आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में रविवार को एक बस खाई में गिर गई है, जिसमें 45 लोग की मौत हो गई. ये हादसा पौड़ी-धूमाकोट नैनीडांडा ब्लॉक में पिपली-भौन मोटर मार्ग पर हुआ है.  प्राप्त जानकारी के अनुसार बस भौन से रामनगर जा रही थी. हाडा ग्वीन पुल के पास हुआ. हालांकि हादसा किस वजह से हुआ इसकी जाकारी अभी तक प्राप्त नहीं हुई है.भौन से करीब 15 किलोमीटर आगे हादसा हुआ है.बस का नंबर यू के12 सी/0159 है.

 प्रशासन की टीम मौके पर रवाना हो गई है. लोगों की मानें तो बस ओवरलोड भी थी जहाँ बस में केवल 28 लोगों के बैठने की क्षमता थी. लेकिन बस में तकरीबन 60 सवारियां बैठी हुई थीं. अभी फिलहाल घायलों को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है. जिनमें कुछ लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है......हादसा किस वजह से हुआ फिलहाल अभी इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है.

 

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): दिल्ली में बुराड़ी के संत नगर में रविवार सुबह एक घर से संदिग्ध स्थिति में 11 शव मिलने से हड़कंप मच गया है. सभी शव रस्सी से लटके मिले हैं. मृतकों में सात महिलाएं और चार पुरुष शामिल हैं. इनकी मौत कैसे हुई इसके बारे में अभी साफ-साफ कुछ पता नहीं चल पाया है, लेकिन मौके पर पुलिस पहुंच गई है और मामले की छानबीन की जा रही है. बताया जा रहा है कि कुछ लोगों के हाथ पैर बंधे हुए हैं. कुछ लोगों की आंखों पर पट्टी भी बंधी हुई थी.

पुलिस ने बताया कि इनमें 10 शव जाल के फंदे में लटके मिले जबकि एक बुजुर्ग महिला का शव फर्स्ट फ्लोर से बरामद किया गया. इस तरह से 11 लोगों का शव एक साथ पाया जाना हैरत की बात है. पुलिस का कहना है कि सभी एंगल से मामले की जांच की जा रही है ताकि इसके पीछे की वजहों को सामने लाया जा सके. हालांकि पुलिस शुरुआती तौर पर इसे खुदकुशी का मामला मान रही है. पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है. एक ही घर से 11 शव बरामद होने से इलाके में हड़कंप मच गया है. ये सभी शव बुराड़ी के संत नगर में गली नंबर 24 में गुरुद्वारे के पास स्थित एक घर से बरामद किए गए हैं. जिस घर से शव बरामद किए गए हैं, उसे दो मंजिला बताया जा रहा है. पुलिस ने इस मामले में हत्या या आत्महत्या की आशंका से इनकार नहीं किया है.

पुलिस ने बताया कि यह परिवार इस इलाके में पिछले 22-23 सालों से रह रहा था. परिवार में दूध और प्लाईवुड की दुकान है. साथ में एक किराने की एक दुकान भी थी. सुबह-सुबह इस तरह की खबर मिलते ही इलाके के लोग घटनास्थल पर एकत्रित हो गए. लोगों में घटना को लेकर तमाम तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं.

पुलिस ने बताया कि 11 लोगो के परिवार में दो भाई और उनकी पत्नियां थीं. दो लड़के करीब 16 से 17 साल के थे। मृतकों में एक बुजुर्ग मां और बहनें शामिल हैं. पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस के बताया कि 10 लोग फंदे से लटके मिले हैं जबकि एक बुजुर्ग महिला का गला दबाया हुआ है. पुलिस का मानना है कि इस महिला की हत्या की गई है. 10 लोग जो फंदे से लटके मिले हैं वह सभी फर्स्ट फ्लोर पर मिले हैं.(सौजन्य:आजतक डॉट इन)

 

 

 

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): मध्य प्रदेश के मंदसौर में मासूम बच्ची से हुई दरिंदगी ने फिरसे एक बार पूरे देश को शर्मशार कर दिया है. जहाँ पूरे देश में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है वहीँ अब इस घटना पर राजनीति भी शुरू हो गई है. राजनितिक गलिआरों में छींटाकशी का दौर भी शुरू हो गया है. साथ ही लोकगायिका मालिनी अस्वस्थी ने  घटना पर चुप्पी साधने वाले बॉलीवुड कलाकारों पर करारा तंज कसा है. उन्होंने पूछा है कि आखिर बच्चियों के साथ अत्याचार के मामले में धार्मिक भेदभाव क्यों किया जा रहा है? कठुआ कांड को लेकर तख्ती लटकाने और विदेशी मीडिया में लेख लिखने वाले लोग आखिर मंदसौर की घटना पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं. 

