• एटीएम में कैश नहीं, क्या फिर पैदा हो रहे हैं नोटबंदी जैसे हालात? बीजेपी के सीएम दे रहे उलटे सीधे ब्यान ...चार राज्यों में मची त्राहि-त्राहि...........

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): बुरी खबर ये आ रही है कि देश में एक बार फिरसे नोटबंदी जैसे हालात पैदा हो रहे हैं. देश के 4 बड़े राज्यों से कैश की भारी किल्लत की ख़बरें लगातार आ रही हैं. बैंकों ने मानो हाथ खड़े कर दिए है और लोग परेशान हो रहे हैं. एटीएम के बाहर नो काश के बोर्ड टांग दिए गये हैं. जिन राज्यों में ये संकर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है उनमे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात का नाम प्रमुख है. इनमे से भी बिहार में तो नोटबंदी जैसे हालातों का लोगों को सामना करना पड़ रहा है. लोग कैश के लिए एटीएम और बैंकों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन बैंकों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं. गौरतलब है कि शादियों का सीजन चल रहा है ऐसे में हर किसी को कैश की ज़रूरत होती है लेकिन इस नए संकट ने सबकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. ऐसे में बैंक शादी का कार्ड एकबार फिर से देखकर कैश तो दे रहे हैं लेकिन जितनी जरूरत है उससे कहीं कम ही मिल प् रहा है इस वजह से लोगों में एक बार फिर से भय और अफरा-तफरी का माहौल सा बन गया है. वहीँ एक बार फिर से शुरू हुए इस नकदी संकट के बीच बीजेपी के दिग्गज नेता और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का बहुत ही चौंकाने वाला बयान सामने आया है जिसमे उन्होंने इस संकट को साजिश करार दिया है. किसानों की सभा को संबोधित करने को दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 2000 के नोट को साजिश के तहत चलन से गायब किया जा रहा है. अब ये साज़िश कौन कार रहा है इसका जवाब शायद उन्हें देना पड़ेगा क्योंकि केंद्र में भी बीजेपी सरकार है और राज्य में भी उनकी, जिसके वो मुखिया हैं. अब ऐसे हालातों के बीच वो ये दोष कांग्रेस के मत्थे तो नहीं मड्ड सकते. यानी राजनीतिक ताने-बाने को बुनने का खेल शुरू हो चुका हैजिसमे पक्ष ने तो अपनी कवायद शुरू कर दी है अब विपक्ष क्या गुल खिलाता है ये देखने वाली बात होगी. जानकारों की मानें तो इन राज्यों मे लोगों द्वारा ज्यादा बैंको और एटीएम से ज्यादा नगदी निकालने की वजह से यह संकट पैदा हुआ है. इन राज्यो में लोगों ने बैंकों से पैसे तो निकाले लेकिन बैंकों में पैसे जमा नहीं कराए गए, जिसकी वजह से यह समस्या खड़ी हुई है. साथ ही रिज़र्व बैंक द्वारा 2000 के नोटों की छपाई बंद करना और 200 के नोटों के लिए बैंकों की सारी एटीएम मशीनों का अभी तक तैयार न हो पाना भी इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है. वहीँ बैसाखी, बिहू और सौर नव वर्ष जैसे त्योहार होने की वजह से भी लोगों को ज्यादा नगदी की जरुरत पड़ी. यानी कैश निकाला तो ज्यादा गया लेकिन कैश जमा कम हुआ जिसके चलते ये हालात बने. साथ ही दूसरा मत ये भी है कि लोगों के सामने जबसे बैंकों के घोटाले आये हैं तबसे लोगों का विश्वास बैंकों के ऊपर से उठने लगा है वो अपने पैसे की धीरे-धीरे निकासी कर रहे हैं. अब असल वजह जो भी हो लेकिन इतना तो तय है की अगर ये नकदी संकट जल्दी नहीं सुलझा तो एक बार फिर से अपने विरोधियों के निशाने पर प्रधानमंत्री मोदी होंगे और इस बार वो जनता से क्या कहेंगे ये भी देखने वाली बात होगी क्योंकि पिछली बार  प्रधानमंत्री जी ने 90 दिनों का समय लेकर जनता  चुप कराया था हालांकि समस्या 90 दिनों में भी सुलझ नहीं पाई थी, जिसके कारण उनकी बहुत किरकिरी हुई थी.  Read More
  • रामनवमी के दिन धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने के आरोप में अरविंद केजरीवाल पर दर्ज हुआ केस, कपिल मिश्रा ने वीडियो जारी कर किया था खुलासा.....

    आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): लगता है केजरीवाल के सितारे गर्दिश में चल रहे हैं एक विवाद ख़त्म होता नहीं कि दूसरा शुरू हो जाता है.  अभी केजरीवाल के माफेनामे का सिलसिला थमा भी नहीं था कि आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने और दो धार्मिक समुदायों के बीच नफरत फैलाने की कोशिश के आरोप में मंगलवार (17 अप्रैल) को केस दर्ज किया गया है.  गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले ही आम आदमी पार्टी के बागी विधायक कपिल मिश्रा ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि केजरीवाल के समर्थकों ने एक मस्जिद के बाहर भगवा कपड़े पहनकर हाथों में तलवार लेकर प्रदर्शन किया था. यह मामला रामनवमी के दिन का है, जब दिल्ली के शाहदरा इलाके में एक मस्जिद के बाहर लोगों ने राजनीतिक नारे लगाए थे और माहौल को खराब करने की कोशिश की थी. कपिल ने विडियो जारी करके आम आदमी पार्टी के ऊपर ये इलज़ाम लगाया था कि आप ने राजनीतिक फायदा उठाने के लिए जान-बूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की थी. वहीँ इस आरोप पर पलटवार करते हुए आप नेता अमानतुल्ला ने इसे बीजेपी की साजिश करार दिया था. लेकिन बाद में जब कपिल ने वीडियो जारी करके ये दिखाया कि जलूस में तलवारें लेहराने वाले लोग आम आदमी पार्टी के करीबी हैं तो मस्जिद के सेक्रेटरी ने भी माना था कि जो तस्वीर मीडिया में दिखाई जा रही है, उसमें आम आदमी पार्टी से जुड़े लोग हैं. उसमें एक शख्स की पहचान इलाके के विधायक और विधान सभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल के करीबी के रूप में हुई थी. बता दें कि इस वीडियो को कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया था और आरोप लगाया था कि आप दिल्ली में भगवा आतंक के नाम पर दहशत फैलाना चाहती थी। वीडियो में कथित तौर पर विधान सभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल की भी आवाज होने का दावा किया गया है, जिसमें वो कथित तौर पर  यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि मस्जिद के बाहर जुलूस रोक दो और हाथों में तलवार लेकर हवा में लहराओ। गौरतलब है कि कपिल मिश्रा पहले केजरीवाल सरकार में मंत्री थे लेकिन उन्हें ब्रखास्त कर दिया गया था। इसके बाद मिश्रा ने केजरीवाल पर अपनी आंखों के सामने स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन से दो करोड़ रुपये कैश लेने का आरोप लगाया था। काफी विवाद के बाद केजरीवाल ने कपिल मिश्रा को पिछले साल पार्टी से सस्पेंड कर दिया था. दरअसल इस सारी घटना की पोल खोलते हुए कपिल मिश्र ने ट्वीट किया था और आरोप लगाया था कि आप दिल्ली में भगवा आतंक के नाम पर दहशत फैलाना चाहती थी. वीडियो में कथित तौर पर विधान सभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल की भी आवाज होने का दावा किया गया है, जिसमें वो कथित तौर पर  यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि मस्जिद के बाहर जुलूस रोक दो और हाथों में तलवार लेकर हवा में लहराओ. वहीँ बीजेपी भी इस वीडियो के आने के बाद आप पर हमलावर हुई थी और उन्होंने आप पर सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप लगाया था.(इनपुट:जनसत्ता डॉट कॉम) Read More
  • जब दलित युवक को अपने कंधों पर बिठाकर मंदिर के भीतर ले गया पुजारी...

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): खबर एनडीटीवी की है और खबर ऐसी है कि इससे कोई छेड़छाड़ करना उचित नहीं लगा... इसलिए बिलकुल वही खबर आपको दे रहा हूँ जो खबर डॉट एनडीटीवी ने लिखी है. हो सकता है इससे समाज में एक पॉजिटिव सन्देश जाए...... हैदराबाद में एक मंदिर के पुजारी ने नई शुरुआत करते हुए एक दलित युवक को अपने कंधों पर बिठाया, और श्री रंगनाथ मंदिर के भीतर लेकर गए. पुजारी ने मंदिर के भीतर पहुंचकर इस युवक आदित्य पारासरी को गले भी लगाया. हैदराबाद के चिल्कुर बालाजी मंदिर के पुजारी सीएस रंगराजन ने बताया कि उनके ऐसा करने से हालिया दिनों में दलितों के साथ हुए भेदभाव और उनके खिलाफ हुईं हिंसात्मक घटनाओं के विरुद्ध देशभर में मजबूत संदेश जाएगा. बताया गया है कि यह परम्परा लगभग 3,000 साल पुरानी है, और तमिलनाडु में पुजारी द्वारा दलित युवक को कंधों पर बिठाकर मंदिर ले जाने की इस प्रथा को 'मुनि वाहन सेवा' के नाम से जाना जाता है.   पुजारी सीएस रंगराजन ने समाचारपत्र "डेक्कन क्रोनिकल"' से बातचीत में जानकारी दी कि यह 2,700 साल पुरानी परम्परा को दोबारा शुरू करना है, जिसका उद्देश्य सनातन धर्म की महानता को पुनर्स्थापित करने और समाज के सभी वर्ग में समानता का संदेश प्रसारित करना है. उन्होंने कहा कि इस पहल के पीछे का मकसद दलितों के साथ हो रही उत्पीड़न की घटनाओं को रोकना और विभिन्न वर्गों में बंधुत्व की भावना जाग्रत करना है.चेगोंडी चंद्रशेखर नामक शख्स द्वारा फेसबुक पर पोस्ट किए गए वीडियो में गले में माला डाले हुए दलित श्रद्धालु करीब 50-वर्षीय पुजारी के कंधों पर हाथ जोड़े बैठा है, और आसपास चल रही भीड़ इस अनूठी घटना का वीडियो बना रही है.   मंदिर में नहीं मिला था प्रवेश, अब बदलाव की उम्मीद... 25-वर्षीय आदित्य पारासरी ने कहा कि मेरे मूल निवास महबूबनगर में ही मुझे हनुमान मंदिर में प्रवेश से मना कर दिया गया था. दलित होने की वजह से मेरा परिवार इस घटना से उत्पीड़ित और अपमानित महसूस कर रहा था. कई मंदिरों में अब भी यह सब जारी है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि यह बदलाव की शुरुआत है. इससे लोगों की मानसिकता बदलेगी.   