Items filtered by date: Tuesday, 01 May 2018

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): आखिर वो पल आ ही गया जिसका बीजेपी के साथ कर्नाटक के लोगों को भी बड़ी बेसब्री से इंतजार था. क्योंकि ऐसा माना जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी की रैलियां बीजेपी की हर को भी जीत में बदलने का माद्दा रखती हैं. साथ ही आज से वो जंग भी शुरू हुई जिसमें अब प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अब खुद निशाने पर ले रहे हैं. क्योंकि अबतक तो राहुल गांधी ही मोदी पर हमले कर रहे थे और कर्नाटक के लोगों के साथ-साथ देश भी इस बात का इंतजार कर रहा था कि राहुल के हमलों का जवाब मोदी कैसे देते हैं. तो आज उस इंतजार को ख़त्म करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  कर्नाटक में अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की, जहाँ उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में राहुल गांधी को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों पर लगातार 15 मिनट तक बोलने की चुनौती दे दी. दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि अगर वह संसद में लगातार 15 मिनट तक बोलेंगे तो पीएम मोदी उनके सामने बैठ भी नहीं पाएंगे. प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी की इसी चुनौती पर पलटवार करते हुए कहा, "कांग्रेस के श्रीमान अध्यक्ष जी, आपने बिल्कुल सही फरमाया, हम आपके सामने नहीं बैठ सकते, आप तो ‘नामदार’ हैं और हम ‘कामदार’ हैं. हमारी क्या हैसियत है आपके सामने बैठने की. हम तो अच्छे कपड़े भी नहीं पहन सकते हैं, ऐसे में आपके सामने बैठने का हक हमें कैसे हो सकता है.

मोदी ने आगे राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि वह चाहें तो कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान राज्य की कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों पर लगातार 15 मिनट अपनी पसंदीदा भाषा में, पेपर का सहारा लिए बिना बोलकर दिखाएं. इसके अलावा उन्होंने राहुल गांधी को यह भी चुनौती दे डाली कि उन्हें अपने इस भाषण में 15 मिनट के अंदर करीब 5 बार भारत की महान शख्सियत विश्वेश्वरय्या के नाम का उल्लेख करना होगा. दरअसल अभी हाल ही में राहुल गांधी का एक भाषण काफी वायरल हुआ था, जिसमें राहुल गांधी विश्वेश्वरय्या के नाम का उच्चारण करने में गलती करते दिखाई दे रहे थे. जिसके बाद मोदी ने उन्हें ऐसा कहने की चुनौती दी.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा, ‘हम कामदार हैं और नामदार के जुल्म झेलते हुए आए हैं. हम झेलने की ताकत बढ़ाते जा रहे हैं. मोदी जी को छोड़ो नामदार, इस कामदार की क्या बात करें, लेकिन एक काम करो आप इस चुनाव अभियान के दौरान कर्नाटक में, आपको जो भाषा पसंद हो उसमें, वह चाहे हिंदी हो या अंग्रेजी या आपकी माता जी की मातृभाषा ही क्यों न हो. आप 15 मिनट हाथ में कागज लिए बिना कर्नाटक की आपकी सरकार की उपलब्धियां जनता के सामने बोल दीजिए. साथ में एक छोटा काम भी कीजिएगा, उस 15 मिनट के भाषण के दौरान कम से कम 5 बार आप श्रीमान विश्वेश्वरय्या के नाम का उल्लेख कर दीजिएगा. इतना कर लोगे तो कर्नाटक की जनता तय कर लेगी कि आपकी बातों में कितना दम है.’

यानी बात बिलकुल साफ़ है कि राहुल गाँधी और नरेंद्र मोदी के बीच की जुबानी जंग अब शुरू हो चुकी है. अब प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष को सीधे निशाने पर ले लिया है और वंशवाद के साथ-साथ वो उनकी पब्लियत पर भी सवालिया निशान लगा रहे हैं. अब किसके आरोपों से जनता कितनी सहमत है ये तो जब चुनाव के नतीजे आयेंगे तभी पता चलेगा लेकिन इतना तय है कि कर्नाटक की चुनावी जंग अपने चरम पर है जिसे जनता अपने-अपने आयने से देख रही है.(इनपुट: जनसता डॉट कॉम)

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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): लगता है खट्टर सरकार के सितारे कुछ गर्दिश में चल रहे हैं. विपक्ष जहाँ हर बात पर सरकार को घेर रहा है वहीँ अब सुप्रीम कोर्ट ने भी ज़मीन आवंटन मामले में सरकार को कड़ी फटकार लगाईं है. गौरतलब है कि जमीन आवंटन से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. दरअसल हरियाणा सरकार ने खनन के लिए 558.53 हेक्‍टेयर जमीन की नीलामी को लेकर निविदा आमंत्रित की थी. एक कंपनी ने इसे हासिल भी किया, लेकिन बाद में पता चला कि जमीन तो महज 141.76 हेक्‍टेयर ही है. कंपनी ने हरियाणा सरकार को इसकी जानकारी भी दी, लेकिन खट्टर सरकार ने कंपनी की आपत्तियों पर गौर करने से इनकार कर दिया. इसके बाद कंपनी ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी. हालांकि उस समय कोर्ट से कंपनी को झटका लगा.  ऐसे में इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी. अब शीर्ष अदालत ने हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. जस्टिस दीपक गुप्‍ता और जस्टिस मदन बी. लोकुर की पीठ ने लताड़ लगाते हुए कहा कि सत्‍ता का फायदा उठाते हुए आप (खट्टर सरकार) लोगों को बेवकूफ मत बनाइए. कोर्ट ने उस नोटिस पर तीखी टिप्‍पणी की जिसमें 558.53 हेक्‍टेयर का उल्‍लेख किया गया था, जबकि हकीकत में जमीन डेढ़ सौ हेक्‍टेयर भी नहीं थी.

यह मामला करनाल में खनन के लिए जमीन आवंटित करने से जुड़ा है. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को कंपनी द्वारा जमा पैसे को लौटाने का निर्देश दिया है. अब राज्‍य सरकार को 9% के ब्‍याज के साथ राशि लौटानी होगी. कोर्ट ने पाया कि कंपनी को जमीन भी दी गई. सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि लैंड एरिया और उसकी साइज की पुष्टि करने का काम कंपनी का है. इस पर कोर्ट के तेवर और सख्‍त हो गए. पीठ ने कहा, ‘सरकार में होने पर प्रत्‍येक चीज के लिए आम नागरिकों पर आरोप लगाना बेहद आसान हो जाता है. 558.53 हेक्‍टेयर के लिए सार्वजनिक निविदा निकाली गई थी. ऐसे में आप (खट्टर सरकार) सिर्फ 141.76 हेक्‍टेयर ही कैसे दे सकते हैं? इसके बाद आप कह रहे हैं कि जमीन की पुष्टि करने का दायित्‍व याची (कंपनी) का ही है. आप इस तरह से आमलोगों को मूर्ख नहीं बना सकते हैं. आप सरकार हैं और यह सुन‍िश्चित करना आपकी जिम्‍मेदारी है कि जिसको लेकर विज्ञापन निकाला गया वह मुहैया कराया जाए.’ हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान हाई कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्‍पणी नहीं की. (सौजन्य:जनसत्ता डॉट कॉम)

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