आवाज़(रेखा राव, गुरुग्राम): मोदी सरकार में राज्य मंत्री और हरियाणा के कद्दावर नेता राव इंदरजीत की सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से कई मुद्दों पर अन-बन की ख़बरें कोई नई खबर नहीं है, लेकिन इस बार केन्द्रीय मंत्री खट्टर से इस कदर नाराज़ हुए कि उन्होंने भरी सभा में ही खट्टर को आड़े-हाथों लेते हुए जमकर फटकार लगा दी.  दरअसल मोदी सरकार के 4 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में राव इंद्रजीत ने खट्टर की लेट-लतीफी पर उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि 2019 के चुनाव में आपकी सरकार से मदद की कोई उम्मीद नहीं हैं.

राव इंद्रजीत सिंह ने कहा, 'मुझे कोई खास उम्मीद नहीं है कि आपकी सरकार चुनाव में सांसदों की मदद करेगी. जो हीरो होंडा चौक का उद्घाटन होना था वो मैं अपनी तरफ से कर आया, फीता काटना ही बाकी रह गया है, वो आप जाकर कर आईये. आपने टाइम दिया था आप नहीं पहुंचे, मैं होकर आ गया. आपके पास निजी सचिव हैं, आप फोन कर देते. किसी को तो खबर करनी चाहिए कि हम वहां खड़े रहें. केंद्र सरकार का कार्यक्रम हो, केंद्र का पैसा लग रहा हो और हम घूमकर चले जाएं, यह हम नहीं करेंगे.'

गुरुग्राम से सांसद इंद्रजीत सिंह यहीं नहीं रुके, उन्होंने मनोहर लाल खट्टर को संबोधित करते हुए यह तक कह दिया कि बेहतर यही है अगली बार आपको आमंत्रित ही न किया जाए. केंद्रीय मंत्री गडकरी से अनुरोध करते हुए राव इंद्रजीत ने कहा कि अगली बार से ऐसे कार्यक्रम में केंद्र का मंत्री उपस्थित होना चाहिए. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के अलावा प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सुभाष बराला और कई वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार के मंत्री मौजूद थे. इंद्रजीत सिंह के बयान पर जब खट्टर से प्रतिक्रिया मांगी गई तो वो काफी असहज नजर आए. हालांकि अपनी लेट-लतीफी पर लीपा-पोती करते हुए खट्टर ने कहा कि वह इंद्रजीत सिंह की बेबाकी के कायल हैं, उनके दिल में जो था कह दिया. ये सब तो घर की बात है.

गौरतलब है कि राव इंदरजीत इससे पहले भी खट्टर को आड़े-हाथों ले चुके हैं. एक बार उन्होंने रेवाड़ी में ये तक कह दिया था कि जिन उम्मीदों पर दक्षिण हरियाणा के लोगों ने बीजेपी की सरकार बनाई थी खट्टर उनपर ज़रा भी खरे नहीं उतर पाए. बीजेपी के कार्यकर्ता और हम किस मुंह से अगली बार वोट मांगने जायेंगे. इस बार खट्टर ने फिर राव इंदरजीत का दिल दुखाया और राव इंदरजीत फिर भरी सभा में खट्टर को आड़े-हाथों ले लिया. दरअसल राव इंदरजीत की ये बेचैनी जायज़ भी लगती है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान जब मैंने राव इंदरजीत से बात की थी तो उन्होंने  सूबे में बीजेपी की सरकार आने के बाद दक्षिण हरियाणा को विकास की दृष्टि से अव्वल बनाने की बात कही थी. इतना ही नहीं उन्होंने भरी सभा में रेवाड़ी को सिंगापूर बनाने की बात कही थी लेकिन सरकार बनने के बाद दक्षिण हरियाणा के प्रति खटार सरकार का उदासीन रवैया देखने को मिला जिससे कार्यकर्ता और खुद राव इंदरजीत  उनसे बहुत नाराज़ चल रहे हैं.(इनपुट: आजतक)

 

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): भारत के पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के दिग्गज़ नेता प्रणव मुखर्जी 7 जून को होने वाली आर एस एस कार्यकर्ताओं की अहम बैठक को सम्बोधित कर सकते हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की मानें तो आर एस एस ने 7 जून को अंतिम वर्ष के स्वयंसेवकों के विदाई संबोधन के लिए देश के पूर्व राष्ट्रपति और दिग्गज कांग्रेसी रहे प्रणव मुखर्जी को आमंत्रित किया है. इस दौरान आर एस एस के लगभग 800 स्वयमसेवक मौजूद रहेंगे. आर एस एस के मुख्यालय नागपुर में हर वर्ष इस तरह का कार्यक्रम होता है. पहले इस कार्यक्रम का नाम ऑफिसर ट्रेनिंग कोर्स था जबकि अब इसका नाम बदलकर संघ शिक्षा वर्ग रख दिया गया है. इस कोर्स को पास करने के बाद स्वयमसेवक पूर्ण कालिक प्रचारक बन जाते हैं और वो पूरे देश में संघ की विचारधारा का प्रचार-प्रसार करते हैं.

खबर में ख़ास बात ये है कि आर एस एस और कांग्रेस की विचारधारा हमेशा से ही पूर्व और पश्चिम वाली रही है. ऐसे में जैसे ही ये खबर आई कि प्रणव दा आर एस एस स्वयंसेवकों को सम्बोधित करेंगे तब से राजनितिक गलिआरों में खलबली मच गई है. दरअसल प्रणव मुखर्जी 1969 के दशक से कांग्रेसी रहे हैं जिन्हें देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का सबसे करीबी माना जाता रहा है. कांग्रेसी सरकारों में उन्हें वरिष्ठ मंत्री का दर्ज़ा मिला है और इतना ही नहीं एक समय उन्हें कांग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार भी माना जाता था. या यों भी कह सकते हैं कि वो कांग्रेस के संकटमोचक भी रहे हैं. जब भी कांग्रेस कहीं फंसती दिखी तो उन्होंने मोर्चा सम्भाला और साड़ी उलझनों को पल में सुलझा दिया. मनमोहन सरकार में वो देश के वित्त मंत्री रहे और उसके बाद 2012 से लेकर 2017 तक वो देश के 13वें राष्ट्रपति रहे. प्रणव मुखर्जी एक ऐसी शख्सियत का नाम हैं जो हमेशा पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्त्रोत रहे हैं. पक्ष और विपक्ष हमेशा से उनकी इज्ज़त करता आया है. ऐसे में ऐसी शख्सियत का आर एस एस स्व्यम्सेवकों को सम्बोधित करने जाने का मतलब कई बातें कहता है.

हालांकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि क्या वाकई प्रणव मुखर्जी स्वयं सेवकों को सम्बोधित करेंगे लेकिन टाइम्स ऑफ़ इंडिया और जनसत्ता की मानें तो आरएसएस के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि प्रणव मुखर्जी को इस बाबत न्योता भेजा गया है, और उचित समय आने पर इस बात की आधिकारिक घोषणा भी कर दी जायेगी. 

 

आवाज़(बी.डी अगरवाल, रेवाड़ी): श्री श्याम सेवा समिति ट्रस्ट रेवाड़ी ने प्रथम नि:शुल्क नेत्र जांच कैम्प का आयोजन किया। समिति के सचिव शरद गोयल ने बताया कि ट्रस्ट के चेयरमैन रामकिशन अग्रवाल व प्रधान प्रवीण गोयल के नेतृत्व में समिति के सभी ट्रस्टीयों के सहयोग से संजीविनी अस्पताल के नेत्र चिकित्सक डॉक्टर वैभव शर्मा, डॉक्टर संजीव बिसला व सहयोगी शेफाली चराया की कुशल टीम ने कैम्प में 947 लोगों के आंखों की जाँच कर उन्हें 400 चश्मे व दवाएं भी दी गई तथा 110 लोगों की आंखों के ऑपरेशन करने निश्चित किये गए,जिनको तिथि समय अनुसार दे दी गई है।

नेत्र जांच कैम्प का शुभारंभ मुख्याथिति भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश सयोंजक सतीश खोला, विशिष्ट अतिथि समाजसेवी डीके जैन व गुरुग्रामलोकसभा निगरानी कमेटी के चेयरमैन लक्ष्मण यादव ने समिति ट्रस्टियों के
साथ सयुंक्त रूप से महाराजा अग्रसैन की प्रतिमा के समक्ष द्वीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि समाज हित मे इस प्रकार के जनहित के कार्य समय समय पर अग्रवाल समाज के लोग करते रहते है।इसलिए आज के आंखों के नि:शुल्क नेत्र कैम्प के लिए श्रीश्याम सेवा समिति ट्रस्ट बधाई के पात्र है क्योंकि नर सेवा ही नारायण सेवा है। सतीश खोला अपनी तरफ से 51 हजार रुपये, लोकनिर्माण मंत्री राव नरबीर सिंह
के कैम्प में न पहुंचने पर उनकी तरफ से ट्रस्ट को 2 लाख रुपये व वेद अग्रवाल गैस वाले ने भी 21 हजार रुपये देने की घोषणा की। कैम्प में लोगों की आंखों की जांच कर रही डॉक्टरों की टीम ने कहा कि सभी अपनी आंखों को धूल मिट्टी, तेज धूप में ज्यादा खुली ना रखना, खुली आंखों को सीधे पानी से ना धोना, रक्तचाप नियंत्रण में रखना व शुगर की बीमारी में आंखों का विशेष ख्याल रखना चाहिए।
 
ट्रस्ट के चेयरमैन रामकिशन अग्रवाल ने समिति ट्रस्टियों के साथ  सभी अथितियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया और सभी उपस्थित लोगों का आभार प्रकट किया। इस अवसर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद यादव, अग्रवाल समाज के प्रधान राधेश्याम गुप्ता, वैश्य समाज प्रधान बृजलाल गोयल, प्रधान हिन्दू स्कूल रामकिशन अग्रवाल भालखी वाले, आनन्द स्वरूप डाटा, जितेंद्र जिंदल, मनोज गोयल,राजीव अग्रवाल, प्रवीण डाटा, अग्रवाल सभा के सचिव दीपक अग्रवाल, सतीश अग्रवाल व मंच संचालन पण्डित महेश पतसारिया ने किया।

आवाज़(बी.डी. अगरवाल, रेवाड़ी): जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं हरियाणा में एस वाई एल का मुद्दा फिरसे जिन्न की तरह निकलकर बाहर आ गया है और समस्त पार्टियों के बीच एक दूसरे को इसका जिम्मेवार ठहराने की कवायद शुरू हो चुकी है. इंडियन नेशनल लोकदल ने तो इसके लिए वाकायदा जेल भरो की मुहीम शुरू की है. इनेलो नेता इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं और हरियाणा को उसका हक़ दिलवाने की बात कहते हुए मौजूदा सरकार को इसके पीछे दोषी ठहरा रहे हैं. ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब इनेलो सुप्रीमो चौधरी ओमप्रकाश चौटाला कार्यकर्ताओं से मिलने रेवाड़ी सनसिटी स्थित जिला कार्यालय में पहुंचे और कार्यकर्ताओं से रूबरू होते हुए चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने कहा कि सतलुज यमुना लिंक नहर का पानी लेके रहेंगें. यह हमारा हक है और हम अपना हक लेना जानते हैं. उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बावजूद भी बीजेपी की सरकार ने आज तक एसवाईएल के पानी को लाने के लिए किसी भी तरह का प्रयास नहीं किया, जबकि आज सबसे ज्यादा जरूरत दक्षिण हरियाणा को पानी की है और उसी पानी को लाने के लिए इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी  हर प्रकार से संघर्ष कर रही है. इनेलो ने इसके लिए कभी प्रदेश में तो कभी दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन  किये लेकिन इस निक्कमी सरकार के कान पर जू तक नही रेंगी.