गौरतलब है कि 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने SC-ST एक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी के खिलाफ फैसला दिया था. इसके खिलाफ दलित समुदाय ने 2 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया था. इस बंद के दौरान कई जगह से हिंसात्मक झड़पों की ख़बरें आई थीं. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में फैसले की समीक्षा के लिए अपील की थी.(सौजन्य:खबर डॉट एनडीटीवी डॉट कॉम) उम्मीद है कि आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क के नियमित पाठकों को ये खबर पसंद आएगी... ये खबर तमाचा है उन तमाम राजनीतिज्ञों के ऊपर जो आपसी भाई चारे को खराब करके केवल और केवल अपना हित साधने का प्रयास करते हैं...... समाज में आज भी भाईचारा कायम है और ऐसे वाकये हमारे इस भाचारे को और मजबूत बनायेंगे.... आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क इस खबर की सराहना करता है और सलाम करता है ऐसे पुजारी और हमारे दलित भाई को जो इस आयोजन का हिस्सा बने......आइये हम सब एक बेहतर और सशक्त भारत के निर्माण में अपना सहयोग दें..... आप सब की प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा....शुभकामनाएं... Read More
  • कठुआ और उन्नाव में गैंगरेप की घटना के विरोध में राहुल गांधी ने आधी-रात इंडिया गेट पर किया कैंडल मार्च, सरकार की कार्यशैली और पीएम मोदी की चुप्पी पर भी उठाए सवाल....

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): कठुआ और उन्नाव में गैंगरेप जैसी घटनाओं से एक बार फिर पूरे देश में रोष है. इन घटनाओं के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने राहुल गाँधी की अगुवाई में इंडिया गेट पर गुरुवार आधी रात 12 बजे कैंडल मार्च किया. एक घंटे से ज्यादा समय तक के इस कैंडल मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया. इस दौरान राहुल गांधी ने सरकार पर बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. उन्होंने मौजूदा सरकार को असंवेदनशील ठहराया वहीँ पीएम मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए. गौरतलब है कि इस मार्च में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रियंका गांधी ने भी हिस्सा लिया. वहीँ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी रात करीब सवा बारह बजे मार्च में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में एक के बाद एक महिलाओं और बच्चियों के साथ घटनाएं हो रही हैं. चाहे बात उन्नाव की हो या फिर कठुआ की हम महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा के खिलाफ और इसके विरोध में ही यहां खड़े हैं. राहुल गांधी ने कहा कि यहां आम जनता, सभी पार्टी के लोग और महिलाएं खड़ी हैं. आज हिंदुस्तान की महिलाएं बाहर निकलने से डरने लगी हैं. यह कोई राजनीतिक मामला नहीं है, यह हमारी महिलाओं की सुरक्षा का  मामला है. महिलाओं के खिलाफ जो अत्याचार हो रहे हैं उसके खिलाफ सरकार को कुछ करना चाहिए. बच्चियों और महिलाओं के साथ हिंसा और बलात्कार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्नाव रेप मामले को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के बाद आज कठुआ में नन्ही बच्ची से हुए गैंगरेप के बाद हुई उसकी नृशंस हत्या को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कठुआ में आठ साल की एक बच्ची से बलात्कार और उसकी हत्या की घटना को ‘अकल्पनीय नृशंसता’ बताया. राहुल गांधी ने हैरानी जताई कि कोई भी व्यक्ति दोषियों को बचाने की मांग कैसे कर सकता है? कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट किया, ‘‘उन्हें (अपराधियों को) सजा दिए बिना नहीं छोड़ना चाहिए.’’ राहुल ने इस अपराध को लेकर की जा रही राजनीति की भी आलोचना की. उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह का पाप करने वाले दोषियों का कोई कैसे संरक्षण कर सकता है.’’ उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के खिलाफ हिंसा मानवता के खिलाफ अपराध है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘हम लोग क्या हो गए हैं कि एक बेकसूर बच्ची से की गई ऐसी अकल्पनीय नृशंसता में हम राजनीतिक दखलंदाजी की इजाजत देंगे.’’ गौरतलब है कि बकरवाल मुस्लिम समुदाय की बच्ची जम्मू कश्मीर के कठुआ में रासना गांव स्थित अपने घर के पास से 10 जनवरी को लापता हो गई थी. एक हफ्ते बाद उसी इलाके में उसका शव मिला था. घटना की जांच के लिए गठित एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने दो विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) और एक हेड कांस्टेबल सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. इन पुलिसकर्मियों पर साक्ष्य नष्ट करने का आरोप है. बलात्कार और हत्या की इस घटना के बाद से जम्मू में रोष छाया हुआ है. शहर के बार एसोसिएशन ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का विरोध किया है और आरोप लगाया है कि अल्पसंख्यक डोगरा समुदाय को निशाना बनाया जा रहा. वहीं, मृतका के लिए न्याय की मांग करते हुए कश्मीर घाटी में प्रदर्शन हुए हैं.(सौजन्य:खबर डॉट एनडीटीवी डॉट कॉम) Read More
  • हिमाचल प्रदेश: लोकसभा चुनावों की सुगबुगाहट के बीच कांग्रेस ने भी की तैयारी शुरू, जी.एस. बाली या फिर सुधीर शर्मा लड़ सकते हैं काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट से चुनाव....!

