आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): दिनोंदिन बढ़ते पेट्रोल-डीज़ल के दामों ने भले ही आम आदमी(आम नागरिक) की नींद उड़ा रखी हो लेकिन सरकार के कान तले जूं रेंगती नजर नहीं आ रही है और फिलहाल इन बढ़ते दामों से राहत मिलने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं. आज सरकार ने लगातार 11 वें दिन भी पेट्रोल-डीज़ल के दामों में बढ़ोतरी की. दिल्ली में पेट्रोल की वर्तमान कीमत 76.87 प्रति लीटर है जबकि डीज़ल की कीमत 68.08 रूपए प्रति लीटर है. ऐसे में आम आदमी कैसे गुज़ारा करे उसे समझ नहीं आ रहा है. वहीँ सरकार की तरफ से साफतौर पर ये इशारा कर दिया गया है कि पेट्रोल डीज़ल के दाम कम नहीं किये जा सकते.

इंडियन एक्सप्रेस की मानें तो इस मामले में जब केन्द्रीय मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता नितिन गडकरी से पूछा तो उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि पेट्रोल डीज़ल के दाम कम नहीं किये जा सकते क्योंकि ये सीधे-सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ मामला है. ये न टाली जा सकने वाली स्थिति है. अगर हम महंगे दामों पर पेट्रोल डीज़ल खरीदते हैं और फिर उसे सस्ता बेचते हैं तो उसपर हमें सब्सिडी देनी पड़ेगी जिसका सीधा असर सरकार की समाज कल्याण की योजनाओं पर पड़ेगा.

गडकरी ने साफ़ कहा कि पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा कीमतों पर सब्सिडी देने के लिए हमें सिंचाई योजनाओं, फ्री एलपीजी देने वाली उज्ज्वला योजना, ग्रामीण विद्युतीकरण, लोन के लिए मुद्रा योजना जैसी कई योजनाओं को बंद करना पड़ेगा. गडकरी ने आगे कहा की हम 10 करोड़ परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना पर काम कर रहे हैं. फसल बीमा योजना पर काम चल रहा है. हमारे पास साधन सीमित हैं.अगर आइसे में हमने पेट्रोल-डीज़ल के दामों पर सब्सिडी देनी पड़ी तो सब गड़बड़ हो जाएगा.

वहीं जब नितिन गडकरी से सवाल किया गया कि पेट्रोलियम उत्पादों में टैक्स कटौती करके भी जनता को राहत दी जा सकती है तो उन्होंने कहा कि ये हमारी अर्थव्यवस्था की नीव है. अगर इस बारे में फैसला लिया जाता है तो ये हमारे वित्त मंत्री तय करेंगे. वैकल्पिक इंधन के इस्तेमाल के सवाल पर गड़करी ने कहा कि सरकार मेथनॉल, इथेनॉल, बायो-डीज़ल, इ-वाहन जैसी योजनाओं पर तेज़ी से काम कर रही है. साथ ही ये सारे विकल्प सस्ते और प्रदूषण-मुक्त भी हैं.

देश में बढती तेल कीमतों पर बोलते हुए गड़करी ने कहा कि हम अपनी जरुरत का केवल 30 फीसदी ही खनन कर पाते हैं जबकि बाकी का 70 फीसदी हमें आयात करना पड़ता है. इसलिए हम आयात कीमतों को कम करने में लगे हुए हैं. हम दुनिया में कई जगह तेल क्षेत्रों के अधिग्रहण योजना पर भी काम कर रहे हैं. जैसा हमने अभी रूस के साथ किया है. लेकिन स्वाभाविक बात है कि 70 फीसदी आयात की जाने वाली वस्तु की पूर्ति करने के लिए पैसे नहीं हैं.

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली):  आतंक के मुद्दे पर पाकिस्तान पूरे विश्व में अकेला पड़ चुका चूका है, जिसके कारण न केवल उसे चारों तरफ किरकिरी झेलनी पड़ती है बल्कि अपने गृह पाकिस्तान में भी कई ऐसी वादातें होती हैं जिनके कारन जानो-माल का नुक्सान होता है. लेकिन अब तक पाकिस्तान केवल इस कारन अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बाख जाता था क्योंकि उसका घनिष्ठ मित्र चीन[पूरी दुनिया के आगे पाकिस्तान को बचाने के लिए खडा हो जाता है. लेकिन अब आतंक के मुद्दे पर चौतरफा घिरे पाकिस्तान को एक बड़ा झटका लगा है. सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि पाकिस्तान को बचाने वाले चीन ने भी अब अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं.