इनेलो सुप्रीमो यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि अगर कभी सिंधू बॉर्डर पर नहर खुदाई के लिए हजारों कार्यकर्ता जाते है तो गिरफ्तार कर लिया जाता है. कभी संसद का घेराव करते है तो कार्यकर्ताओं को लाठियों से पीटा जाता है. लेकिन हम हार मानने वालों में से नहीं हैं इसीलिए पार्टी ने अब प्रदेश के हर जिले में जेल भरो आंदोलन का अभियान शुरू किया है ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके और हरियाणा को उसका हक मिल सके.  वहीँ कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने कार्यकर्ताओं को आगामी 19 जून को रेवाड़ी में  होने वाले जेल भरो आन्दोलन में बढ़चढ़ कर भाग लेने की बात कही. उन्होंने कहा  कि आज बीजेपी सरकार की वजह से देश और प्रदेश के हालात बहुत खराब हो चुके हैं चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है.  हर वर्ग सरकार के उदासीन रवैये से परेशान हो चुका है और अब वह इस सरकार से छुटकारा पाना चाहता है. क्योंकि बीजेपी सरकार केवल झूठे वादों की सरकार है ये लोगों को गुमराह करती हैऔर  गुमराह कर उनकी वोट को ठगने का काम करते हैं जबकि धरातल पर कोई काम नहीं करते ना ही उन्होंने अपने कोई चुनावी वादा पूरा किया. चौटाला आगे बोले कि मौजूदा सरकार युवाओं को रोजगार देने के नाम पर ठगा. रोज़गार तो मिला नहीं उल्टा बेरोज़गारी बढ़ती जा रही है. 
 
वहीँ कांग्रेस पर भी इनेलो सुप्रीमो ने जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि कॉंग्रेस के भ्रष्टाचार को जनता भूली नही है. हरियाणा कांग्रेस में वो अपनी आपसी फूट से बिल्कुल खत्म हो गयी है. चौधरी ओम प्रकाश चौटाला ने कहा कि 3206 लोगो रोजगार देकर उनके घरों में चूल्हा जलाने का काम किया था जिसके लिए कांग्रेस सरकार ने षडयंत्र के तहत  युवाओं को रोजगार देने के नाम पर उनको जेल में बंद किया गया है. लेकिन वो घबराने वाले नही है और दोबारा सत्ता में आने पर वह फिर से युवाओं  को रोजगार देने का काम करेंगे देंगे फिर चाहे इसके लिए उन्हें फांसी क्यों ना चढ़ना पड़े. इसलिये अब जनता आशा और उम्मीद भरी नजरों से इंडियन नेशनल लोकदल में बहुजन समाज पार्टी गठबंधन की ओर देख रही है. श्री चौटाला ने कार्यकर्ताओं को आगामी चुनाव के लिए तैयार रहने की  के लिए  कहा  दिशा निर्देश देते हुए कहा कि अब चुनाव दूर नहीं है  और इसलिए सभी कार्यकर्ता  वह पदाधिकारी  गांव गांव जाकर ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़ कर संगठन को मजबूत करने का काम करें  और  इनेलो बसपा गठबंधन की सरकार बनाने का काम करें. इस मौके पर  इनेलो जिला प्रधान डॉ राजपाल यादव ने भी वहां आये हुए कार्यकर्ताओं का आभार जताया.
 
इसके पश्चात  इनेलो सुप्रीमो ने  बहरोड से विधायक धर्मपाल चौधरी का कुछ दिन पहले हुआ आकस्मिक निधन पर उनके भाई शीशराम चौधरी के निवास पर शोक प्रकट करने पहुंचे और सब संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए इस दुख की घड़ी में ढांढस बंधाया. इस अवसर पर चंडीगढ़ कार्यालय सचिव सरदार नक्षत्र सिंह मल्हान, प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील चौधरी ,पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह , श्रमिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विद्यानंद लांबा, रेवाड़ी हलका प्रधान राजवीर कालूवास, कोसली  हलका प्रधान जगफूल यादव, बावल हलका प्रधान  रामकिशन छिल्लर, महिला प्रधान कमला शर्मा, बुद्धिजीवी सेल के जिला संयोजक जगदीश प्रसाद डहीनवाल, शहरी प्रधान वरुण गांधी, एससी सेल के जिला संयोजक श्यामसुंदर सब्बरवाल, वरिष्ठ नेता रामफल कोसलिया ,युवा नेता विजय भुरथला, व्यापार सेल के जिला संयोजक सुभाष गर्ग, किसान सेल के जिला संयोजक विनोद शर्मा बावल, बीसी सेल के जिला संयोजक सुबेसिंह प्रजापत, , जिला पार्षद हरीश झाबुआ, श्रमिक प्रकोष्ठ संयोजक सतपाल बिठवाना,कर्मचारी सेल प्रधान बीडी यादव, जिला उपाध्यक्ष मनजीत जैलदार,  डॉक्टर संजय मेहरा,  टेक चंद सैनी ,इनसो प्रधान सतेंदर झाबुआ,महिला नेत्री सुरेंद्र कौर राठी ,विमला चौधरी,शकुंतला यादव,बसपा महिला प्रधान लक्ष्मीबाई ,बसपा जिला प्रधान अशोक कुमार अहमदपुर, बसपा प्रदेश सचिव  प्रीतम जांगड़ा ,गोपाल ओढी, अरुण बधराना,नरेश गुरवड़ा, अजय पीपल, मास्टर किशोरीलाल, जगराम चोपड़ा ,प्यारेलाल , ,जिला प्रवक्ता एडवोकेट रजवन्त सिंह डहीनवाल,डॉ रविन्द्र कुमार ,धर्मपाल देशवाल ,जित्तू डोहक़ी, कर्मबीर सरपंच नैहचाना ,रामअवतार जांगड़ा , युवा हल्का प्रधान अमन जून, बावल प्रवक्ता राजू चौधरी ,कोसली प्रवक्ता यशवीर यादव, पंजाबी मार्किंट प्रधान विनोद अरोड़ा ,सज्जन सिंह सुरेहली, भूप सिंह भाकली ,जस्सूराव मीरपुर ,संदीप टुमना , मंसाराम खिजूरी, सतीश धनखड़ ,पवन ढाकिया, सुरेन्द्र ढाकिया ,सतीश मीरपुर,सुधीर मास्टर, सतपाल रुद्द, महेन्द्र बालावास,रमेश तिहाड़ा,अमन हरचंदपुर,सुरेंद्र चौहान, ज्योति सांगवान,लीलू खोरी,दीपक कुमार,गौरव सैनी,नरेश सैनी जोगेंद्र कुमार, शुभम ,महेंद्र कुमार, पवन खुराना, अनमोल लाला जी,राजाराम,राम प्रकाश तोंदवाल, वीडी मेहरा, राजसिंह कुंडू, सहित सैकड़ों की संख्या में इनेलो बसपा के कार्यकर्ता साथी उपस्थित रहे.
 