मालिनी के इस सवाल ने पूरे देश में एक बहस छेड़ दी है कि क्या वाकई इस देश में बलात्कार जैसे घिनौने जुर्म को भी धर्म के चश्मे से देखा जाता है? जब कठुआ में ऐसी दरिंदगी हुई थी तब पूरे देश में उस घटना के प्रति गुस्सा था. लोग सड़क पर आ गये थे, जिनमें कई राजनितिक पार्टियाँ भी शामिल थीं.  साथ ही बॉलीवुड के भी कई नामी चेहरे इस घटना के विरोध में आकर खड़े हो गये थे. लेकिन अब मंदसौर की दरिंदगी के ऊपर  मालिनी ने अब ऐसी बात कहकर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वाकई इस देश में हर मुद्दे को धर्म के चश्मे से देखा जाएगा. दरअसल मालिनी ने बॉलीवुड पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया, 'कठुआ पर शर्म आई और मंदसौर पर जुबां पर ताले! आक्रोश में भेदभाव! बॉलीवुड में अब न कोई तख्ती लटका रहा, न ही कोई विदेशी अखबारों और मीडिया में भारत को बदनाम करता हुआ लेख लिख रहा. न घंटों विलाप करने वाले एंकर अब व्यथित दिख रहे! बच्चियों में भी भेदभाव का दोहरा मापदंड सिर्फ सेक्युलर कर सकते हैं.'

मालिनी अवस्थी के इस ट्वीट को लेकर बवाल शुरू हो गया. सोशल मीडिया पर उनको ट्रोल किया जाने लगा. उन पर रेप की घटना को धर्म के चश्मे से देखने का आरोप लगने लगा. जब मामला ज्यादा बढ़ा, तो उन्होंने अपने ट्वीट पर सफाई दी और विरोधियों पर जमकर बरसीं. एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान मालिनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि 'मैं खुद भी एक औरत हूं और मैं एक बेटी की मां हूं. मैंने जिंदगी भर जो भी गाया, वो औरतों को ही समर्पित गीत गाए हैं. निर्भया का किस्सा हो या कठुआ का कांड हो या फिर कोई रेप की घटना, उसके दोषियों को फांसी की सजा मिलनी ही चाहिए.'

उन्होंने कहा कि सिर्फ छेड़छाड़ की घटना से ही एक लड़की का कलेजा आर-पार हो जाता है. मंदसौर की घटना के बारे में भी सुनते ही मन आक्रोश से भर गया, लेकिन मुझे यह लगा कि मैं एक अकेली कलाकार हूं, जिसने इस मामले में ट्वीट किया. मैंने यही कहा कि यह अजीब सी हैरान करने वाली बात है कि कैसे कुछ लोगों के लिए एक बात इतनी बड़ी हो जाती है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर तक व्यापक हो जाती है और दूसरी घटना पर कोई बोलता तक नहीं है.' मालिनी अवस्थी का मानना है कि जो लोग कठुआ कांड पर हल्ला मचा रहे थे, वो इस घटना पर चुप्पी साधे हुए हैं. ऐसे लोग रेप की घटना को भी धर्म के चश्मे से देख रहे हैं. बॉलीवुड के कलाकारों पर सीधा हमला बोलते मालिनी अवस्थी ने कहा, 'मैं पूछना चाहती हूं कि बॉलीवुड में बहुत कलाकार हैं, उनको कठुआ कांड को लेकर शर्म आई थी, लेकिन अब मंदसौर की घटना को लेकर वे सब खामोश हैं. उन्होंने सवाल पूछा कि मंदसौर की घटना को लेकर उन्हें शर्म क्यों नहीं आती?

