आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): हिमाचल प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पंडित सुखराम ने फिर एक बार कांग्रेस का दामन थाम लिया है.......वो अपने पौत्र आश्रय शर्मा को लोकसभा टिकेट न मिलने के चलते खासे नाराज़ चल रहे हैं.....पार्टी ने अपने पुराने उम्मीदवार रामस्वरूप शर्मा को ही फिर से टिकेट देकर एक तरह से पंडित सुखराम के राजनीतक वर्चस्व को किनारे कर दिया है..........जिसको लेकर सुखराम काफी नाराज़ चल रहे थे .....अपनी इस नाराज़गी का इज़हार उन्होंने किसी सार्वजनिक मंच पर तो नहीं किया लेकिन वो अपने पौत्र आश्रय शर्मा के लिए मंडी से बीजेपी की लोकसभा सीट चाह रहे थे ये बात किसी से छिपी हुई नहीं है..........अब खबर आ रही है कि पंडित सुखराम अपने पौत्रमोह के चलते एक बार फिर से कांग्रेस में घर वापिसी कर ली है....कांग्रेस मुख्यालय से हमें जिसकी एक तस्वीर भी हासिल हुई है जिसमे वो प्रदेश पार्टी प्रभारी, पार्टी अध्यक्ष और अपने पौत्र आश्रय शर्मा के साथ राहुल गांधी के साथ खड़े हैं......

हिमाचल की राजनीति पर विशेष रूप से मंडी लोकसभा सीट पर अच्छी पकड़ रखने वाले पंडित सुखराम की वापिसी  निश्चित तौर पर बीजेपी के सियासी समीकरणों को काफी हद तक बिगाड़ सकता है..... गौरतलब है कि मंडी लोकसभा में कुल 10 विधानसभा सीटें आती हैं जिनमे से 9 पर इस समय भाजपा काबिज़ है वहीँ एक विधासभा सीट पर आज़ाद उम्मीदवार प्रकाश राणा जीते थे जिन्होंने बाद में बीजेपी को अपना समर्थन दे दिया. यानी इस बार ऐसा माना जा रहा था कि बीजेपी के लिए मंडी लोकसभा सीट जीतना कोई बड़ी बात नहीं है.... एक तो सारे सियासी समीकरण बीजेपी के पक्ष में और दूसरा मुख्यमंत्री भी जिला मंडी के... यानी सोने पे सुहागा... लेकिन अब पंडित सुखरामका कांग्रेस का दामन थाम लेने के बाद निश्चित तौर पर बीजेपी के लिए ये एक झटका साबित होगा.....क्योंकि मंडी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 10 विधान सभा क्षेत्रों में 4-5 ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जिन्हें पंडित सुखराम की राजनितिक विरासत के तौर पर देखा जाता है.....यानी वहां से किसी भी उम्मीदवार का पंडित सुखराम के आशीर्वाद के बिना जीता पाना बहुत मुश्किल है...... यानी भाजपा के लिए पंडित सुखराम अब सरदर्द बन चुके हैं जो उसके राजनीतक समीकरणों को पूरी तरह से बिगाड़ सकते हैं........

सूत्रों से मिली खबर के अनुसार पंडित सुखराम कांग्रेस में शामिल होने के बाद मंडी लोकसभा सीट से  कांग्रेस आश्रय शर्मा को अपना उम्मीदवार बना सकती है.... जिससे खामोश पड़ी पार्टी के अंदर एक नै उर्जा का संचार होगा.......ख़ास बात ये है कि इसके लिए पार्टी के दिग्गज नेता और कभी पंडित सुखराम के धुरविरोधी रहे पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी हामी भर दी है....  क्योंकि उन्हें भी ये बात भली भांति मालूम है कि पंडित सुखराम की इच्छा के बिना मंडी लोकसभा से कांग्रेस उम्मीदवार का जीतना बहुत मुश्किल है..... ऐसे में आश्रय शर्मा को अगर कांग्रेस का उम्मीदवार बना दिया  जाए तो कोई बड़ी बात नहीं.....

साथ ही एक बड़ी खबर और आ रही है जिसके मुताबिक आज शाम 7 बजे पंडित सुखराम के पुत्र और बीजेपी सरकार में मंत्री अनिल शर्मा भी पार्टी से इस्तीफ़ा दे सकते हैं..... यानी एक बात साफ़ हो गई है कि इस लोकसभा सीट से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ना तय हैं.........

बहरहाल अब पंडित सुखराम कांग्रेस में आ गये हैं.....पौत्रमोह उन्हें एक बार फिरसे कांग्रेस की तरफ खींच लाया है...... अब आश्रय मंडी लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार होंगे ये भी तय है....... साथ ही ये भी तय है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की मुश्किलें भी बढेंगी........ और अगर गलती से भी मंडी लोकसभा सीट बीजेपी के हाथ से गई तो मुख्यमंत्री जयराम का नया-नया साम्राज्य भी बिखर जायेगा.......