आवाज़(बी डी अग्रवाल, रेवाड़ी): सोमाणी कॉलेज ऑफ फार्मेसी का शुभारंभ किया गया, जिसमें मुख्यातिथि के रूप में अतिरिक्त मुख्य सचिव हरियाणा सरकार धनपत सिंह आईएएस मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरूआत मुख्यातिथि धनपत सिंह एवं विशिष्टातिथि चेयरमैन श्रम कल्याण बोर्ड हरियाणा सरकार रमेश बल्हारा, प्रसिद्ध उद्योगपति अशोक सोमाणी, ज्वार्इंट डायरेक्टर एचएसबीटीआई हरियाणा डॉ. सुलतान सिंह, जिला पार्षद धर्मेद्र खटाणा, जननेता विजय सोमाणी, फार्मेसी कॉलेज की प्रिंसीपल श्रीमती भावना यादव एवं सोमाणी कॉलेज के डायरेक्टर प्रो. वाईपी सिंह के द्वारा स्वत्रतंता सेनानी आरडी सोमाणी के प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर व माँ सरस्वती के आगे दीप प्रज्जवलित कर की गई। इसके पश्चात कॉलेज की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना कर मां शारदा का आर्शीवाद लिया। मुख्यातिथि माननीय धनपत सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुए बताया कि सोमाणी परिवार द्वारा पहले से ही इंजीनियरिंग कॉलेज व मैंनेजमेंट कॉलेज की स्थापना की हुई है। इसके पश्चात फार्मेसी कॉलेज की शुरूआत एक अच्छी पहल है। उन्होंने बताया कि सोमाणी परिवार कई वर्षो से शिक्षा व जनकल्याण के कार्यों में रूचि लेता रहा है, जिसके चलते सोमाणी कॉलेज शिक्षा के क्षेत्र में एक उभरता हुआ सितारा बनकर चमक रहा है। उन्होंने सोमाणी कॉलेज की पूरी टीम को इस अच्छे कार्य के लिए बधाई भी दी और उपस्थित जनसमुदाय से अपील कर कहा कि आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति के लिए शिक्षित होना अति आवश्यक है। इसलिए वे स्वयं या अपने बच्चों को इन शिक्षण संस्थान में शिक्षित कर आगे बढ़ाए। 
 
इस मौके पर श्रम कल्याण बोर्ड के चेयरमैन रमेश बल्हारा ने जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि दक्षिण हरियाणा की पुरानी मांग पर आज से 18 वर्ष पूर्व जब दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-8 के बीच में कोई भी तकनीकी संस्था नहीं थी उस समय सोमाणी परिवार ने तकनीकी मैनेजमेंट की शिक्षा के लिए कॉलेज की स्थापना की। कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों को उद्योगपति अशोक सोमाणी, एडवोकेट विशाल सोमाणी, राधे सोमाणी, आईडी बंसल, डॉ. सीराम सिंगला, जगदीश माहेश्वरी, प्रसून माहेश्वरी, धर्मेन्द्र खटाणा, ब्लॉक समिति बावल के चेयरमैन विक्रम सिंह ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर पूर्व पार्षद रामजीलाल सैनी, कैलाश सैनी, जरनलिस्ट एसोसिएशन हरियाणा के अध्यक्ष संजय राठी, संजय आर्य, एडवोकेट नितेश, अग्रवाल, एडवोकेट प्रेमपाल अनपढ, जसवंत सिंह, अजय सपड़ा, अशोक शर्मा, राकेश मुदगिल, स्वामी सुखानंद, देवेन्द्र तिवारी, विनय, कॉलेज स्टाफ व विद्यार्थियों सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।

 

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): दिनोंदिन बढ़ते पेट्रोल-डीज़ल के दामों ने भले ही आम आदमी(आम नागरिक) की नींद उड़ा रखी हो लेकिन सरकार के कान तले जूं रेंगती नजर नहीं आ रही है और फिलहाल इन बढ़ते दामों से राहत मिलने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं. आज सरकार ने लगातार 11 वें दिन भी पेट्रोल-डीज़ल के दामों में बढ़ोतरी की. दिल्ली में पेट्रोल की वर्तमान कीमत 76.87 प्रति लीटर है जबकि डीज़ल की कीमत 68.08 रूपए प्रति लीटर है. ऐसे में आम आदमी कैसे गुज़ारा करे उसे समझ नहीं आ रहा है. वहीँ सरकार की तरफ से साफतौर पर ये इशारा कर दिया गया है कि पेट्रोल डीज़ल के दाम कम नहीं किये जा सकते.

