बड़ी दिलचस्प है ये गुजरात की लड़ाई, मोदी ने लाइन में खड़े होकर किया मतदान तो किसी को भगवान की याद आई....

14 Dec 2017
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आवाज़(ब्यूरो, गाँधी नगर): गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए दुसरे और अंतिम चरण के लिए वोटिंग सुबह 8 बजे से जारी है. बड़े-बड़े दिग्गज अपना वोट डालने मतदान केंद्र पहुँच रहे हैं. वहीँ कुछ नेता मतदान करने से पूर्व भगवान को याद करना भी नहीं भूले हैं. अब बात कर लेते हैं वोटिंग करने वाले दिग्गजों की. तो इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी का नाम सबसे ऊपर आता है. गुजरात के बेटे पीएम मोदी मतदान केंद्र पहुंचे और आम लोगों के साथ लाइन में खड़े होकर उन्होंने मतदान किया. वोट डालने के बाद पीएम मोदी ने घरों के बाहर और सड़कों पर खड़े लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादंन किया. इस दौरान वह काफी दूर तक पैदल चलकर भी गए.  मोदी आये हैं तो भला मोदी-मोदी के नारे न लगें ऐसा कैसे हो सकता है. तो जैसे ही मोदी मतदान केंद्र पहुंचे तो वहां मोदी-मोदी के नारे ऐसे लगने शुरू हुए की मानों वहां चुनाव नरेंद्र मोदी के लिए ही हो रहा हो. और हकीकत में हो भी कुछ ऐसा ही रहा है. काम करे या न करे गुजरात के मुख्यमंत्री और उनके मंत्री, और भुगतें प्रधानमंत्री मोदी. खेर ये अलग विषय है जिसपर बाद में चर्चा होगी. अब बात हो रही थी मोदी-मोदी के नारों की. तो कांग्रेस को इस सब से पेट दर्द शुरू हुआ और उन्होंने चुनाव आयोग पर भी भेदभाव का आरोप जड़ दिया. कांग्रेस मोदी के रोड शो की शिकायत लेकर चुनाव आयोग पहुँच गयी और वहां जाकर साहब जी की शिकायत कर दी. अब चुनाव आयोग इसपर क्या कदम उठाता है ये भी देखने वाली बात होगी. प्रधानमंत्री मोदी की बात तो हो गयी अब उनके सिप्पेसालार और बीजेपी के रह्स्त्रिय अध्यक्ष अमित शाह को कैसे भूल सकते हैं. गुजरात के वाशिंदे और बीजेपी के राष्ट्रिय अध्यक्ष का नाम भी मतदान करने वालों में में सबसे ऊपर है.

तो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अपने बेटे जय शाह के साथ मतदान करने से पहले मंदिर गये और भगवान का आशीर्वाद लिया. उसके बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने नारनपुरा से विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाला. अमित शाह 150 सीटों के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं और बार-बार ये दावा कर रहे हैं कि बीजेपी कम से कम 150 सीटें तो लाएगी ही या फिर उस से ऊपर भी ले आये. लेकिन गुजरात की जनता क्या गुल खिल्येगी इसका अंदाज़ा लगाने में इस बार बड़े-बड़े राजनीतिक पंडित फेल हो रहे हैं. अब अमित शाह कितने पास होते हैं या फिर वो भी फेल हो जायेंगे इसका पता भी 18 को चल जाएगा. खेर ये तो थी बात अमित शाह के मतदान करने और उनके गणित की. अब बात बीजेपी की ही हो रही है तो फिर अरुण जेटली को कैसे भूल सकते हैं. गुजरात चुनाव की सारी जिम्मेवारी सँभालने वाले अरुण जेटली भी मतदान करने पहुंचे. वो भी मतदान करने के लिए आम लोगों के साथ लाइन में खड़े हुए. अब आम लोग उनके साथ कितना खड़े होते हैं ये जब परिणाम आएगा तो पता चलेगा. पर इस मौके पर उन्होंने गुजरात की जनता से अपील की वो ज्यादा से ज्यादा संख्या में आयें, मतदान करें और गुजरात में चल रही विकास यात्रा को जारी रखें. उनके अलावा गुजरात के वर्तमान उप-मुख्यमंत्री नितिन भाई पटेल की बात करें तो उन्होंने भी मतदान करने से पहले मंदिर जाकर भगवान का आशीर्वाद लिया, और करें भी क्यों नहीं क्योंकि जिस तरह से इस बार जनता ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों की रैलियों में जाकर सबको बड़ी गंभीरता से सुना है और अबतक मतदाता खामोश है उसे देखकर ये कहा जा सकता है कि अब गुजरात के तमाम नेताओं को केवल भगवान का ही सहारा है. क्योंकि मतदाता तो खामोश है और खुलकर अपनी पसंद का इज़हार नहीं कर रहा. ये तो हो गये सत्ता पक्ष के बड़े चेहरे आइये अब जरा विपक्ष पर भी एक नज़र डाल लेते हैं. 