सवाल वाजिब भी लग रहा है ये वाकई दिल को देहला देने वाली घटना है. लेकिन पूरे देश में अब इसे लेकर एक और सवाल खड़ा हो गया है कि आखिरकार कबतक ऐसी घटनाओं को लेकर भी लोग अपना हित साधते रहेंगे? कबतक लोग हर घटना को धर्म के चश्मे से देखेंगे. मालिनी की बातों में भी सच्चाई नजर आती है. इस घटना को लेकर अबतक बॉलीवुड से कोई भी कलाकार तख्ती लेकर बाहर नहीं आया है. क्योंकि लड़की सम्प्रदाय विशेष से सम्बन्ध नहीं रखती है. आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क का मानना है कि इस तरह के जुर्म के लिए दोषियों के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करते हुए फांसी की सज़ा दी जानी चाहिए. 

वहीं मध्य प्रदेश के मंदसौर में बच्ची के साथ रेप के बाद राजनीति में उबाल आ गया है. बच्ची अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रही है. मामले को कुछ दिन बीत चुके हैं, इरफान आसिफ नाम के आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया गया है. मध्य प्रदेश की सरकार मामले की फास्ट ट्रैक सुनवाई करने का वादा भी कर रही है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि कठुआ में आसिफा रेप मामले की तरह इस मामले में बॉलीवुड के सितारों ने बच्ची के लिए आवाज़ क्यों नहीं उठाई? राजनीतिक पार्टियों ने इस मामले को लेकर सड़कों पर मोर्चे क्यों नहीं निकाले? टीवी और अखबारों में इस बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए कैंपेन क्यों नहीं चले?

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): राजस्थान बीजेपी की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. पहले उपचुनावों में लोकसभा की दो सीटों और विधानसभा की एक सीट में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसे कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनावों के ट्रेलर करार दिया. उसके बाद राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष के इस्तीफे इस बाद नए पार्टी अध्यक्ष पर पार्टी हाई कमान और बसुन्धरा राजे के बीच सहमति नहीं बन पाई और पार्टी को नया सूबेदार न्युक्त करने के लिए दो महीने से भी ज्यादा का इंतजार करना पड़ा. यहाँ भी ये साफ़ दिखा कि राजस्थान में बीजेपी पार्टी कम और बसुन्धरा का ज्यादा वर्चस्व है और यहाँ वहीँ होता है जो बसुन्धरा चाहती हैं. यानी बसुन्धरा पार्टी से बड़ी हो गई हैं जिसने पार्टी की मुसीबतें और बढ़ा दिन. आख़िरकार अब जाकर नए सूबेदार की न्युक्ति हो गई है, लेकिन अब राजस्थान में जो पार्टी को झटका लगा है उसकी भरपाई करना शायद बीजेपी के लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा ये बात बीजेपी हाई कमान भी जानती है. 

दरअसल यहाँ हम बात कर हरे हैं राजस्थान बीजेपी के सबसे वरिष्ठ विधायक और बड़े ब्राह्मण नेता घनश्याम तिवाड़ी की जिहोने पार्टी बसुन्धरा राजे की लगातार बेरुखी के चलते आख़िरकार बीजेपी से ही इस्तीफ़ा दे दिया. पार्टी के लिए इसे राजस्थान में अबतक का सबसे बड़ा झटके के तौर पर देखा जा रहा है. क्योंकि राजस्थान एक ऐसा राज्य है सरकार बनाने में ब्राह्मणों की काफी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. जब भी इस तबके ने बीजेपी का साथ दिया है राजस्थान में बीजेपी ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ करते हुए सरकार बनाई है. लेकिन पिछले कुछ समय में जिस तरह से बसुन्धरा ने ब्राह्मण नेता घनश्याम तिवाड़ी की अनदेखी की उसके बाद ब्राह्मणों में बीजेपी के खिलाफ काफी रोष देखा जा रहा है. हालांकि घनशयाम तिवाड़ी ने काफी समय तक इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की लेकिन उनकी न तो संघ ने सुनी न ही बीजेपी ने. आखिरकार तिवाड़ी ने बाबा रामदेव के पास भी हाई कमान के पास संदेश भेजा लेकिन साड़ी कोशिशें नाकाम साबित हुईं और नतीजा घनश्याम तिवाड़ी का पार्टी से इस्तीफे के रूप में सामने आया. पार्टी हाई कमान भी ये बात जानती है कि इस नुकसान की भरपाई करना बहुत मुश्किल है क्योंकि घनश्याम तिवाड़ी राजस्थान की वो शख्सियत हैं जिन्होंने यहाँ पार्टी को अपने खून पसीने से सींचा है. तिवाड़ी न केवल यहाँ संघ के प्रचारक रहे हैं बल्कि भैरो सिंह शेखावत और बसुन्धरा की पिछली सरकार में भी मंत्री रहे हैं. लेकिन पिछले 5 साल में पार्टी ने जिस तरह से उनकी अनदेखी की उसके बाद उन्होंने अंत में ये कदम उठाया.

