उत्तर प्रदेश: सपा-बसपा को मात देने के लिए मोदी-शाह- योगी ने बनाई रणनीति, बड़ा सवाल : क्या मोदी फिर जीत पाएंगे उत्तर प्रदेश का किला..................!

24 Jul 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): कहते हैं जिसने देश पर राज करना हो तो उसे उत्तर प्रदेश पर पहले कब्ज़ा ज़माना पड़ता है, या यों कहें कि केंद्र की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर ही गुजरता है. लेकिन अभी हाल ही में जिस तरह से उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने जिस तरह से गोरखपुर और फूलपुर और फिर कैराना और नूरपुर हारा उसने बीजेपी के मिशन 2019 के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है. बीजेपी बच्क्फूत पर है और उसके विरोधी ये मानकर चल रहे हैं की आगामी लोकसभा चुनावों में भी सपा-बसपा का ये गठबंधन मोदी के विजय रथ को रोकने में कामयाब रहेगा. ऐसे में अगर कांग्रेस भी सपा-बसपा के साथ जुड़ गई तो बीजेपी के राहें और मुश्किल हो जायेंगी. इन्हीं सब चुनौतियों के मद्देनजर अब उत्तर प्रदेश की कमान स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्भाली है और वो अब एक ऐसी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं जिससे बीजेपी एक बार फिरसे 2019 में उत्तर प्रदेश के किले को फट करते हुए केंद्र की सत्ता पर काबिज़ हो. सूत्रों की मानें तो मोदी-अमित शाह-और योगी ने मिलकर ऐसी रणनीति तैयार की है जिससे अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा के मंसूबों पर पानी फेरा जा सके. मोदी-शाह-योगी जिन पहलुओं पर काम कर रहे हैं आइये उनपर डालते हैं एक नजर:-

 मोदी की रैलियों से बनाया जा रहा है बीजेपी के पक्ष में माहौल.....

सूत्रों की मानें तो बीजेपी उत्तर प्रदेश में मोदीमय माहौल बनाने में एक बार फिर से जुट गई है. जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है. चुनाव से एक साल पहले से ही मोदी एक के बाद एक ताबड़तोड़ रैलियां करने में जुटे हैं. इसी कड़ी में पिछले एक महीने के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सूबे में पांच रैलियों को सम्बोधित कर चुके हैं और आगे भी ये सिलसिला जारी रहने की उम्मीद जताई जा रही है. सूत्रों की मानें तो लोकसभा चुनवा से पहले उत्तर प्रदेश में प्रधानमन्त्री मोदी की लगभग 20 रैलियां कराने की योजना बनाई गई है. रैलियों की रूपरेखा कुछ इस तरह से तैयार की गई है जिसमे प्रत्येक रैली के जरिए 2 से 3 संसदीय क्षेत्रों वोटरों को कवर किया जा सके.जिससे फिर से एक बार चुनाव से पहले सूबे का माहौल मोदीमय हो जाए और चुनावों में इसका फायदा बीजेपी को मिल सके.

जल्द हो सकता है योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल......

सूत्रों की मानें तो 2019 के मद्देनजर उत्तर प्रदेश में जल्द मंत्रिमंडल में फेरबदल के साथ-साथ विस्तार भी हो सकता है. जिसमें उन चेहरों को तरजीह दी जा सकती जिन्होंने विभिन्न मुद्दों पर कई बार योगी के खिलाफ आवाज़ उठाई है. साथ ही मंत्रिमंडल कुछ दलित चेहरों को भी तरजीह दी जा सकती है जिससे सपा-बसपा के गठबंधन को हराया जा सके. दरअसल उत्तर प्रदेश में बीजेपी मायावती के सामने कुछ ऐसे दलित चेहरों को उतरना चाहती है जो मायावती के कद के हों. साथ ही दलित समुदाय से कुछ ऐसे युवाओं को भी आगे लाना चाह रही है जिनकी छवि दलितों के बीच अच्छी हो. ऐसे में उम्मीद ये जताई जा रही है कि ऐसे किसी दलित चेहरे को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है जो बेशक पहली बार चुनाव जीता हो लेकिन उसकी पकड़ जनता के बीच अच्छी हो.

कई ताक़तवर मंत्रियों को भी लड़वाया जा सकता है चुनाव.....

