Items filtered by date: Monday, 08 January 2018

आवाज़ (संजीत खन्ना,झज्जर, 8 जनवरी):  मकर सक्रान्ति पर्व नजदीक है। इस पर्व पर झज्जर शहर सहित आस-पास के क्षेत्रों में प्रति साल लाखों रूपए की पंतगबाजी होती है। इस पंतगबाजी के शौकीन चाईनीज डोर का इस्तेमाल भी बेखौफ होकर करते है। जिसकी वजह से हर साल कई हादसे होते हैं. ऐसे अगर पिछले साल की बात करें तो पिछले साल भी चाइनीज़ डोर की वजह से कई हादसे हुए थे जिसमें कई लोगों की जान तक चली गई थी। हालांकि प्रशासन हर बार इस चाईनीज डोर के प्रतिबन्ध के लिए आदेश जारी करता है, लेकिन यह आदेश हर बार ही केवल कागजी कार्यवाहीं साबित होते है।

हांलाकि मकर सक्रांति पर्व में अभी 6 दिन शेष है लेकिन प्रबिन्ध के बावजूद चाईनीज डोर की बिक्री धड़ल्ले से शहर में हो रही है। सीजन के चलते चाइनीज डोर बिकनी हुई शुरू: जिले में 14 जनवरी को मकर सक्रान्ति पर्व नजदीक आते ही जिले में चाइनीज गट्टू डोर की बिक्री प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद चोरी छिपे हो रही है। ऐसे में जहां देश भर में चाइनीज वस्तुओं के बहिष्कार को लेकर स्वर मुखर हो रहे हैं, वहीं खूनी डोर के नाम से जानी जाने वाली खतरनाक गट्टू डोर को बेचने हेतु चोर दरवाजे से व्यापारियों की ओर से अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

गौरतलब है कि उक्त गट्टू चाइना डोर बच्चों के लिए अत्यंत घातक है। इसमें लोहे का पुट तथा प्लास्टिक होने के चलते उक्त डोर टूटती नहीं है जिसके चलते आज तक पठानकोट के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं तथा कई अपाहिज हो चुके हैं। ऐसे में प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद चाइना ड्रैगन के नाम से मशहूर गट्टू डोर को व्यापारियों की ओर से डम्प करना शुरू कर दिया गया है। गौरतलब है कि उक्त चाइना डोर पर देश के अन्य हिस्सों की तरह ही पंजाब में भी बिक्री पर पाबंदी लगाई गई है। मजेदार बात यह है कि प्रशासन को पता नहीं कि कहां पर उक्त डोर बेची जा रही है परंतु गली-मोहल्लों में छोटे-छोटे बच्चों से पूछो तो वे एकदम से बता देते हैं कि उक्त दुकान पर यह डोर मिल रही है। चाइनीज डोर को बेचने को लेकर चर्चा है कि कुछ दुकानदारों की ओर से उक्त घातक डोर को अन्य कार्य करने वाली दुकानों पर बेचा जा रहा है ताकि पुलिस को शक न हो। इसके अलावा शहर के वीरान माने जाने वाले क्षेत्रों में कुछ जगहों पर स्टॉक करके रखा गया है तथा बच्चों से पैसे लेकर उक्त डोर को वहां से लाकर चोरी-छिपे बेचा जा रहा है।

आखिर क्या है गट्टू डोर: गट्टू डोर चाइना में निर्मित डोर है। इस डोर में लोहे की तार को इस्तेमाल में लाया जाता है, जो अगर किसी की गर्दन या शरीर के किसी हिस्से में लिपट जाए तो शरीर के उस हिस्से को मिनटों में काट देती है। इस डोर में जहरीले कैमिकल का इस्तेमाल किया जाता है जिसके चलते पतंग उड़ाते समय बच्चों का हाथ कटने की सूरत में यह उस भाग को गला सकता है तथा मुंह में डालने की सूरत में बच्चे का शारीरिक नुक्सान हो सकता है। कई परिंदे गट्टू डोर की चपेट में आकर घंटों डोर में उलझ कर तड़पते रहते हैं तथा मर जाते हैं।

अमृतसरी तथा बरेली डोर की बिक्री नाममात्र: झज्जर शहर के ही कई दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने गट्टू डोर बेचने से तौबा कर रखी है, लेकिन जो दुकानदार चोरी-छिपे उक्त डोर को बेच रहे हैं, उनके चलते उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसके चलते अमृतसरी तथा बरेली डोर की बिक्री प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई की उक्त घातक डोर को बेचने वालों पर तुरंत सख्ती की जाए।