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर हिमाचल कांग्रेस में भी हलचल शुरू हो गयी है. दावेदारों की सूची दिनोंदिन लम्बी होती जा रही है. जिनमें दिग्गज कांग्रेसी नेता व पूर्व मंत्री जी.एस.बाली, वीरभद्र सिंह के ख़ास पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा, काँगड़ा से पूर्व कांग्रेसी सांसद चौधरी चन्द्र कुमार, हर्ष महाजन जैसे कई लोगों के नाम शामिल हैं. लेकिन सूत्रों की मानें तो इन नामों में जी.एस बाली और सुधीर शर्मा का नाम सबसे आगे चल रहा है. यानी काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार या तो जी.एस.बाली हो सकते हैं या फिर सुधीर शर्मा. दोनों ही नेता आजकल अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के साथ-साथ पार्टी के अंदर-बाहर भी काफी सक्रिय हैं जिससे इन संभावनाओं को और बल मिला है. राजनितिक पंडितों की मानें इन दोनों नामों के आगे चलने के पीछे कई वजहें भी हैं. सबसे पहले अगर जी.एस. बाली के नाम पर नजर डाली जाए तो वो निसंदेह काँगड़ा के सबसे दिग्गज कांग्रेसी नेता हैं. उनका जनाधार केवल अपने विधानसभा क्षेत्र में ही नहीं बल्कि दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी है. इतना ही नहीं विधानसभा चुनावों से पहले ये कयास भी लगाये जा रहे थे कि वीरभद्र सिंह के बाद बाली एक ऐसे नेता हैं जो कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं. लेकिन चुनाव परिणाम बिलकुल विपरीत आये और बलि थोड़े से वोटों से अपना चुनाव हार गये. लेकिन आजकल फिर से पार्टी के अंदर और बाहर बाली की बढ़ती सक्रियता ने इस सम्भावना को और बढ़ा दिया है कि वो आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की तरफ से सम्भावित उम्मीदवार हो सकते हैं. दूसरी बात जो बाली की उम्मीदवारी को ज्यादा बल देती है वो ये है कि पार्टी हाई-कमान में भी उनकी अच्छी खासी पकड़ है. दिल्ली दरबार से उनके नजदीकी रिश्ते किसी से छुपे हुए नहीं हैं. ऐसा माना जाता रहा है कि हिमाचल में बनने वाली कांग्रेस सरकारों में मुख्यमंत्री की इच्छा न होते हुए भी उन्हें मंत्री पद देना पड़ता था. और मंत्री रहते हुए उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जिसके कारण उनका और मुख्यमंत्री के बीच 36 का आंकड़ा रहा, लेकिन बाली ने कभी इसकी परवाह नहीं की और अपने तरीके से अपने काम को आगे बढ़ाया फिर चाहे इसके लिए उन्हें किसी के भी विरोध का सामना करना पड़ा हो. तीसरा कारण जो उनकी उम्मीदवारी को और पुख्ता कर रहा है वो वीरभद्र सिंह की हिमाचल की राजनीती में दिनोंदिन ढीली होती पकड़ है. एक समय था जब हिमाचल में वीरभद्र सिंह की तूती बोलती थी. लेकिन पिछले कुछ समय से वीरभद्र को जिस तरह से पार्टी हाई-कमान दरकिनार करके सुखविंदर सिंह सुक्खू को तरजीह दी उससे ऐसा लगा मानों वीरभद्र का राजनितिक करियर ढलान पर है. वीरभद्र के तमाम विरोध के बावजूद सुक्खू अपने पद पर बने रहे जिसने इस बात की तरफ इशारा कर दिया कि पार्टी हाई-कमान की नजरों में अब वीरभद्र की उतनी एहमियत नहीं रही जितनी की पहले कभी हुआ करती थी. अब ऐसा माना जा रहा है कि लोकसभा चुनावों में सुक्खू भी बाली के नाम को आगे बढ़ा सकते हैं क्योंकि इसके उन्हें दो फायदे होंगे. एक तो वीरभद्र के समर्थित उम्मीदवार को वो पछाड़ सकेंगे साथ ही आने वाले समय में वो अपनी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के लिए बाली से समर्थन की उम्मीद भी कर सकते हैं. वहीँ सुधीर शर्मा के नाम पर नजर डालें तो उनकी उम्मीद्वारी को सबसे प्रबल बनाने वाली वजह वीरभद्र सिंह का ख़ास होना है. वो वीरभद्र सिंह के चहेते हैं और ऐसा भी कहा जाता रहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार का चेहरा भले ही वीरभद्र सिंह थे लेकिन परदे के पीछे सुधीर शर्मा की काफी चलती थी. यानी अगर एक बार फिर से वीरभद्र सिंह की बात टिकेट आवंटन में सुनी गई तो सुधीर शर्मा का काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट के चुनाव लड़ना तय है. दूसरा कारण जो सुधीर शर्मा की उम्मीदवारी को और पुख्ता करता है वो ये है कि काँगड़ा के अंदर वो भी बाली की तरह एक व्यापक जनाधार वाले ब्राह्मण नेता हैं. उन्होंने पहले अपनी पैत्रिक जगह बैजनाथ से चुनाव जीता और फिर धर्मशाला का रुख किया जहाँ से भी उन्हें जीत हासिल हुई. लेकिन इस बार के चुनाव में उन्हें धर्मशाला से हार का सामना करना पडा. इसके अलावा तीसरा कारण जो उन्हें प्रबल उम्मीदवार बनाता है वो ये है कि उन्हें जिला काँगड़ा के कई कांग्रेसी नेताओं का साथ मिल सकता है जो उनके नाम का समर्थन करेंगे. बहरहाल मौजूदा हालात पर नजर डालें तो इतना तो तय है कि कांग्रेस की तरफ से इस बार काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट पर एक ब्राह्मण उम्मीदवार होगा. लेकिन राजनीति में हर रोज़ नई संभावना बनती और बिगडती है. अभी के हालात तो यही ब्यान कर रहे हैं कि बाली या सुधीर में से किसी एक को कांग्रेस लोकसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बना सकती है, और इन दोनों की पार्टी के अंदर बढ़ती सक्रियता भी यही गवाही दे रही है. अब आगे होगा क्या ये तो आने वाला वक़्त ही बतायेगा लेकिन जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे हिमाचल कांग्रेस के अंदर भी राजनीति गरमाती जा रही है. Read More
  • पार्टी के 39वें स्थापना दिवस पर अमित शाह ने मुंबई से किया मिशन 2019 का आगाज़, बोले: मोदी की बाढ़ में साथ आए कुत्ते-बिल्ली-सांप.....