आवाज़(रोहित कुमार जामवाल, चंडीगढ़): हिमाचल में जैसे ही बीजेपी ने अपनी लोकसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की कांग्रेस ने बीजेपी के विरुद्ध अपना मास्टर प्लान तैयार करने की कवायद शुरू कर दी और अब इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है....... सूत्रों की मानें तो कांग्रेस हिमाचल की ४ लोकसभा सीटों पर ऐसे उम्मीदवार उतारेगी जो न केवल बीजेपी को कड़ी टक्कर दें बल्कि मोदी के मिशन 2019 की राह को भी बिगाड़ें...... इसी कड़ी के तहत कांग्रेस ने हमीरपुर लोकसभा सीट के लिए एक ऐसे उम्मीदवार को उतारने की कवायद शुरू की है जो न केवल अनुराग ठाकुर को कड़ी टक्कर दे बल्कि उन्हें हारने में भी सक्षम हो.......सूत्रों की मानें तो इसके लिए कांग्रेस ने बीजेपी के नेता और पूर्व लोकसभा सांसद सुरेश चंदेल को कांग्रेस में लाने की तैयारी कर ली है...... क्योंकि राजनितिक पंडितों का भी मानना है की अगर अनुराग को हराना है तो उनके सामने कांग्रेस को ऐसा उम्मीदवार चाहिए जो कद से भी बड़ा हो और भाजपा के काम करने के तरीके से भी पूरी तरह से वाकिफ़ हो........ ऐसे में सुरेश चंदेल एक ऐसा नाम है जो हमीरपुर से कांग्रेस के हितों को साधने में मुफ़ीद हो सकते हैं..........

सूत्रों की मानें तो सुरेश चंदेल जल्द ही कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं....... यानी भाजपा नेता सुरेश चंदेल को लेकर अखिरकार सारी अटकलों पर अब तस्वीर जल्द ही साफ़ हो जाएगी.... साथ ही यह भी सामने आ जाएगा कि चंदेल कांग्रेस में जाने को लेकर केवल भाजपा पर ही दबाव बना रहे थे या सच में कांग्रेस के साथ चलने को तैयार हो गए हैं......शनिवार को भी इसी मसले पर दिल्ली में प्रदेश का राजनीतिक माहौल काफी चर्चा में रहा... मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर, प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती व प्रभारी मंगल पांडे, चंदेल के घावों पर मरहम लगाते रहे.... लेकिन चंदेल की ओर से भाजपा को कोई राहत नहीं मिली है...

भाजपा की तरफ से ऐसा प्रयास दो बार किया गया, लेकिन चंदेल ने केवल उनके साथ हुई गुस्ताखियों तक ही बात रखी, यह बातचीत किसी अंजाम तक नहीं पहुंची... घटनाक्रम पर कांग्रेस की भी बराबर नजर थी... कांग्रेस के वो नेता चंदेल की इस बैठक से राहत महसूस कर रहे थे जो आगे तक टिकट की दौड़ में है... पुख्ता सुत्रों की मानें तो अब सुरेश चंदेल दोपहर बाद कांग्रेस में विधिवत रूप से हाथ थाम लेंगे, जिसकी आधिकारिक घोषणा सोमवार या फिर अगले एक-दो दिन में हो सकती है....... इसके लिए बाकायदा रणनीति को अंजाम दिया जा चुका है.... अब इसके लिए चंदेल ने हामी भर दी है और भाजपा में रहने की बात पर विराम लगा दिया है... और अब वो प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल, प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर, मुकेश अग्निहोत्री और प्रदेश के सहप्रभारी गुरकीरत सिंह कोटली की मौजूदगी में राहुल गांधी के समक्ष कांग्रेस में जा सकते हैं... बहरहाल टिकट को लेकर कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में ही फैसला होना है.... लेकिन जब कांग्रेस के ज्यादातर नेता अनुराग ठाकुर के सामने चुनाव लड़ने से कतरा रहे हैं ऐसे समय में सुरेश चंदेल कांग्रेस के लिए एक बेहतर उम्मीदवार साबित हो सकते हैं.......

राजनितिक पंडितों की मानें तो अगर सुरेश चंदेल कांग्रेस में शामिल होकर अनुराग के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं तो वो निश्चित तौर पर अनुराग की जीत के समीकरण बिगाड़ सकते हैं... चंदेल के चुनाव लड़ने से सारे सियासी समीकरण बदल जाएंगे.... कांग्रेस वैसे ही हमीरपुर में काफी मजबूत है साथ ही चंदेल के आने से बिलासपुर में भी उसकी पकड़ काफी मजबूत जाएगी..... ऐसे में अनुराग जिस तरह से अपनी जीत को काफी आश्वस्त लग रहे हैं उनकी नींद भी उड़ना स्वभाविक है......कहीं फिर से वही स्थिति न आ जाए जिसका सामना उनके पिता और बीजेपी के दिग्गज नेता प्रेम कुमार धूमल को  सुजानपुर के विधानसभा चुनावों में करना पडा था........