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आवाज़(रेखा राव, गुरुग्राम): राहुल गाँधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनते ही ऐसा कहा जा रहा था कि अब जल्द ही राहुल पार्टी और संगठन ने बड़े पैमाने पर फेरबदल करेंगे, लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ होता हुआ नहीं दिख रहा है और कांग्रेस हाईकमान ने सभी प्रदेश अध्यक्षों को उनके पदों पर फिलहाल बरकरार रखने के आदेश जारी कर दिए हैं. ऐस्सा करके भले ही हाई कमान ने अपनी तरफ से सारे विवाद शांत कर दिए हैैं, लेकिन हरियाणा में ऐसा बिल्कुल नजर नहीं आ रहा है. इस ऐलान के बाद हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खेमे और हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर के खेमे और मुखर होते हुए दिख रहे हैं और आने वाले वाले वक़्त में हरियाणा कांग्रेस में दिग्‍गजों का 'संग्राम' और तेज हाेने की संभावना है.

कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी का पत्र जारी होने के बाद जहाँ एक तरफ अशोक तंवर पार्टी के काम में जुट गए हैैं वहीँ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैैं. या इस बात को इस नजरिये से भी देख सकते हैं कि कांग्रेस हाईकमान के परिपत्र के आधार पर तंवर समर्थकों के हौसले बुलंद हैं वो ये मान कर चल रहे हैं कि पार्टी हाई कमान अशोक तंवर के काम सेखुश है वहीँ दूसरी ओर, हुड्डा समर्थक इसे अस्थायी व्यवस्था मान कर चल रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदला जायेगा और इसपर भूपिंदर सिंह हुड्डा की दावेदारी सबसे मजबूत है. यानी वो प्रदेश अध्यक्ष पद पर अपनी ताल ठोंके हुए हैैं, यानी कांग्रेस हाईकमान के इस पत्र से हरियाणा में कांग्रेस दिग्गजों का टकराव कम होगा, इसकी संभावना बिल्कुल भी नजर नहीं आ रही है. 


अध्यक्ष के काम करते रहने का पत्र अस्थायी, बदलाव अभी भी संभव : हुड्डा

इस मुद्दे पट जब एक अख़बार ने भूपिंदर सिंह हुड्डा से बात की तो उन्होंने कहा कि अशोक तंवर को अध्‍यक्ष पद पर काम करते रहने का पत्र अस्‍थायी व्‍यवस्‍था है और अभी भी इसमें बदलाव हो सकता है. उनके मुताबिक कांग्रेस हाईकमान ने किसी एक व्यक्ति या एक राज्य के लिए परिपत्र जारी नहीं किया है. यह एक रूटीन परिपत्र है, जिसमें कहा गया है कि जिस राज्य में जो अध्यक्ष काम कर रहा है, वह अगले आदेश तक काम करता रहे. इससे अधिक कुछ नहीं है. बदलाव अभी भी संभव है. हालांकि उन्होंने कहा कि में पार्टी का एक सिपाही हूँ और पार्टी जो भी फैसला लेगी वो उसे मंज़ूर करेंगे. हम पार्टी की नीतियों को घर-घर पहुँचाने का काम करेंगे.

सभी नेता गुटबाजी खत्म कर दें, मैैं अपनी तरफ से पहल करता हूं : तंवर

वहीँ जब इस मसले पर प्रदेश पार्टी अध्यक्ष अशोक तंवर से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि वह पार्टी में गुटबाजी समाप्‍त करने के लिए पहल कर रहे हैं. उन्होंने मौजूदा फैसले पर अपनी ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा कि पार्टी हाईकमान ने हमारे अब तक के संगठनात्मक कामकाज पर मुहर लगाई है. अध्यक्ष पद का कोई मुद्दा कभी रहा ही नहीं. मैैं हैरान हूं कि कुछ लोगों ने इसे मुद्दा बना लिया. मैैं पहले भी अध्यक्ष था और अब हाईकमान ने फिर से मुझे काम करने का मौका दिया है.  पार्टी हमारे लिए सर्वोपरि है. मैैं सभी पार्टी नेताओं से हाथ जोड़कर गुटबाजी खत्म करने तथा सिर जोड़कर काम करने की अपील करूंगा. आज कांग्रेस ही सभी दलों का विकल्प है. इसलिए हमें एकजुट होकर जनता की आवाज बनना चाहिए.


 



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हरियाणा के पूर्व विधायकों को दर्द है कि राज्‍य की मनोहरलाल सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है. पिछले तीन सालाें से उनकी पेंशन व भत्‍ते में बढ़ोत्‍तरी नहीं की है, जबकि वर्तमान विधायकों के वेतन और भत्ते तीन बार बढ़ चुके हैं.......