दरअसल चीन ने पाकिस्तान को सलाह दी है कि वो मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफ़िज़ सईद को पाकिस्तान के बाहर कहीं भेज दे. क्योंकि हाफ़िज़ सईद के कारण पाकिस्तान की पूरे विश्व में किरकिरी हो रही है. सूत्रों की मानें तो ये सलाह खुद चीन के राष्ट्रपति सही-जिन-पिंग ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अब्बासी को दी है. जिन पिंग ने पिछले महीने बोआओ फोरम फॉर एशिया सम्मेलन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी से करीब 35 मिनट मुलाकात की जिसमे उन्होंने कम से कम 10 बार पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से कहा की वो सईद को पश्चिम एशियाई देशों में अपनी बाकी की जिंदगी जीने के लिए अनुमति दें.

"द हिन्दू" की मानें तो  चीन ने पाकिस्तान पर ये दवाब बनाया है कि वो सईद की चमक-दमक और दिमागी सोच से दुनिया को दूर रखे. वहीँ रिपोर्ट के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति की इस सलाह के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर अपनी टीम से कानूनी सलाह मांगी है. हालांकि इस मुद्दे का अभी तक कोई समाधान नहीं निकला जा सका है और ऐसा माना जा रहा है कि मौजूदा सरकार में इसका कोई समाधान हो भी नहीं पायेगा क्योंकि एक तो पूरे देश में ये चुनावी मुद्दा बन जाएगा साथ ही पाकिस्तान की मौजूदा सरकार का कार्यकाल इस साल 31 मई को पूरा हो रहा है जबकि अगली सरकार के गठन के लिए चुनाव जुलाई के अंत तक होंगे.

वहीँ जमात-उद-दावा ने पाकिस्तान पर अमेरिका और भारत के दवाब में आकर सईद के खिलाफ कार्यवाही करने का आरोप लगाया है. लेकिन संगठन प्रमुख हाफ़िज़ सईद ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया है कि पाकिस्तान चीन के दव्वाब में आकर उसे देश से बाहर भेजने की तैयारी कर रहा है. हालांकि उसने इतना तो माना कि चीन इस मुद्दे पर सुपर-रोले तो अदा करेगा लेकिन वो उसके साथ इस तरह का व्यवहार करेगा इसपर उसे संदेह है.

गौरतलब है कि सयुंक्त राष्ट्र, अमेरिका और भारत ने हाफ़िज़ सईद को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर राका है और उसके सर पर 50 लाख डॉलर का इनाम है. हालांकि  वैश्विक दवाब के बाद पाकिस्तान ने उसे घर में नजरबंद रखा लेकिन पाकिस्तान में ही बढ़ते दवाब के बाद उसे वहां की सरकार ने रिहा कर दिया. लेकिन अब जब चीन ने इस आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को लताड़ा है और हाफ़िज़ सईद को पाकिस्तान से निकलने को कहा है तो ये पाकिस्तान के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है.

माना जा रहा है कि चीन के इसकदम का असर पूरे पाकिस्तान पर दिखेगा. ऐसे समय में जब पूरा विश्व पाकिस्तान से किनारा कर चूका है उस समय चीन ही एकमात्र उसका दोस्त बचा हुआ था. लेकिन अब उसने भी पाकिस्तान से किनारा कर लिया है तो पाकिस्तान के लिए ये एक बुरी खबर है. माना जा रहा है कि चीन का ये कदम प्रधानमंत्री के पिछले चीन दौरे में हुए वार्तालाप के बाद उठाया गया है. इसे भारत की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है. जानकारों की मानें तो हाफ़िज़ सईद के दिन अब लद चुके हैं और अब उसे अपनी सलामती की दुआ मनानी चाहिए, क्योंकि उसके पाप का घड़ा अब भर चुका है. अबन तो वह पाकिस्तान के काम का रह गया है और अमेरिका और भारत उसके पीछे हाथ धोकर पड़े हुए हैं. ऐसे में चीन की पाकिस्तान को दो-टूक अपने आप में बहुत कुछ कहती है. जानकारों की मानें तो चीन के इस कदम के बाद भारत का मंसूबा हाफ़िज़ सईद को भारत लाकर उसे मुंबई हमलों का दोषी करार देते हुए सज़ा देना है. अब वाकई ऐसा हो पता है या नहीं ये तो देखने वाली बात होगी लेकिन इतना तय है कि सईद के बुरे दिनों की शुरुआत हो चुकी है और अब वो किस अंजाम तक पहुँचती है ये देखने वाली बात होगी.....

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली):   तकरीबन 10 साल में पूरा हुआ किशनगंगा हाइड्रो प्रोजेक्ट भारत और पाकिस्तान के बीच काफी वक्त से मतभेद का कारण बना हुआ है.  पर‍ियोजना के उद्घाटन के बाद पाकिस्‍तान ने वर्ल्‍ड बैंक से श‍िकायत की थी. लेकिन ताज़ा खबर ये है कि इस मामले में पाकिस्तान को वर्ल्ड बैंक से तगड़ा झटका लगा है. जहाँ पाकिस्तान ने 1960 के सिंधु जल समझौते का हवाला देते हुए भारत पर इसके उल्लंघन का आरोप लगाया था और विश्व बैंक से इस प्रोजेक्ट पर निगरानी रखने को कहा था. साथ ही ये अपील भी  की थी कि वर्ल्‍ड बैंक इस प्रोजेक्‍ट में गारंटर की भूमिका निभाए. हालांकि इस पर वर्ल्‍ड बैंक, पाकिस्‍तान और भारत के अध‍िकारियों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी.वहीँ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मई को किशनगंगा हाइड्रो प्रोजेक्ट का उद्घाटन कर द‍िया है. 

