2019 में होगा मोदी v/s पूरा विपक्ष का मुकाबला, दिल्ली में हो गयी सियासी गतिविधियाँ तेज़.........

26 Mar 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): देश में बदलते राजनितिक हालात ने उस वक़्त की याद दिला दी जब एक समय इंदिरा का मुकाबला करने के लिए पूरा विपक्ष एकजुट हो गया था. आज भी ऐसा ही कुछ नज़र देखने को मिल रहा है जब कई क्षेत्रीय दलों ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए कभी अपने धुरविरोधी रहे राजनितिक दलों से हाथ मिला लिए हैं. यानी संकेत साफ़ हैं कि विपक्ष को ये अच्छी तरह से मालूम हो गया है की अगर अपना अस्तित्व बचाना है तो आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ एक मंच पर आना होगा. लड़ाई भारतीय राजनीती में अपने अस्तित्व को बचाने की है,और उसके लिए तमाम राजनितिक दल अब साथ आने लगे हैं जो 2019 की लोकसभा की लड़ाई को और दिलचस्प बनयेगा साथ ही बीजेपी और मोदी के लिए नई मुसीबतें भी खड़ी करेगा.

उत्तर प्रदेश में अपनी राज्यसभा सीट हारने के बावजूद बीएसपी प्रमुख मायावती ने सपा में गठबंधन के लिए एक औपचारिक मीटिंग करने के बाद अपनी हरी झंडी दे दी है. इतना ही नहीं उन्होंने तो कांग्रेस को भी गंठबंधन में शामिल होने का न्योता दे दिया है लेकिन कांग्रेस अभी इसके लिए असमंजस की स्थिति में है. क्योंकि कांग्रेस को ये अच्छी तरह मालूम है कि उत्तर प्रदेश में जादातर सीटों का बंटवारा एसपी-बीएसपी के बीच ही होगा, कहीं उसके हिस्से केवल अमेठी-राइबरेली ही न रह जाए इसलिए वो अभी इंतज़ार करने के मूड में है. साथ ही कांग्रेस के लिए एक चिंता का सबब ये भी है कि उत्तर प्रदेश में अपने राजनितिक अस्तित्व को कैसे बचाना है. लेकिन अब एसपी-बीएसपी का गठबंधन उत्तर प्रदेश में बीजेपी के रथ को रोकने की रणनीति में आगे बढ़ गया है. ये बीजेपी के लिए वाकई चिंता का सबब होगा. अब असल परीक्षा बीजेपी और आर एस एस की होने वाली है. उन्हें पिछली बार के मुकाबले इस बार उत्तर प्रदेश में कितनी सीटें मिलती हैं ये भी देखने वाली बात होगी. क्योंकि सपा-बसपा की आँख यादव+मुस्लिम+दलित पर होगी जिसके सहारे वो बीजेपी को चारों खाने चित करने की कोशिश करेंगी, वहीँ बीजेपी की नजर हिन्दू वोट बैंक को फिर से एकत्रित करके अपने पक्ष में करने की होगी.

दूसरी खबर जो 2019 में मोदी के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता को बढ़ावा दे रही है वो ये है कि ममता दीदी यानि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री दिल्ली आ रही हैं जो विपक्ष में कई नेताओं से मुलाकात करके उन्होंने एकसूत्र में पिरोने की बात करेंगी. उनके इस टूर में सोनिया गांधी से मुलाकात का भी कार्यक्रम भी है. यानी ममता तेलंगाना के मुख्यमंत्री से जुगलबंदी करने के बाद अब कांग्रेस को भी अपने हितों के अनुर्रोप साधने की कोशिश करेंगी जिससे मोदी को मात दी जा सके. लेकिन कांग्रेस से गठबंधन किन शर्तों पर होगा इसपर अभी सस्पेंस बरकरार है.

वहीँ महाराष्ट्र से भी एक खबर आई है जहाँ शरद पवार ने कांग्रेस से विधानसभा और लोकसभा  में चुनावी गठबंधन करने के संकेत दे दिए हैं लेकिन जूनियर पवार यानी शरद पवार के भतीजे अजीत पवार कांग्रेस को 50-50 की डील दे रहे हैं. जिसके लिए कांग्रेस थोड़ी असहज दिख रही है. लेकिन दोनों दलों को यहाँ भी मालूम है कि अगर मोदी से मुकाबला करना है तो एक होना ही होगा क्योंकि यहाँ लड़ाई अस्तित्व बचाने की है. वैसे भी महाराष्ट्र में अशोक गहलोत और वहां के कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष चव्हान तमाम गतिविधियों पर नजर बनाये हुए हैं और जल्द ही वहां भी सीटों का मसला सुलझ जाएगा. यानी वहां से भी सन्देश बिलकुल साफ़ है की 2019 में मुकाबला मोदी वेर्सिस पूरा विपक्ष होने वाला है.

बहरहाल इतना तो तय है कि अब तमाम दल अपने राजनितिक मतभेद भुलाकर मोदी को मात देने के लिए एक साथ खड़े होने लगे हैं और गोरखपुर और फूलपुर की सतें जीतने के बाद पूरे देश में ये सन्देश गया है कि अगर मोदी का मुकाबला करना है तो एक होने होगा और वैसे भी कहते हैं कि राजनीती में कोई भी हमेशा के लिए दोस्त या दुश्मन नहीं होता. तो अगर आने वाले समय में कभी कुछ पुराने दुश्मन दोस्त बन जाएँ तो आपको कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि अब लड़ाई अस्तित्व की है क्योंकि सबको ये लग रहा है कि मिलकर मोदी को हराओ नहीं तो मोदी सबको खा जाएगा.

 

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