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): जैसे जैसे 2019 का रण नज़दीक आता जा रहा है वैसे वैसे सत्ता पक्ष और विपक्ष में जुबानी तकरार बढ़ता जा रहा है. पिछले कुछ समय से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मोदी सरकार को जमकर घेर रहे हैं वहीँ बीजेपी भी पलटवार करने में समय नहीं लगा रही. मुकाबला दिलचस्प है, जनता भी तमाशा देख रही है. और समय आने पर ये भी बता देगी कि वो किसकी बात से कितना सहमत है लेकिन अभी जिस तरह से जुबानी जंग सत्ता पक्ष और विपक्ष में छिड़ी हुई है उसने आगामी लोकसभा चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है. ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब बीजेपी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पार्टी के 39वें स्थापना दिवस पर विपक्ष पर जमकर बरसे. भाजपा अध्यक्ष ने मुंबई में हुई एक रैली के दौरान विपक्षी पार्टियों की तुलना कुत्ते-बिल्ली और सांप से की. गौरतलब है कि भाजपा के स्थापना दिवस पर मुंबई में आयोजित एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि 2019 का काउंटडाउन शुरु हो चुका है. मैने एक बात सुनी थी कि जब बाढ़ आती है तो उसमें सभी पेड़, पौधे और जीव जंतु बह जाते हैं. इस बाढ़ में वट-वृक्ष अकेला बच जाता है तो सांप भी उस वट-वृक्ष पर चढ़ जाता है, नेवला भी चढ़ जाता है, कुत्ता भी चढ़ जाता है. ये मोदी जी की जो बाढ़ आयी है उससे घबराकर सभी कुत्ते, बिल्ली, सांप और नेवले इकट्ठा होकर चुनाव लड़ना चाहते हैं. दिलचस्प बात ये है कि अमित शाह का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां 2019 के लोकसभा चुनाव में साथ आने की तैयारी कर रही हैं. अमित शाह ने बीजेपी कार्यकर्ताओं में एक नए जोश का संचार करते हुए कहा कि अभी भाजपा का स्वर्णिम काल नहीं आया है, भाजपा का स्वर्णिम काल तब होगा, जब पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में भी भाजपा की सरकार बन जाएगी. वहीँ भाजपा की अब तक की यात्रा पर बात करते हुए शाह कहा कि भाजपा की शुरुआत 10 सदस्यों के साथ हुई थी और आज पार्टी के 11 करोड़ सदस्य हैं और आज यह विश्व की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी है. रैली में अमित शाह के भाषण में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सबसे ज्यादा निशाने पर रहे. शाह ने कहा कि राहुल गांधी हमसे पिछले 4 सालों का हिसाब मांग रहे हैं, लेकिन देश की जनता आपसे पिछली 4 पीढ़ियों का हिसाब मांग रही है. वे हमसे तो हिसाब मांगते हैं लेकिन अपना 4 पीढ़ियों का हिसाब नहीं बताते. साथ ही अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए अमित शाह ने उज्जवला योजना, स्वच्छ भारत अभियान, बिजली कनेक्शन और 5 लाख तक के स्वास्थ्य बीमा योजना का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज देश के 20 राज्य, 68 प्रतिशत भू-भाग और 70 प्रतिशत जनता पर भाजपा का शासन है. पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए अमित शाह ने कहा कि कार्यकर्ता आज से ही 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट जाएं और 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी जी के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत से भाजपा को फिर से सत्ता में लाएंगे.   हालांकि बाद में अमित शाह ने अपने कुत्ते-बिल्ली और सांप वाले बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में लिया गया. अमित शाह ने विपक्षी पार्टियों को उनके बयान का बुरा ना मानने की अपील की है. अमित शाह ने कहा कि उन्होंने वह बयान इसलिए दिया था कि आमतौर पर विपक्षी पार्टियां इस तरह एकजुट नहीं होती हैं. अमित शाह ने कहा कि विभिन्न विचारधाराओँ वाली पार्टियां सपा और बसपा जिस तरह से साथ आ रही हैं, उन्हें मेरे बयान का बुरा नहीं मानना चाहिए.   वहीँ फाउंडेशन डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा को नई ऊंचाई पर पहुंचाने का श्रेय पार्टी के करोड़ो कार्यकर्ताओं को दिया. पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा न्यू इंडिया की पार्टी है और उनकी पार्टी भारत की विभिन्नताओं में विश्वास रखती है. ये सबसे खास संस्कृति है और 125 करोड़ भारतीयों की यही ताकत है. पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता ही उसके लिए सबकुछ हैं. कार्यकर्ता ही पार्टी का दिल और उसकी आत्मा हैं, जिनका पसीना ही पार्टी को नई ऊंचाईयों पर लेकर जाएगा. पीएम मोदी ने कहा कि आज पार्टी के स्थापना दिवस पर मैं पार्टी के करोड़ो कार्यकर्ताओं के आगे सिर झुकाता हूं.(इनपुट:जनसत्ता डॉट कॉम) Read More
  • हिमाचल प्रदेश: हमीरपुर से अनुराग ठाकुर, मंडी से रामस्वरूप शर्मा होंगे बीजेपी के लोकसभा उम्मीदवार, काँगड़ा व शिमला से नजर आयेंगे नए चेहरे.......!