दरअसल 330 मेगावॉट क्षमता वाली किशनगंगा परियोजना नियंत्रण रेखा से महज दस किलोमीटर की दूरी पर है. जहां यह परियोजना स्थित है वह इलाका साल भर में छह महीनों के लिए राज्य के बाकी हिस्सों से कटा रहता है. नीलम नदी, जिसका एक नाम किशनगंगा भी है पर बने इस परियोजना की शुरुआत साल 2007 में हुई थी. इसके 3 साल बाद ही पाकिस्तान ने यह मामला हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उठाया, जहां तीन साल के लिए इस परियोजना पर रोक लगा दी गई. साल 2013 में, कोर्ट ने फैसला दिया कि किशनगंगा प्रॉजेक्ट सिंधु जल समझौते के अनुरूप है और भारत ऊर्जा उत्पादन के लिए इसके पानी को डाइवर्ट कर सकता है.

ऐसे में किशनगंगा प्रोजेक्ट भारत के लिए सिर्फ एक बांध नहीं है और इसकी सुरक्षा करना भारत के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन यह आसान नहीं है. कई सुरक्षा एजेंसियों ने इस परियोजना पर आतंकवादी हमले की आशंका जताई है. घुसपैठ की वारदातों और खुफिया रिपोर्ट के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है. यह प्रोजेक्‍ट दो घाटियों के बीच 379 हेक्टर में फैला हुआ है और इसके लिए 23.24 किलोमीटर सुरंग खोदी गई है .

वहीँ इंडियन एक्‍सप्रेस की मानें तो पाकिस्‍तान द्वारा मोर्टार हमले और आतंकियों दोनों से इस बांध को खतरा है, हालांकि ज्‍यादा खतरा आतंकियों से है. नवंबर 2016 में जब उड़ी हमले और फि‍र भारत की जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्‍तान लगातार सीजफायर का उल्‍लंघन कर रहा था, तब कई मोर्टार यहां आकर गिरे थे. उस दौरान सभी कर्मचारी भागकर इसके टनल में चले गए थे, जो उस समय खाली था और पानी से भरा नहीं गया था.  लेकिन पर‍ियोजना पर काम कर रहे एक अध‍िकारी के अनुसार यह टनल 2014 में बन चुका था. यह टनल गुरेज स्‍थ‍ित डैम से पानी बांदीपोरा स्‍थ‍ित पावर स्‍टेशन तक ले जाने का काम आता है. उस दौरान कई कर्मचारियों अलावा गांववाले भी सुरक्षा के लिए इस टनल में आ गए थे. उनकी मदद के लिए सेना को बुलाया गया था. हालांकि ऐसी घटना अब तक सिर्फ एक बार हुई है. 

वहीं अब इस डैम की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. इसकी सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) कर रहा है. इसके अलावा सेना का एक कैंप भी यहां मौजूद है. इंडियन एक्‍सप्रेस के अनुसार एक अध‍िकारी ने बताया कि भारत ने अगर इस संवेदनशील जगह पर डैम बनाने का निर्णय लिया है तो उसे पूरा विश्‍वास है कि वह इसकी सुरक्षा भी कर सकता है. हालांकि इस डैम को ज्‍यादा बड़ा खतरा किसी आतंकी हमले से है. जानकारों की मानें तो पाकिस्‍तान इस डैम को इसलिए भी नुकसान नहीं पहुंचाना चाहेगा क्‍योंकि इससे सबसे ज्‍यादा नुकसान उसे ही होगा. क्‍योंकि बांध के टूटने पर सबसे ज्‍यादा खतरा एलओसी के पास पाकिस्‍तान अध‍िकृत कश्‍मीर के इलाकों को है. किशनगंगा नदी के एलओसी पार करते ही आबादी वाले गांव शुरू हो जाते हैं. पाकिस्‍तान में इसे तावबल कहा जाता है. वहीं भारत के हिस्‍से में स्‍थित 27 गांवों में से बस 6 गांव ही डैम के बाद नीचे किशनगंगा नदी के किनारे स्‍थित हैं.

