Items filtered by date: Tuesday, 23 January 2018

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): बीजेपी और शिवसेना के बीच काफी वक्त से चल रही तल्खी का नतीजा मंगलवार को सामने आ ही गया। शिवसेना ने एनडीए गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने कहा है कि वह 2019 का चुनाव अकेले ही लड़ेगी। इसके अलावा, विधानसभा चुनाव में भी अकेले ही उतरेगी। इस फैसले का महाराष्ट्र की राजनीति पर बड़ा असर पड़ने वाला है। महाराष्ट्र सरकार के अलावा बीएमसी में दोनों पार्टियां गठबंधन करके सरकार चला रही हैं। शिवसेना ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब युवा नेता और पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को पार्टी की नैशनल एक्जीक्यूटिव का सदस्य बनाया गया है। इसे शिवसेना की विरासत अगली पीढ़ी को सौंपने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

बता दें कि शिवसेना ने यह फैसला अपनी कार्यकारिणी की बैठक में लिया है। हालांकि, लंबे वक्त से चली आ रही तल्खी को देखते हुए यह फैसला सामान्य ही माना जाएगा। शिवसेना केंद्र की मोदी सरकार, यहां तक कि राज्य की फडणवीस सरकार की खासी आलोचक रही है। नोटबंदी, जीएसटी जैसे केंद्र सरकार के फैसलों से लेकर हर उस मुद्दे पर शिवसेना अपने सहयोगी पर हमलावर रही, जिसके जरिए विरोधी पार्टियों ने बीजेपी को घेरने की कोशिश की। तल्खी इस हद तक बढ़ गई कि शिवसेना परंपरागत राजनीतिक विरोधी कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी की तारीफ करते नजर आई। बीएमसी के चुनाव भी इस तल्खी के माहौल में लड़े गए। हालांकि, बीजेपी और शिवसेना ने अलग अलग चुनाव लड़ा। चुनाव में बीजेपी ने शिवसेना को इतनी कड़ी टक्कर दी कि शिवसेना ने उस वक्त चुप्पी साधने में ही भलाई समझी और बीजेपी के सहयोग से नगर निगम की सत्ता पर काबिज होने में भलाई समझी। दूसरी ओर, बीजेपी के नेता शिवसेना के तमाम हमलों के बावजूद बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया देते रहे हैं।

शिवसेना की ओर से इस बड़े फैसले का ऐलान वरिष्ठ नेता संजय राउत ने किया। बता दें कि महाराष्ट्र सरकार में बीजेपी और शिवसेना की गठबंधन के 288 विधायक हैं। इनमें 122 बीजेपी के, 63 शिवसेना और बाकी अन्य विधायक हैं। वहीं, कांग्रेस के 42, और एनसीपी के 41 विधायक हैं। अब बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या शिवसेना महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी की सत्ता से भी अलग होगी? कुछ राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह शिवसेना की ओर से बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति है।(सौजन्य:जनसत्ताडॉट कॉम)

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आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): कुलदीप बिशनोई कि जब से कांग्रेस में वापसी हुई है तब से ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं कि वो जल्द ही हरियाणा कांग्रेस की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखेंगे, लेकिन कुलदीप अपना एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं. प्रदेश कांग्रेस में जहाँ हुड्डा और तंवर खेमे में गुटबाजी साफ़ तौर पर दिखाई दे रही है दोनों एक दूसरे को मात देने में नित नई तैयारियां कर रहे हैं वहीँ कुलदीप बिशनोई चुपचाप हर राजनितिक गतिविधि पर नजर बनाये हुए तमाशा देख रहे हैं. अभी हालिया हिसार में हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों से भी कुलदीप ने दूरी बनाई राखी और उनकी तरफ से ऐसा कहा गया कि उन्हें किसी कार्यक्रम के लिए निमन्त्रण नही भेजा गया. मतलब साफ़ है वो किसी भी गुट का हिस्सा नहीं बनना चाहते. यानी राजनीति सधी हुई है और सोच दूर की. और कहते भी हैं कि दो बिल्लियों कि लड़ाई में फायदा किसी तीसरे का ही होता है.