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): इस बार का लोकसभा चुनाव कई मायनों में ख़ास है..... ख़ास बात ये है कि प्रधानमंत्री मोदी को हारने के लिए विपक्ष पूरी तरह से लामबंद हो रहा है..... जिसे देखकर ये लग रहा है कि लोकसभा चुनाव 2019 की जंग आसान नहीं होने वाली है........ अब भारतीय जनता पार्टी की चुनावी लिस्ट आने के बाद कई ऐसी सीटें हैं जिनपर महाटक्कर होने की संभावना प्रबल हो गई है और पूरे देश की आँखें इन सीटों पर लगी रहेंगी.......... ऐसे में आइये आपको बताते हैं कि ऐसी कौन सी सीटें हैं जिनपर इस बार महाटक्कर होने की सम्भावना है.........

वाराणसी

वाराणसी सीट देश की सबसे हाई प्रोफाइल सीट है क्योंकि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर यहां से चुनाव लड़ने जा रहे हैं. 2014 में  भी उन्होंने यहां से चुनाव लड़ा था, तब भी उनके खिलाफ यहाँ से आप नेता अर्व्विंद केजरीवाल मैदान में उतरे थे लेकिन मुंह की खाई थी............अब एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां से लड़ने की ठानी है. जिसको देखते हुए ऐसी खबरें आ रही हैं कि विपक्ष यहां से कोई संयुक्त उम्मीदवार उतार सकता है, जबकि दलित नेता चंद्रशेखर आज़ाद भी यहां से चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं. साफ है कि इस सीट पर क्या होता है, इसको लेकर पूरे देश की नज़र रहेगी.... हालांकि राजनितिक जानकारों की मानें तो यहाँ से विपक्ष को फिरसे एक बार मुंह की ही खानी पड़ेगी लेकिन मोदी के खिलाफ चुनावी समर में कौन उतरता है और चुनाव का नतीजा कैसा आता है इसपर पूरे देश की नजर रहेगी.......

अमेठी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पारंपरिक सीट अमेठी में एक बार फिर लड़ाई रोमांचक होने जा रही है. भाजपा ने एक बार फिर यहां से  ईरानी को मैदान में उतारा है, 2014 में भी उन्होंने यहां से ही चुनाव लड़ा था. हालांकि, वह चुनाव जीतने में सफल नहीं रही थीं. उसके बावजूद वह पिछले पांच साल से लगातार वहां पर काम कर रही हैं, इसलिए इस बार भी लड़ाई देखने लायक होगी. ख़ास बात ये है कि स्मृति इरानी जिस तरह से पिछले 5 साल से अमेठी में जिस तरह से एक्टिव रही हैं उससे इस सीट में अब मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है.......... यानी राहुल गांधी के लिए इस बार यहां से जीत की डगर काफी मुश्किल होने वाली है..........

गांधीनगर

गुजरात की गांधीनगर लोकसभा सीट से इस बार नया सांसद मिलेगा. भाजपा दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी इस बार यहां से चुनाव नहीं लड़ेंगे, उनकी जगह भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह चुनावी मैदान में होंगे. आडवाणी यहां से 8 बार सांसद रह चुके हैं. शाह पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ेंगे, यही कारण है कि इस सीट पर हर किसी की नज़र होगी. और जो भी उनके खिलाफ चुनाव लड़ेगा तो टक्कर कांटेदार ही होगी. हालांकि राजनितिक पंडित अभी इस बात को खारिज़ कर रहे हैं कि शाह को यहाँ से कोई गंभीर चुनौती मिलेगी पर विपक्ष किस तरह का उम्मीदवार उनके खिलाफ उतारता है ये देखने वाली बात होगी........

 

बागपत

राष्ट्रीय लोक दल (RLD) की नई पीढ़ी जयंत चौधरी इस बार बागपत से चुनावी मैदान में हैं. पिछली बार मोदी लहर के चलते सत्यपाल सिंह ने उनके पिता अजित सिंह को यहां पर पटखनी दी थी. लेकिन कैराना में जिस फॉर्मूले ने उपचुनाव में काम किया और बीजेपी की शिकस्त मिली उसके बाद रालोद के हौसले काफी बुलंद हैं. जयंत चौधरी, सपा-बसपा-रालोद के संयुक्त उम्मीदवार हैं. यानी सत्यपाल सिंह के लिए इस बार की जंग आसान नहीं होने वाली है. अब होता क्या है ये तो चुनावी नतीजे ही बताएंगे लेकिन अभी इस सीट पर भी देश भर की निगाहें टिकी रहेंगी...........

 

मुजफ्फरनगर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जाटलैंड मुजफ्फरनगर इस बार बड़ी सियासी लड़ाई का गवाह बनेगा. यहां से रालोद प्रमुख अजित सिंह चुनावी मैदान में हैं, जिनका मुकाबला संजीव बालियान से होगा. इस क्षेत्र में जाट वोटरों की संख्या काफी ज्यादा है, यही कारण है कि ये लड़ाई कड़ी होने वाली है. 2013 में हुए दंगे के बाद इस सीट पर भाजपा को फायदा हुआ था और 2014 में प्रचंड जीत हासिल हुई थी. लेकी इस बार महागठबंधन ने सारे सियासी समीकरण बदल दिए हैं......... बीजेपी को एक फिरसे मोदी लहर का सहारा है वहीँ महागठबंधन फिर से बीजेपी को हराने की कोशिश में है.......

