ईस्ट और वेस्ट, मोदी इज़ बेस्ट, अब नार्थ ईस्ट में चला मोदी का जादू, कांग्रेस बेहाल, लेफ्ट भारत से विदाई की और.........

03 Mar 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): आज शायद कोई भी मीडिया संस्थान देश के पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के सिरमौर रहे अटल बिहारी बाजपयी को याद भले ही न कर रहा हो लेकिन मुझे उनकी दूरदर्शिता का एहसास हो रहा है जब उन्होंने कहा था कि भले ही आज हम कम संख्या में हों, अपनी सरकार नहीं बचा पा रहे हों, लेकिन एक दिन ऐसा आएगा जब हर जगह कमल खिलेगा, फिर चाहे वो पूर्वोतर भारत हो या दक्षिण, हर जगह कमल खिलेगा. मुझे आज भी याद है वो क्षण, जब वाजपयी ने बहुमत न साबित कर पाने के कारण 13 दिन की सरकार चलाकर इस्तीफ़ा दे दिया था. लेकिन एक भविष्यवाणी की थी, कि एक दिन ऐसा आएगा जब कांग्रेस सिमटेगी और अखण्ड भारत  में हर जगह कमल खिलेगा. शायद आज उस भविष्यवाणी के सच होने का समय आ गया है, और वाजपयी वो मंजर देख रहे हैं. में किसी की प्रशंसा नहीं कर रहा, पर आज के रिजल्ट देखने के बाद यही लगता है कि देश में मोदी मेजिक अभी भी चल रहा है और ये कहा जा सकता है कि चाहे ईस्ट हो या फिर वेस्ट, मोदी इस बेस्ट.

खैर अब मुद्दे की बात पर आते हैं. आज पूर्वोत्तर भारत के तीन राज्यों मेघालय, त्रिपुरा और नागालैंड में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजें आ गये हैं. नतीजों के मुताबिक बीजेपी त्रिपुरा में तो सरकार बना चुकी है. सहयोगी पार्टी को छोड़ भी दें तो भी बीजेपी अकेले अपने दम पर सरकार बना सकती है. यानी बीजेपी के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि. सीधे जीरो से हीरो. जिस पार्टी का एक राज्य में अस्तित्व ही ना हो वो सत्ता में अपने दम पर काबिज़ और हराया उस पार्टी को जो वहां पर 25 साल से शासन कर रही हो. ऐसी जीत भारतीय राजनीति के इतिहास में बहुत कम ही देखने को मिलती है. लेकिन आप कहेंगे की ऐसे उदाहरण और भी तो हैं. जी हाँ हैं, लेकिन बहुत कम. सबसे बड़ी एक और बात जो इस जीत में देखने को सामने आ रही है और बीजेपी के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह ने भी कही कि लेफ्ट भारत के लिए कहीं भी राईट नहीं है. यानी लेफ्ट की भारत से विदाई. लेफ्ट का गढ़ आज ढेह गया और जीत के हीरो फिर वही. यानी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी. तो ये मान सकते हैं कि पूर्वोतर भारत के त्रिपुरा ने लाल सलाम को अलविदा कहकर भगवा यानी कमल का दामन थाम लिया है. त्रिपुरा की जीत से गदगद प्रधानमंत्री मोदी भी गदगद हैं. इस एतिहासिक जीत पर ख़ुशी का इज़हार करते हुए पीएम ने लिखा- ‘त्रिपुरा के मेरे भाइयों बहनों ने जो किया वह अविश्वसनीय है. उनके इस समर्थन और प्यार के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. हम त्रिपुरा के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.’ वहीँ पार्टी कार्यकर्ताओं को शुक्रिया कहते हुए पीएम ने लिखा- ‘त्रिपुरा की जीत कोई मामूली जीत नहीं है. शून्य से शिखर तक पहुंचने की ये गाथा हमारे कार्यकर्ताओं की मेहनत और संगठन की शक्ति को दर्शाती है.’ पीएम ने ये भी लिखा कि, ‘त्रिपुरा की जीत जुल्मी ताकतों पर लोकतंत्र की जीत है. आज डर पर शांति और अहिंसा की जीत हुई है.’

