राजस्थान: कांग्रेस के 80 उम्मीदवार तय, टिकेट देते वक़्त जातीय समीकरणों का भी रखा ध्यान, गहलोत और गिरिजा व्यास भी लड़ेंगे चुनाव.......

31 Oct 2018
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आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी-कांग्रेस के बीच छिड़ी जंग अपने आखिरी दौर में है....इसी के मद्देनजर कांग्रेस ने लम्बी प्रक्रिया के बाद 80 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं...... उम्मीदवारों के नामों पर नज़र डालें तो इसमें ख़ास बात ये है कि कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में जगह बनाने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी चुनाव लड़ेंगे. इसी के साथ इस तरह की चर्चा पर विराम लग गया है जिसमें कहा जा रहा था कि गहलोत अब प्रदेश की राजनीति नहीं करेंगे.   

अशोक गहलोत और गिरिजा व्यास का नाम आने से सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने की अटकलों को लगा झटका......

राजनितिक पंडितों की मानें तो पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रस के संगठन महासचिव अशोक गहलोत अपनी पारंपरिक सीट जोधपुर के सरदारपुरा से चुनाव लड़ेंगे. जो निश्चित तौर पर सचिन पायलट के मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पर एक झटका है..... सूत्रों की मानें तो कांग्रेस हाई-कमान ने ये कदम उठाकर एक तीर से कई निशाने किये हैं..... कांग्रेस के इस कदम से जहां विभिन्न गुटों में बंटी कांग्रेस अब एकसाथ मिलकर चुनाव लड़ने पर विवश होगी... वहीँ सब वरिष्ठ लोगों को ये दिशानिर्देश भी दिया गया है कि जो ज्यादा विधायक जितवाकर लायेगा पार्टी उसीको मुख्यमंत्री के पद पर बिठाएगी...... साथ ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता गिरिजा व्यास का नाम उदयपुर शहर से तय माना जा रहा है. वहीं भरतपुर जिले की डीग-कुम्हेर सीट से मौजूदा विधायक विश्वेंद्र सिंह का नाम तय है. साथ ही पूर्व राज्यसभा सांसद नरेंद्र बुडानिया का नाम चुरू के तारानगर विधानसभा सीट से तय है, जबकि पूर्व विधायक जाकिर हुसैन का नाम नागौर जिले की मकराना विधानसभा से तय हुआ है.

गौरतलब है कि सरदारपुरा विधानसभा अशोक गहलोत की परंपरागत सीट रही है. 1998 में जब गहलोत मुख्यमंत्री बने तो वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़े थे. इसीलिए सरदारपुरा से विधायक मानसिंह देवड़ा ने उनके लिए सीट खाली कर दी. जिसके बाद हुए उपचुनाव में जीत के बाद से गहलोत लगातार इस सीट से विधायक हैं. सूत्रों के अनुसार उदयपुर लोकसभा का तीन बार प्रतिनिधित्व करने वाली वरिष्ठ कांग्रेस नेता गिरिजा व्यास उदयपुर शहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी. इस सीट पर उनका मुकाबला बीजेपी के कद्दावर नेता और वसुंधरा सरकार में मंत्री गुलाब चंद कटारिया से होगा. कटारिया पिछली तीन बार से इस सीट से विधायक हैं.

 

डीग-कुम्हेर से विश्वेंद्र पर भरोसा

वहीं, विश्वेंद्र सिंह के बारे में बात करें तो 2013 की प्रचंड सत्ताविरोधी लहर में भरतपुर जिले की सात सीटों में से जो एकमात्र सीट कांग्रेस के खाते में आई थी वो डीग-कुम्हेर ही थी. हालांकि, इसके बाद कांग्रेस ने उपचुनाव में जिले की एक और सीट जीती. लिहाजा डीग-कुम्हेर सीट पर कांग्रेस ने अपने सबसे मजबूत चेहरे पर भरोसा किया है.

200 विधानसभा सीटों पर क्या है गणित?

आपको बता दें कि राजस्थान की सभी 200 विधानसभा सीटों पर एक चरण में 7 दिसंबर को मतदान होना है. जबकि नतीजे 11 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे. साल 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 163 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. जबकि कांग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई. बसपा को 3, NPP को 4, NUZP को 2 सीटें मिली थीं. जबकि 7 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे.

 

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