एक और वजह जिसके मुताबिक डैम को पाकिस्‍तान की बमबारी से इसलिए भी ज्‍यादा खतरा नहीं है, क्‍योंकि डैम पहाड़ों के बीच स्‍थ‍ित है और पाकिस्‍तान की बमबारी की सीधे पहुंच में नहीं आता है. साथ बांध काफी मजबूत है और इसका इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर बमबारी झेलने के लिए काबिल है. हालांकि सबसे ज्‍यादा खतरा आतंकियों द्वारा प्‍लान अटैक से है. लेकिन आतंकियों के हमले में भी पाकिस्‍तान की तरफ बाढ़ का खतरा बना हुआ है, हालांकि यह हमले के स्‍तर पर निर्भर करेगा. डैम को हमले से कितना नुकसान पहुंचा है, उस न‍िर्भर करेगा कि पानी का फ्लो कैसा रहेगा. साथ ही गुरेज में रह रहे लोग भी इस डैम की सुरक्षा में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. यहां रह रहे ज्‍यादातर लोगों को प्रो इंड‍िया माना जाता है, ऐसे में वे सेना की मदद भी करते हैं. वहीँ टनल की सुरक्षा के बारे में अगर बात करें तो यह पानी से भरा रहता है, ऐसे में यहां तक पहुंचना लगभग नामुमकिन है और इस पर हमला करना काफी मुश्‍किल है.

गौरतलब है कि किशनगंगा प्रोजेक्‍ट के उद्घाटन के बाद पाकिस्‍तान एकबार फिर विश्व बैंक के पास पहुंच गया था. जहाँ उसने भारत पर 1960 के सिंधु जल समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए प्रोजेक्‍ट पर विश्व बैंक से निगरानी रखने को कहा है और साथ ही अपील की है कि वर्ल्‍ड बैंक इस प्रोजेक्‍ट में गारंटर की भूमिका निभाए. 

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): आरक्षण इस देश में एक ऐसा विषय हो गया है जिसे हर राजनीतिक दल अपने हिसाब से भुनाने में लगा हुआ है. हरेक दल अपने आप को दलितों, पिछड़ों और जनजातियों का हितेषी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा... लेकिन ऐसे में समाज के कई गैर राजनीतिक संगठन इसके विरोध में भी उतर रहे हैं. जो आरक्षण को ख़त्म करने की मांग कर रहे हैं या फिर आरक्षण को जाती आधारित न करके बल्कि गरीबी पर आधारित करने की मांग कर रहे हैं. ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब माँ कालका धर्मार्थ ट्रस्ट की अध्यक्षा और जीवनधारा संघ (एनजीओ) की राष्ट्रिय संरक्षिका सुधा भारद्वाज (माँ) ने आरक्षण के विरुद्ध आवाज़ उठाई.

मौका सुधा भारद्वाज के जन्मदिन का था और उसे मनाने के लिए पूरे देश से उनके एनजीओ के पदाधिकारी भी आये हुए थे. ऐसे में आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क भी उनके बुलावे पर वहां पहुंचा और उनसे बातचीत की. सुधा भारद्वाज ने बातचीत में बताया कि आरक्षण एक ऐसा ज़हर है जो समस्त हिन्दू समाज को बांटने का काम कर रहा है. सारे हिन्दू समाज को जातियों में बांटकर राजनीतिक पार्टियाँ अपना उल्लू सीधा कर रही हैं. हर कोई अपने आप को दलितों, पिछड़ों और देश की कुछ जनजातियों का सबसे बड़ा पेरोकार और हितेषी बताने में तुला हुआ है. लेकिन वास्तव में ये कुछ नहीं बल्कि समाज को बांटने का काम हो रहा है जिसे हर एक को समझने की जरुरत है.

सुधा भारद्वाज ने आगे कहा कि हमें आज़ाद हुए 70 साल हो चुके हैं. आजतक दलितों को उनका हक क्यों नहीं मिल पाया., और कितना समय लगेगा उनका हक उन्हें मिलने में. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि आरक्षण जिस गरीब को मिलना चाहिए वहां तक तो पहुँच ही नहीं पा रहा है. केवल समाज का एक चालाक तबका उसका फायदा उठा रहा है और बाकी लोग केवल उनका मुंह ताकते रह जा रहे हैं. लेकिन अब वक़्त आ गया है जब आरक्षण जाती आधारित नहीं बल्कि गरीबी पर आधारित होना चाहिए. समाज में केवल आरक्षण उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जो इसके वास्तव में हकदार हों.

सुधा भारद्वाज ने आगे कहा कि वो इस मुहीम को पूरे देश में लेकर जायेंगी. अभी उनका संगठन तकरीबन 12 राज्यों में समाजसेवा का काम कर रहा है. लेकिन अब वो आरक्षण के मुद्दे  को लेकर पूरे देश में जायेंगीं और जनजागृति का काम करेंगीं. वहीँ जब उनसे उनकी राजनीतिक मंशा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने फिलहाल राजनीति में जाने से मना किया, लेकिन इतना कहा कि आने वाले चुनावों में वो और उनका संगठन केवल उसी दल का समर्थन करेगा जो सब जातियों के हितों की बात करेगा और आरक्षण को जाती आधारित न करके गरीबी आधारित करने की वकालत करेगा.

