यूपी उपचुनाव: मोदी-योगी पर भारी बुआ-बबुआ की जोड़ी, फूलपुर और गोरखपुर में भाजपा को चटाई धूल, 2019 में मोदी के खिलाफ बन सकता है महागठबंधन ......

14 Mar 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): उत्तर प्रदेश में उप-चुनाव के नतीजे जैसे ही आये बीजेपी के चेहरे से मुस्कान गायब हो गयी वहीँ विपक्ष ख़ुशी से फूला नहीं समा रहा है. अभी एक साल पहले ही प्रचंड बहुमत लेकर आई उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार अपनी दोनों लोकसभा सीटों को बचाने में नाकामयाब साबित हुई. जो सीटें उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में लाखों के अन्तेर से जीती थीं व्ही इस बार बहुत बड़े अंतर से हारने जा रहे हैं. नतीजों को गौर से देखें तो फूलपुर सीट पर सपा प्रत्याशी नागेंद्र सिंह पटेल ने बीजेपी प्रत्याशी कौशलेंद्र सिंह पटेल पर 59,613 वोटों से जीत हासिल की है. वहीँ गोरखपुर में सपा के प्रवीण निषाद भाजपा उम्मीदवार उपेंद्र दत्त शुक्ला से 22,954 वोटों से आगे चल रहे हैं यानी हार यहाँ भी तकरीबन तय ही है. एक और बात जो यहाँ गौर करने लायक है वो ये है कि फूलपुर से चुनाव जीतने के बाद समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी नागेंद्र सिंह ने बीएसपी प्रमुख मायवती को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, “बहनजी का बहुत आशीर्वाद था. एक विचारधारा की सभी पार्टियां एक हुईं और हमारी जीत हुई. इस जीत का श्रेय अखिलेश जी, मायावती जी और फूलपुर की जनता को देता हूं.”

यानी मतलब साफ़ है कि उत्तर प्रदेश की जनता ने इस उप-चुनाव में बीजेपी को सिरे से नकार दिया. जिस जनता ने उन्हें अभी एक साल पहले ही सर-माथे पर बिठाया था उसी जनता ने उन्हें फिर से ज़मीन पर ला दिया. वहीँ इस हार को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीतिक सौदेबाजी के कारण ऐसा हुआ. सीएम योगी ने बीजेपी की हार के चार मुख्य कारण बताए हैं.उन्होंने राजनीतिक सौदेबाजी, लोकल मुद्दे, कम मतदान और अति आत्मविश्वास को हार का मुख्य कारण बताया है. उन्होंने कहा, “राजनीतिक सौदेबाजी के कारण बीजेपी हार गई. हमें इसका तोड़ खोजना होग.। मुझे विश्वास है कि प्रदेश के अंदर जो बेमेल राजनीतिक सौदेबाजी होनी शुरू हुई है, जनता इसे जरूर समझेगी.”

वहीँ आगामी लोकसभा चुनाव के बारे में जब उनसे खतरे की घंटी के बारे में जब उनसे पूछा गया तो यूपी सीएम ने कहा, “देश के अंदर पीएम मोदी के नेतृत्व में जो भी कल्याण के कार्य हुए हैं, जो एक विश्वास जगा है, वह राष्ट्रीय मुद्दों में महत्वपूर्ण होगा. उपचुनाव में लोकल मुद्दे ज्यादा हावी होते हैं, लेकिन समीक्षा करना आवश्यक है, जिससे भविष्य में हम लोग बेहतर प्रदर्शन कर सकें.” इसके अलावा उन्होंने कहा कि अति आत्मविश्वास नहीं होना चाहिए और बीजेपी इसकी वजह से ही हारी है.इसके अलावा, यूपी सीएम ने कहा कि दोनों सीटों पर मतदान भी कम ही हुआ था. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के कई वोटर्स वोट देने नहीं गए थे. वहीं, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी कहा है कि इस हार का विश्लेषण करना जरूरी है. साथ ही, उन्होंने समाजवादी पार्टी की जीत पर हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें ऐसी उम्मीद नहीं थी कि इतनी बड़ी संख्या में बीएसपी के वोटर्स सपा को वोट देंगे.

बहरहाल इस चुनाव ने हतोत्साहित पड़े विपक्ष को एक संजीवनी दे दी है. उत्तर प्रदेश में एसपी-बीएसपी का एक नया गठबंधन देखने को मिला और सूत्रों की मानें तो ये गठबंधन 2019 में भी बरकरार रहे इसके लिए कवायद अभी से शुरू हो गयी है. अगर भविष्य में भी ये गठबंधन बरकरार रहता है तो बीजेपी के लिए निश्चित तौर पर ये खतरे की घंटी है. वहीँ बीजेपी के सामने एक और चुनौती है जिसका सामना उन्हें करना है. उन्हें इस हार पर आत्मचिंतन करना होगा. साथ ही ये भी देखना होगा की कहीं अति-आत्मविश्वास के साथ-साथ पार्टी के नेताओं में घमंड तो नहीं आ गया क्योंकि चुनाव से पहले जब भी केशव प्रसाद मौर्य और योगी आदित्यनाथ से पूछा गया तो उन्होंने इस लाखों वोटों से ये चुनाव जीतने की बात कही थी लेकिन नतीजे इसके एकदम उल्ट आये. जिसपर बीजेपी को निश्चित तौर पर सोचना होगा साथ ही उनके एक साल के करी को जमीन पर भी दिखाना होगा ताकि लोगों को लगे की वाकई काम हो रहा है. क्योंकि अक्सर विपक्ष बीजेपी पर जनता को बरगलाने और जुमलों की सरकार कहता है.

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