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): हिमाचल में विजय पताका फ़हराने के बाद बीजेपी ने यहां 2019 के लिए शंखनाद कर दिया है. चर्चाओं, अफवाहों और अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने का दौर जारी है. टिकेट की आस पाले कई उम्मीदवार लाइन में हैं और अपने-अपने हिसाब से हाई-कमान तक अपनी साख बढ़ाने में लगे हुए हैं. इस बीच बड़ी खबर ये आ रही है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ऐसे चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में है जिनकी छवि साफ़-सुथरी, इमानदार हो साथ ही उन्हें पार्टी और संगठन में भी अच्छा ख़ासा अनुभव हो. आइये हम आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं कि हिमाचल प्रदेश से कौन-कौन सी सीटों से कौन सा उम्मीदवार हो सकता है..... कांगड़ा लोकसभा सीट...... पिछली बार के लोकसभा चुनाव पर नजर डाली जाए तो काँगड़ा लोकसभा सीट बीजेपी ने हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटों से जीती थी. जहाँ से बीजेपी की तरफ से हिमाचल बीजेपी के दिग्गज़ नेता शांता कुमार ने चुनाव लड़ा था. लेकिन इस बार ये माना जा रहा है कि शांता कुमार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. एक तो उम्र ज्यादा हो गयी है और दूसरा शांता कुमार अपनी राजनितिक विरासत को आगे किसी ऐसे चेहरे को सौंपना चाहते हैं जो आगे भी हिमाचल भाजपा अपनी पकड़ बनाये रखे. सूत्रों की मानें तो इसी मुद्दे पर कुछ दिन पहले शांता कुमार और सूबे के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बीच काफी लम्बी चर्चा भी हुई है. सूत्रों की मानें तो इस बार काँगड़ा लोकसभा क्षेत्र से शांता कुमार की पसंद स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार या फिर कभी बीजेपी से बगावत करने वाले और फिर करारी हार के बाद फिर घर वापसी करने वाले नेता दूलो राम हैं. लेकिन विपिन परमार हिमाचल की राजनीति में ही रहना चाहते हैं वहीँ दूलो राम बेशक शांता कुमार और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के चहेते हों लेकिन हाई-कमान उनके नाम पर तैयार नहीं होगा. क्योंकि टिकेट हाई-कमान तय करेगा जहाँ पर न तो शांता कुमार के ही रिश्ते अच्छे हैं और दूलो राम का ट्रैक रिकॉर्ड भी वहां कुछ अच्छा नहीं है. ऐसे में जो नाम उभरकर सामने आ रहे हैं उनमें हिमाचल प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष इंदु गोस्वामी और बीजेपी प्रदेश संगठन मंत्री पवन राणा और नूरपुर जिला महामंत्री रणवीर सिंह निक्का के नाम सबसे आगे चल रहे हैं. सूत्रों की मानें तो ये बड़े चेहरे हैं जिनमें से किसी एक को बीजेपी इस बार काँगड़ा के दंगल में उतार सकती है. इन चेहरों की कई खासियतें हैं जो इन्हें इस बार के चुनाव के लिए दावेदार बना रही हैं. ऐसे में अगर इंदु गोस्वामी की बात की जाए तो उन्हें संगठन में अच्छा ख़ासा अनुभव है. प्रदेश की महिलाओं में अच्छी ख़ासी पकड़ के साथ-साथ वो एक डाउन तो अर्थ नेता मानी जाती रही हैं. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीति में महिलाओं को आगे बढ़ाने का संकल्प भी इस कदम से पूरा होता हुआ नजर आ रहा है. ऐसे में हाई-कमान उनकी अबतक की मेहनत का फल देते हुए काँगड़ा लोकसभा सीट से उम्मीदवार बना सकती हैं. वहीँ पवन राणा भी इस रेस में कहीं पिछड़ते हुए नजर नहीं आ रहे हैं. पार्टी और संगठन में उनकी अच्छी खासी पकड़ के साथ-साथ हाई-कमान से उनके मधुर सम्बन्ध भी उन्हें इस बार का दावेदार बना रहे हैं. वहीँ नूरपुर से ज़िला महामंत्री रणवीर सिंह निक्का का नाम इस रेस में चल रहा है. रणवीर सिंह निक्का की मेहनत और पार्टी के प्रति वफादारी भी उन्हें उम्मीदवार बनाती है. साथ ही उनके नाम पर शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल दोनों गुटों में सहमति बन सकती है.  हमीरपुर लोकसभा सीट...... हिमाचल प्रदेश की हमीरपुर लोकसभा सीट पिछले काफी समय से बीजेपी के अभेद्य दुर्ग ही रही है. इस सीट में बीजेपी के उम्मीदवार के सामने कभी भी कांग्रेस कोई चुनौती पेश नहीं कर पायी है. धूमल परिवार यहाँ पर एकछत्र राज़ कर रहा है. लेकिन प्रेम कुमार धूमल के विधानसभा  चुनाव हारने के बाद यहाँ भी गुटबाजी तेज़ हुई और ऐसी अफवाहें उड़ाई गईं की इस बार यहाँ से अनुराग ठाकुर की बजाए पार्टी किसी दूसरे चेहरे को मौका दे सकती है. कईयों ने प्रेम कुमार धूमल को यहाँ से उम्मीदवार बनाया तो कईयों ने जे.