Items filtered by date: Friday, 01 June 2018

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): देश में हुए उपचुनाव की 4  लोकसभा सीटों और 10 विधानसभा सीटों के नतीजे घोषित किये गये जिसके बाद देश में सियासी घमासान और तेज़ हो गया है. नतीजों को बीजेपी के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है वहीँ फूलपुर और गोरखपुर के बाद उत्तर प्रदेश में इसे विपक्ष के लिए संजीवनी के तौर पर देखा जा रहा है. चुनाव के नतीजों पर एक नजर डालें तो बीजेपी महज़ 2 सीटें ही जीत सकी. जिसमे एक लोकसभा सीट है तो एक विधानसभा सीट. वहीँ सबसे चर्चित सीटों पर नजर डालें तो इसमें उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट, नूरपुर की विधानसभा सीट और महाराष्ट्र की पालघर लोकसभा सीट के नाम प्रमुख हैं. जिसमे उत्तर प्रदेश की कैराना और नूरपुर सीटों में एक बार फिर से बीजेपी के ऊपर विपक्ष भारी पड़ा और बड़े मार्जिन से यहाँ विपक्ष के उम्मीदवारों के बीजेपी के उम्मीदवारों को धूल चटा दी. वहीं महाराष्ट्र की पालघर सीट ने बीजेपी की लाज बचा ली और यहाँ से एक बार फिर से बीजेपी उम्मीदवार विजयी हुए.

ऐसे में पहले अगर लोकसभा सीटों की बात करें तो उत्तर प्रदेश की कैराना सीट में मुकाबला बीजेपी बनाम सारा विपक्ष था. आरएलडी उम्मीदवार तबस्सुम हसन को आरएलडी, सपा, बसपा और कांग्रेस का समर्थन हासिल था वहीँ बीजेपी ने पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगंका सिंह के ऊपर दांव लगाया था. यानी बीजेपी यहाँ सहानभूति वोट और अपने विकास के सहारे चुनाव लड़ रही थी. लेकिन विकास हार गया और विपक्ष की उम्मीदवार तबस्सुम ने 44,618 वोट से बीजेपी की मृगंका सिंह को हरा दिया. यानी यहाँ जिन्नाह पर गन्ना भारी पड़ गया या यों कहें की जाट और मुस्लिम के इस पुराने गठबंधन ने एक बार फिर से एक होकर बीजेपी को धूल चटा दी. हालांकि बीजेपी ने यहां ध्रुबिकरण की कोशिश तो की थी लेकिन जानकारों की मानें तो ये दांव बीजेपी को उल्टा पड़ गया. हिन्दू वोट बैंक में से जात छटक कर आरएलडी के पक्ष में फिर से एक बार इकठ्ठा हुआ जिसने बीजेपी के सारे अरमानों पर पानी फेर दिया.

वहीँ महाराष्ट्र की बात करें तो यहाँ दो लोकसभा सीटों पर बीजेपी बनाम विपक्ष का मुकाबला था जिसमे गोंदिया-भंडारा सीट पर कांग्रेस और एनसीपी मिलकर बीजेपी को हराने में लगे हुए थे और पालघर सीट पर बीजेपी का मुकाबला अपनी पुरानी सहयोगी शिवसेना से ही था. जब नतीजे आये तो गोंदिया-भंडारा सीट विपक्ष के खाते में गिरी. यहाँ कांग्रेस-एनसीपी के उम्मीदवार मधुकर राव  कुकड़े ने बीजेपी के हेमंत पटेल को 12,352 वोटों से हरा दिया. वहीँ पालघर सीट ने बीजेपी की लाज़ रख ली. यहाँ बीजेपी के राजेन्द्र गावित ने शिवसेना के श्रीनिवास वनगा को 29,574 वोटों से हराकर अपनी सीट बचाई और जीत अपने नाम की. तो वहीँ नागालैंड में बीजेपी की सहयोगी पार्टी एनडीपीपी के तोखेहो येपथोमी में लगभग 1.73 लाख वोटों के बड़े अंतर से एनपीएफ के सी अपोक जमीर को हराकर बीजेपी के लिए कुछ राहत देने का काम किया.