 

तिरुअनंतपुरम

केरल की तिरुअनंतपुरम सीट से इस बार की लड़ाई खास है, यहां पर मौजूदा सांसद शशि थरूर का मुकाबला मिजोरम के पूर्व गवर्नर कुम्मनम राजशेखर से है. भाजपा से चुनाव लड़ने के लिए ही उन्होंने गवर्नर पद से इस्तीफा दिया था. तिरुअनंतपुरम सीट पर शशि थरूर काफी समय से सक्रिय रहे हैं, यही कारण है कि उन्हें यहां से मात देना इतना आसान भी नहीं है..... लेकिन बीजेपी ने जिस तरह से अपना उम्मीदवार उतारा है उसने इस मुकाबले को काफी दिलचस्प बना दिया है........

 

मुंबई नॉर्थ सेंट्रल

भाजपा के दिग्गज रहे प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन एक बार फिर मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सीट से चुनाव लड़ेंगी. पिछली बार उन्होंने भारी मतों से जीत हासिल की थी. इस सीट पर कांग्रेस की तरफ से बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त चुनाव लड़ रही हैं. प्रिया दत्त ने पहले चुनाव लड़ने से मना किया था, लेकिन बाद में उन्हें टिकट मिल ही गया...... मुकाबला काफी दिलचस्प है लेकिन राजनीतक पंडितों की मानें तो पूनम एक बार फिर से प्रिय को मात दे सकती हैं.........

 

आसनसोल

आसनसोल लोकसभा सीट से बीजेपी ने एक बार फिर से बाबुल सुप्रियो को मैदान में उतारा है. इस बार आसनसोल का जंग सचमुच खास होने वाली है. 12 मार्च को ममता बनर्जी ने इस सीट से बतौर TMC कैंडिडेट मुनमुन सेन के नाम का ऐलान किया है. मुनमुन सेन प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं और इस वक़्त बांकुरा से सांसद हैं. यानी यहां जंग अभिनेता बनाम अभिनेत्री की है.

 

 मुरादाबाद

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस इस बार कई तरह के प्रयोग कर रही है. प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, उनका मुकाबला स्थानीय नेता कुंवर सर्वेश सिंह से है. राज बब्बर 2014 में गाजियाबाद से चुनाव लड़े थे, जहां उन्हें वीके सिंह ने पटखनी दी थी. मुस्लिम बहुल कहे जाने वाले मुरादाबाद में कांग्रेस की ओर से मजबूत प्रत्याशी उतारने से मुकाबला कड़ा हो गया है.

 

बंदायू

उत्तर प्रदेश की बंदायू लोकसभा सीट पर लड़ाई इसबार खास है, क्योंकि यहां से भाजपा ने संघमित्रा मौर्य को मौका दिया है. संघमित्रा भाजपा के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी हैं, जो कि पूर्व में बसपा के बड़े नेता रह चुके हैं. जबकि, समाजवादी पार्टी की तरफ से इस सीट पर धर्मेंद्र यादव चुनाव लड़ेंगे. धर्मेंद्र यादव 2014 में मोदी लहर के बावजूद बड़े अंतर से यहां से चुनाव जीते थे.  

 

 

 

 

 

आवाज़(ब्यूरो, जम्मू): जम्मू कश्मीर में पिछले 24 घंटों में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के चार मामले सामने आए हैं. ताजा एनकाउंटर शोपियां जिले के इमाम साहब में शुरू हुआ है. माना जा रहा है कि 2-3 आतंकी एक घर में छिपे हुए हैं. बंदीपोरा में मुठभेड़ के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के 2 आतंकी मारे गए हैं. इसमें लश्कर का टॉप कमांडर अली भाई भी शामिल है.

इसी तरह बारामूला जिले में गुरुवार को हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए. इसके अलावा शोपियां में भी एक आतंकी मारा गया है. इन चारों मुठभेड़ों में अब तक पांच आतंकवादी मारे जा चुके हैं. इस दौरान एक अधिकारी समेत तीन सैन्यकर्मी घायल हो गए.

अली भाई पाकिस्तान का बताया जा रहा है. श्रीनगर स्थित रक्षा प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने बताया बारामूला के कलंतरा इलाके में नमबलनार अभियान में दो आतंकवादियों को ढेर किया गया है. उन्होंने कहा कि मुठभेड़ अब भी जारी है. कर्नल कालिया ने बताया कि अभियान में एक अधिकारी और दो जवान घायल हुए हैं.

घायल जवानों को यहां बादामीबाग छावनी स्थित सेना के 92 बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना के आधार पर दिन में इलाके की घेराबंदी की थी और तलाशी अभियान शुरू किया था. उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाईं, जिन्होंने जवाबी कार्रवाई की और मुठभेड़ शुरू हो गई.

