राजस्‍थान उप-चुनाव में करारी हार के साइड इफ़ेक्ट : बीजेपी नेता ने लिखी अमित शाह को चिट्ठी में की नेत्रित्व परिवर्तन की मांग........

05 Feb 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): राजस्थान में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सत्ताधारी भाजपा की करारी हार का असर दिखने लगा है. हार का ठीकरा सूबे कि मुझ्य्मंत्री बसुन्धरा राजे के सर फोड़ा जा रहा है. यानी बसुन्धरा के लिए मुश्किलें खड़ी होने लगीं हैं.पिछले काफ़ी सालों से राजस्थान की पार्टी इकाई के अंदर पनप रहा असंतोष अब खुलकर बाहर सामने आने लगा है. इतना ही नहीं नाराज़गी अकेले बसुन्धरा से ही नहीं है बल्कि बसुन्धरा के साथ प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी को भी हटाने की मांग हो रही है.

हार का ठीकरा बसुन्धरा और परनामी के सर फोड़ते हुए कोटा जिला ओबीसी सेल के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को एक पत्र लिखा है. सूत्रों कि मानें तो उन्होंने इसमे मुख्यमंत्री पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए कहा है- ‘‘वसुंधरा ने पार्टी को हार के मोड़ पर लाकर खड़ा किया है. सूबे में हर वर्ग के अंदर आक्रोश पनप रहा है, कार्यकर्ता सूबे के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव चाहते है.”  अशोक चौधरी ने पत्र में वसुंधरा राजे और अशोक परनामी का नाम लिखकर उनके इस्तीफे की मांग की है. इतना ही नहीं उन्होंने इसमें लिखा है कि अगर जल्द ही नेत्रित्व परिवर्तन न किया गया तो आने वाले विधानसभा चुनाव में इसके नतीज़े के प्रति भी बीजेपी अध्यक्ष को आगाह किया गया है. सियासी हलके में इस पत्र को काफ़ी गंभीरता से लिया जा रहा है.

यानी कहा जा सकता है कि हार कि बाद लिखे गये इस पत्र कि वजह से एक बार फिर पार्टी के अंदर बगावत की भी बू आने लगी है. गौरतलब है कि वसुंधरा सरकार के खिलाफ पहले से ही पार्टी के विधायक घनश्याम तिवाड़ी मोर्चा खोले हुए हैं. ऐसे में अब जिस तरह से संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने भी वसुंधरा के खिलाफ भड़ास निकालनी शुरू की है, उससे मुख्यमंत्री खेमे में हलचल है.लेकिन सूत्रों कि मानें तो ऐसा करने में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को काफ़ी दिक्कतें आएँगी और अभी वो इस हालत में नहीं हैं कि एकदम से राजस्थान में नेत्रित्व परिवर्तन किया जा सके. क्योंकि ज्यादातर विधायक अभी भी वसुंधरा के पक्ष में ही खड़े दिख रहे हैं और पार्टी इस वक़्त कोई भीऐसा कदम नहीं उठा सकती जिसकी वजह से ये हलकी चिंगारी आग का रूप धारण कर ले और आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका खामियाज़ा भुगते.

गौरतलब है कि राजस्थान में साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में तीन सीटों में करारी हार को बड़ा झटका माना जा रहा है. क्योंकि अगर हार-जीत के वोटों के अंतर पर नजर डालें तो अजमेर लोकसभा सीट पर ये अंतर 85 हजार, अलवर लोकसभा सीट पर दो लाख वोटों से कांग्रेस प्रत्याशी ने भाजपा उम्मीदवार को हराया वहीं एकमात्र मांडलगढ़ विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 13 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा. जबकि ये तीनों सीटें पहले भाजपा के कब्जे में थीं, मगर जनप्रतिनिधियों के निधन के बाद खाली हुईं थीं.

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