बात अब नागालैंड की कर लेते हैं. यहाँ भी बीजेपी अपने सहयोगी दल के साथ सरकार बनाने की स्थिति में पहुँच गई है और ऐसा लग रहा है कि नागालैंड में भी भगवा लहराना भाजपा के लिए कोई टेढ़ी खीर नहीं है. लेकिन यहाँ भी लड़ाई कम दिलचस्प नहीं थी. सियासत में बीजेपी को इस राज्य में कई तरह के आरोपों को झेलना पड़ा. इस तरह का भी प्रचार किया गया कि अगर बीजेपी को वोट दिया तो आपका धर्म संकट में पड़ जाएगा. और तो छोडिये धर्म संसद यानी चर्च से भी ये कहलवाया गया कि बीजेपी के पक्ष में मतदान न करें. लेकिन लोकतंत्र में जनता जनार्दन होती है. लोगों ने बढ़-चढ़कर मतदान किया और बीजेपी और उसके सहयोगी दल को  वोट भी मिले और इतने मिले कि अब वो सत्ता के एकदम करीब पहुँच गये हैं.  ऐसा लग रहा है कि भाजपा अपने सहयोगी दल के साथ सत्ता में काबिज़ हो जायेगी. जो बात यहां भी गौर करने लायक है वो ये है कि यहाँ भी जीत का केवल एक ही हीरो. नरेंद्र मोदी. यानी मोदी मेजिक यहाँ भी बरकरार. मोदी इसके लिए भी खुश हैं. वहां के लोगों का भी शुक्रिया अदा किया और कहा कि वह प्रदेश के विकास के लिए सभी जरूरी कदम उठाएंगे.

वहीं, मेघालय में बीजेपी के लिए अच्छी खबर तो नहीं आई है लेकिन पार्टी के नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वहां पर गठबंधन करके सरकार बनाई जा सकती है. इन तीनों राज्यों में पार्टी के प्रदर्शन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी खुश नजर आ रहे हैं. उनके उल्लास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 10 मिनट के भीतर लगातार सात ट्वीट कर पार्टी नेताओं और कार्यक्रताओं को बधाई दे डाली. पीएम ने लिखा कि, ‘तीनों राज्यों के परिणाम देख लग रहा है कि वहां के लोगों ने बदलाव और विकास के लिए वोट किया है. अब हमारी जिम्मेदारी ये है कि हम कैसे उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरते हैं.’

बहरहाल पूर्वोतर के नतीजे जहाँ बीजेपी के लिए सुकूनदायक हैं वहीँ कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट की चिंता बढाने वाले. साथ ही राजनितिक पंडितों के लिए भी ये रिसर्च का विषय है कि जिस प[पार्टी का आज से 4 साल पहले जहां जनाधार न के बराबर था वो वहां कैसे सत्ता पर काबिज़ हुई. उए वाकई किसी जादू से कम नहीं है. क्योंकि अभी हालिया राजस्थान और मध्य प्रदेश के उप-चुनावों की हार से बीजेपी बेकफुट पर आ गयी थी और ऐसा लग रहा था कि मानो अब मोदी मेजिक ख़त्म सा हो गया है लेकिन आज तीन राज्यों के इन नतीजों ने बीजेपी के अंदर फिर से प्राण फूंकने और नए जोश का संचार किया है. यानी कहा जा सकता है कि देश में मोदी मेजिक अब भी बरकरार है. लेकिन कहते हैं कि बड़ी जीत हमेशा बड़ी जिम्मेवारी भी लेकर आती है. अब 2019 के लोकसभा चुनाव बहुत करीब हैं. ऐसे में बीजेपी को उन बड़े राज्यों पर भी ध्यान देना होगा जहाँ पर वो 2014 में आश्चर्यजनक प्रदर्शन करते हुए जीतकर आये थे, लेकिन उप-चुनावों में वहां पर उन्हें मुंह की खानी पड़ी. यहाँ बात मध्य-प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रदेशों की हो रही है. यहाँ पर बीजेपी की सरकारें लम्बे समय से हैं और हाल ही में हुए उप-चुनावों में यहाँ की जनता ने बीजेपी को नकार दिया है. यानी राजनीती में परीक्षा कभी ख़त्म नहीं होती है एक जंग जीत ली तो फिर दूसरी जंग की तैयारी शुरू करनी पड़ती है. यहाँ ये बात कहने का मतलब साफ़ है कि मेरा इशारा विपक्ष की तरफ भी है.  यानी समय पार्ट टाइम राजनीति का नहीं बल्कि फुल टाइम राजनीती का है. वैसे तो राहुल गाँधी ने कांग्रेस की कमान सँभालने के बाद अच्छा काम तो किया लेकिन गुजरात के बाद वो कुछ ढीले से नजर आये और आज दिनभर मीडिया ने उनके इटली दौरे के बार में जो कहा की वो घूमने गये हैं. कांग्रेस को उस से बचते हुए सारे विपक्ष को फिर से इक्कठा करना एक चुनौती रहेगी. अब वो इसमें कितने कामयाब हो पाते हैं ये तो वक़्त ही बतायेगा लेकिन आज के चुनावी नतीजे तो यही बताते हैं कि देश में मोदी मेजिक अभी भी बरकरार है और 2019 के लिए विपक्ष की राह उतनी आसान नहीं जितनी की गुजरात के नतीजों के बाद कही जा रही थी. हमारी तरफ से देश के सभी राजनितिक दलों को हार्दिक शुभकामनाएं........

 

 

 

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