तिवाड़ी ने पार्टी हाई कमान को एक पात्र लिखा है जिसमें उन्होंने पार्टी हाई कमान को बसुधरा के आगे बौना करार दिया है. साथ ही तिवाड़ी ने बसुधरा राजे पर कुछ केन्द्रीय मंत्रियों से सांठगांठ से भ्रष्टाचार करने का भी आरोप लगाया है. यानी घनश्याम तिवाड़ी ने बीजेपी के लिए बहुत बड़ी मुश्किलें पैदा कर दी हैं. तिवाड़ी के इस कदम से राजस्थान के कांगेसीयों के चेहरे खिल गये हैं. वो इस कदम को बीजेपी से ब्राह्मणों की नाराज़गी के रूप में देख रहे हैं और प्रचारित भी कर रहे हैं. 

गौरतलब है कि सचिन पायलट की सक्रियता ने जहां कांग्रेस के साथ गुर्जर वोट को कांग्रेस के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कारण सूबे की माली बिरादरी में कांग्रेस की अच्छी पकड़ मानी जाती रही है. अब अगर बीजेपी से नाराज़ ब्राह्मण बिरादरी भी कांग्रेस की और रुख करती है तो ये निश्चित तौर पर बीजेपी के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होगा जिससे बीजेपी के सूबे की सत्ता में दोबारा लौटने के सपने पर पानी फिरेगा बल्कि मिशन 2019 को पूरा कर पाना बहुत मुश्किल होगा.

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): हाईकोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर वासियों को बड़ी राहत देते हुए शनिवार से दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के हजारों कर्मचारियों के अपनी मांगों के कारण हड़ताल पर जाने से रोक लगा दी है. गौरतलब है कि डीएम्आरसी से बातचीत नाकाम होने के बाद  करीब 9,000 नॉन-एग्जिक्यूटिव कर्मचारी शनिवार से हड़ताल पर चले जाने वाले थे. हड़ताल होने की सूरत में मेट्रो सेवाएं बंद हो जाती और लाखों लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता.

HC ने औचित्य पर सवाल उठाए

दिल्ली हाईकोर्ट ने हड़ताल के औचित्य पर सवाल उठाया. जस्टिस विपिन सांघी ने त्वरित सुनवाई के बाद अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा कि प्रथम दृष्ट्या मेट्रो कर्मचारियों की प्रस्तावित कार्रवाई उचित या कानूनी प्रतीत नहीं होती. डीएमआरसी जनसुविधा के तहत रोजाना करीब 25 लाख यात्रियों को सेवा मुहैया कराती है. इसके लिए उसे पर्याप्त नोटिस नहीं दिया गया और समझौता प्रक्रिया अब भी जारी है. दूसरी ओर, हड़ताल को देखते हुए डीएमआरसी ने त्वरित याचिका दायर की जिसे कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल के समक्ष सुनवाई के लिए रखा गया. उन्होंने इसे सुनवाई के लिए जस्टिस सांघी के पास भेज दिया. जस्टिस सांघी ने अपने 5 पन्ने के आदेश में कहा, 'मैं आवेदन की मांग के मुताबिक अंतरिम राहत देने के लिए इच्छुक हूं. इसी मुताबिक प्रतिवादियों (कर्मचारियों) को 30 जून को या मामले में अगले आदेश तक हड़ताल पर जाने से रोका जाता है.' हड़ताल पर कोर्ट अगली सुनवाई 6 जुलाई को करेगा.