विपक्ष की बाते करें तो कांग्रेस से पहले एक नाम है जो धयान में आता है और वो है पाटीदार नेता हार्दिक पटेल. हार्दिक पटेल ने भी अपने दिल में जो बीजेपी के खिलाफ आग जलाई है वो उसे थोडा और सुलगाकर या फिर यों कहें कि जोत की ज्वाला बनाकर मतदान क्रन्द्र पहुंचे. उन्होंने वीरमगाम में अपना वोट डाला. अब भई हार्दिक पटेल बड़े नेता हो गये हैं जो सब पार्टियों से भी ऊपर हैं तो फिर भला ऐसे मौके पर खामोश कैसे रहते. वोट डालने के बाद हार्दिक पटेल ने कहा कि काफी अच्‍छे परिणाम आएंगे, यानी कांग्रेस के पक्ष में आयेंगे, क्‍योंकि गुजरात की छह करोड़ लोगों ने अपने भविष्‍य की फिक्र कर रहे हैं. अब बारी थी मोदी और उनकी सरकार पर हमला करने की. प्रधानमंत्री मोदी को वो पहले ही कजोर प्रधानमंत्री तो बता ही चुके हैं. इस बार निशाना राज्य सरकार थी. उन्होंने कहा कि अभी से सचिवालय के अंदर सीक्रेट फाइल गायब होनी शुरू हो गई हैं. आधे लोग तो कर्नाटक के चुनाव में लग गए हैं इसका मतलब है कि वो हार मार चुके हैं. 

अब बात बापू जी की. यहाँ हम महात्मा गाँधी जी की नहीं बल्कि गुजरात के नए बापू शंकर सिंह बाघेला जी की कर रहे हैं. शंकर सिंह वाघेला ने गांधी नगर के वासन में वोट डाला. बाघेला न तो बीजेपी के साथ हैं और न ही कांग्रेस के साथ. फिर वो किसके साथ हैं? ये बड़ा सवाल है. पर यहाँ सवाल ये नहीं है कि बापू किसके साथ हैं, बल्कि सवाल ये है कि क्या गुजरात की जनता बापू के साथ है? इसका जवाब भी जल्दी ही मिल जाएगा. 18 का इंतजार कीजिये. 

  गौरतलब है कि कड़ी सुरक्षा के बीच अहमदाबाद, गांधीनगर, बनासकांठा समेत 14 जिलों की 93 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं. इस दौर में कुल 851 उम्मीदवार मैदान में हैं. यानी आज सब उम्मीदवारों का भविष्य मशीनों में बंद हो जाएगा और जब 18 का पिटारा खुलेगा तब पता चलेगा की पप्पू पास हुआ या फेल? या फिर जनता फिर से मोदी के साथ है. मोदी के विकास मॉडल के साथ है. 

अब चुनाव गुजरात में हो रहा है तो पहले दौर के मतदान की तरह दुसरे दौर में भी बड़ोदरा और उसके आस पास के शहरों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में गड़बड़ी को लेकर निर्वाचन आयोग से कई शिकायतें की गईं. कई स्थानों पर ईवीएम में गड़बड़ी की वजह से मतदान प्रक्रिया बाधित हुई. लेकिन अब सब ठीक ठाक चल रहा है. वैसे भी जो जीतेगा उसके लिए सब ठीक होगा और जो हारेगा वो मशीनों में गड़बड़ी का आरोप जरुर लगाएगा. यानी ये लड़ाई काफी लम्बी चलेगी. अब आप यहाँ समझ ही गये होंगे कि हम किसकी बात कर रहे हैं. यानी आज कई बड़े चेहरों की किस्मत गुरुवार को ईवीएम में कैद हो जाएगी.