इंडियन एक्सप्रेस की मानें तो इस मामले में जब केन्द्रीय मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता नितिन गडकरी से पूछा तो उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि पेट्रोल डीज़ल के दाम कम नहीं किये जा सकते क्योंकि ये सीधे-सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ मामला है. ये न टाली जा सकने वाली स्थिति है. अगर हम महंगे दामों पर पेट्रोल डीज़ल खरीदते हैं और फिर उसे सस्ता बेचते हैं तो उसपर हमें सब्सिडी देनी पड़ेगी जिसका सीधा असर सरकार की समाज कल्याण की योजनाओं पर पड़ेगा.

गडकरी ने साफ़ कहा कि पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा कीमतों पर सब्सिडी देने के लिए हमें सिंचाई योजनाओं, फ्री एलपीजी देने वाली उज्ज्वला योजना, ग्रामीण विद्युतीकरण, लोन के लिए मुद्रा योजना जैसी कई योजनाओं को बंद करना पड़ेगा. गडकरी ने आगे कहा की हम 10 करोड़ परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना पर काम कर रहे हैं. फसल बीमा योजना पर काम चल रहा है. हमारे पास साधन सीमित हैं.अगर आइसे में हमने पेट्रोल-डीज़ल के दामों पर सब्सिडी देनी पड़ी तो सब गड़बड़ हो जाएगा.

वहीं जब नितिन गडकरी से सवाल किया गया कि पेट्रोलियम उत्पादों में टैक्स कटौती करके भी जनता को राहत दी जा सकती है तो उन्होंने कहा कि ये हमारी अर्थव्यवस्था की नीव है. अगर इस बारे में फैसला लिया जाता है तो ये हमारे वित्त मंत्री तय करेंगे. वैकल्पिक इंधन के इस्तेमाल के सवाल पर गड़करी ने कहा कि सरकार मेथनॉल, इथेनॉल, बायो-डीज़ल, इ-वाहन जैसी योजनाओं पर तेज़ी से काम कर रही है. साथ ही ये सारे विकल्प सस्ते और प्रदूषण-मुक्त भी हैं.

देश में बढती तेल कीमतों पर बोलते हुए गड़करी ने कहा कि हम अपनी जरुरत का केवल 30 फीसदी ही खनन कर पाते हैं जबकि बाकी का 70 फीसदी हमें आयात करना पड़ता है. इसलिए हम आयात कीमतों को कम करने में लगे हुए हैं. हम दुनिया में कई जगह तेल क्षेत्रों के अधिग्रहण योजना पर भी काम कर रहे हैं. जैसा हमने अभी रूस के साथ किया है. लेकिन स्वाभाविक बात है कि 70 फीसदी आयात की जाने वाली वस्तु की पूर्ति करने के लिए पैसे नहीं हैं.

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली):  आतंक के मुद्दे पर पाकिस्तान पूरे विश्व में अकेला पड़ चुका चूका है, जिसके कारण न केवल उसे चारों तरफ किरकिरी झेलनी पड़ती है बल्कि अपने गृह पाकिस्तान में भी कई ऐसी वादातें होती हैं जिनके कारन जानो-माल का नुक्सान होता है. लेकिन अब तक पाकिस्तान केवल इस कारन अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बाख जाता था क्योंकि उसका घनिष्ठ मित्र चीन[पूरी दुनिया के आगे पाकिस्तान को बचाने के लिए खडा हो जाता है. लेकिन अब आतंक के मुद्दे पर चौतरफा घिरे पाकिस्तान को एक बड़ा झटका लगा है. सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि पाकिस्तान को बचाने वाले चीन ने भी अब अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं.

दरअसल चीन ने पाकिस्तान को सलाह दी है कि वो मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफ़िज़ सईद को पाकिस्तान के बाहर कहीं भेज दे. क्योंकि हाफ़िज़ सईद के कारण पाकिस्तान की पूरे विश्व में किरकिरी हो रही है. सूत्रों की मानें तो ये सलाह खुद चीन के राष्ट्रपति सही-जिन-पिंग ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अब्बासी को दी है. जिन पिंग ने पिछले महीने बोआओ फोरम फॉर एशिया सम्मेलन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी से करीब 35 मिनट मुलाकात की जिसमे उन्होंने कम से कम 10 बार पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से कहा की वो सईद को पश्चिम एशियाई देशों में अपनी बाकी की जिंदगी जीने के लिए अनुमति दें.

"द हिन्दू" की मानें तो  चीन ने पाकिस्तान पर ये दवाब बनाया है कि वो सईद की चमक-दमक और दिमागी सोच से दुनिया को दूर रखे. वहीँ रिपोर्ट के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति की इस सलाह के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर अपनी टीम से कानूनी सलाह मांगी है. हालांकि इस मुद्दे का अभी तक कोई समाधान नहीं निकला जा सका है और ऐसा माना जा रहा है कि मौजूदा सरकार में इसका कोई समाधान हो भी नहीं पायेगा क्योंकि एक तो पूरे देश में ये चुनावी मुद्दा बन जाएगा साथ ही पाकिस्तान की मौजूदा सरकार का कार्यकाल इस साल 31 मई को पूरा हो रहा है जबकि अगली सरकार के गठन के लिए चुनाव जुलाई के अंत तक होंगे.

वहीँ जमात-उद-दावा ने पाकिस्तान पर अमेरिका और भारत के दवाब में आकर सईद के खिलाफ कार्यवाही करने का आरोप लगाया है. लेकिन संगठन प्रमुख हाफ़िज़ सईद ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया है कि पाकिस्तान चीन के दव्वाब में आकर उसे देश से बाहर भेजने की तैयारी कर रहा है. हालांकि उसने इतना तो माना कि चीन इस मुद्दे पर सुपर-रोले तो अदा करेगा लेकिन वो उसके साथ इस तरह का व्यवहार करेगा इसपर उसे संदेह है.

