हिमाचल प्रदेश: लोकसभा चुनावों की सुगबुगाहट के बीच कांग्रेस ने भी की तैयारी शुरू, जी.एस. बाली या फिर सुधीर शर्मा लड़ सकते हैं काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट से चुनाव....! Featured

11 Apr 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर हिमाचल कांग्रेस में भी हलचल शुरू हो गयी है. दावेदारों की सूची दिनोंदिन लम्बी होती जा रही है. जिनमें दिग्गज कांग्रेसी नेता व पूर्व मंत्री जी.एस.बाली, वीरभद्र सिंह के ख़ास पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा, काँगड़ा से पूर्व कांग्रेसी सांसद चौधरी चन्द्र कुमार, हर्ष महाजन जैसे कई लोगों के नाम शामिल हैं. लेकिन सूत्रों की मानें तो इन नामों में जी.एस बाली और सुधीर शर्मा का नाम सबसे आगे चल रहा है. यानी काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार या तो जी.एस.बाली हो सकते हैं या फिर सुधीर शर्मा. दोनों ही नेता आजकल अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के साथ-साथ पार्टी के अंदर-बाहर भी काफी सक्रिय हैं जिससे इन संभावनाओं को और बल मिला है.

राजनितिक पंडितों की मानें इन दोनों नामों के आगे चलने के पीछे कई वजहें भी हैं. सबसे पहले अगर जी.एस. बाली के नाम पर नजर डाली जाए तो वो निसंदेह काँगड़ा के सबसे दिग्गज कांग्रेसी नेता हैं. उनका जनाधार केवल अपने विधानसभा क्षेत्र में ही नहीं बल्कि दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी है. इतना ही नहीं विधानसभा चुनावों से पहले ये कयास भी लगाये जा रहे थे कि वीरभद्र सिंह के बाद बाली एक ऐसे नेता हैं जो कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं. लेकिन चुनाव परिणाम बिलकुल विपरीत आये और बलि थोड़े से वोटों से अपना चुनाव हार गये. लेकिन आजकल फिर से पार्टी के अंदर और बाहर बाली की बढ़ती सक्रियता ने इस सम्भावना को और बढ़ा दिया है कि वो आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की तरफ से सम्भावित उम्मीदवार हो सकते हैं. दूसरी बात जो बाली की उम्मीदवारी को ज्यादा बल देती है वो ये है कि पार्टी हाई-कमान में भी उनकी अच्छी खासी पकड़ है. दिल्ली दरबार से उनके नजदीकी रिश्ते किसी से छुपे हुए नहीं हैं. ऐसा माना जाता रहा है कि हिमाचल में बनने वाली कांग्रेस सरकारों में मुख्यमंत्री की इच्छा न होते हुए भी उन्हें मंत्री पद देना पड़ता था. और मंत्री रहते हुए उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जिसके कारण उनका और मुख्यमंत्री के बीच 36 का आंकड़ा रहा, लेकिन बाली ने कभी इसकी परवाह नहीं की और अपने तरीके से अपने काम को आगे बढ़ाया फिर चाहे इसके लिए उन्हें किसी के भी विरोध का सामना करना पड़ा हो. तीसरा कारण जो उनकी उम्मीदवारी को और पुख्ता कर रहा है वो वीरभद्र सिंह की हिमाचल की राजनीती में दिनोंदिन ढीली होती पकड़ है. एक समय था जब हिमाचल में वीरभद्र सिंह की तूती बोलती थी. लेकिन पिछले कुछ समय से वीरभद्र को जिस तरह से पार्टी हाई-कमान दरकिनार करके सुखविंदर सिंह सुक्खू को तरजीह दी उससे ऐसा लगा मानों वीरभद्र का राजनितिक करियर ढलान पर है. वीरभद्र के तमाम विरोध के बावजूद सुक्खू अपने पद पर बने रहे जिसने इस बात की तरफ इशारा कर दिया कि पार्टी हाई-कमान की नजरों में अब वीरभद्र की उतनी एहमियत नहीं रही जितनी की पहले कभी हुआ करती थी. अब ऐसा माना जा रहा है कि लोकसभा चुनावों में सुक्खू भी बाली के नाम को आगे बढ़ा सकते हैं क्योंकि इसके उन्हें दो फायदे होंगे. एक तो वीरभद्र के समर्थित उम्मीदवार को वो पछाड़ सकेंगे साथ ही आने वाले समय में वो अपनी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के लिए बाली से समर्थन की उम्मीद भी कर सकते हैं.

वहीँ सुधीर शर्मा के नाम पर नजर डालें तो उनकी उम्मीद्वारी को सबसे प्रबल बनाने वाली वजह वीरभद्र सिंह का ख़ास होना है. वो वीरभद्र सिंह के चहेते हैं और ऐसा भी कहा जाता रहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार का चेहरा भले ही वीरभद्र सिंह थे लेकिन परदे के पीछे सुधीर शर्मा की काफी चलती थी. यानी अगर एक बार फिर से वीरभद्र सिंह की बात टिकेट आवंटन में सुनी गई तो सुधीर शर्मा का काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट के चुनाव लड़ना तय है. दूसरा कारण जो सुधीर शर्मा की उम्मीदवारी को और पुख्ता करता है वो ये है कि काँगड़ा के अंदर वो भी बाली की तरह एक व्यापक जनाधार वाले ब्राह्मण नेता हैं. उन्होंने पहले अपनी पैत्रिक जगह बैजनाथ से चुनाव जीता और फिर धर्मशाला का रुख किया जहाँ से भी उन्हें जीत हासिल हुई. लेकिन इस बार के चुनाव में उन्हें धर्मशाला से हार का सामना करना पडा. इसके अलावा तीसरा कारण जो उन्हें प्रबल उम्मीदवार बनाता है वो ये है कि उन्हें जिला काँगड़ा के कई कांग्रेसी नेताओं का साथ मिल सकता है जो उनके नाम का समर्थन करेंगे.

बहरहाल मौजूदा हालात पर नजर डालें तो इतना तो तय है कि कांग्रेस की तरफ से इस बार काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट पर एक ब्राह्मण उम्मीदवार होगा. लेकिन राजनीति में हर रोज़ नई संभावना बनती और बिगडती है. अभी के हालात तो यही ब्यान कर रहे हैं कि बाली या सुधीर में से किसी एक को कांग्रेस लोकसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बना सकती है, और इन दोनों की पार्टी के अंदर बढ़ती सक्रियता भी यही गवाही दे रही है. अब आगे होगा क्या ये तो आने वाला वक़्त ही बतायेगा लेकिन जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे हिमाचल कांग्रेस के अंदर भी राजनीति गरमाती जा रही है.

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