अब अगर विधानसभा चुनाव की बात करें तो सबसे चर्चित उत्तर प्रदेश की नूरपुर सीट एक बार फिर से विपक्ष के सांझे उम्मीदवार नईमुल हसन के खाते में गई जहाँ उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार को 5,662 वोट के अंतर से हरा दिया, तो उत्तराखंड की थराली सीट ने बीजेपी को कुछ राहत दी. यहाँ बीजेपी की मुन्नी देवी ने अपनी सीट पार्टी की झोली में डालते हुए कांग्रेसी उम्मीदवार को 1981 वोटों के अंतर से हराया.इसके अलावा भाजपा के लिए पूरे देश से कोई अच्छी खबर नहीं आई और सब जगह पार्टी को हार का मुंह देखना पडा. पंजाब की शाहकोट से कांग्रेस के उम्मीदवार हरदेव सिंह लाडी 38,801 वोटों से जीते तो बिहार में आरजेडी के शाहनवाज़ आलम ने 41,000 वोटों से जीत दर्ज की. जीत के बाद आरजेडी की ख़ुशी का ठिकाना न रहा और उनके तेज्श्वी यादव ने जीत को लालूवाद से जोड़ दिया और अपने नितीश चच्चा को बोले की आपको लालूवाद समझने में अभी वक़्त लगेगा. 

बिहार के पड़ोस में बसे झारखण्ड से भी बीजेपी के लिए बुरी खबर ही आई जहाँ पर विपक्षी झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने गोमिया और सिल्ली दोनों सीटों पर बीजेपी को करारी मात देते हुए मुख्यमंत्री रघुबर दास के विकास पर सवालिया निशान लगा दिया. गोमिया सीट पर झामुमो की बबिता देवी ने 1344 वोटों से जबकि सिल्ली में झामुमो की सीमा महतो में बीजेपी उम्मीदवार को 13,508 वोटों के अंतर से हराकर बीजेपी को करारा झटका दिया.

कमोवेश ऐसा ही कुछ देखने को मिला महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी जहाँ की अम्पाती सीट पर कांग्रेसी उम्मीदवार ने 3191 वोटों के अंतर से अपने नाम कर कांग्रेस के चहरों को एक बार फिर से ख़ुशी से महका दिया. तो वहीँ पश्चिम बंगाल की महेशतला सीट तृणमूल कांग्रेस के तुलाल दास ने 62,831 मतों से अपने नाम कर ये साबित किया कि पश्चिम बंगाल में ममता का जादू बरकरार है और बीजेपी के लिए यहाँ झंडे गाड़ना अभी दूर की कौडी है. इसके अलावा केरल की चेंगन्नुर सीट पर एलडीएफ के साजी चेरियन ने 20,956 वोटों से जीत दर्ज की तो कर्नाटक की आरआर नगर सीट पर कांग्रेस के एन मुनिरतना ने 25400 वोटों के भारी अंतर से बीजेपी को बड़ा झटका दिया.

यानी उपचुनावों के नतीजों ने एक बात साफ़ कर दी है कि विपक्ष की एकजुटता रंग ला रही है और इतना तय है कि बीजेपी के लिए अब यही एकता सबसे बड़ा सरदर्द बन गया है,जिसकी काट ढूँढना उनके लिए बहुत बड़ा यक्श्प्रशन बन गया है. हालांकि बीजेपी उपचुनावों के नतीजों को मोदी के विपरीत नहीं देख रही. पार्टी प्रवक्ता कह रहे हैं की 2019 की लड़ाई में लोग उन्हें ही वोट देंगे क्योंकि यहाँ मोदी के मुकाबले विपक्ष के पास एक भी चेहरा नहीं है जो मोदी का मुकाबला कर सके. और वैसे भी मोदी उपचुनावों में प्रचार नहीं करते तो ऐसे में जनादेश मोदी के विरुद्ध नहीं है बल्कि स्थानीय मुद्दों ने इस चुनाव में बड़ी भूमिका निभाई. लेकिन बीजेपी की ये दलील पूरी तरह से गले के नीचे नहीं उतरती क्योंकि मोदी विरोधियों को भी एक बात भली तरह पता है कि अगर मोदी को हराना है तो उनसब को मिलकर ही हराना पड़ेगा. अगर अकेले-अकेले लड़ेंगे तो उनका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा. ऐसे में अगर लड़ाई अपने-अपने अस्तित्व को लेकर है तो उनकी एकता होना स्वाभाविक है. उत्तर प्रदेश इसका सबसे बड़ा उदहारण है जहाँ कभी पूर्व और पश्चिम रहे बीएसपी-एसपी आज एक दूसरे के दिल और धड़कन हो गये हैं. यानी उत्तर प्रदेश से संदेश साफ़ है कि मोदी को हराना है तो एक हो जाओ. तो कुल मिलाकर ऐसा कह सकते हैं कि मोदी को हारने के लिए सारा विपक्ष एक होगा और इसकी कवायद जो उत्तर प्रदेश से शुरू हुई थी अब वो पूरे देश तक जायेगी. राजनीतिक पंडित भी इस बात को अब मानने लगे हैं. हालांकि विपक्ष में भी अभी लीडरशिप को लेकर मतभेद है लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि विपक्ष को ये बात भली-भांति पता है कि मोदी को हारने के लिए सब एक हो जाओ नहीं तो मोदी सबको खा जाएगा. इससे पहले कि मोदी सबको खाए मोदी को हराओ ये संदेश साफ़ है. ऐसे में बीजेपी के लिए चुनौतियां बहुत भारी हैं. आने वाले समय में बीजेपी के चाणक्य अमित शाह इसके लिए क्या नीति बनाते हैं ये देखने वाली बात होगी. फिलहाल तो उपचुनाव के नतीजों को देखकर ऐसा ही कहा जा सकता है कि मोदी पस्त और विरोधी मस्त.........