गौरतलब है कि सयुंक्त राष्ट्र, अमेरिका और भारत ने हाफ़िज़ सईद को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर राका है और उसके सर पर 50 लाख डॉलर का इनाम है. हालांकि  वैश्विक दवाब के बाद पाकिस्तान ने उसे घर में नजरबंद रखा लेकिन पाकिस्तान में ही बढ़ते दवाब के बाद उसे वहां की सरकार ने रिहा कर दिया. लेकिन अब जब चीन ने इस आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को लताड़ा है और हाफ़िज़ सईद को पाकिस्तान से निकलने को कहा है तो ये पाकिस्तान के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है.

माना जा रहा है कि चीन के इसकदम का असर पूरे पाकिस्तान पर दिखेगा. ऐसे समय में जब पूरा विश्व पाकिस्तान से किनारा कर चूका है उस समय चीन ही एकमात्र उसका दोस्त बचा हुआ था. लेकिन अब उसने भी पाकिस्तान से किनारा कर लिया है तो पाकिस्तान के लिए ये एक बुरी खबर है. माना जा रहा है कि चीन का ये कदम प्रधानमंत्री के पिछले चीन दौरे में हुए वार्तालाप के बाद उठाया गया है. इसे भारत की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है. जानकारों की मानें तो हाफ़िज़ सईद के दिन अब लद चुके हैं और अब उसे अपनी सलामती की दुआ मनानी चाहिए, क्योंकि उसके पाप का घड़ा अब भर चुका है. अबन तो वह पाकिस्तान के काम का रह गया है और अमेरिका और भारत उसके पीछे हाथ धोकर पड़े हुए हैं. ऐसे में चीन की पाकिस्तान को दो-टूक अपने आप में बहुत कुछ कहती है. जानकारों की मानें तो चीन के इस कदम के बाद भारत का मंसूबा हाफ़िज़ सईद को भारत लाकर उसे मुंबई हमलों का दोषी करार देते हुए सज़ा देना है. अब वाकई ऐसा हो पता है या नहीं ये तो देखने वाली बात होगी लेकिन इतना तय है कि सईद के बुरे दिनों की शुरुआत हो चुकी है और अब वो किस अंजाम तक पहुँचती है ये देखने वाली बात होगी.....

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली):   तकरीबन 10 साल में पूरा हुआ किशनगंगा हाइड्रो प्रोजेक्ट भारत और पाकिस्तान के बीच काफी वक्त से मतभेद का कारण बना हुआ है.  पर‍ियोजना के उद्घाटन के बाद पाकिस्‍तान ने वर्ल्‍ड बैंक से श‍िकायत की थी. लेकिन ताज़ा खबर ये है कि इस मामले में पाकिस्तान को वर्ल्ड बैंक से तगड़ा झटका लगा है. जहाँ पाकिस्तान ने 1960 के सिंधु जल समझौते का हवाला देते हुए भारत पर इसके उल्लंघन का आरोप लगाया था और विश्व बैंक से इस प्रोजेक्ट पर निगरानी रखने को कहा था. साथ ही ये अपील भी  की थी कि वर्ल्‍ड बैंक इस प्रोजेक्‍ट में गारंटर की भूमिका निभाए. हालांकि इस पर वर्ल्‍ड बैंक, पाकिस्‍तान और भारत के अध‍िकारियों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी.वहीँ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मई को किशनगंगा हाइड्रो प्रोजेक्ट का उद्घाटन कर द‍िया है. 

दरअसल 330 मेगावॉट क्षमता वाली किशनगंगा परियोजना नियंत्रण रेखा से महज दस किलोमीटर की दूरी पर है. जहां यह परियोजना स्थित है वह इलाका साल भर में छह महीनों के लिए राज्य के बाकी हिस्सों से कटा रहता है. नीलम नदी, जिसका एक नाम किशनगंगा भी है पर बने इस परियोजना की शुरुआत साल 2007 में हुई थी. इसके 3 साल बाद ही पाकिस्तान ने यह मामला हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उठाया, जहां तीन साल के लिए इस परियोजना पर रोक लगा दी गई. साल 2013 में, कोर्ट ने फैसला दिया कि किशनगंगा प्रॉजेक्ट सिंधु जल समझौते के अनुरूप है और भारत ऊर्जा उत्पादन के लिए इसके पानी को डाइवर्ट कर सकता है.

ऐसे में किशनगंगा प्रोजेक्ट भारत के लिए सिर्फ एक बांध नहीं है और इसकी सुरक्षा करना भारत के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन यह आसान नहीं है. कई सुरक्षा एजेंसियों ने इस परियोजना पर आतंकवादी हमले की आशंका जताई है. घुसपैठ की वारदातों और खुफिया रिपोर्ट के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है. यह प्रोजेक्‍ट दो घाटियों के बीच 379 हेक्टर में फैला हुआ है और इसके लिए 23.24 किलोमीटर सुरंग खोदी गई है .

वहीँ इंडियन एक्‍सप्रेस की मानें तो पाकिस्‍तान द्वारा मोर्टार हमले और आतंकियों दोनों से इस बांध को खतरा है, हालांकि ज्‍यादा खतरा आतंकियों से है. नवंबर 2016 में जब उड़ी हमले और फि‍र भारत की जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्‍तान लगातार सीजफायर का उल्‍लंघन कर रहा था, तब कई मोर्टार यहां आकर गिरे थे. उस दौरान सभी कर्मचारी भागकर इसके टनल में चले गए थे, जो उस समय खाली था और पानी से भरा नहीं गया था.  लेकिन पर‍ियोजना पर काम कर रहे एक अध‍िकारी के अनुसार यह टनल 2014 में बन चुका था. यह टनल गुरेज स्‍थ‍ित डैम से पानी बांदीपोरा स्‍थ‍ित पावर स्‍टेशन तक ले जाने का काम आता है. उस दौरान कई कर्मचारियों अलावा गांववाले भी सुरक्षा के लिए इस टनल में आ गए थे. उनकी मदद के लिए सेना को बुलाया गया था. हालांकि ऐसी घटना अब तक सिर्फ एक बार हुई है. 

