Items filtered by date: Monday, 22 January 2018

आवाज़(विशाल चौधरी, कैथल): हरियाणा में लगातार हो रही रेप की घटनाओं और डोकलाम में एक बार फिर चीनी सैनिकों की घुसपैठ पर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी व कैथल से विधायक रणदीप सुरजेवाला ने बयान जारी कर मोदी सरकार पर 7 सवाल दागे। उन्होंने कहा कि जो सैटेलाइट इमेज सामने आई हैं क्या इस बात की जानकारी सरकार के पास है? क्या पीएम मोदी इस बात को स्वीकारेंगे कि डोकलाम पर नया खतरा खड़ा हुआ है? 

सुरजेवाला के मोदी सरकार से 7 बड़े सवाल
 
1. क्या मोदी सरकार और रक्षा मंत्रालय को जानकारी है कि डोकलाम पर चीन ने कब्जा कर लिया है ? (सैटेलाइट इमेज के मुताबिक)
 
2. चीन ने डोकलाम में जो मौजूदा स्थिति पैदा की है क्या वो 28 अगस्त, 2017 की विदेश मंत्रालय के भारत-चीन समझौते के मुताबिक है ?
 
3. डोकलाम में trijunction का मसला भविष्य में कैसे हाल होगा ?
 
4. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 1.3 किमी अंदर रोड बनाया है। क्या ये सही है?
 
5. क्या नरेंद्र मोदी ये स्वीकार करेंगे कि नया खतरा डोकलाम मसले पर खड़ा हो गया है?
 
6. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि मसले को बातचीत से हल किया जाएगा। डोकलाम में नया घटनाक्रम क्या उल्लंघन नहीं?
 
7. अपने दावे के मुताबिक मोदी सरकार ने घुसपैठ रोकने के लिए अबतक क्या किया है?
 
इन सवालों के अलावा भी सुरजेवाला ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला. साथ ही उन्होंने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को आड़े हाथे लेते हुए कहा कि ओवैसी बीजेपी की बी टीम का हिस्सा हैं, वह बीजेपी का विघटनकारी एजेंडा आगे बढ़ाते हैं। इसलिए उनके बयानों को देशहित में नहीं दिखाया जाए। सुरजेवाला यहीं नहीं रुके उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आदित्यनाथ विकास के नाम पर ग्रहण, मुख्यमंत्री की नाक के नीचे ऑक्सीजन का पेमेंट ना होने से बच्चे मर जाते हैं। दलितों के मकानों को आग लगा दी जाए और सीएम चुप रहते हैं। दलितों को नहलाकर और इत्र लगवाकर वो मिलते हैं। उनका शासन कुशासन बन चुका है, उनके शब्दों के कोई मायने नहीं।
 
हरियाणा गैंगरेप पर भी सवाल
 
उन्होंने कहा कि आज भी हरियाणा के फतेहाबाद में गैंग रेप की घटना सामने आई, मुख्यमंत्री सिर्फ लिप सर्विस कर रहे हैं। उनकी सरकार दिल्ली बैठकर हरियाणा चलाना चाहती है, मुख्यमंत्री को बीजेपी अध्यक्ष और केंद्र के नेताओं के दिल्ली में फेरे लगाने से फुर्सत नहीं है। सिर्फ कुछ अधिकारियों के तबादले से रेप नहीं रुकने वाले हैं। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि गैंगरेप में हरियाणा सरकारी आकंड़ों में नंबर एक पर है। इसके लिए अकेले खट्टर सरकार ही नहीं केंद्र भी ज़िम्मेदार है क्योंकि अपराधी हरियाणा- दिल्ली बॉर्डर का इस्तेमाल करते हैं। पीएम जागें और अपनी सरकार को कड़े एक्शन लेने को कहें।
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आवाज (कृष्ण कुमार, नारनौल): हरियाणा कांग्रेस आजकल सूबे की सरकार पर पूरी तरह हमलावर है. कांग्रेस के सूबे के सभी बड़े नेता जगह-जगह रैली कर रहे हैं. सरकार को घेर रहे हैं और ये कह रहे हैं कि सरकार पूरी तरह से नाकाम है ऐसा लग रहा है मानों चुनाव आने ही वाले हैं. मतलब साफ़ है कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही. ऐसा ही कुछ देखने को मिला नारनौल में जहाँ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित संघर्ष रैली में हरियाणा विधायक दल की नेता किरण चौधरी पहुंची और सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा में दिनों दिन बढ़ रही  बलात्कार की घटनाएं पर अंकुश लगाने में हरियाणा की खट्टर सरकार नाकाम साबित हुई है. एक तरफ हरियाणा सरकार व केंद्र सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चला रखा है दूसरी तरफ हरियाणा में बेटियों के साथ दिनों दिन बलात्कार की घटनाएं सामने आ रही है इससे यह साबित होता है कि सूबे में अपराधी कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं और सरकार तमाशगीन बनी हुई है.
 