बारामूला में होली के दिन आतंकियों ने यह ग्रेनेड हमला उस वक्त किया जब इलाके में एक तलाशी अभियान चल रहा था. इसके कुछ मिनट बाद ही सोपोर कस्बे में भी आतंकवादियों ने सीआरपीएफ के एक कैंप पर धावा बोल दिया, लेकिन इस ग्रेनेड हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. हमले के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस ने बताया कि कुछ आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सीआरपाएफ और पुलिस ने वारपोरा इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान चलाया.(सौजन्:आजतक डॉट इन)

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने 184 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान गुरुवार को कर दिया. सूचि में उत्तर प्रदेश के उम्मीदवारों पर सबकी नजर टिकी हुई थी जहां बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 28 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की. इस सूची में सबसे ख़ास बात ये रही कि बीजेपी ने एक बार फिर से पश्चिम उत्तर प्रदेश की सियासी जंग फतह के लिए पुराने चेहरों पर फिर से विश्वास जताते हुए उन्हें मैदान में उतरा है..... अगर उम्मीदवारों की बात करें तो यहां बीजेपी ने जाट, राजपूत और वैश्य समुदाय के लोगों को उतार कर जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है. जाट के सामने जाट, वैश्य के सामने वैश्य और दलित के सामने दलित का दांव खेला है.

पश्चिम यूपी में ये हैं बीजेपी के चेहरे

अगर सीटों की बात करें तो पश्चिमी यूपी की मुजफ्फरनगर सीट पर बीजेपी ने संजीव बालियान, बागपत से सत्यपाल सिंह, बिजनौर से कुंवर भारतेन्द्र, सहारनपुर से राघव लखनपाल, मुरादाबाद से कुंवर सर्वेश कुमार, अमरोहा से कंवर सिंह तंवर, मेरठ से राजेंद्र अग्रवाल, गाजियाबाद से वीके सिंह, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) डॉ. महेश शर्मा, अलीगढ़ से सतीश कुमार गौतम, मथुरा से हेमा मालिनी, एटा से राजवीर सिंह, आंवला से धर्मेंद्र कुमार कश्यप, बरेली से संतोष गंगवार और लखीमपुर खीरी से अजय कुमार मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है.

जाट बनाम जाट के बीच लड़ाई

यूपी में जाट लैंड माने जाने वाली मुजफ्फरनगर और बागपत सीट पर बीजेपी का सीधा मुकाबला आरएलडी से है. बागपत सीट पर बीजेपी ने सत्यपाल सिंह को उतारा है तो आरएलडी से चौधरी अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी मैदान में है. ऐसे ही मुजफ्फरनगर सीट से बीजेपी ने संजीव बालियान के सामने आरएलडी के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह सियासी रण में उतरे हैं. इस तरह से इन सीटों पर जाट बनाम जाट के बीच लड़ाई का मैदान बना है. जबकि पिछले चुनाव में बागपत से सत्यपाल सिंह ने मोदी लहर के सहारे बागपत सीट पर जयंत चौधरी के पिता अजित सिंह को मात देकर सांसद बनें और फिर मंत्री. वहीं, मुजफ्फरनगर दंगे के चलते ध्रुवीकरण का फायदा संजीव बालियान को मिला था. इस बार दोनों नेताओं की राह आसान नहीं है, क्योंकि आरएलडी को जहां सपा-बसपा गठबंधन का सियासी फायदा मिल सकता है. वहीं, कांग्रेस ने भी अपना उम्मीदवार नहीं उतारने का ऐलान किया है.

वैश्य बनाम वैश्य की लड़ाई

मेरठ सीट से बीजेपी ने अपने दो बार के सांसद राजेंद्र अग्रवाल पर एक बार फिर दांव लगाया है. जबकि कांग्रेस ने यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास के पुत्र हरेंद्र अग्रवाल को उतारा है. इस तरह वैश्य बनाम वैश्य की लड़ाई बनती दिख रही है. हालांकि सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन ने हाजी याकूब कुरैशी पर दांव लगाया है.

 

राजपूतों पर जताया बड़ा भरोसा

पश्चिम यूपी में जाट ही नहीं बल्कि राजपूत समुदाय भी किंगमेकर की भूमिका में है. यही वजह है कि पश्चिम यूपी में बीजेपी ने जाट के साथ-साथ राजपूतों को भी साधने की कवायद की है. गाजियाबाद से वीके सिंह, बिजनौर से कुंवर भारतेन्दु, मुरादाबाद से कुंवर सर्वेश सिंह और अलीगढ़ से सतीश कुमार गौतम पर दांव लगाया है. हालांकि सूबे के राजनीतिक समीकरण के लिहाज से मौजूदा दौर में राजपूत मतदाता बीजेपी का प्रमुख वोटबैंक है.

ओबीसी को साधने की कवायद

पश्चिम यूपी में ओबीसी मतदाताओं में गुर्जर और सैनी समुदाय निर्णायक भूमिका में हैं. बीजेपी ने गुर्जर समुदाय को साधने के मद्देनजर अमरोहा से कंवर सिंह तंवर पर दांव लगाया है. सैनी और मौर्य मतदाताओं को अपने पाले में जोड़े रखने के लिए संभल सीट से परमेश्वर लाल सैनी और बदायूं से स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य को मैदान में उतारा है. ऐसे ही कश्यप मतदाताओं को साधने के लिए आंवला से धर्मेंद्र कश्यप और कुर्मी वोट के लिए एक बार फिर बरेली से संतोष गंगवार पर पार्टी ने भरोसा जताया है. इसके अलावा लोध समुदाय को अपने पाले में लाने के लिए फिर से एटा सीट से फिर राजवीर सिंह पर दांव खेला है.