दरअसल डीएमआरसी में लगभग 12,000 लोग कार्यरत है जिनमें लगभग 9 हजार गैर-कार्यकारी कर्मचारी हैं. डीएमआरसी के कुछ गैर-कार्यकारी कर्मचारी अपनी आठ सूत्री मांगों के समर्थन में 19 जून से यमुना बैंक और शाहदरा समेत कुछ मेट्रो स्टेशनों पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

CM केजरीवाल का ट्वीट

दिल्ली में मेट्रोकर्मियों की संभावित हड़ताल को देखते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा था, 'मेट्रोकर्मियों की सभी उचित मांगें पूरी की जानी चाहिए, हड़ताल से लाखों लोगों को असुविधा होगी. हड़ताल नहीं होनी चाहिए. मैं कर्मचारियों से अनुरोध करता हूं कि वे हड़ताल न करें.'

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): एक तरफ पूरे देश में राजनीतिक पार्टियों के बीच सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय लेने की होड़ मची हुई है वहीँ दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में रमजान सीजफायर खत्म होने के बाद से ही सेना का ऑपरेशन लगातार जारी है. इसी कड़ी में शुक्रवार को पुलवामा में सेना ने 3 और आतंकियों को जन्नत की सैर करवाते हुए उनके अंजाम तक पहुँचाया यानी की मार गिराया. सेना का ये ऑपरेशन दोपहर दो बजे से चल रहा था. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, आतंकी एक घर में छिपे हुए थे और कुछ लोगों को बंधक बना रखा था. इस वजह से सेना को ऑपरेशन में खासी दिक्‍कत का समाना करना पड़ा. वहीं, पुलवामा में एनकाउंटर साइट के पास ही फिरसे कुछ लोगों ने पथराव किया. इसमें 10 लोग घायल हुए हैं. वहीं, एक नागरिक की मौत हुई है.

दरअसल सेना को शुक्रवार दोपहर जानकारी मिली कि पुलवामा में 3 आतंकी छिपे हुए हैं. इसके बाद सेना ने यहां सर्च ऑपरेशन चलाया. इसी बीच आतंकी एक घर में जाकर छिप गए. सेना और पुलिस के जवानों ने उन्‍हें घेर लिया और बाद में मार गिराया. आतंकियों ने घर में कुछ आम लोगों को भी बंधक बनाया था. ये ऑपरेशन 55RR और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने  संयुक्त रूप से चलाया. इससे पहले शुक्रवार को ही कुपवाड़ा में सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई, इस ऑपरेशन में सेना ने एक आतंकी को मार गिराया. ये ऑपरेशन कुपवाड़ा के त्रेहग्राम इलाके में हुआ है. ऑपरेशन सुबह करीब 5.30 बजे से जारी था.ईनपुट:आजतक डॉट इन)

 

 

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): दिल्ली-एनसीआर वासियों के लिए बुरी खबर है, यहां के लोगों के लिए लाइफलाइन बन चुकी मेट्रो का पहिया कल से अनिश्चितकाल के लिए थम जाएगा. दरअसल दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के हजारों कर्मचारी अपनी कई मांगों के नहीं माने जाने पर शनिवार से हड़ताल पर जा रहे हैं.

गौरतलब है कि डीएमआरसी और कर्मचारियों के बीच शुक्रवार को बातचीत नाकाम होने के बाद करीब 9,000 नॉन-एग्जिक्यूटिव कर्मचारी शनिवार से हड़ताल पर चले जाएंगे. अगर ऐसा हुआ तो मेट्रो सेवाएं बंद हो सकती है. इससे पहले मेट्रो के नॉन-एग्जिक्यूटिव कर्मचारियों ने वेतन बढ़ोतरी जैसी कई मांगें पूरी नहीं जाने की सूरत में 30 जून से हड़ताल पर जाने की धमकी दी थी. 

मंत्री बोले-विवाद सुलझाए डीएमआरसी

आधी रात से शुरू होने वाले हड़ताल को देखते हुए दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने डीएमआरसी के मैनेजिंग डायरेक्टर को निर्देश दिया है कि नॉन-एग्जिक्यूटिव कर्मचारियों के मांगों का तुरंत समाधान निकाला जाए. गहलोत ने मैनेजिंग डायरेक्टर को लिखे पत्र में कहा, 'विवाद को जल्द से जल्द सुलझाया जाए जिससे मेट्रो की सेवाएं बाधित न हों. अगर मेट्रो की सेवाएं बाधित होती हैं तो लाखों यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आगे के घटनाक्रम को लेकर उन्हें लगातार अवगत कराया जाए. डीएमआरसी को किसी भी हद तक जाकर पूरे विवाद को खत्म कराया जाना चाहिए. समस्या से समाधान के लिए वह हमेशा उपलब्ध रहेंगे.(सौजन्य:आजतक डॉट इन)