बहरहाल इतना तो तय है कि कांग्रेस 2019 के चुनाव के लिए अभी से पूरी तरह से कमर कास चुकी है और एक सधी हुई रणनीति के तहत काम कर रही है. हालांकि लड़ाई दोहरी है क्योंकि कांग्रेस हरियाणा में गुटबाजी का शिकार है. उन्हें एक तरफ तो मतदाताओं के सामने बीजेपी सरकार को नाकाम साबित करना है तो वहीँ दूसरी तरफ पार्टी में अपनी साख तो भी बनाये रखना है. अब वो इसमें कितने कामयाब हो पाते हैं ये तो वक़्त ही बतायेगा लेकिन इतना तय है कि लड़ाई दिलचस्प हो चली है आने वाले वक़्त में सत्ता पक्ष और विपक्ष में तकरार और तीखी होगी.
 
 
 
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आवाज़(मुकेश शर्मा, गुरुग्राम): बड़ी पुराणी कहावत है कि सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं, यानी आप उसको कितना भी छुपाओ वो अपने आप बहार आ ही जाता है. कुछ ऐसे ही अधिकारी हैं IAS  आशोक खेमका. सरकार चाहे कोई भी हो, इंसान चाहे कितना भी शक्तिशाली हो, आशोक खेमका कभी किसी के दवाब में नहीं आते और वही करते हैं जो उचित हो. शायद यही वजह है कि सूबे कि बीजेपी सरकार में भी उन्हें तबादलों का दंश झेलना पड़ा. लेकिन वो उदास नहीं हुए और चुपचाप अपना काम करते रहे. अब हरियाणा के ये IAS अधिकारी और खेल महकमे के प्रमुख सचिव अशोक खेमका एक बार फिर अपने मास्टरस्ट्रोक से चर्चा में है.  इस पर उन्होंने राज्य में सरकारी आयोजन पर हुए करोड़ों के खर्च का हिसाब-किताब मांगकर अफसरों को परेशान कर दिया है, जिन्होंने लंबा-चौड़ा बिल भुगतान के लिए लगाया है. लेकिन इस बार ख़ास बात ये है कि इस बार उन्हें सरकार का भी साथ मिला है. अपनी वेबाकी के लिए जाने जाने वाले खेल मंत्री अनिल विज ने कहा है कि खेमका जो कर रहे हैं, वो उचित है, बिना पक्का बिल के धनराशि नहीं जारी हो सकती. यानी दो शूरमा साथ हो गये हैं जिनसे पार पाना इस बार किसी के लिए आसान नहीं होने वाला है.

आखिर कौन हैं आशोक खेमका.....

आशोक खेमका ता दें कि अशोक खेमका राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में तब आए थे, जब उन्होने 2012 में रॉबर्ड वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुए भूमि सौदे को रद्द कर दिया था. उस समय खेमका हरियाणा के राजस्व विभाग में थे. बीजेपी ने इसी रिपोर्ट को चुनावों में भी बड़ा मुद्दा बनाया था और कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का इलज़ाम लगाया था. खैर खेमका जिस भी विभाग में रहे, उस विभाग के मंत्री और भ्रष्ट अफसरों से कभी नहीं पटी. यही वजह रही कि उन्हें हर बार तबादले झेलने पड़े. पिछले साल नवंबर में उनका 51 वीं बार ट्रांसफर हुआ था, जिसकी जानकारी उन्होंने खुद ट्विटर पर सभी से साझा की थी.

आखिर इस बार क्या है पूरा मामला......

दरअसल मामला स्वर्ण जयंती समारोह के आयोजन से जुड़ा हुआ है. हर जिले को हरियाणा सरकार ने 54-54 लाख रुपये दिए थे. मगर, जिलों के उपायुक्तों ने एक से डेढ़ करोड़ रुपये के खर्च का लंबा-चौड़ा बिल-बाउचर लगाकर भुगतान के लिए सचिवालय भेजा है. इस आयोजन का नोडल खेल विभाग को बनाया गया था. विभाग के आईएएस अफसर अशोक खेमका ने सभी जिला उपायुक्तों से साफ कह दिया है कि जितनी धनराशि खर्च के लिए तय थी, उससे एक रुपये अधिक नहीं मिलेगी. इसके लिए कोई सोर्स-सिफारिश नहीं चलेगी. जब खेमका ने भुगतान से जुड़ी फाइलों पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया तो अफसरों के चेहरे लटक गए. सूत्र बताते हैं कि कई जिलों में कंसल्टेंट नियुक्त कर 80 से 90 लाख रुपये दे दिए गए. इस पर मुख्य सचिव की बैठक में भी खेमका ने सवाल उठाते हुए कहा था कि आयोजन में कंसल्टेंट नियुक्त करने की क्या जरूरत थी. खेल विभाग ने आयोजन के लिए 22 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे, मगर जिलों से 11 करोड़ और रुपये मांगे गए. यह देखकर विभाग के प्रमुख सचिव अशोक खेमका ने सबसे स्टेटमेंट आफ एक्सपेंडीचर मांग लिया. गौरतलब है कि हरियाणा की स्थापना के 50 साल पूरे होने पर सभी जिलों में स्वर्ण जयंती समारोह हुए थे.(इनपुट:जनसत्ता)

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