वहीँ जब उनसे दलित विरोधी होने क सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ़ कहा कि वो सब जातियों का सम्मान करती हैं. उनके लिए बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर भी उतने ही सम्माननीय हैं जितने की पंडित मदन मोहन मालवीय. इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि जब बाबा साहेब ने आरक्षण की व्यवस्था की थी तो साथ ही कुछ समय के पश्चात उसकी समीक्षा की बात भी कही थी. लेकिन आज हो क्या रहा है. समाज में केवल कुछ चालाक लोग उसका फायदा उठा रहे हैं जबकि जो उस आरक्षण का वाकई हक़दार है वो उससे महरूम है. ऐसे में क्या कसूर है उस ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समुदाय के बच्चे का जो इस आरक्षण के कारण दूसरों से बढ़िया नंबर लाने के बावजूद भी न तो कहीं दाखिला ले पा रहा है और न कहीं नौकरी. आखिर ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समाज के लोगों का क्या कसूर है जो ये सजा उनको दी जा रही है. और सरकार हमें ये बताये कि और कितने समय के बाद समाज के इन वर्गों को उनका हक मिलेगा? और कितने समय तक समाज में ऐसी व्यवस्था लागू रहेगी? अब वक़्त आ गया है जब समाज के सब वर्गों को इसके खिलाफ आवाज़ उठानी होगी. मैं इस मुहीम को पूरे देश में लाकर जाउंगी. हम सबको जगाने का काम करेंगे और अगर जरुरत पड़ी तो सब राजनीतिक पार्टियों को आने वाले चुनावों में सबक भी सिखायेंगे.

इस मौके पर जीवनधारा एनजीओ के देश के काफी प्रदेशों के पदाधिकारी भी सम्मिलित हुए जिनमें जीवन धारा संघ के राष्ट्रीय अध्य्क्ष गोविंद पाण्डेय, गौ रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री योगेश भाटी, राष्ट्रीय संगठन मंत्री रवि मित्तल ,राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री प्रभुदयाल शर्मा , राष्ट्रीय संयोजिका श्री मति लक्ष्मी ठाकुर, राष्ट्रीय महिला सहसचिव मीनाक्षी शुक्ला, मुम्बई से आरिफ अली, हिमाचल से बिमला उत्तर प्रदेश से अध्यक्ष  श्री अभय शुक्ला, दिल्ली से आशु शर्मा,  नोएडा से अध्यक्ष श्री राहुल सिंह  और 50 से अधिक सदस्य के नाम शामिल हैं.

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): कर्नाटक में बीजेपी की गिरने के बाद कांग्रेस के राष्ट्रिय अध्यक्ष भी अपनी ख़ुशी जताने सामने आये. इस मौके पर उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी, आर एस एस और बीजेपी के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह पर ज़ोरदार हमला बोला. राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश और देश के लोगों और संवैधानिक संस्थाओं से ऊपर नहीं हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रवैया लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि तानाशाही वाला है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी को अहंकारी बताते हुए कहा कि भारत में ताकत ही सब कुछ नहीं है, बल्कि लोगों की इच्छाशक्ति ही सबकुछ है. हमने जनता को इसके बारे में बताया और बीजेपी के अहंकार की सीमा भी गिनाई. इस देश को कैसे चलाया जाना है इसकी एक सीमा है. जबकि प्रधानमंत्री का मॉडल लोकतांत्रिक नहीं, तानाशाही वाला है. साथ ही राहुल ने कहा कि देश की जनता ने टेलीविजन पर देखा कि किस तरह कर्नाटक विधानसभा में राष्ट्रगान बजने से पहले ही बीजेपी के विधायक उठकर चले गए. ये उनका स्वभाव है कि वे हिंदुस्तान के किसी भी संस्थान की इज्जत नहीं करते हैं. मुझे गर्व है कि कर्नाटक की जनता ने प्रधानमंत्री, बीजेपी के अध्यक्ष और हत्यारोपी अमित शाह को दिखा दिया कि वे लोकतंत्र को खरीद नहीं सकते हैं,  मुझे उम्मीद है कि बीजेपी और आरएसएस ने कर्नाटक से सबक सीखा होगा.

राहुल ने कर्नाटक में बीजेपी के ऊपर खरीद-फ़रोख्त का आरोप लगाते हुए कहा कि मीडिया के सामने खुलेआम बीजेपी ने कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों को खरीदने की कोशिश की. लेकिन उनकी एक न चली. वहीँ एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा कि विपक्ष अपने सहयोग से बीजेपी को हराएगा. देश भर में लगातार हमले हो रहे हैं, बीजेपी और आरएसएस को हम रोकेंगे, देश की जनता और कर्नाटक की जनता की रक्षा की. मैं कर्नाटक के लोगों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं. 

राहुल ने सीधे प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों की खरीद-फरोख्त को मंजूरी दी. प्रधानमंत्री कहते हैं कि वे भ्रष्टाचार से लड़ रहे हैं, लेकिन असल में वे खुद भ्रष्टाचार हैं. हमने फोन पर हुई बातचीत सार्वजनिक रूप से रखी है. वे लोग सोचते हैं कि देश की हर संस्था को झुका सकते हैं, और तबाह कर सकते हैं. एक के बाद एक वे जनादेश का अपमान कर रहे हैं.