 

Published in राजनीति

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): जैसे ही कल उपचुनाव के नतीज़े आये सियासी गलिआरों में इस बात को लेकर चर्चा तेज़ हुई की मोदी को हराना है तो विपक्ष को एक होना होगा.यानी जो चीज़ अबतक असम्भव दिख रही थी अब वही संभव दिख रही है बस विपक्ष को अपने मतभेद भुलाकर एक होना होगा. जिसके लिए प्रयास भी शुरू हो चुके हैं. उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ ये महागठबंधन अब कर्नाटक तक पहुँच गया है और ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि 2019 से पहले-पहले पूरे देश में मोदी के खिलाफ विपक्ष की लाम्बंदी होगी. बीजेपी के लिए महज़ विपक्ष की लामबंदी ही चिंता का विषय नन्हीं है बल्कि दिनोंदिन पार्टी के अपने वोट बैंक और खिसकता जनाधार भी चिंता का विषय है. ऐसे में बीजेपी से जुड़े कुछ वरिष्ठ लोग और नेता भी इस बात पर चिंता जताने लगे हैं कि आखिर क्यों बीजेपी दिनोंदिन अपने वोट-बैंक को खोटी जा रही है.

ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब कल उपचुनाव के नतीजे आये. बीजेपी की हार पर नजर डालें तो या तो पार्टी का वोट-बैंक या तो घर से बाहर वोट डालने के लिए निकला ही नहीं या फिर उन्होंने बीजेपी को उस तादाद में वोट नहीं किया जितना की पहले होता था. पार्टी के इसी खिसकते जनाधार को लेकर बीजेपी से जुड़ी सामाजसेविका एवं माँ कालका धर्मार्थ ट्रस्ट की अध्यक्षा सुधा भारद्वाज ने भी चिंता जताई है. सुधा का कहना है कि पार्टी की इस हार की सबसे बड़ी वजह मोदी का दलित और पिछड़े वोट बैंक के प्रति प्रेम है. मोदी इसी वोट-बैंक को पाने के चक्कर में अपने वोट-बैंक को खोते जा रहे हैं जिसका खामियाज़ा पार्टी को भुगतना पड़  रहा है.

सुधा की मानें तो अगर बीजेपी नहीं सुधरी तो ये तो बस शुरुआत है इसका असली असर तो 2019 में देखने को मिलेगा जब बीजेपी के पुराने लोग भी उसे वोट नहीं देंगे. सुधा ने मोदी को सलाह दी कि मोदी को ये समझना होगा दलित और पिछड़े वोट-बैंक कभी भी बीजेपी के पक्ष में नहीं रहे. आप आंकड़े उठा कर देख लीजिये. और अब कितना दलित और पिछड़े का वोट आपको मिल रहा है वो भी आपके सामने है. आप अपने वोट-बैंक को खोते जा रहे हो. वहीँ राम मंदिर के मसले पर भी उन्होंने बीजेपी को नसीहत दी और उसपर राम मंदिर के बनाने से मुकरने का इलज़ाम लगाया. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने राम मंदिर के मुद्दे पर आम-जन को ही नहीं बल्कि पूरे देश के साधू-संत समाज को भी ठगा है. अगर हल कोर्ट के द्वारा ही निकलना था तो क्योंकि सैंकड़ों हिन्दुओं की जानें गवाईं. आपने जन-भावनाओं को अपने राजनीतिक हित के पीछे कुर्वान कर दिया, और अब जब केंद्र में आपकी पूरी बहुमत वाली सरकार है तो आप कहते हैं की मामला कोर्ट में है.

