हिमाचल भाजपा में टिकट को लेकर मचा घमासान, कुछ लोग जानबूझकर मीडिया में करवा रहे अपने नाम के टिकेट की खबर लीक?

07 Sep 2017
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आवाज़ (रेखा राव, शिमला): हिमाचल भाजपा में टिकट की दौड़ में लगे प्रत्याशियों के बीच घमासान मचा हुआ है. इस बार एक अनार सौ बीमार वाली कहावत एकदम सही बैठ रही है. टिकट सिर्फ एक है और दावेदार कई. होने भी चाहिए यही तो लोकतंत्र है, और सबको टिकट मांगने से लेकर चुनाव लड़ने का भी अधिकार है. ऐसे में कई प्रत्याशी तरह तरह के जुगाड़ में लगे हुए हैं. पहले दो खेमे मशहूर थे. एक शांता कुमार और दूसरा प्रेम कुमार धूमल. लेकिन अब तीसरा खेमा भी अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में आ जुटा है. उसका नाम भी सुन लीजिये, खेर आप सबसे ज्यादा समझदार हैं. और हों भी क्यों नही, जनता जनार्दन हैं, सब जानते हैं. फिर भी चलिए हम आपको बता ही देते हैं.  वो खेमा है जे.पी.नड्डा का. सुना जा रहा कि उनकी भी खूब चल रही है.या यों कहें की केवल उनकी ही सुनी जा रही है. शांता कुमार टिकेट के लिए किसी की भी मदद करने के लिए मना कर चुके हैं और धूमल साहब कुछ चुप चुप हैं. इस बात को ऐसे भी कह सकते हैं की उनकी ख़ामोशी भी कई बातों का इज़हार कर रही है. इस बात को कुछ ऐसे समझिये की धूमल साहब की भी फिलहाल उस तरीके से नही सुनी जा रही जैसे पहले सुनी जाती थी.

बहुत ज्ञान बाँट लिया आपको आइये अब मुद्दे की बात पे आते हैं. तो खबर कुछ ऐसी है कि हिमाचल के कुछ भाजपा नेता आजकल तिलमिलाए हुए हैं, थोड़े घबराये हुए हैं कुछ अपना जी मचलाए हुए है. ओह्...हो.. इसका फिर से कोई दूसरा मतलब न निकाल लीजियेगा. बात सपाट है. इसे सीधे ही समझिये. टिकेट कटने का खतरा है भई. तो तरह तरह के जुगाड़ तो करने पड़ेंगे न. तो अब नया पैंतरा बताते हैं, जो अब अपनाया जा रहा है. तो गौर से सुनते जाएइयेगा अरे माफ़ कीजियेगा में गलत बोल गई .. पढ़ते जाएगा.

तो नया फार्मूला चर्चा में बने रहने के लिए ये है कि कुछ खबरें लीक की जाएँ. उनमे अपना नाम विधानसभा के टिकेट में सबसे ऊपर रखा जाए. अरे नाम ही ऊपर नही बल्कि टिकेट के लिए अपना नाम ही घोषित करवा दिया जाए. और मेल लीक कर दी जाए. और लीक भी कहाँ से? जे.पी.नड्डा के नाम से. और अपने इलाके में जाकर सबको वो खबर पढ़ाई जाए.खूब वायरल की जाए. अपने चेले चांटों को भी इस काम पर लगाया जाए.की कहीं कोई कसर बाकी न रह जाए. सब पढो... सब आगे बढ़ो. ओह माफ़ कीजियेगा. सब पढो और सिर्फ में आगे बढूँ. उसमे भी अपना बचाव करने के लिए एक नया पैंतरा रखा हुआ है. और वो ये की उस खबर में अकेला अपना नाम ही वायरल नही करवाना है. उसमे 20 से 30 लोगों के नाम होने चाहिए,जिसमे से एक आपका भी होगा. जिस से किसी को कोई शक भी न हो और नेता जी की अपने इलाके में धोंश भी बनी रहे और साथ में कार्यकर्ताओं का जोश भी बना रहे की अब तो बस हमारे नेता का टिकेट पक्का हो गया. अब नेता जी मैदान में आकर कांग्रेस के उम्मीदवार की जमानत जब्त करवाकर कैबिनेट मंत्री बन जायेंगे और फिर अपने तो अच्छे दिन आयेंगे, पब्लिक के आयें या न आयें इससे हमें क्या.

अब ये भी बता देते हैं की आजकल ऐसी ही कुछ ख़बरें चर्चा में हैं. जिसमे भाजपा के 30 उम्मीदवारों की सूची जारी की गई है. नाम उनके हैं जो या तो पिछली बार भाजपा के प्रत्याशी थे. चुनाव हार गये और इस बार फिर टिकेट चाह रहे हैं. साथ ही मन में ये डर है कि कहीं इस बार उनका पत्ता साफ़ न हो जाए. या फिर इसमें ऐसे लोग हैं जो पार्टी छोड़ कर आज़ाद चुनाव लड़ गए थे. यानी जब पार्टी ने टिकेट नही दिया तो फिर कैसी पार्टी? में तो बस में हूँ. आज़ाद लड़कर भी जीतूँगा. फिर पार्टी को दिखाऊंगा कि में क्या चीज़ हूँ, कैबिनेट मंत्रालय लूँगा, या फिर हम तो डूबेंगे सनम साथ में पार्टी को भी ले डूबेंगे.

जबकि हकीकत ये है कि अभी तक तो चुनाव की भी घोषणा नहीं हई. चुनाव आयोग अभी आचार संहिता लगाएगा. फिर जाकर तो पता चलेगा की चुनाव आने वाले हैं. और वैसे भी सूबे के मुखिया वीरभद्र सिंह ये पहले ही कह चुके हैं कि वो अपना कार्यकाल पूरा करेंगे. तो जनाब क्या कहेंगे अब आप. और हां अब भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती की उस प्रेस रिलीज़ का भी जिक्र कर देते हैं जिसमे उन्होंने कहा था की अभी तक जो अफवाहें उड़ाई जा रही हैं उनपर धयान देने की जरुरत नहीं है. ऐसा कुछ शरारती तत्व कर रहे हैं. और अगर कोई  पार्टी के अंदर है जो ऐसा कर रहा है और पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ कार्यवाही भी की जायेगी. या यों कहें की पार्टी से निकल दिया जाएगा. और अगर कोई बाहर का है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जायेगी. तो जनाब अब समझ में आया, कि  ये क्या खेल चल रहा है? और क्यों चल रहा है? इन ख़बरों में उन लोगों का नाम ज्यादा है जिनको लग रहा है की इस बार उनका टिकेट कटेगा. तो अब बेचारे करें भी तो क्या करें. क्योंकि अगर टिकेट कटा, तो फिर वो कहावत एकदम सटीक बैठेगी... की धोबी का कुता, न घर का................. बस, आगे समझ जाइए. तो अंत में आप सबको राम राम. अपना रखियेगा ध्यान. और अगर ऐसी कोई खबर आये या कोई मनचला सताए तो रहिएगा खबरदार, होशियार क्योंकि यही तो राजनीती है प्यारे... यहाँ देखने को मिलते हैं तरह तरह के नज़ारे.. फिर में आउंगी ऐसी ही कोई खबर लेकर.. तबतक.. सभी पाठकों को मेरी प्यार भरी राम राम.  

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