 

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): ज़ी न्यूज़ के जाने-माने पत्रकार और एंकर सुधीर चौधरी एक बार फिरसे सुर्ख़ियों में हैं. उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से एक विडियो पोस्ट किया है जिसमे एक मुस्लिम व्यक्ति उन्हें अपशब्द कह रहा है. वो अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें मुस्लिम विरोधी करार दे रहा है. ये शख्स सुधीर चौधरी से इतना नाराज़ है कि उसने भाषा की सारी मर्यादाएं तोड़ते हुए  सुधीर चौधरी को"कुत्ते का पिल्ला"तक कह डाला. 

दरअसल विडियो में दिख रहे इस शख्स को सुधीर चौधरी की बुर्के की अनिवार्यता के विरोध में पेश की गई एक रिपोर्ट से बेहद नाराज़गी है. इस शख्स ने सुधीर चौधरी पर उनके धार्मिक ग्रन्थों का अपमान करने का इलज़ाम लगाया. उसके मुताबिक बुर्के की प्रथा इसलिए शुरू की गई ताकि महिलाओं को दूसरे मर्दों की बुरी नजरों से बचाया जा सके. लेकिन सुधीर चौधरी इसको गलत बता रहे हैं.

वहीँ सुधीर चौधरी में भी इस विडियो को पोस्ट करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है. सुधीर ने कहा है कि अगर ऐसा किसी किसी लिबरल एंकर(पाकिस्तानी प्रेमी) के साथ हुआ होता अबतक वो रो-रोकर सारा आसमान सर पर उठा लेते. इलज़ाम लगाते कि इस देश में सच बोलने की यही सजा है. लोकतंत्र खतरे में है. मुझे जान का खतरा है और अबतक वो एंकर धरने पर बैठ गये होते.

गौरतलब है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब सुधीर चौधरी या उनके नेत्रित्व में चल रहा जी न्यूज़ ऐसे किसी शख्स के निशाने पर आया हो. इससे पहले भी सुधीर चौधरी पर मुस्लिम विरोधी होने के इलज़ाम लगते रहे हैं. वहीँ इस विडियो को देखने के बाद ट्विटर यूजर्स ने सुधीर चौधरी का पक्ष लेते हुए इस शख्स पर कानूनी कार्यवाही करने की सलाह दी है तो वहीँ कुछ लोग उनकी सपोर्ट में भी आकर खड़े हुए हैं.

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): लोकसभा चुनाव 2019 का बिगुल बज चुका है, ऐसे में देश की सारी सियासी पार्टियां अपनी तैयारी में जुट गई हैं. मुकाबला मोदी बनाम पूरा विपक्ष का होने की उम्मीद जताई जा रही है. ऐसे में अखिलेश यादव के नेत्रित्व वाली समाजवादी पार्टी के अंदर भी सबकुछ ठीक होता हुआ दिखाई दे रहा है. सूत्रों की मानें तो यहाँ भी पार्टी जो पहले दो धडों में बनती हुई थी अब एक होती हुई दिखाई दे रही है. उसकी एक झलक तब दिखाई दी जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रिय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव के 72वें जन्मदिन के उपलक्ष पर अखिलेश के प्रिय चच्चा प्रोफेसर रामगोपाल यादव और चच्चा शिवपाल यादव एक मंच पर दिखे. ये दोनों न केवल एक साथ दिखे बल्कि दोनों ने मिलकर केक भी काटा. शिवपाल ने प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पांव भी छुए और आपसी मतभेद को बीते दिनों की बात कहकर एकता का सन्देश भी दिया.

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले ये दोनों ही नेता करीब दो साल बाद एक साथ एक मंच पर दिखे हैं. हालांकि इस मौके पर प्रोफेसर रामगोपाल यादव कुछ भी कहने से बचते हुए दिखे लेकिन शिवपाल यादव ने कहा कि हमारे परिवार में अब कोई भी मतभेद नहीं है. हमसब एक हैं. हम प्रोफेसर रामगोपाल यादव को जन्मदिन की बधाई देते हैं और इस पावन मौके पर समस्त सेक्युलर पार्टियों का आवाहन करते हैं की आइये अब हम सब मिलकर प्रदेश में लगी हुई अघोषित इमरजेंसी को उखाड़ फेंके.