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र बीजेपी इस बार कई उलटफेर करने जा रही है..... इसी कड़ी में एक और बड़ी खबर ये आ रही है कि बीजेपी छत्तीसगढ़ में एमसीडी दिल्ली की तर्ज़ पर सभी उम्मीदवारों को बदलने जा रही है...... सूत्रों की मानें तो बीजेपी के अंदरूनी सर्वे में ये सामने आया है कि छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा निराशाजनक प्रदर्शन वहां के सांसदों का रहा है..... पार्टी ने बड़े घन विचार-विमर्श के बाद अब ये फैसला लिया है कि वो छत्तीसगढ़ से सभी उम्मीदवारों को बदल देगी और उनकी जगह नए तथा युवा चेहरों को मौका देगी जो 15-20 साल तक अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर सकें........

साथ ही छातिगढ़ से एक बड़ी खबर और ये भी है की डॉक्टर रमण सिंह के बेटे की जगह उनके पिता यानी कि खुद रमण सिंह चुनाव लड़ सकते हैं........... अब होता क्या है ये तो जल्द ही ओता चल जायेगा लेकिन इतना तय है कि जिस तरह से बीजेपी ये बड़े उलटफेर कर रही है उससे वो अपने नारे party with a difference के नारे को चरित्रार्थ करना चाह रही है.......

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): लोकसभा चुनावों के मद्देनजर बीजेपी संसदीय समिति की बैठक जारी है... इसी बीच सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर ये आ रही है कि काफी समय से प्रधानमंत्री मोदी से नाराज़ चल रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार के पटना साहिब से भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिंह का टिकेट भी काट दिया गया है....... पिछले काफी समय से द्शात्रुघन सिन्हा ने जिस तरह अपनी पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है उसके चलते इस बार उनका टिकेट काट दिया गया है....

सूत्रों की मानें तो पार्टी उनकी जगह केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को मौका दे सकती है..... लेकिन पार्टी के कुछ बड़े नेता रविशंकर की मौजूदगी दिल्ली में चाहते हैं.... क्योंकि रविशंकर प्रसाद को  मोदी ग्रुप में एक बड़े रणनीतिकार के तौर पर देखा जाता है... ऐसे में अगर रवि शंकर प्रसाद चुनाव लड़ते हैं तो वो रणनीति नही तैयार कर पाएंगे........ अगर ऐसी स्थिति पैदा होती है तो फिर पार्टी पटना साहिब से किसी दूसरे बड़े भूमिहार नेता को पटना साहिब से चुनाव में उतार सकती है........ 

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उम्मीदवारों के नामों पर माथापच्ची जारी है..... लेकिन सूत्रों  हवाले से बड़ी खबर ये आ रही है कि भाजपा के वरिष्ठ और दिग्गज़ नेता लाल कृषण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, और शांता कुमार इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने जा रहे हैं.....सूत्रों की मानें तो इसकेलिए पार्टी ने रणनीति तैयार कर ली है......   गौरतलब है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण अडवाणी गुजरात की गांधी नगर सीट से   लड़ते आए हैं लेकिन उनकी बढ़ती उम्र को देखते हुए पार्टी ने ये फैसला लिया है.... उन्हें मनाने की जिम्मेवारी पार्टी ने वरिष्ठ नेता राम लाल को सौंपी है..... सूत्रों की मानें तो आडवाणी की जगह गांधी नगर सीट से  उनके बेटे जयंत आडवाणी या फिर उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी को मौका दिया जा सकता है.......

वहीँ कानपुर से बीजेपी के दूसरे बड़े नेता मुरली मनोहर जोशी का टिकेट भी काट दिया गया है..... जिसके पीछे कई वजहों को माना जा रहा है...... जोशी अभी बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में हैं और उनके चुनाव न लड़ने की सबसे बड़ी वजह उनकी बढ़ती उम्र को ही माना जा रहा है......सूत्रों की मानें तो इसके लिए जोशी को अवगत करवा दिया गया है.... अगर किसी वजह से बात नहीं बनती है तो पार्टी उन्हें राज्य सभा से चुनकर भेज सकती है लेकिन इतना तय है कि जोशी का टिकेट भी कट गया है......

साथ ही बीजेपी के तीसरे बड़े नेता शांता कुमार का टिकेट भी काट दिया है..... शांता कुमार भी बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं औए हिमाचल प्रदेश की काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट से बीजेपी के सांसद हैं..... सूत्रों की मानें तो बीजेपी शांता कुमार की बढ़ती उम्र की वजह से ही उनका टिकेट भी काट रही है.... हालाँकि शांता कुमार पहले ये घोषणा कर चुके थे कि अब वो चुनाव नहीं लड़ेंगे लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आया शांता कुमार का विचार बदला और वो 85 साल का जवान खुद को कहने लगे.... और साथ ही ये भी कहा कि अगर पार्टी चाहेगी तो वो चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं...... लेकिन अब पार्टी ने ये साफ़ कर दिया है कि वो 85 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को रिटायर करने के मूड में हैं.... सूत्रों की मानें तो शांता कुमार की जगह पार्टी यहां से किसी महिला उम्मीदवार या फिर किसी गद्दी समुदाय के उम्मीदवार को मौका दे सकती है........