सुधा यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने आगे कहा कि  हमारी पार्टी को संतों का आशीर्वाद था. इसके अलावा प्रवीण तोगड़िया जैसे दिग्गज़ हमारे साथ थे. बीजेपी कभी बीजेपी ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य की पार्टी हुआ करती थी. हम सब लोगों ने मिलकर इसे अपने खून-पसीने से सींचा है और यहाँ तक पहुँचाया है. लेकिन अब जो बीजेपी आप देख रहे हैं इसमें हमारी कोई जगह नहीं है. पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता आडवाणी, मुरली मनोहर, जोशी, शांता कुमार, गोविन्दाचार्य, यशवंत सिन्हा आज कहाँ हैं. आज तो बस सब कुछ रिमोट से चल रहा है. बीजेपी अब प्राइवेट लिमिटेड पार्टी हो गई है जिस[पर बस दो लोगों का अधिकार है. वही सब कुछ करते हैं. लेकिन अब कार्यकर्ता सब समझ गया है. झूठ और काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती. अगर बीजेपी अभी नहीं चेती तो 2019 में उसे इस बात का खमियाज़ा भुगतना पड़ेगा. अभी भी वक़्त है पार्टी के कार्यकर्ता को सम्मान दो. उसकी बात सुनो, उसके ऊपर अपनी बात मत थोपो... सुधा ने चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा कि अभी नहीं चेते तो फिर वही कहना पड़ेगा कि अब पछताए क्या होत जब चिड़िया चुग गई खेत......

 

Published in राजनीति

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): भारतीय जनता पार्टी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने उपचुनाव के नतीजों पर निराशा जताते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी के लिए जागने का अवसर बताया है. सुब्रमण्यम स्वामी ने साफ़ कहा कि बीजेपी अब चापलूसों को मलाई खिलाना छोड़े और जल्द से जल्द राम मंदिर के लिए ज़मीन उपलब्ध करवाए. दरअसल अभी कुछ दिन पहले हुए चुनाव के आये नतीजों ने बीजेपी की नींद उड़ा दी है, जिसमें बीजेपी के खाते में केवल 1 ही सीट आई. नतीजों में मिली करारी हार के बाद स्वामी ने दो ट्वीट किये जिसमे बीजेपी को साफ़ साफ़ नसीहत दी गई है.

अपने पहले ट्वीट में बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भाजपा के लिए चुनावी नतीजों को निराशाजनक बताया. साथ ही पार्टी को नसीहत दी कि अगर बीजेपी चापलूसों को मलाई खिलाना छोड़ दे तो इसमें जल्द ही सुधार आ सकता है. भाजपा में वापसी करने की ताक़त है लेकिन इसके लिए अपनी प्रकृति के अनुरुप फैसले लेने होंगे. 

वहीँ स्वामी ने शुक्रवार को दूसरा ट्वीट किया जिसमे उन्होंने कहा कि बीजेपी को अब वो करने की जरुरत है जिसके लिए लोगों ने उन्हें पसंद किया. अब वक़्त आ गया है जब सरकार को जल्द से जल्द राम मंदिर के लिए जमीन उपलब्ध करवानी चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि फ़ास्ट ट्रैक अदालतों से सुनवाई करवाकर टीडीके, बैमबिनो, पीवीएन  और पीसी आदि को जेल भिजवाना चाहिए. गौरतलब है कि यहां टीडीके से मतलब सोनिया गांधी, बैमबिनो से राहुल गाँधी, पीवीएन से पूर्व पीएम पीवी नरसिम्हा राव, और पीसी मतलब पूर्व वित्तमंत्री पी चिदम्बरम से लगाया जा रहा है.

दरअसल सुब्रमण्यम स्वामी ऐसे एकमात्र सांसद हैं जो बार-बार बीजेपी को हिंदुत्व की राजनीति करने की सलाह देते रहते हैं. उनका मानना है कि बीजेपी को वही करना चाहिए जिसके लिए उन्हें जनता ने चुना है. स्वामी का मानना है की जनता ने बीजेपी को विकास के लिए न तो वोट दिया था और न ही आगे देगी. बीजेपी को लोग हिंदुत्व की वजह से पसंद करते हैं. इसीलिए अब भाजपा को बिना वक़्त गवाए राम मंदिर के लिए जमीन उपलब्ध करवानी चाहिए. वहीँ शिवसेना से हुए मनमुटाव के ऊपर भी उनका कहना है कि माना शिवसेना अभी बहुत नाराज़ है लेकिन आने वाले लोकसभा चुनाव में शिवसेना बीजेपी के साथ आ जाएगी.

Published in राजनीति

Error : Please select some lists in your AcyMailing module configuration for the field "Automatically subscribe to" and make sure the selected lists are enabled

Photo Gallery