उत्तर प्रदेश: करीब एक साल बाद सामने आया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विज़न उत्तर प्रदेश, राज्य को दिया विकास का गुजरात मॉडल.....

23 Feb 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): योगी आदित्यनाथ जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे तो उनके विरोधियों ने ये प्रचार शुरू किया कि अब उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय का रहना मिउश्किल हो जाएगा. वहीँ योगी ने चुपचाप अपना काम करते हुए सबका साथ, सबका विकास की बात की. खैर अब योगी को कमान संभाले हुए  एक साल पूरा होने जा रहा है. लेकिन एक साल तक योगी विपक्षियों के निशाने पर रहे कि योगी सरकार कुछ काम नहीं कर रही और योगी महज़ पिछली सरकार की फ़ाइल और घपले-घोटालों में ही उलझी रही है. लेकिन अब योगी ने एक साल पूरा होने से पहले गुजरात मॉडल की तर्ज़ पर उत्तर प्रदेश का अपना पहला इन्वेस्टर सबमिट आयोजित करते हुए राज्य के लिए अपना विज़न प्रस्तुत किया है.

योगी ने इस सबमिट के लिए देश और दुनिया के बड़े करिबरियों को आने का न्योता दिया. जिसे सबने हाथों-हाथ लेते हुए न सिर्फ सबमिट में शिरकत की बल्कि उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी-बड़ी इन्वेस्टमेंट की घोषणा भी की. सबमिट में शामिल हुए देश के बड़े उद्योगपतियों पर नजर डालें तो बिडला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिडला के अलावा रिलायंस समूह के मुकेश अम्बानी और अदानी जैसे देश के कई दिग्गजों ने भी इस सबमिट में शिरकत करते हुए उत्तर प्रदेश में आने वाले वर्षों में काफी बड़े निवेश की घोषणा करते हुए रोज़गार उपलब्ध करने की भी घोषणा की. बिड़ला, रिलायंस और अडानी जैसे समूहों के प्रमुखों ने एक बात साफ शब्दों में कही कि वह उत्तर प्रदेश के लिए बड़े निवेश का ऐलान इसलिए कर रहे हैं क्योंकि बिना उत्तर प्रदेश को आर्थिक गतिविधियों के केन्द्र में रखे भारत को विश्व स्तर पर आर्थिक शक्ति के तौर पर नहीं खड़ा किया जा सकता है.

इस मौके पर देश के बड़े उद्योगपतियों ने ये बात साफ़ की कि चीन को आर्थिक शक्ति बनाने में उसके कुछ प्रोविंसेस की अहम भूमिका रही है. देश की जीडीपी में इन राज्यों का सर्वाधिक योगदान भी है. खास बात यह है कि आर्थिक आंकड़ों को देखकर साफ है कि ये प्रोविंस चीन की सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं और इस घनी आबादी के सहारे ही चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में सफल हुआ है. इसी तर्ज़ पर भारत को भी अगर आगे ले जाना है तो उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाना ही होगा. 

गुजरात मॉडल से  उत्तर प्रदेश भी बनेगा कारोबार में देश का अग्रणी राज्य 

उत्तर प्रदेश में इवेस्टर समिट के लिए सजे मंच से एक के बाद एक शख्सियत और संभावित निवेशकों ने 2003 का वह मंजर याद दिलाया जब गुजरात की कमान संभालने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात की नींव रखी. लखनऊ के मंच पर दावा किया गया कि वायब्रेंट गुजरात समिट ने गुजरात में बड़े निवेश का रास्ता खोलते हुए गुजरात को कारोबार में देश का अग्रणी राज्य बना दिया. लिहाजा इसी तर्ज पर चलते हुए अब उत्तर प्रदेश को देश का अहम वाणिज्यिक क्षेत्र बनाया जाएगा. भारत में जनसंख्या के हिसाब से सर्वाधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश है. लिहाजा भारत के लिए चीन जैसी अर्थव्यवस्था को पकड़ने और उसे पछाड़ने के लिए जरूरी है कि भारत में भी आर्थिक विकास के केन्द्र में उत्तर प्रदेश को रखा जाए.

इन कंपनियों ने किया यूपी को इंडस्ट्रियल हब बनाने का ऐलान......

यूपी इंवेस्टर्स समिट के मंच से बोलते हुए देश के बड़े उद्योगपतियों ने अगले कुछ वर्षों में हजारों करोड़ के निवेश के साथ-साथ राज्य में लाखों नए रोजगार पैदा करने का दावा किया है. इनमें यदि राज्य के सबसे बड़े निवेशक आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों में 25,000 करोड़ रुपये का निवेश का दावा किया तो देश के सबसे बड़े कारोबारी मुकेश अंबानी ने तीन साल में 10,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एक लाख से अधिक नौकरियां देने का दावा किया. वहीं समिट में शिरकत कर रहे अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी ने अगले कुछ वर्षों के दौरान राज्य में अपनी कंपनियों के विस्तार के लिए कुल 45,000 करोड़ रुपये के निवेश का दावा किया है.

इनके अलावा कई क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों ने उत्तर प्रदेश के इवेस्टर समिट के दौरान राज्य में बड़े निवेश का ऐलान किया है. गौरतलब है कि महज डेयरी सेक्टर में नीदरलैंड समेत यूरोप की कंपनियों ने लगभग 500 समझौते करते हुए हजारों करोड़ के निवेश का खाका पेश किया है.

बहरहाल योगी ने अपना विज़न उत्तर प्रदेश पेश कर दिया है. अब देखना यह है कि क्या उत्तर प्रदेश का यह इंवेस्टर समिट भी वाइब्रेंट गुजरात की तरह राज्य की आर्थिक तस्वीर को बदलने में कामयाब होता है? या फिर दूसरे राज्यों के होने वाले इन्वेस्टर सबमिट की तरह फेल ही साबित होता है. क्योंकि ज्यादातर राज्य सरकारें इन्वेस्टर्स सबमिट तो करती हैं, खूब खर्चा कर इसमें लाखों करोड़ों के एम्ओयू  भी साइन होते हैं लेकिन हकीकत की ज़मीन पर कुछ नहीं दिखता. इतना ही नहीं कई जगह तो ऐसे उदहारण भी देखने को आये हैं जहां पर इन्वेस्टर सबमिट को आयोजित करने में जितना खर्चा राज्य सरकार ने वहन किया ऊनि भी इन्वेस्टमेंट नहीं आई. अब उत्तर प्रदेश में गुजरात मॉडल को कितनी सफलता मिलती है ये तो आने वाला वक़्त ही बतायेगा. क्या वाकई चीन की बराबरी करने के लिए उत्तर प्रदेश अहम भूमिका अदा करेगा इसका इंतजार रहेगा.

 

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