योगी सरकार ने आंबेडकर के नाम में जोड़ा ‘रामजी’, अब कहलाएंगे डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर, बड़ा सवाल: किसके होंगे अम्बेडकर........!

29 Mar 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): उत्तर प्रदेश सरकार अब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम में "राम जी" का नाम जोड़ने जा रही है. यानि अब बाबा साहेब का नाम डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर हो जायेगा. दरअसल यह नया शब्द "रामजी" उनके पिता के नाम से लिया गया है. 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में जन्मे डॉ. आंबेडकर के पिता का नाम राम जी मालोजी सकपाल था. अब सरकार के नए आदेश के तहत उत्तर प्रदेश के राजकीय अभिलेखों में संविधान निर्माता बाबा साहेब का पूरा नाम लिखा जाएगा.

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने बुधवार(28 मार्च) को सभी विभागों को आदेश जारी किया है. जिसके तहत अब बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का पूरा नाम यानी डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर लिखा जायेगा. बताया जा रहा है कि यह फैसला राज्यपाल राम नाईक की पहल पर हुआ है. जनसत्ता की मानें तो सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव जितेंद्र कुमार ने बताया कि राज्यपाल राम नाईक ने शासन को संविधान की आठवीं अनुसूची की मूल प्रति भेजी थी, जिसमें डॉ. आंबेडकर ने हस्ताक्षर करते समय अपना पूरा नाम डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर लिखा था.

राज्यपाल ने कहा था कि डॉ. आंबेडकर का अधूरा और गलत नाम लिखा जा रहा है. लिहाजा उनके पिता के साथ पूरा नाम लिखा जाए, जो बाबा साहब ने विभिन्न जगहों पर अपने हस्ताक्षर में लिखे हैं. जिस पर सामान्य प्रशासन विभाग ने डॉ. आंबेडकर का पूरा नाम लिखने का आदेश जारी कर दिया. राज्यपाल राम नाईक ने पिछले साल कहा था कि किसी भी व्यक्ति का नाम उसी तरह लिखा जाना चाहिए, जिस प्रकार वह खुद लिखता हो. बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर महासभा के निदेशक डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल के मुताबिक राज्यपाल राम नाईक ने 2017 से डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम के साथ रामजी जोड़ने के लिए पहल की थी. उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित बाबा साहब पर बनी संस्थाओं के प्रमुखों को पत्र लिखकर सही नाम लिखे जाने की बात कही थी.

दरअसल संविधान के पन्ने में बाबा साहब का डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के नाम से हस्ताक्षर शामिल है. बाबासाहब डॉ. भीमराव आंबेडकर महासभा के निदेशक डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल कहते हैं कि इस कैंपेन को राज्यपाल राम नाईक ने दिसंबर 2017 में शुरू किया था. राम नाईक ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और महासभा को पत्र लिखकर आंबेडकर के नाम का सही उच्चारण और सही नाम लिखने के लिए ध्यान आकृष्ट कराया था. अब उत्तर प्रदेश सरकार ने ये फल करते हुए बाबा साहेब के नाम को उसी रूप में लिखने का फैसला किया है जिस तरह वो खुद लिखते थे. बता दें कि 14 अप्रैल को बाबा साहब की जयंती है. ऐसे में बीजेपी के इस कदम के मायने राजनीतिक पंडितों के मुताबिक दूरगामी होंगे. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पारित होने वाले इस आदेश के बाद बाबा साहेब के नाम पर राजनीती करने वालों की प्रतिक्रिया क्या आती है ये भी देखने वाली बात होगी. हालांकि ऐसे कदम को सकारात्मक रूप से ही देखना चाहिए लेकिन भारत जैसे इस देश में हर मुद्दे पर राजनीती न हो ऐसा तो सम्भव ही नहीं है. इसलिए आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क पूछ रहा है कि आखिर किसके होंगे आम्बेडकर? हालांकि बाबा साहेब सबके हैं उन्होंने अपने जीवनकाल में सबको बराबर नज़र से देखा. समाज में समानता  की बात की. लेकिन ये इस देश का दुर्भाग्य ही है की राजनीति ने उन्हें भी सबका न रखते हुए व्यक्ति विशेष और पार्टी विशेष के साथ जोड़ दिया. आज बाबा साहेब तो शायद बहुत दुखी होते... आप सभी को आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क परिवार की तरफ से बाबा साहेब आम्बेडकर की आने वाली जयंती की अग्रिम शुभकामनाएं..... बाबा साहेब हमें आप पर गर्व है... हमारी हर सांस आपका धन्यवाद करती है..... (इमेज सोर्स:यू ट्यूब)

 

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