वहीं अब इस डैम की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. इसकी सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) कर रहा है. इसके अलावा सेना का एक कैंप भी यहां मौजूद है. इंडियन एक्‍सप्रेस के अनुसार एक अध‍िकारी ने बताया कि भारत ने अगर इस संवेदनशील जगह पर डैम बनाने का निर्णय लिया है तो उसे पूरा विश्‍वास है कि वह इसकी सुरक्षा भी कर सकता है. हालांकि इस डैम को ज्‍यादा बड़ा खतरा किसी आतंकी हमले से है. जानकारों की मानें तो पाकिस्‍तान इस डैम को इसलिए भी नुकसान नहीं पहुंचाना चाहेगा क्‍योंकि इससे सबसे ज्‍यादा नुकसान उसे ही होगा. क्‍योंकि बांध के टूटने पर सबसे ज्‍यादा खतरा एलओसी के पास पाकिस्‍तान अध‍िकृत कश्‍मीर के इलाकों को है. किशनगंगा नदी के एलओसी पार करते ही आबादी वाले गांव शुरू हो जाते हैं. पाकिस्‍तान में इसे तावबल कहा जाता है. वहीं भारत के हिस्‍से में स्‍थित 27 गांवों में से बस 6 गांव ही डैम के बाद नीचे किशनगंगा नदी के किनारे स्‍थित हैं.

एक और वजह जिसके मुताबिक डैम को पाकिस्‍तान की बमबारी से इसलिए भी ज्‍यादा खतरा नहीं है, क्‍योंकि डैम पहाड़ों के बीच स्‍थ‍ित है और पाकिस्‍तान की बमबारी की सीधे पहुंच में नहीं आता है. साथ बांध काफी मजबूत है और इसका इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर बमबारी झेलने के लिए काबिल है. हालांकि सबसे ज्‍यादा खतरा आतंकियों द्वारा प्‍लान अटैक से है. लेकिन आतंकियों के हमले में भी पाकिस्‍तान की तरफ बाढ़ का खतरा बना हुआ है, हालांकि यह हमले के स्‍तर पर निर्भर करेगा. डैम को हमले से कितना नुकसान पहुंचा है, उस न‍िर्भर करेगा कि पानी का फ्लो कैसा रहेगा. साथ ही गुरेज में रह रहे लोग भी इस डैम की सुरक्षा में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. यहां रह रहे ज्‍यादातर लोगों को प्रो इंड‍िया माना जाता है, ऐसे में वे सेना की मदद भी करते हैं. वहीँ टनल की सुरक्षा के बारे में अगर बात करें तो यह पानी से भरा रहता है, ऐसे में यहां तक पहुंचना लगभग नामुमकिन है और इस पर हमला करना काफी मुश्‍किल है.

गौरतलब है कि किशनगंगा प्रोजेक्‍ट के उद्घाटन के बाद पाकिस्‍तान एकबार फिर विश्व बैंक के पास पहुंच गया था. जहाँ उसने भारत पर 1960 के सिंधु जल समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए प्रोजेक्‍ट पर विश्व बैंक से निगरानी रखने को कहा है और साथ ही अपील की है कि वर्ल्‍ड बैंक इस प्रोजेक्‍ट में गारंटर की भूमिका निभाए. 

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): आरक्षण इस देश में एक ऐसा विषय हो गया है जिसे हर राजनीतिक दल अपने हिसाब से भुनाने में लगा हुआ है. हरेक दल अपने आप को दलितों, पिछड़ों और जनजातियों का हितेषी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा... लेकिन ऐसे में समाज के कई गैर राजनीतिक संगठन इसके विरोध में भी उतर रहे हैं. जो आरक्षण को ख़त्म करने की मांग कर रहे हैं या फिर आरक्षण को जाती आधारित न करके बल्कि गरीबी पर आधारित करने की मांग कर रहे हैं. ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब माँ कालका धर्मार्थ ट्रस्ट की अध्यक्षा और जीवनधारा संघ (एनजीओ) की राष्ट्रिय संरक्षिका सुधा भारद्वाज (माँ) ने आरक्षण के विरुद्ध आवाज़ उठाई.

मौका सुधा भारद्वाज के जन्मदिन का था और उसे मनाने के लिए पूरे देश से उनके एनजीओ के पदाधिकारी भी आये हुए थे. ऐसे में आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क भी उनके बुलावे पर वहां पहुंचा और उनसे बातचीत की. सुधा भारद्वाज ने बातचीत में बताया कि आरक्षण एक ऐसा ज़हर है जो समस्त हिन्दू समाज को बांटने का काम कर रहा है. सारे हिन्दू समाज को जातियों में बांटकर राजनीतिक पार्टियाँ अपना उल्लू सीधा कर रही हैं. हर कोई अपने आप को दलितों, पिछड़ों और देश की कुछ जनजातियों का सबसे बड़ा पेरोकार और हितेषी बताने में तुला हुआ है. लेकिन वास्तव में ये कुछ नहीं बल्कि समाज को बांटने का काम हो रहा है जिसे हर एक को समझने की जरुरत है.

सुधा भारद्वाज ने आगे कहा कि हमें आज़ाद हुए 70 साल हो चुके हैं. आजतक दलितों को उनका हक क्यों नहीं मिल पाया., और कितना समय लगेगा उनका हक उन्हें मिलने में. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि आरक्षण जिस गरीब को मिलना चाहिए वहां तक तो पहुँच ही नहीं पा रहा है. केवल समाज का एक चालाक तबका उसका फायदा उठा रहा है और बाकी लोग केवल उनका मुंह ताकते रह जा रहे हैं. लेकिन अब वक़्त आ गया है जब आरक्षण जाती आधारित नहीं बल्कि गरीबी पर आधारित होना चाहिए. समाज में केवल आरक्षण उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जो इसके वास्तव में हकदार हों.