इए में कुछ सीटें ऐसी हैं जिनपर काफी दिलचस्प मुक़ाबले की उम्मीद है. मेहसाणा से उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल का मुकाबला कांग्रेस के जीवाभाई पटेल से है. राधनपुर से कांग्रेस के अल्पेश ठाकोर का मुकाबला बीजेपी के लविंगजी ठाकोर से है. वहीं वडगाम सीट से कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार जिग्नेश मेवाणी का मुकाबला बीजेपी के विजय चक्रवर्ती से है.


गुजरात विधानसभा चुनाव में इस बात का पार्टी गठजोड़: 

गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ रही है. यानी बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी के सहारे उनकी नीतियों के सहारे चुनाव मैदान में उतरी है. हालांकि मोदी की नीतियों को उनके ही राज्य में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों ने कितना माना है अपनाया है ये भी बड़ा प्रशन है चर्चा का विषय है लेकिन वो सब बाद में. फिलहाल इतना जान लीजिये की बीजेपी अकेले मैदान में उतरी है तो वहीँ कांग्रेस गठजोड़ की राजनीति करके सत्ता में 22 साल बाद वापसी की उम्मीद के साथ चुनाव मैदा में उतरी है. आइये दाल लेते हैं एक नज़र...        

पार्टी                      दूसरे दौर में सीटें           पूरा गुजरात
बीजेपी                         93                          182
कांग्रेस                         90                          178
भारतीय ट्राइबल पार्टी       2                              6
कांग्रेस समर्थित निर्दलीय  1                              1
        
दूसरे दौर के दिग्गज उम्मीदवार 

दुसरे दौर के चुनाव में भी मुकाबला बड़ा दिलचस्प है. कुछ सीटें तो ऐसी हैं जिनपर गुजरात ही नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान की नज़र है. आइये डालते हैं उन सीटों और उनके उम्मीदवारों पर एक नज़र :

मेहसाणा     नितिन पटेल                बीजेपी        उपमुख्यमंत्री    
सिद्धपुर       जयनारायण व्यास        बीजेपी        पूर्व मंत्री और पार्टी प्रवक्ता    
राधनपुर      अल्पेश ठाकोर              कांग्रेस         प्रमुख OBC नेता, हाल में कांग्रेस में शामिल    
वडगाम        जिग्नेश मेवाणी           कांग्रेस समर्थित निर्दलीय    प्रमुख दलित नेता, कांग्रेस के समर्थन से उम्मीदवार
वतवा          प्रदीप सिंह जडेजा          बीजेपी          गृह राज्य मंत्री      
ढोलका        भूपेंद्र सिंह चुड़ास्मा        बीजेपी          3 बार विधायक, फ़िलहाल मंत्री
दाभोई         सिद्धार्थ पटेल                कांग्रेस           पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

पिछली बार के सभी चुनावों से यह चुनाव कुछ अलग है. क्योंकि भाजपा के खिलाफ जाति आधारित समीकरण बैठाने की जुगत में कांग्रेस ने हार्दिक पटेल, ठाकोर और मेवानी का सहारा लिया है जो पाटीदारों, अन्य पिछड़ा वर्ग और दलितों की ओर से युवा तुर्क बनकर उभरे हैं. 

गुजरात विधानसभा चुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए साख का विषय है. इतना ही नहीं, यह दोनों के लिए परीक्षा की घड़ी भी है. एक-दो जगह को छोड़ दें तो लोकसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस लगातार हार का मुंह देखती आ रही है. कांग्रेस इस चुनाव को जीतकर अपनी खोई जमीन तलाशने की कोशिश करेगी और एक बार फिर से अपने कार्यकर्ताओं में विश्वास भरने की कोशिश करेगा. वहीं भाजपा के लिए इस चुनाव को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले की परीक्षा माना जा रहा है. अगर एक तरह से कहा जाए तो गुजरात विधानसभा चुनाव पीएम मोदी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है और राहुल के लिए अग्निपरीक्षा है. 


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