उत्तर प्रदेश उप-चुनाव के बाद अमित शाह से मिले योगी, हार के कारणों पर हुआ मंथन, जल्द हो सकता है मंत्रिमंडल में फेरबदल........!

05 Jun 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): उत्तर प्रदेश के उप चुनावों में एक बार फिरसे मिली करारी हार के बाद कल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की.हालांकि पार्टी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तो नहीं आई लेकिन सूत्रों की मानें तो दोनों के बीच उत्तर प्रदेश के उप-चुनावों में मिली हार के विषय में चर्चा हुई. साथ ही विपक्ष की एकता से आने वाले लोकसभा चुनावों में कैसे निपटा जाए इसपर भी चर्चा हुई. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों की मानें तो पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने योगी से कैराना में मिली हार का कारण भी पूछा, और उन तमाम वजहों पर चर्चा की जो आने वाले वक़्त में बीजेपी के लिए चुनौती बन सकती हैं.

गौरतलब है कि बीजेपी को हालिया उप-चुनावों में कैराना लोकसभा सीट और नूरपुर विधानसभा सीट गवांनी पड़ी, जहाँ विपक्ष के सांझे उम्मीदवारों ने बीजेपी को बड़े अंतर से हरा दिया. पार्टी अध्यक्ष ने ये जानना चाहा की वो कौन सी वजहें रहीं जिनकी वजह से पार्टी वोटरों को अपनी तरफ आकर्षित करने में नाकाम रही. सूत्रों की मानें तो उत्तर परदेश के उप-चुनावों में बीजेपी की हार की मुख्य वजह दलितों और पिछड़ों के वोट बैंक का बीजेपी से पिछडकर वापिस बसपा के साथ जाना एक मुख्य वजह है.

इसी मुद्दे के मद्देनजर अब इस बात की सम्भावना जताई जा रही है कि उत्तर परदेश में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार या फिर फेरबदल देखने को मिल सकता है. सूत्रों की मानें तो योगी आदित्यनाथ जल्द ही अपने मंत्री मंडल में फेरबदल कर सकते हैं जिसमे कुछ नये दलित व पिछड़े वर्ग के चेहरों को तरजीह दी जा सकती है वहीँ कुछ लोग जो अपनी ही सरकार में योगी के खिलाफ झंडा बुलंद किये हुए हैं उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है. सूत्रों का कहना है कि पार्टी कुछ ऐसे दलित व पिछड़े वर्ग के चेहरों को तरजीह दे सकती है जिनकी छवि साफ़-सुथरी हो जो दलित और पिछड़ा वोट बैंक को अपने साथ मजबूती से बांधकर आगे ले जा सकें.

वहीँ अगर मंत्रिमंडल फेरबदल होता है तो सबकी नजरें ओम प्रकाश राजभर पर भी रहेंगी जिन्होंने योगी के खिलाफ पिछले काफी समय से मोर्चा खोल रखा है. राजभर के मुताबिक उत्तर प्रदेश में बीजेपी को मिल रही हार की मुख्य वजह खुद योगी आदित्यनाथ ही हैं क्योंकि बीजेपी ने चुनाव तो केशव प्रसाद मौर्य के नेत्रित्व में लड़ा लेकिन जब मुख्यमंत्री बनाने की बारी आई तो हाई-कमान ने योगी को मुख्यमंत्री बना दिया. जिससे पिछड़े वर्ग के लोगों को भारी रोष हुआ और उन्होंने बीजेपी को वोट देना बंद कर दिया.

वहीँ सूत्रों की मानें तो पार्टी हाई-कमान योगी के अबतक के काम से संतुष्ट है और उन्हें हटाने पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है. मंथन बस इस बात को लेकर चल रहा है विपक्ष की इस एकता से कैसे निपटा जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों में ऐसी क्या रणनीति बनाई जाए जिससे विपक्ष की इस एकता से निपटा जाए यही सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी के सामनेआकर खड़ी हुई है. 

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