सुधा भारद्वाज ने आगे कहा कि वो इस मुहीम को पूरे देश में लेकर जायेंगी. अभी उनका संगठन तकरीबन 12 राज्यों में समाजसेवा का काम कर रहा है. लेकिन अब वो आरक्षण के मुद्दे  को लेकर पूरे देश में जायेंगीं और जनजागृति का काम करेंगीं. वहीँ जब उनसे उनकी राजनीतिक मंशा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने फिलहाल राजनीति में जाने से मना किया, लेकिन इतना कहा कि आने वाले चुनावों में वो और उनका संगठन केवल उसी दल का समर्थन करेगा जो सब जातियों के हितों की बात करेगा और आरक्षण को जाती आधारित न करके गरीबी आधारित करने की वकालत करेगा.

वहीँ जब उनसे दलित विरोधी होने क सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ़ कहा कि वो सब जातियों का सम्मान करती हैं. उनके लिए बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर भी उतने ही सम्माननीय हैं जितने की पंडित मदन मोहन मालवीय. इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि जब बाबा साहेब ने आरक्षण की व्यवस्था की थी तो साथ ही कुछ समय के पश्चात उसकी समीक्षा की बात भी कही थी. लेकिन आज हो क्या रहा है. समाज में केवल कुछ चालाक लोग उसका फायदा उठा रहे हैं जबकि जो उस आरक्षण का वाकई हक़दार है वो उससे महरूम है. ऐसे में क्या कसूर है उस ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समुदाय के बच्चे का जो इस आरक्षण के कारण दूसरों से बढ़िया नंबर लाने के बावजूद भी न तो कहीं दाखिला ले पा रहा है और न कहीं नौकरी. आखिर ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समाज के लोगों का क्या कसूर है जो ये सजा उनको दी जा रही है. और सरकार हमें ये बताये कि और कितने समय के बाद समाज के इन वर्गों को उनका हक मिलेगा? और कितने समय तक समाज में ऐसी व्यवस्था लागू रहेगी? अब वक़्त आ गया है जब समाज के सब वर्गों को इसके खिलाफ आवाज़ उठानी होगी. मैं इस मुहीम को पूरे देश में लाकर जाउंगी. हम सबको जगाने का काम करेंगे और अगर जरुरत पड़ी तो सब राजनीतिक पार्टियों को आने वाले चुनावों में सबक भी सिखायेंगे.

इस मौके पर जीवनधारा एनजीओ के देश के काफी प्रदेशों के पदाधिकारी भी सम्मिलित हुए जिनमें जीवन धारा संघ के राष्ट्रीय अध्य्क्ष गोविंद पाण्डेय, गौ रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री योगेश भाटी, राष्ट्रीय संगठन मंत्री रवि मित्तल ,राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री प्रभुदयाल शर्मा , राष्ट्रीय संयोजिका श्री मति लक्ष्मी ठाकुर, राष्ट्रीय महिला सहसचिव मीनाक्षी शुक्ला, मुम्बई से आरिफ अली, हिमाचल से बिमला उत्तर प्रदेश से अध्यक्ष  श्री अभय शुक्ला, दिल्ली से आशु शर्मा,  नोएडा से अध्यक्ष श्री राहुल सिंह  और 50 से अधिक सदस्य के नाम शामिल हैं.

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): कर्नाटक में बीजेपी की गिरने के बाद कांग्रेस के राष्ट्रिय अध्यक्ष भी अपनी ख़ुशी जताने सामने आये. इस मौके पर उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी, आर एस एस और बीजेपी के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह पर ज़ोरदार हमला बोला. राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश और देश के लोगों और संवैधानिक संस्थाओं से ऊपर नहीं हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रवैया लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि तानाशाही वाला है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी को अहंकारी बताते हुए कहा कि भारत में ताकत ही सब कुछ नहीं है, बल्कि लोगों की इच्छाशक्ति ही सबकुछ है. हमने जनता को इसके बारे में बताया और बीजेपी के अहंकार की सीमा भी गिनाई. इस देश को कैसे चलाया जाना है इसकी एक सीमा है. जबकि प्रधानमंत्री का मॉडल लोकतांत्रिक नहीं, तानाशाही वाला है. साथ ही राहुल ने कहा कि देश की जनता ने टेलीविजन पर देखा कि किस तरह कर्नाटक विधानसभा में राष्ट्रगान बजने से पहले ही बीजेपी के विधायक उठकर चले गए. ये उनका स्वभाव है कि वे हिंदुस्तान के किसी भी संस्थान की इज्जत नहीं करते हैं. मुझे गर्व है कि कर्नाटक की जनता ने प्रधानमंत्री, बीजेपी के अध्यक्ष और हत्यारोपी अमित शाह को दिखा दिया कि वे लोकतंत्र को खरीद नहीं सकते हैं,  मुझे उम्मीद है कि बीजेपी और आरएसएस ने कर्नाटक से सबक सीखा होगा.

राहुल ने कर्नाटक में बीजेपी के ऊपर खरीद-फ़रोख्त का आरोप लगाते हुए कहा कि मीडिया के सामने खुलेआम बीजेपी ने कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों को खरीदने की कोशिश की. लेकिन उनकी एक न चली. वहीँ एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा कि विपक्ष अपने सहयोग से बीजेपी को हराएगा. देश भर में लगातार हमले हो रहे हैं, बीजेपी और आरएसएस को हम रोकेंगे, देश की जनता और कर्नाटक की जनता की रक्षा की. मैं कर्नाटक के लोगों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं. 

राहुल ने सीधे प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों की खरीद-फरोख्त को मंजूरी दी. प्रधानमंत्री कहते हैं कि वे भ्रष्टाचार से लड़ रहे हैं, लेकिन असल में वे खुद भ्रष्टाचार हैं. हमने फोन पर हुई बातचीत सार्वजनिक रूप से रखी है. वे लोग सोचते हैं कि देश की हर संस्था को झुका सकते हैं, और तबाह कर सकते हैं. एक के बाद एक वे जनादेश का अपमान कर रहे हैं.