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): ममता बनर्जी ने जब कोलकाता में विपक्ष की रैल्ली की तो ये सवाल उठा कि क्या अब ममता महागठबंधन की सर्वसम्मत नेता हो गई हैं... कम से कम उन्होंने इतना तो दर्शा दिया कि उनके नाम कके नीचे करीब 20 दलों के नेता इक्कट्ठे हो सकते हैं..... लेकिन रैली में शरद यादव की जुबान ऐसी फिसली कि वो चर्चचा का विषय बन गई.... अब इस मुद्दे पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चुटकी ली है.....  मोदी ने कहा कि आखिर सच्चाई कब तक छुपती, कभी न कभी तो सच बाहर आ ही जाता है...... दरअसल, ममता की रैली में जनता को संबोधित करने आए शरद यादव बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रहे थे, तभी उनकी जुबान फिसल गई और वह राफेल घोटाले की जगह बोफोर्स घोटाले पर ही बोलने लगे. हालांकि, तुरंत बाद उन्होंने इस सफाई दी और कहा कि माफ कीजिए मैं राफेल की बात कर रहा था. मोदी ने तंज कसते हुए कहा कहा कि 'जिस मंच से ये लोग देश और लोकतंत्र को बचाने की बात कह रहे थे, उसी मंच पर एक नेता ने बोफोर्स घोटाले की याद दिला दी. आखिर सच्चाई कब तक छुपती है. कभी न कभी तो सच बाहर आ ही जाता है, जो कल कोलकाता में हुआ.' हालांकि, पीएम मोदी ने सीधे तौर पर शरद यादव का नाम नहीं लिया. बता दें कि पीएम मोदी 'मोदी ऐप्प' के जरिये महाराष्ट्र और गोवा के बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे. 

 

ईवीएम को अभी से ही विलेन बनाया जा रहा: पीएम मोदी


पीएम मोदी ने इस दौरान कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा. पीएम मोदी ने कहा कि '2019 में हार के लिए वे अभी से ही बहाने बनाने शुरू कर दिए हैं. ईवीएम को विलेन बनाया जा रहा है. यह स्वाभाविक है क्योंकि सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतना चाहती है, मगर यह चिंताजनक है जब कुछ पार्टियां जनता को फॉर ग्रांटेड ले लेते हैं. वे जनता को मूर्ख समझते हैं और अपना रंग बदलते रहते हैं.'

उनके पास धनशक्ति, हमारे पास जनशक्ति: पीएम मोदी


आगे उन्होंने कहा कि 'एक दूसरे के साथ उन्होंने गठबंधन किया है. हमने देश की 125 करोड़ जनता के साथ गठबंधन किया है. आपको क्या लगता है कौन सा गठबंधन मजबूत है? कोलकाता रैली के मंच पर जितने भी नेता थे, उनमें से अधिकतर प्रभावशाली लोगों के थे या फिर वे अपने बच्चों को राजनीति में सेट करने की कोशिश कर रहे हैं. उनके पास धनशक्ति है, हमारे पास जनशक्ति है.'

 

विधायक और प्रशासन मस्त, जनता कर रही त्राहि-त्राहि, ठेकेदार और आला अफसरों की मिलीभगत से सरकार को लगा करोड़ों का चूना.....!

 

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): हम आज़ाद हैं...आजादखयाल हैं और अपनी इस आज़ादी के महत्व को समझते हैं.... सरकार की अहमियत को समझते हैं अपने अधिकारों और कर्तव्यों दोनों को लेकर सजग हैं.... कहीं कुछ गलत हो रहा हो तो अपनी आवाज़ भी उठाते हैं... लेकिन अगर आवाज़ उठाई जाए फिर भी समस्या न सुलझाया जाए, आपकी आवाज़ को अनसुना करके आपको डराया और धमकाया जाए.... सरकार और स्थानीय नेता, एमएलए अपने मस्त रहें और जनता त्राहि-त्राहि करे तो क्या वाकई हम अपने आप को आज़ाद कह पायेंगे..... ऐसा ही कुछ हो रहा है हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ तहसील के जमरेला  वासियों के साथ..... ये लोग आज काला पानी की सजा काटने को मजबूर हैं.... और ऐसी घटनाएं ही सवालिया निशाँ खड़ा करती हैं उन सरकारों के ऊपर जो सबका साथ-सबका विकास करने की बातें करती हैं.... 