दरअसल समाजवादी पार्टी में अंतर्कलह उस वक़्त गहरा गई थी जब अखिलेश मुख्यमंत्री थे उन्होंने उस वक़्त के समाजवादी पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष और अपने पिता मुलायम सिंह यादव के कई निर्णयों का विरोध किया था. मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल के पक्ष में जाते हुए कई बार अखिलेश यादव को डांट भी लगाईं थी. जिसके कारण पार्टी दो धड़ों में बाँट गई थी. एक धड़ा अखिलेश के चच्चा और मलायम के चहेते भाई शिवपाल यादव का बन गया था जबकि दूसरा धड़ा अखिलेश यादव और उनके पक्ष में खड़े प्रोफेसर रामगोपाल यादव का बन गया था. शिवपाल यादव ने इस झगडे का सारा ठीकरा रामगोपाल यादव के सर फोड़ा था और कहा था कि प्रोफेसर रामगोपाल यादव के कारण ही पिता-पुत्र के बीच दरार आई है.

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): खबर राजनीतिक है और हरियाणा से है, जिसका असर पूरे हरियाणा की राजनीति पर पड़ना तय माना जा रहा है. खबर ये है कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को हटाने की ख़बरें निराधार ही हैं और सूत्रों की मानें तो आने वाले वक़्त में भी तंवर ही हरियाणा कांग्रेस के सर्वेसर्वा होंगे. हाई कमान उनके अबतक के काम से पूरी तरह से संतुष्ट है और अब उन्हें सूबे में वो सब पॉवर देने की तैयारी चल रही है जहाँ वो पार्टी के लिए कई बड़े फैसले ले सकते हैं. यानी बात साफ़ है कि हुड्डा खेमे के लिए जहाँ ये बहुत बड़ा झटका है वहीँ कुलदीप बिश्नोई के लिए भी खबर कुछ ख़ास अच्छी नहीं है क्योंकि बिश्नोई को भी ये उम्मीद थी कि हुड्डा खेमे की मदद से वो प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी पाने में कामयाब हो सकते हैं. लेकिन जिस तरह की खबर सूत्रों से मिल रही है उसके मुताबिक कांग्रेस हाई कमान तंवर के अबतक के काम से न केवल संतुष्ट है बल्कि उनकी साइकिल यात्रा में उमड़ रही भीड़ से भी पार्टी गदगद है. पार्टी उनमे हरियाणा में कांग्रेस का भविष्य देख रही है. इतना ही नहीं सूत्रों की मानें तो तंवर को आने वाले वक़्त में ऐसी पॉवर दी जा सकती हैं जिससे वो बेधडक निर्णय ले सकते हैं. यानी मतलब साफ़ है कि हरियाणा की राजनीति में कांग्रेस की तरफ से अब सबसे बड़ा एकमात्र चेहरा अशोक तंवर ही हैं.