आवाज़(रेखा राव, गुरुग्राम): हरियाणा के पूर्व विधायक सूबे की मनोहर लाल खट्टर सरकार से खासे नाराज़ चल रहे हैं पूर्व विधायकों ने सरकार से कहा है कि अब हमारी भी चिंता करो. या यों कह सकते हैं कि पूर्व विधायकों ने अपनी पेंशन और अन्य भत्ते बढ़वाने के लिए के सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. गौरतलब है कि प्रदेश मेें वर्तमान विधायकों का वेतन और भत्ते तीन बार बढ़ चुके, लेकिन पूर्व जनप्रतिनिधियों का मामला अभी तक लटका है. परिणामस्वरूप पूर्व विधायक एसोसिएशन सरकार के खिलाफ़ लामबंद हो गयी है. एसोसिएशन का कहना है कि भाजपा सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है. पूर्व विधायकों का कहना है कि विभिन्न स्तरों पर मुद्दा उठाए जाने के बावजूद दो साल से महंगाई भत्ता बंद है और कई अन्य सुविधाएं भी नहीं मिल पा रहीं, जबकि दूसरे राज्यों की तुलना में हरियाणा में पूर्व विधायकों की बेसिक पेंशन पांच गुणा तक कम है.

पूर्व विधायक एसोसिएशन के प्रधान नफे सिंह राठी की अगुआई में कार्यकारिणी की बैठक में यह मुद्दा उठा. इस बैठक में विभिन्न दलों के बीस से अधिक पूर्व विधायक शामिल थे. बाद में पत्रकारों से रू-ब-रू एसोसिएशन पदाधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल, विधानसभा अध्यक्ष कंवर पाल गुर्जर और संसदीय कार्यमंत्री राम बिलास शर्मा के सामने यह मसला उठाते हुए विभिन्न राज्यों में पूर्व विधायकों को दी जा रही सुविधाओं की तुलनात्मक रिपोर्ट उन्हें सौंपी जा चुकी है. वहीँ एसोसिएशन के महासचिव और पूर्व विधायक रण सिंह मान ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने भरोसा दिलाया था कि शीतकालीन सत्र में इस संबंध में बिल लाया जाएगा, लेकिन तीन दिन के सत्र में इस पर कोई चर्चा तक नहीं हुई. अगर बजट सत्र में पूर्व विधायकों के पेंशन और अन्य सुविधाओं को लेकर बिल नहीं लाया गया तो कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर अगली रणनीति तय की जाएगी. पूर्व विधायकों ने बीजेपी सरकार पर इल्ज़ाम लगाते हुए कहा कि अमूमन विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाने के दौरान ही पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाई जाती है, लेकिन भाजपा सरकार में ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने दुसरे राज्यों से हरियाणा की तुलना करते हुए कहा कि पिछड़े राज्यों में भी पूर्व विधायकों को हरियाणा की तुलना में पेंशन और सुविधाएं कई गुणा अधिक मिल रही हैं, जबकि हरियाणा की मनोहर सरकार इस मुद्दे पर आँख मूँद कर बैठी हुई है.


एक बार विधायक बनने पर मिलते 51 हजार 750 रुपये   

गौरतलब है कि सूबे में फिलहाल 290 पूर्व विधायक हैं जिन्हें सरकार पेंशन देती है. एक बार विधायक रह चुके व्यक्ति को पेंशन और भत्तों के रूप में हर महीने 51 हजार 750 रुपये मिल रहे हैं. इसमें दस हजार रुपये बेसिक पेंशन और 245 रुपये भत्ता शामिल है. हर बार विधायक बनने पर अलग-अलग पेंशन मिलती है. वर्तमान में 20 पूर्व विधायक ऐसे हैं, जिनकी मासिक पेंशन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वेतन से भी ज्यादा है, जबकि 175 से अधिक पूर्व विधायक ऐसे हैं, जिनकी मासिक पेंशन 51 हजार से अधिक है......

आइये अब देश के कुछ दूसरे राज्‍यों में पूर्व विधायकों की पेंशन पर एक नज़र डालते हैं......

राज्य                         बेसिक पेंशन (मासिक)

1. महाराष्ट्र    -50 हजार रुपये। हर साल दो हजार रुपये की बढ़ोतरी
2. कर्नाटक   -40 हजार रुपये। हर साल एक हजार रुपये की बढ़ोतरी
3. हिमाचल प्रदेश    -36 हजार रुपये। एक अवधि के बाद एक हजार रुपये की बढ़ोतरी
4. उत्तर प्रदेश   -25 हजार रुपये
5. मध्य प्रदेश  -20 हजार रुपये
6. छत्तीसगढ़   -20 हजार रुपये
7. झारखंड   -20 हजार रुपये                   (इनपुट:दैनिक जागरण)

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कांग्रेेेस का धयान इस साल आठ राज्‍यों और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारियों पर है और इसके लिए राहुल गाँधी अभी से जुट गये हैं.......

