जयराम के मंत्रिमंडल में ज्यादा नया तो कुछ पुराना, यानी युवा जोश के साथ अनुभव का भी तड़का....

27 Dec 2017
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): आज हिमाचल भाजपा कुछ बदली-बदली नज़र आई. मौका हिमाचल के नए नवेले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के शपथ ग्रहण समारोह का था. जिसमे प्रधानमंत्री मोदी से लेकर पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह के साथ-साथ बीजेपी के सभी दिग्गज़ नेताओं के साथ NDA के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे. आज जयराम ठाकुर की अगुवाई में उनके मंत्रिमंडल ने शपथ ग्रहण की. अगर गौर से जयराम ठाकुर के कैबिनेट की बात करें तो इतना साफ़ झलकता है कि बहुत जद्दोजहद के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया है. जिसमे सूबे के सबसे बड़े जिले काँगड़ा से लेकर जयराम के गृह जिले मंडी के साथ-साथ पूरे हिमाचल को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गयी है.

मंत्रीमंडल में चार ऐसे चेहरे हैं जो पहले भी कैबिनेट में रह चुके हैं, साथ ही सात नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया गया है. यानी मतलब साफ़ है कि जयराम के मंत्रिमंडल में अनुभव के साथ-साथ युवा जोश को भी तरजीह दी गयी है. वहीँ इस से पहले के मंत्रिमंडल की बात करें फिर चाहे वो कांग्रेस हो या बीजेपी उन सभी मंत्रिमंडलों में ज्यादातर पुराने चेहरों को ही तबज्जो दी जाती थी. भूले बिसरे क्काहीं इक्का-दुक्का कोई नये चेहरे मंत्रिमंडल में आ जायें तो वो चर्चा का विषय होता था. लेकिन इस बार जयराम ने तमाम मिथ्याओं को तोड़ते हुए मंत्रिमंडल को नया रूप दिया है.

तमाम राजनीतिक समीकरणों को धयान में रखते हुए जयराम ने सूबे के सबसे बड़े जिले काँगड़ा से सबसे अधिक 4 मंत्रियों को अपने मंत्रिमंडल में जगह दी है. इसके बाद मंडी से दो मंत्रियों को शामिल किया गया है. यहाँ ये बात गौर करने लायक है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी मंडी जिले से ही आते हैं तो ऐसे में ये कहा जा सकता है जहाँ इस बार मंडी जिले में बीजेपी में कमाल का प्रदर्शन किया था और 10 में से 9 सीटें बीजेपी की झोली में डाली थी तो उसको इसका इनाम देने की पूरी कोशिश की गयी है. जिसके दूरगामी परिणाम होंगे. यानी 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए अभी से बिसात बिछा दी गयी है.

इसके बाद शिमला,सोलन, लाहौल-स्पीती ,कुल्लू व उना ऐसे जिले हैं जिन्हें कैबिनेट में एक-एक जगह मिली है. यानी कुल बारह जिलों में से सात को कैबिनेट में जगह मिली है. अब अगर कैबिनेट में सामजस्य की बात करें तो महेंद्र सिंह, किशन कपूर, अनिल शर्मा व सरवीण चौधरी ऐसे नाम है जो पहले भी बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. इसके साथ एक नाम और ऐसा है जो थोडा अनुभव अपने साथ रखता है, और वो नाम हैलाहौल-स्पीती से आने वाले रामलाल मार्कंडेय का. जब वर्ष 1998 में हिमाचल में धूमल के नेत्रित्व में बीजेपी सरकार बनी थी तब तत्कालीन रामलाल मार्कंडेय को राज्य मंत्री बनाया गया था, पर इस बार जयराम ने उन्हें अपनी कैबिनेट में जगह दी है. वहीँ शिमला से सुरेश भारद्वाज को जगह दी गयी है. वैसे तो भरद्वाज हिमाचल भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं लेकिन कैबिनेट में पहली बार शुमार किये गये हैं. वहीँ विपन परमार, विक्रम सिंह, डॉ. राजीव सहजल, वीरेंद्र कंवर व गोबिंद ठाकुर जयराम की कैबिनेट के ऐसे चेहरे हैं जिन्हें पहली बार मंत्रिमंडल में जगह दी गयी है.

यानी मतलब साफ़ है. जयराम नए चेहरों पर अधिक विश्वास कर रहे हैं साथ ही थोडा अनुभव का तड़का भी रख रहे हैं. यानी जयराम की कैबिनेट दूर की अकुदी है. क्योंकि इस बार हिमाचल भाजपा का जो स्वरूप उभरकर सामने आया है ये बिलकुल नई बीजेपी है. जहाँ नए चेहरे हैं नया उत्साह है और सामने 2019 का लोकसभा चुनाव है. यानी लड़ाई दोहरी है. एक तरफ हिमाचल में अपने काम से जनता को कुछ करके दिखाना है साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव में हिमाचल से 4 सीटें पार्टी को जितवाना है जिससे मोदी की नज़र में भी इस नयो बीजेपी की साख बढ़ सके...... 

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