कहानी शुरू होती है हिमाचल प्रदेश की बैजनाथ तहसील के जमरेला गांव से....बल्कि ये कहानी नहीं हकीकत है जमरेला गांव की जो सुविधाओं के नाम पर काला पानी से किसी भी अंदाज़ में कम नहीं है.... यहां के लोग भोले-भाले और सीधे साधे हैं..... वोट तो नेता आकर ले जाते हैं पर इस गांव में सुविधाओं के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिलते हैं.... फिर शायद इस गांव की याद उन्हें अगले चुनाव में ही आती है.... आज इस गांव में सड़क तक नहीं है... जो कच्ची सड़क बनी थी वो भी पिछली बरसात में बह गई.... सम्पर्क पूरे क्षेत्र से टूट गया है.... बड़े लोग तो फिर भी किसी तरह अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करके अपने काम पर पहुँच रहे हैं, लेकिन बच्चे स्कूल तक नहीं जा पा  रहे हैं...... कहने के लिए तो एक बांस का छोटा सा पुल जिसे स्थानीय भाषा में त्रगड़ी कहते हैं वो बना दिया गया है लेकिन सुबह के वक़्त जैसे ही उस पुल पर ओस पड़ती है तो फिसलन से कई बार हादसे हो जाते हैं और जान जाते जाते बचती है.... पर किसी को परवाह नहीं है..... शिकायतें स्थानीय विधायक से बार बार की गई लेकिन असर निल्ल वटे सन्नाटा ही नजर आया है...स्थानीय लोगों की मानें तो विधायक को उनके गांव की याद बस चुनाव में आती है.... उसके बाद उन्होंने इस गांव को भुला ही दिया है... शिकायत करने जाओ तो केवल आश्वासन ही मिलते हैं.... काम होता नहीं...... कह सकते हैं कि सरकार और स्थानीय अधिकारी अपने कमरों में मस्त हैं और जनता त्रस्त है....जिस सरकार की प्राथमिकता सबका विकास की हो उसके राज में अगर हालत ऐसे हों तो वाकई घटना दुखद है...... .यानी सरकार का सबका साथ सबका विकास का नारा यहाँ पूरी तरह से फेल ही नजर आता है.....

ठेकेदार और स्थानीय प्रशासन गांव की बदहाली के जिम्मेवार, करोड़ो का हुआ घोटाला.....

आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क ने जब स्थानीय लोगों से बात की तो पता चला कि ऐसा नहीं है कि सड़क इस गांव में नहीं थी... सरकार ने करोड़ों रूपए खर्च करके सड़क तो बनाई लेकिन जिस तरह से वो सडक बनी वो कागजों पर ज्यादा थी और ज़मीन पर कम.... पुल भी बनाया गया लेकिन वो भी कागजों पर ज्यादा मजबूत था धरातल पर कम.... पिछली बरसात का पानी धरातल पर बनी सडक और पुल को बहा ले गया लेकिन कागजों पर आज भी ये सड़क और पुल मजबूत हैं.... यानी जाहिर तौर पर इसकी जांच कराए जाने की आवश्यकता है क्योंकि इतनी शिकायतों के बाद भी अगर समस्या का निपटारा नहीं हो पा रहा तो कहीं दाल में कुछ काला तो जरुर है... स्थानीय लोगों की मानें तो ठेकेदार ने सड़क बनाते वक़्त सारे नियम क़ानून को टाक पर रखकर काम किया... बात बात पर अपनी ऊँची पहुंच की धौंस जमाता था.... और अगर फिर भी बात न बने तो डराना धमकाना और उंची पहुंच का हवाला देना उसके लिए आम बात थी......

 

कांग्रेस सरकार के कारनामों की सजा भुगत रहे हैं जमरेलावासी, हमारी सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर, जल्द होगा समाधान: मुल्ख राज प्रेमी(स्थानीय विधायक)

जब आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क ने इस मुद्दे को लेकर स्थानीय विधायक से बात की तो उन्होंने इसका ठीकरा पिछली सरकार के सर पर फोड़ते हुए कहा कि जमरेला वासीयों की इस तकलीफ की वजह पिछली कांग्रेस सरकार है.... उन्होंने जो पुल बनाया उसकी ड्राइंग तक ढंग से तैयार नहीं की गई थी.... हमनें सत्ता में आते ही जमरेला के लिए सड़क को ढंग से तैयार करवाया और वहां पर सुचारू रूप से बसें भी चलना शुरू हो गई थीं... लेकिन बरसात में पुल बह गया और ज्यादा बरसात होने के कारण सड़क भी जगह-जगह से टूट गई है.... लेकिन उन्होंने इस समस्या के निदान से मुख्यमंत्री से बात की है और जल्द ही सरकार जमरेला वासियों को मुख्यधारा में वापिस ले आएगी......

अब उम्मीद केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से.....

स्थानीय लोगों की मानें तो गांव को मुख्य धारा में जोड़ने के लिए उन्होंने अपनी तरफ से साड़ी कोशिशें करके देख ली हैं... स्थानीय अधिकारियों से लेकर एमएलए तक की चौखट पर वो कई बार अपनी नाक रगड़कर थक गये हैं.... पर सबने जैसे अपने कानों में रुई डाल रखी है.... भैंस के आगे जितनी मर्ज़ी बीन बजाओ कुछ असर ही नहीं होता..... अब उम्मीद केवल देश के प्रधानमंत्री मोदी से बची हुई हैं.... वो ही उनका कुछ भला कर सकते हैं.... हिमाचल की सरकार ने तो उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया है.....

 

 

 

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