पी. नड्डा को. लेकिन सूत्रों की मानें तो यहाँ से इस बार भी अनुराग ठाकुर ही बीजेपी के लोकसभा प्रत्याशी होंगे. पिछले काफी समय से अनुराग अपने लोकसभा क्षेत्र में काफी सक्रिय हैं और गांव-गांव जाकर लोगों से मिल रहे हैं. केंद्र की योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं. साथ ही पार्टी हाई-कमान में फिर चाहे वो स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, अनुराग के सबसे मधुर सम्बन्ध हैं. सूत्रों की मानें तो हाई-कमान अनुराग के जनसम्पर्क अभियान से काफी खुश है और इस बार भी वो ही हमीरपुर से पार्टी के प्रत्याशी होंगे इस बात में कोई दो-राय नहीं रह गयी है. वहीँ सूत्रों की मानें तो प्रेम कुमार धूमल को पार्टी के अंदर कोई बड़ा पद दिया जा सकता है क्योंकि वो हिमाचल बीजेपी के बड़े कद्दावर नेता हैं और पार्टी धूमल परिवार की राजनीति को खत्म नहीं करना चाहती क्योंकि इसका असर पूरे हिमाचल में परिणामों पर पड़ सकता है. साथ ही हमीरपुर के लोगों को भी अब इस बात का एहसास हो चुका है जब प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री हुआ करते थे तो पूरे हिमाचल में हमीरपुर की अलग पहचान होती थी. लेकिन विधानसभा चुनाव धूमल जैसे ही हारे तो वो प्रभाव हमीरपुर से हटकर मंडी का हो गया. ऐसे में अब हमीरपुर की एकमात्र उम्मीद अनुराग ठाकुर ही हैं. लोगों को ये लगता है कि अनुराग 2019 का चुनाव जीतने के बाद केंद्र में मंत्री बनेंगे जिसका सीधा फायदा हमीरपुर को होगा. ऐसे में ये कहा जा सकता है कि अनुराग ठाकुर ही इस बार भी हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी के उम्मीदवार होंगे. मंडी लोकसभा सीट.... मंडी लोकसभा सीट में भाजपा सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रही है. जोगिन्द्र नगर की सीट को छोड़ दिया जाए तो मंडी ज़िले की लगभग सभी विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्ज़ा है. जोगिन्दर नगर से आज़ाद जीतने वाले विधायक प्रकाश राणा भी एक तरह से बीजेपी के ही हो गये हैं क्योंकि उन्होंने अपना समर्थन बीजेपी को दे दिया है और ऐसा माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों में वो जोगिन्दर नगर से बीजेपी उम्मीदवार होंगे. मात्र कुल्लू में विपक्ष का एक विधायक है. यहाँ की लोकसभा सीट की बात की जाए जो वर्तमान सांसद रामस्वरूप के सामने कोई चुनौती नजर नहीं आ रही. पार्टी और संगठन से मधुर रिश्ते, संगठन में कामकाज़ का अच्छा ख़ासा अनुभव, साफ़-सुथरी छवि जैसे कई गुण हैं जो रामस्वरूप को निर्विवाद मंडी लोकसभा सीट से फिरसे प्रत्याशी बनाये जाने के लिए काफी हैं. इसके अलावा संघ की तरफ से भी वो पसंदीदा उम्मीदवार हैं.यानी रामस्वरूप के सामने कोई चुनौती नहीं है.   शिमला लोकसभा सीट.... उपरी हिमाचल की ये सीट एक सीट रिजर्व है, और साथ ही ऐसी सीट है जहाँ पिछली दो बार से बीजेपी का कब्ज़ा है लेकिन कांग्रेस भी यहाँ काफी मजबूत स्थिति में रहती है और इस सीट पर बड़े-बड़े राजनितिक पंडित भी कोई भविष्यवाणी करने से बचते हैं. यहाँ कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का अच्छा ख़ासा प्रभाव है. लेकिन बीजेपी के लिए सुखद बात ये है कि कांग्रेस हाई-कमान ने जिस तरह से वीरभद्र को साइड लाइन किया है उससे ऊपरी हिमाचल में कांग्रेस के खिलाफ लहर है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा. लेकिन बीजेपी को यहाँ से अपना उम्मीदवार बदलना होगा क्योंकि वर्तमान सांसद वीरेंदर कश्यप के ऊपर चुनावी समय में अवैध लेनदेन के मामले में आरोप तय हो गए हैं. ऐसे में पार्टी को यहाँ से नया चेहरा मैदान में उतरना होगा. इस सीट पर भाजपा की तरफ से दो नाम सबसे आगे चल रहे हैं. जिनमे पहला नाम कसौली से विधायक राज्जेक सहजल का है तो दूसरा नाम पच्छाद से विधायक सुरेश कश्यप  का है. दोनों ही नामों के रेस में आगे होने की अपनी-अपनी वजहें भी हैं. सहजल जहां चुनावी गणित को अपने पक्ष में भुनाने के एक्सपर्ट माने जाते हैं वहीँ कश्यप भी डाउन-टू-अर्थ नेता माने जाते हैं. यानी इन दोनों में से पार्टी किसी एक पर दांव लगा सकती है. 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  • पीएनबी घोटाले के बाद एक और बड़ा बैंक घोटाला आया सामने, गुजरात की एक कंपनी को RBI के डिफॉल्टर लिस्ट में होने के बावजूद कंपनी को मिला लोन 2654 करोड़ का लोन....