 

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): कर्नाटक का नाटक आख़िरकार ख़त्म हुआ और बीजेपी के मुख्मंत्री यदुरप्पा ने  महज़ ढाई दिन के मुख्यमंत्री बनकर इस्तीफ़ा दे दिया. यदुरप्पा ने विश्वास मत परीक्षण से पहले ही अपनी हार मानते हुए इस्तीफ़ा दे दिया. विश्वास मत पेश करते हुए यदुरप्पा ने कहा की कर्नाटक में कांग्रेस और जेडी(एस) ने हारी हुई बाज़ी जीतने के लिए अपना पूरा जोर लगा दिया है. अपने भाषण के दौरान यदुरप्पा भावुक होते हुए कहा कि अगर राज्य और केंद्र दोनों में बीजेपी सरकार होती तो वो राज्य को एक मॉडल राज्य बनाते, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा. लेकिन वो किसानों की हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे. उन्होंने कर्नाटक के लोगों का शुक्रिया अदा किया और उम्मीद जताई की 2019 में जनता बीजेपी को स्पष्ट बहुमत देते हुए सारी लोकसभा सीट बीजेपी की झोली में डालेगी.

अब जब बीजेपी की सरकार गिर गई है तो माना जा रहा है कि राज्यपाल गठबंधन के नेता कुमारस्वामी को सरकार बनाने का न्योता देंगे. वहीँ इस मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नवी आज़ाद ने कांग्रेस और जेडी(एस) के सारे एमएलए को धन्यवाद और बधाई दी. साथ ही उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी का धनबल राज्य में बीजेपी की सरकार नहीं बना सका. साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी माननीय न्यायालय का धन्यवाद किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्यपाल अब उनके गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता देंगे और कांग्रेस और जेडी(एस) मिलकर कर्नाटक को अगले 5 साल तक स्थाई सरकार देंगे.

 

आवाज़(बी.डी. अगरवा, रेवाड़ी): राजस्थान के भिवाड़ी फूलबाग थाना के पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आज तीसरे दिन भी रेवाड़ी कोर्ट में वकीलों ने कामकाज ठप रखा । साथ ही वकीलों का एक प्रतिनिधिमंडल राजस्थान राज्यसभा से सांसद भूपेंद्र यादव से मुलाकात करने दिल्ली पहुंचा जहां भूपेंद्र यादव ने राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया से वकीलों के खिलाफ हुई ज्यादती को लेकर बातचीत की, जिसके बाद गुलाबचंद कटारिया ने वकीलों के प्रतिनिधिमंडल को आज शाम 7:30 बजे जयपुर में मिलने के लिए आमंत्रित किया है। इसके साथ ही वकीलों का यह प्रतिनिधिमंडल बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा से मुलाकात कर लौटा है।

चेयरमैन ने आश्वासन दिया कि वह शीघ्र ही माननीय सुप्रीम कोर्ट में दोषी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ जनहित याचिका दायर कर उनकी करतूतों के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही करने के लिए याचिका फाइल करेंगे। इसके बाद रविंदर यादव जिला बार प्रधान के नेतृत्व में इस प्रतिनिधिमंडल ने बार एसोसिएशन ऑफ सुप्रीम कोर्ट के सचिव विक्रांत यादव से मुलाकात की और अपने साथ हुई ज्यादती का विस्तार से वर्णन किया जिसको सुनकर विक्रांत यादव ने कहा कि वह शीघ्र ही राजस्थान पुलिस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाएंगे ।दिल्ली मुलाकात करने के बाद यह प्रतिनिधिमंडल जयपुर के लिए रवाना हो गया जहां उनकी मुलाकात गुलाबचंद कटारिया गृह मंत्री राजस्थान सरकार से तय है। वकीलों के प्रधान रविंद्र यादव ने बताया कि सभी जगह से उन्हें व्यापक सहयोग मिल रहा है जिसके चलते बृहस्पतिवार को तिजारा ,भिवाड़ी ,नीमराना तथा बहरोड़ जिला बार एसोसिएशन ने भी आज पूरे दिन कार्य स्थगित रखा और पुलिस क्लब पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की इस दौरान तिजारा के वकीलों ने जुलूस भी निकाला जिला बार के प्रधान रविंदर यादव ने बताया कि उनके साथ प्रतिनिधि मंडल में सुरेश राव गजराज उपाध्यक्ष राजीव यादव कोषाध्यक्ष विशाल यादव राजेंद्र सिंह कामरेड, केवल खुराना, विश्वामित्र, एसएन वशिष्ठ, रविदत्त कोशिक, मनोज शर्मा, अनिल राव, ईश्वर यादव व बार कौंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के सदस्य प्रवेश यादव शामिल थे।