सपा-बसपा गठबंधन की चुनौती और मौजूदा सांसदों के खिलाफ विरोधी फैक्टर का मुकाबला करने के लिए बीजेपी यूपी सरकार के अपने कई ताकतवर मंत्रियों को चुनाव लड़ा सकती है. इसके लिए बीजेपी राज्य के अपने सबसे प्रभावशाली मंत्रियों की सूची भी तैयार कर रही है, जिनकी चुनाव क्षेत्र में अच्छी पकड़ है. वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री सतीश महाना, एसपी शाही, दारा सिंह चौहान, एसपीएस बघेल और स्पीकर हृदय नारायण दीक्षित जैसे चेहरों को 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी उतार सकती है.

नए चेहरों पर भी लगाया जायेगा दांव...... 

बीजेपी हाई कमान ने चुनावों से काफी वक़्त पहले ही ये साफ संकेत दिए हैं कि वह 71 विजयी उम्मीदवारों में से 50 फीसदी को इस बार मौका नहीं देंगे जिसका मतलब ये हुआ कि इन सीटों पर नए उम्मीदवार नजर आयेंगे. ऐसे में पार्टी को जिताऊ उम्मीदवारों की जरूरत है जिससे राज्य में सीटों का गणित न गड़बड़ाए. सूत्रों की मानें तो इन सभी सीटों पर बीजेपी ऐसे कुछ नए चेहरों को मैदान में उतारेगी जो मोदी के लिए भविष्य की राजनीती करें और जनता के बीच उनकी छवि भी अच्छी हो. बीजेपी ये प्रयोग दिल्ली के मुन्सिपिअल इलेक्शन में भी कर चुकी है जहाँ उसे इसमें कामयाबी मिली थी. बीजेपी का इस बात पर भी फोकस है कि उम्मीदवार मजबूत हों और उनकी जीत पक्की हो. हालांकि अभी गोरखपुर सीट को लेकर बीजेपी बड़ी दुविधा में है. योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी को हार मिली है. ऐसे में मजबूत उम्मीदवारों को लेकर मंथन किया जा रहा है.

OBC समुदाय के गैर यादव वोट बैंक पर रहेगी ख़ास नजर......

सपा-बसपा के साथ आने से बीजेपी का समीकरण बिगड़ा है ये बात बीजेपी को भली-भाँती तरह पता है. पार्टी को ये मालूम है कि यादव समुदाय का वोट बैंक उसे हासिल नहीं हो पायेगा. जो यादव बीजेपी के साथ जुदा है वो हर हाल में उसके साथ ही रहेगा लेकिन सपा से यादव वोट बैंक को छीनना अभी मुमकिन नहीं है. ऐसे में बीजेपी अपनी जमीन को मजबूत करने के लिए गैर यादव ओबीसी मतों को साधने की कवायद में जुट गई है. गैर यादव वोट बैंक पर नजर डालें तो यहाँ बीजेपी खासकर कुर्मी समुदाय को अपने पक्ष में साधने के लिए जुट गई है. बीजेपी ने इसको लेकर बीजेपी ने खास प्लान बनाया है. उसी प्लान के चलते मोदी की यूपी में अभी तक जो रैलियां हुई हैं उनमें मिर्जापुर और शाहजहांपुर दोनों कुर्मी बहुल क्षेत्र है. सूत्रों की माने तो बीजेपी जल्द क=ही इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में पार्टी की कमान कुर्मी समाज के नेता को सौंप सकती है. इसके अलावा प्रजापति, मौर्य, लोध, पाल सहित गैर यादव ओबीसी पर बीजेपी का ख़ास धयान है और पार्टी उ=इन समुदायों को अपने साथ जोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है. पार्टी यादव समुदाय को उत्तर प्रदेश में कुछ इस तरह पेश कर रही है जैसे अखिलेश के राज़ में केवल यादवों का ही भला हुआ और बाकी ओ बी सी समुदाय की अखिलेश ने अनदेखी की.

ध्रुवीकरण की बिसात फिर दिखायेगी अपनी करामात ......

सपा-बसपा जातीय समीकरण के जरिए मोदी को मात देने की कोशिश में हैं. वहीं, बीजेपी 2014 की तर्ज पर हिंदुत्व की बिसात बिछाने में जुटी है. यूपी में बीजेपी उन सीटों पर खास नजर लगाए हुए हैं, जहां विपक्ष मुस्लिम उम्मीदवार उतारेगा. खासकर पश्चिम यूपी की सीटों पर नजर है, जहां आसानी से ध्रुवीकरण के जरिए चुनावी जंग फतह की जा सके.यानी मतलब साफ़ है कि जिस तरह बीजेपी ने पिछली बार किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकेट नहीं दिया था ठीक उसी तरह इस बार भी बीजेपी किसी भी मुस्लिम को टिकेट नहीं देगी.

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