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): देश के बैंकों में दिनोंदिन उजागर हो रहे नए घोटालों ने पूरे देश के साथ-साथ मोदी सरकार की भी नींद उड़ा रखी है. पहले नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के बाद एक और बड़ा घोटाला सामने आ रहा है जिसके तार गुजरात से जुड़े हुए हैं. यानी नीरव मोदी के बाद गुजरात के एक और व्यापारी ने बैंक को मोटी चपत लगाई है. यानी एक और घोतालेबाज़ के नाम का उजागर हुआ है. मूलतः गुजरात के इस व्यापारी नाम एसएन भटनागर है. उनकी बिजली उपकरण निर्माता कंपनी डायमंड पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ सीबीआई ने केस दर्ज किया है. इसके अलावा कंपनी अफसरों के ठिकानों पर सीबीआई ने दस्तावेजों की बरामदगी के लिए छापेमारी भी की है.  गौरतलब है कि इस लोन घोटाले में एस एन भटनागर के अलावा उसके बेटे अमित और सुमित भटनागर भी फंसे हैं. कंपनी में बतौर एक्जीक्यूटिव कार्यरत दोनों बेटों के खिलाफ भी सीबीआई ने केस दर्ज किया है. कंपनी के निदेशकों पर 2654 करोड़ रुपये धोखाधड़ी कर हासिल करने का आरोप है. शिकायत के मुताबिक कंपनी के प्रमोटर एसएन भटनागर ने 11 निजी और सरकारी बैंकों से कुल 2654 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है. ये तमाम कर्ज 2008 से 2016 के बीच लिए गए. मगर भटनागर के स्वामित्व वाली कंपनी ने कर्ज ही नहीं चुकाया. आखिरकार 2016-17 में बैंक ने लोन की धनराशि को एनपीए घोषित कर दिया. इस केस में सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि बैंकों ने भटनागर की कंपनी को तब लोन दिया, जब भटनागर की इस कंपनी को रिजर्व बैंक ने डिफॉल्टर घोषित कर रखा था. इससे लोन घोटाले में बैंक अफसरों की संलिप्तता की ओर साफ़ इशारा हो रहा है. सीबीआई में दर्ज हुई एफआईआर के मुताबिक बैंक ऑफ इंडिया ने सर्वाधिक 670.51 करोड़, बैंक ऑफ वडोदरा का 348.99 करोड़ और आईसीआईसीआई बैंक का 279.46 करोड़ भटनागर की कंपनी पर बकाया है. यह कंपनी वडोदरा में बिजली उपकरण बनाती है. बहरहाल इतना तो तय है कि देश में बैंकों को चपत लगाने वाला अकेला नीरव मोदी ही नहीं था बल्कि उसकी तरह कई ऐसी बड़ी मछलियां हैं जिन्होंने पूरे तालाब को गन्दा कर रखा है. साथ ही इसमें कई ऐसे बैंक अधिकारी भी शामिल हैं जिन्होंने तमाम नियम क़ानून को ताक़ पर रखते हुए इन्हें लोन दिए. और आने वाले वक़्त में इससे जुड़े कई और खुलासे हो सकते हैं. अब देखना ये है कि सरकार इस सब पर लगाम लगाने के लिए क्या कदम इ=उठाती है क्योंकि दिनोंदिन हो रहे इन घोटालों से जहां देश की जनता का बिश्वास सरकार और बकों से उठता जा रहा है वहीँ विपक्ष एक बार फिर से सरकार पर हमलावर होने वाला है क्योंकि अभी नीरव मोदी वाला किस्सा ख़त्म भी नहीं हुआ था की एक और घोटाला उजागर हुआ वो भी गुजरात से तो फिर तो बवाल होना लाजिमी ही है. कांग्रेस तो पहले से ही प्रधानमंत्री को सिर्फ व्यापारियों का हितेषी बता चुकी है.(इनपुट:जनसत्ता) Read More
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