इस बीच 22 जनवरी यानी पिछले कल ये खबर आई कि कुलदीप बिशनोई ने 12 तुगलक लेन स्थित राहुल गाँधी से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की. लगभग 50 मिनट तक चली इस मुलाकात में कुलदीप बिश्नोई ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ प्रदेश के वर्तमान राजनीतिक हालातों, हरियाणा की भाजपा सरकार की विफलताओं तथा राज्य में बढ़ रहे क्राईम पर विस्तार से चर्चा की। जानकारों कि मानें तो इस मुलाकात के कई मायने हैं. जहाँ राहुल को कुलदीप ने हरियाणा के सियासी हालत कि जानकारी दी वहीँ उन्होंने राहुल को जल्द हरियाणा आने का न्योता भी दिया.

सूत्रों कि मानें तो कुलदीप बिश्नोई ने राहुल गांधी को बताया कि हरियाणा की खट्टर सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है ऐसे में कांग्रेस के लिए माहौल अनुकूल है बशर्ते कांग्रेस एक होकर प्रयास करे. गुटबाजी छोडकर अगर सभी बड़े नेता पार्टी को सशक्त करने कि दिशा में प्रयास करें तो 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में होंगे. वहीँ कुलदीप बिशनोई द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक भी उन्होंने राहुल गाँधी को सूबे की हालत कि जानकारी दी. कुलदीप ने राहुल को बताया कि सूबे के लोग कांग्रेस की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं. राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बदतर होती जा रही है. छोटी-छोटी बच्चियों से दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जिन पर लगाम कसने में भाजपा सरकार असफल साबित हो रही है. उन्होंने राहुल को आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की हरियाणा को लेकर हाल में आई रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में साल 2016 के दौरान प्रदेश में सामूहिक दुष्कर्म की 191 घटनाएं हुई थीं. राष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक दुष्कर्म की औसत जहां महज 0.3 फीसदी है वहीं सूबे में यह औसत 1.5 फीसदी है. पिछले साल हरियाणा में दुष्कर्म के कुल 1189 केस दर्ज किए गए थे. जिनमें से करीब 44 फीसदी अथवा करीब 518 घटनाओं में पीड़ितों की उम्र 18 साल से कम रही है. जनवरी माह में ही अभी तक हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं हो चुकी हैं. 

मतलब साफ़ है, जहाँ हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी अपने चरम पर है, तंवर और हुड्डा खेमा एक दूसरे को मात देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा ऐसे में कुलदीप बिशनोई का चुपचाप पार्टी के लिए काम करना और वो भी बिना कोई नया गुट बनाये अपने आप में काफी कुछ कहता है. वैसे भी कुलदीप बिशनोई कि गाँधी परिवार से करीबियां किसी से छुपी हुई नहीं हैं. ऐसे में राहुल गाँधी से मुलाकात के कई मायने निकलते हैं. अब आने वाले समय में ये मुलाकात क्या गुल खिलाती है ये तो वक़्त ही बतायेगा लेकिन इतना साफ़ है कि राजनीति के माहिर खिलाड़ी कुलदीप निश्चित तौर पर कुछ ऐसा करने जा रहे हैं जिसका असर हरियाणा कि राजनीति में देखने को मिलेगा.

 
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आवाज़(विशाल चौधरी, कैथल): कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था  और युवाओ को रोजगार न मुहैया करवाने पर प्रदेश की बीजेपी पर निशाना साधाते हुए कहा आज जम्मू कश्मीर से भी ज्यादा गोलिया हरियाणा में चली है । प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर दुःख जाहिर करते हुए कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा जो प्रदेश सुखशांति , कानून व्यवस्था , प्रति व्यक्ति आय में अग्रणी जाना जाता था, लेकिन आज कानून व्यवस्था नाम की चीज प्रदेश में नहीं है, ऐसा प्रतीत हो रहा है प्रदेश में कोई सरकार नहीं है, हर आदमी अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहा है। बीजेपी के तीन साल के कार्यकाल में कश्मीर से भी ज्यादा गोलिया हमारे प्रदेश में चल चुकी है। 

वहीँ रोजगार के मामले में बीजेपी सरकार को घेरते हुए कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा भारी चिंता का विषय है रोजगार न  मिलने से युवा पथ भर्मित हुआ है।सरकार युवाओ को रोजगार देने में पूरी तरह से असफल रही है। गौरतलब है कि सांसद  कैथल में एक निजी  कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए पहुंचे थे। यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कांग्रेस में गुटबाजी से साफ तौर पर इंकार किया। उन्होंने कहा कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है 2019 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी एक जुटता से चुनाव लड़ेगी और सूबे कि सभी सीटें कांग्रेस ही जीतेगी. 
 
 
 
 

 

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