 

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्‍यक्ष राहुल गांधी कांग्रेस में व्‍यापक पैमाने पर बदलाव लाने की तैयारी में जुटे हैं. पर इसके लिए वो कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखा रहे. शायद यही वजह है कि राहुल गाँधी ने मौजूदा संगठन में अब तक कोई बदलाव नहीं किया है और नया आदेश तक मौजूदा स्थिति बनाये रखने का आदेश पारित किया है. दरअसल राहुल के अध्यक्ष बनने के उपरान्त ये सम्भावना जताई जा रही थी कि अब कांग्रेस में उन चेहरों को तरजीह दी जायेगी जो राहुल की पसंद के हैं. लेकिन राहुल अभी हडबडाहट में कोई फैसला नहीं ले रहे हैं. दरअसल राहुल ने पार्टी और संगठन दोनों को और मजबूत करने का फैसला किया गया है, जिसके लिए उन्होंने एक मजबूत रिसर्च टीम बनाई है.असल में राहुल की कांग्रेस पार्टी को ब्रिटेन की लेबर और अमेरिका की डेमोक्रेट पार्टी की तर्ज पर तैयार करने की योजना है. इसका उद्देश्‍य पार्टी के अंदर एक मजबूत ‘थिंक टैंक’ बनाना है, ताकि पार्टी को तथ्‍यों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर न रहना पड़े. केंद्र में सत्‍तारूढ़ भाजपा पहले से ही अपनी मीडिया टीम को मजबूत कर चुकी है.

कांग्रेस के नेताओं ने बताया कि राहुल गांधी रिसर्च टीम को और दुरुस्‍त करने के लिए पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं के साथ मिल कर काम कर रहे हैं. सोशल मीडिया टीम को भी मजबूत किया जाएगा, ताकि मीडिया में पार्टी को लेकर बेहतर छवि बनाई जा सके, जोकि एक बहुत बड़ी चुनौती है. सूत्रों ने बताया कि रिसर्च टीम के लिए जर्मनी और जापान के राजनीतिक दलों के मॉडल का भी अध्‍ययन किया गया है. कांग्रेस की रिसर्च टीम के मौजूदा प्रमुख और राज्‍यसभा सदस्‍य राजीव गौड़ा फिलहाल 15 युवाओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. इस टीम को अप्रैल तक देश के प्रत्‍येक राज्‍य में रिसर्च डिपार्टमेंट गठित करने का निर्देश दिया गया है. गौरतलब है कि सांसदों की मदद करने के लिए जुलाई, 2017 में रिसर्च टीम का विस्‍तार किया गया था. टीम में 12 पूर्णकालिक सदस्‍य हैं, जबकि तीन इंटर्न भी हैं. पंद्रह लोगों की इस टीम के लिए गुजरात चुनाव पहली बड़ी चुनौती थी. फिलहाल ये लोग त्रिपुरा, मेघालय और कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए काम कर रहे हैं. इसके साथ ही कांग्रेस की रिसर्च टीम पंजाब सरकार के संपर्क में है, ताकि पहले साल के मौके पर उपलब्धियों को बेहतर तरीके से पेश किया जा सके.

अब इस रिसर्च टीम का विस्‍तार राज्‍यों तक करने की योजना है. जानकारों की मानें तो तेलंगाना और मध्‍य प्रदेश कांग्रेस ने रिसर्च टीम से संपर्क साध कर राज्‍य में यूनिट खोलने की मांग की है. बताया जाता है कि तेलंगाना कांग्रेस की सात सदस्‍यीय टीम अनुभव लेने के लिए गुजरात चुनाव के वक्‍त केंद्रीय टीम के साथ थी. सूत्रों का कहना है कि इसके अलावा विभिन्‍न राज्‍यों के विधायकों को भी संबंधित राज्‍य की रिसर्च टीम सहयोग देगी. राज्‍यों द्वारा इसके प्रति रुचि दिखाने के बाद यह फैसला लिया गया है.

बहरहाल इतना तो तय है कि राहुल अब कांग्रेस को नए ज़माने की कांग्रेस बनाने की कवायद में जुटे हैं, जो बीजेपी को तो टक्कर तो दे ही सके साथ ही दुनिया भर में कांग्रेस को मजबूती के साथ पेश कर सके. इसके लिए राहुल अब गहरी रिसर्च कर रहे हैं और कांग्रेस को मजबूत करने का प्लान तैयार कर रहे हैं, क्योंकि राहुल को यर मालूम है कि इस साल कर्नाटक, मध्‍य प्रदेश और राजस्‍थान समेत आठ राज्‍यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसके अलावा 2019 में लोकसभा का चुनाव होगा. अगर पार्टी में जल्दबाज़ी में कोई बदलाव किया जाता है तो इसके फायदे की जगह नुक्सान भी हो  हैं.

 

 

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