आवाज़(मुकेश शर्मा, गुरुग्राम): इस देश में वैसे तो कई चीज़ों को लेकर विवाद होना रोज़ की बात है लेकिन कई बार ऐसी घटनाएं होती हैं जब हर कोई ये सोचने पर मजबूर हो जाता है की क्या वाकई हम 21वीं सदी में जी रहे हैं. जहाँ हर कोई धर्म, जाती, पंथ से ऊपर उठकर आगे बढ़ने की सोचे. लेकिन हरियाणा में हुए इस वाकये को देखकर ऐसा नहीं लगता जहाँ सरकार ने ही एक परीक्षा में जाती सूचक प्रशन पूछकर पूरे देश में हैरत में डाल  दिया. पूरे देश के ब्राह्मणों और ब्राह्मण संगठनों ने इसका विरोध किया. पहले तो सरकार ने इस विरोध को नज़रंदाज़ करने की कोशिश की लेकिन जब हालात काबू में आते न दिखे तो आज मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आखिरकार आयोग के चेयरमैन भारत भूषण भारती को सस्पेंड करके मामले को शांत करने का प्रयास किया है.

गौरतलब है कि इस मामले में सरकार की और से कहा गया है कि मामले की जांच पूरी होने तक आयोग के चेयरमैन निलंबित रहेंगे जिसकी पुष्टि सूबे के शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा ने भी कर दी है. साथ ही बताया जा रहा है कि सरकार जूनियर इंजिनियर की परीक्षा पत्र तैयार करने वाले परीक्षक के खिलाफ भी केस दर्ज़ कर सकती है. दरअसल आज ब्राह्मणों पर आपत्तिजनक सवाल पूछे जाने को लेकर सूबे के मंत्रियों, विधायकों और दूसरे ब्राह्मण नेताओं ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की जिसके बाद ये फैसला लिया गया की जब तक पूरे मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक आयोग के चेयरमैन भारत भूषण भारती निलंबित रहेंगे. हरियाणा के इतिहास में ये पहला मौका है जब कर्मचारी आयोग के चेयरमैन को किसी मामले में निलंबित किया गया हो.

गौरतलब है कि पिछले दस अप्रैल को हुई इंजीनियरिंग की परीक्षा का 75वां प्रशन विवादित रहा जहाँ ये पूछा गया था कि हरियाणा में क्या अपशकुन नहीं माना जाता है? जिसके चार विकल्प दिए गये थे. इसमें से दो विकल्पों को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, तीसरे विकल्प में काले ब्राह्मण से मिलना और चौथे विकल्प में ब्राह्मण कन्या को देखना का विकल्प दिया गया था.इस प्रशन का सही उत्तर ब्राह्मण कन्या को देखना बताया गया था. जैसे ही ऐसे प्रशन का परीक्षा में आने की ख़बर हरियाणा के साथ-साथ देश में लोगों को लगी तो विरोध होना शुरू हो गया और विवाद इतना बढ़ गया की आखिरकार सरकार को आयोग के चेयरमैन को निलम्बित करना पड़ा.

आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क को पूरी उम्मीद है कि सरकार के साथ-साथ आयोग के चेयरमैन को अब हरियाणा में काले ब्राह्मण और ब्राह्मण कन्या की ताकत का एहसास हो गया होगा. एक इंसान होने के नाते मुझे खुद इस बात पर शर्म आती है की आज हम कहाँ खड़े हैं? 21 वीं सदी में जब हम धर्म जातपात से ऊपर उठकर आगे बढ़ने की बात करते हैं ऐसे में हमारी सरकारें इस तरह के प्रशन पूछकर न केवल अपने दिमागी दिवालियेपन का सबूत देती हैं बल्कि समाज में एक ऐसे भयंकर बीज को रोपित कर रही हैं जो कभी भी इस समाज को एक नहीं होने देंगी. आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क की पूरी टीम की तरफ से हरियाणा के साथ-साथ पूरे देश के उन ब्राह्मणों को प्रणाम जिन्होंने सरकार के इस घटिया सवाल को लेकर आवाज़ उठाई और उम्मीद है की आगे से ऐसे किसी भी प्रशन को नहीं पूछा जाएगा फिर चाहे वो किसी भी धर्म, जाती पंथ, सम्प्रदाय से जुड़ा हुआ हो... भारती जी आपके लिए सलाह फ्री में है, ले लीजिये, काम आएगी...... भविष्य में ऐसे किसी भी विवाद कन्नी काटिएगा क्योंकि अगर आपको ऐसे ही प्रशन पूछने हैं तो जवाब मेरा ये है कि........ हाँ मैं भी हूँ काला ब्राह्मण.... आपके लिए अपशकुन.........