सूत्रों की मानें तो हुड्डा को पछाड़ने में तंवर को किरण चौधरी खेमे का साथ तो मिल ही रहा था लेकिन अब कुमारी शैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला का भी आशीर्वाद प्राप्त है. इन दोनों के भी तंवर के साथ आने से जहाँ हुड्डा खेमा कमज़ोर पड़ रहा है वहीँ इस खेमे के समर्थकों में भी मायूसी का माहौल है. हालांकि हुड्डा का भी जनजागरण अभियान चालू है लेकिन पार्टी हाई कमान फिलहाल तंवर के साथ ही खडा है. तंवर भी अब खुलकर बैटिंग करते हुए नजर आ रहे हैं और सूत्रों की मानें तो आने वाले विधानसभा चुनाव में तंवर की टिकेट वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका होगी. जिससे कई विधायकों और हुड्डा समर्थकों के टिकेट कटने की भी सम्भावना पैदा हो गई है. तंवर पहले भी कह चुके हैं कि वे पार्टी की उस सेकंड लाइन को आगे लायेंगे जो वर्षों से कांग्रेस की सेवा कर रहे हैं. अब केवल पार्टी में उसी को तरजीह मिलेगी जो पार्टी के लिए पूरी तरह से समर्पित हो न की किसी व्यक्ति विशेष के लिए. यानी मतलब साफ़ है कि अगर टिकेट वितरण में तंवर की चली तो हुड्डा खेमे के कई चेहरों के टिकेट काटने तय हैं और सूत्रों की मानें तो तंवर ने ऐसे कई पार्टी के सेकंड लाइन के नेताओं को चुनाव की तैयारी करने के निर्देश भी दे दिए हैं. पार्टी हाई कमान भी इस मुद्दे पर तंवर के साथ ही खड़ी दिखाई दे रही है. क्योंकि राहुल गांधी कई बार ये कह चुके हैं कि कांग्रेस में केवल उन्हीं लोगों को टिकेट मिलेगा जो पार्टी के लिए पूरी तरह समर्पित होंगे. यानी राहुल गांधी अब किसी भी राज्य में व्यक्ति विशेष को आगे बढ़ाने का बजाए ऐसे लोगों को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं जो कांग्रेस के लिए काम करे नाकि कोई व्यक्ति विशेष इतना बड़ा हो जाए कि वो कल को पार्टी के लिए दिक्कतें पैदा करे.

इसी के चलते तंवर ने गुरूवार को हरियाणा के पंचायत भवन में सूबे की 10 लोकसभा सीट और नब्बे विधानसभा हलकों के प्रमुख नेताओं से महत्वपूर्ण मीटिंग की और चुनावी बिगुल फूक दिया. सूत्रों की मानें तो तंवर के साथ-साथ पार्टी हाई कमान को भी ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव भी करा सकती है जिसके चलते अब तंवर बिलकुल भी देरी करने के मूड में नहीं हैं और उन्होंने पार्टी के सभी नेताओं को ये आदेश दे दिया है कि उनके पास अब 3 से 6 महीनों का ही वक़्त है. इस समय में जो जितना दम दिखायेगा उसको आने वाले वक़्त में उतना ही फायदा मिलेगा और टिकेट वितरण में भी तरजीह दी जायेगी.

तंवर ने पार्टी कार्यकर्ताओं को ये साफ़ निर्देश दिया है कि वो जनता के बीच जाएँ और सरकार की जनविरोधी नीतियों का प्रचार करें. बिजली पानी सड़क जैसे मुद्दों को उठाएं, एनहांसमेंट के नोटिस से परेशान लोगों का साथ दें, कर्मचारियों और किसानों से जुड़े मूद्दों को पूरे जोर-शोर से उठाएं, ऐसे आंदोलनों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें. साथ ही केंद्र सरकार की भी पोल खोलें. उनके जुमलों के बारे में जनता को बताएं. जनता को बताएं की किस तरह मोदी सरकार ने उन्हें काले धन के मुद्दे, बैंक अकाउंट में 15 लाख देने जैसे कई मुद्दों पर बेबकूफ बनाया ही साथ ही बेरोज़गारी की समस्या को भी उठाएं. कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर बताएं की मोदी सरकार ने किस तरह से हर साल 2 करोड़ लोगों को रोज़गार देने का वादा किया और अब 2 करोड़ तो छोडिये लाखों रोज़गार देने भी ये सरकार नाकामयाब रही. इस सरकार ने युवाओं को भी ठगा है ये संदेश भी सूबे के समस्त युवाओं तक पहुंचाएं.

हालांकि तंवर की इस मीटिंग में तंवर के एंटी खेमे का एक भी नेता नजर नहीं आया पर बैठक में गौर करने वाली एक बात थी वो ये है कि कभी एक-दूसरे के धुरविरोधी रहे कई नेता इस मंच पर एकसाथ नजर आये. जिनमें कुमारी शैलजा के सबसे नजदीकी पूर्व राज्यसभा सांसद ईश्वर सिंह से लेकर हुड्डा खेमे के करीबी रहे पूर्व सांसद चौधरी रणजीत सिंह, पूर्व मंत्री विजेंद्र कादियान, नरेश यादव, सुल्तान सिंह जडोला, डॉक्टर विपिन सांगवान, पंडित होशियारी लाल शर्मा, रवि मैहला के नाम शामिल हैं. साथ ही अभी हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व आईएएस अधिकारी परदीप कासनी भी मंच पर दिखे.

 

 

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