 

आवाज़(बी.डी. अग्रवाल): कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद देश भर में कांग्रेस विरोध जता रही है. हरियाणा भी इससे अछूता नहीं है. यहाँ के भी तमाम बड़े नेताओं ने बीजेपी पर लोकतंत्र का गला घोंटने का आरोप लगाया है. ऐसा ही कुछ रेवाड़ी से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कैप्टेन अजय यादव ने कहा. उन्होंने कहा कि कर्नाटक चुनाव नतीजों में कांग्रेस पार्टी और जेडीएस के 116 विधायक होने के बावजूद भी राज्यपाल द्वारा पहले भाजपा को बुलाया गया, जबकि मणीपुर और गोवा में कांग्रेस पार्टी के सबसे ज्यादा विधायक होने के बाद भी कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए राज्यपाल द्वारा नही बुलाया गया. यह सरेआम लोकतंत्र की हत्या है.
 
अजय यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जो मनमानी की जा रही है, यह देश के लिए बहुत बडा खतरा है. सत्ता हथियाने के लिए भाजपा द्वारा सारे अनैतिक काम किए जा रहे हैं. इसके लिए देश के सभी राजनीतिक दलों को एक होना चाहिए. साथ ही वनारस हादसे पर बोलते हुए कैप्टेन अजय सिंह यादव ने कहा कि बडे शर्म की बात है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र में निमार्णाधीन पूल गिरने से 18 लोगों की मौत हो गई. जिसके लिए मैं अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूं. लेकिन जब प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में ही इतनी बडी लापरवाही हो रही है तो फिर देश का क्या हाल होगा. लेकिन प्रधानमंत्री को इसकी कतई फिक्र नही है. वो तो कर्नाटक में सरकार बनवाने के लिए विधायकों की खरीद फ़रोख्त में व्यस्त हैं. पूर्व मंत्री ने कहा कि कर्नाटक चुनाव में राज्यपाल को चाहिए कि सरकार बनाने के लिए सबसे पहले कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन को बुलाना चाहिए. ताकि सरकार स्थाई रह सके.

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): कर्नाटक में सियासी नाटक अपने चरम पर है जहाँ विधानसभा चुनाव के नतीजों ने तमाम सियासी पार्टियों की नींद उड़ा रखी है और जोड़-तोड़ की राजनीति उफान ले रही है. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी तो बनकर उभरी लेकिन बहुमत के आंकड़े को पा नहीं कर पाई. उसे 104 सीटों से ही संतोष करना पडा. वहीँ कांग्रेस ने 78 सीटें जीतीं तो जेडीएस के खाते में 37 सीटें आईं. अब राज्य में सरकार किसकी बने ये सबसे बड़ा यक्ष प्रशन बनकर सब पार्टियों के सामने खडा हो गया है. हालांकि कांग्रेस ने नतीजे देखकर तुरंत जेडीएस के सामने बिना शर्त समर्थन की बात कहकर बीजेपी को करारा झटका दिया और अब उनके पास वो अंक गणित है जिसके सहारे वो सरकार बना सकते हैं लेकिन सवाल यहाँ भी फिर से व्ही है कि क्या वाकई  चुनाव परिणामों के बाद हुए इस बेमेल गठबंधन से इन दोनों पार्टियों के विधायक संतुष्ट हैं. कांग्रेस की मुख्य लड़ाई बीजेपी को सत्ता से दूर रखना है वहीँ जेडीएस के दोनों हाथों में लड्डू हैं.

लेकिन अब गेंद सीधे-सीधे राज्यपाल के पाले में है कि वो किसको सरकार बनाने के लिए पहले आमंत्रित करते हैं. संविधान विशेषज्ञों की मानें तो राज्यपाल  स्थिति में सबसे बड़े दल को ही सरकार बनाने के लिए न्योता देंगे जिसकी कि उम्मीद भी की जा रही है. अगर सबसे अ दल सरकार बनाने में सक्षम नहीं है तो वो इस स्थिति में जेडीएस-कांग्रेस को बुलाएँगे और अपना बहुमत सिद्ध करने के लिए कहेंगे. इसी रस्साकसी के बीच बीजेपी विधायकों ने आज वीएस यदुरप्पा को विधायक दल के नेता चुन लिया है. उन्होंने दावा किया है कि वह कल (गुरुवार) को शपथ लेंगे. विधायक दल की बैठक के बाद येदियुरप्पा और प्रकाश जावड़ेकर राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचे हैं, जहाँ उन्होंने 104 विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपा है वहीँ कुछ और विधायकों के समर्थन की भी बात कही है.

वहीँ कांग्रेस और जेडीएस बीजेपी के ऊपर उनके विधायकों को तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं. कांग्रेस ने अपने तमाम विधायकों को बेंगलुरु शिफ्ट करने की योजना बनाई है जिसके लिए उन्होंने एक रिसोर्ट में 120 कमरे भी बुक करवा दिए हैं. जेडीएस भी अपने विधायकों को एक करने की लामबंदी कर रही है. यानी सियासी ड्रामा अपने चरम पर है और क्या गुल खिलायेगा इसपर पूरे देश की नजर रहेगी..... आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क भी आपको तमाम उप्दतेस देता रहेगा.....