आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): ममता बनर्जी ने जब कोलकाता में विपक्ष की रैल्ली की तो ये सवाल उठा कि क्या अब ममता महागठबंधन की सर्वसम्मत नेता हो गई हैं... कम से कम उन्होंने इतना तो दर्शा दिया कि उनके नाम कके नीचे करीब 20 दलों के नेता इक्कट्ठे हो सकते हैं..... लेकिन रैली में शरद यादव की जुबान ऐसी फिसली कि वो चर्चचा का विषय बन गई.... अब इस मुद्दे पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चुटकी ली है.....  मोदी ने कहा कि आखिर सच्चाई कब तक छुपती, कभी न कभी तो सच बाहर आ ही जाता है...... दरअसल, ममता की रैली में जनता को संबोधित करने आए शरद यादव बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रहे थे, तभी उनकी जुबान फिसल गई और वह राफेल घोटाले की जगह बोफोर्स घोटाले पर ही बोलने लगे. हालांकि, तुरंत बाद उन्होंने इस सफाई दी और कहा कि माफ कीजिए मैं राफेल की बात कर रहा था. मोदी ने तंज कसते हुए कहा कहा कि 'जिस मंच से ये लोग देश और लोकतंत्र को बचाने की बात कह रहे थे, उसी मंच पर एक नेता ने बोफोर्स घोटाले की याद दिला दी. आखिर सच्चाई कब तक छुपती है. कभी न कभी तो सच बाहर आ ही जाता है, जो कल कोलकाता में हुआ.' हालांकि, पीएम मोदी ने सीधे तौर पर शरद यादव का नाम नहीं लिया. बता दें कि पीएम मोदी 'मोदी ऐप्प' के जरिये महाराष्ट्र और गोवा के बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे. 

 

ईवीएम को अभी से ही विलेन बनाया जा रहा: पीएम मोदी


पीएम मोदी ने इस दौरान कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा. पीएम मोदी ने कहा कि '2019 में हार के लिए वे अभी से ही बहाने बनाने शुरू कर दिए हैं. ईवीएम को विलेन बनाया जा रहा है. यह स्वाभाविक है क्योंकि सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतना चाहती है, मगर यह चिंताजनक है जब कुछ पार्टियां जनता को फॉर ग्रांटेड ले लेते हैं. वे जनता को मूर्ख समझते हैं और अपना रंग बदलते रहते हैं.'

उनके पास धनशक्ति, हमारे पास जनशक्ति: पीएम मोदी


आगे उन्होंने कहा कि 'एक दूसरे के साथ उन्होंने गठबंधन किया है. हमने देश की 125 करोड़ जनता के साथ गठबंधन किया है. आपको क्या लगता है कौन सा गठबंधन मजबूत है? कोलकाता रैली के मंच पर जितने भी नेता थे, उनमें से अधिकतर प्रभावशाली लोगों के थे या फिर वे अपने बच्चों को राजनीति में सेट करने की कोशिश कर रहे हैं. उनके पास धनशक्ति है, हमारे पास जनशक्ति है.'

 

विधायक और प्रशासन मस्त, जनता कर रही त्राहि-त्राहि, ठेकेदार और आला अफसरों की मिलीभगत से सरकार को लगा करोड़ों का चूना.....!

 

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): हम आज़ाद हैं...आजादखयाल हैं और अपनी इस आज़ादी के महत्व को समझते हैं.... सरकार की अहमियत को समझते हैं अपने अधिकारों और कर्तव्यों दोनों को लेकर सजग हैं.... कहीं कुछ गलत हो रहा हो तो अपनी आवाज़ भी उठाते हैं... लेकिन अगर आवाज़ उठाई जाए फिर भी समस्या न सुलझाया जाए, आपकी आवाज़ को अनसुना करके आपको डराया और धमकाया जाए.... सरकार और स्थानीय नेता, एमएलए अपने मस्त रहें और जनता त्राहि-त्राहि करे तो क्या वाकई हम अपने आप को आज़ाद कह पायेंगे..... ऐसा ही कुछ हो रहा है हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ तहसील के जमरेला  वासियों के साथ..... ये लोग आज काला पानी की सजा काटने को मजबूर हैं.... और ऐसी घटनाएं ही सवालिया निशाँ खड़ा करती हैं उन सरकारों के ऊपर जो सबका साथ-सबका विकास करने की बातें करती हैं.... 

कहानी शुरू होती है हिमाचल प्रदेश की बैजनाथ तहसील के जमरेला गांव से....बल्कि ये कहानी नहीं हकीकत है जमरेला गांव की जो सुविधाओं के नाम पर काला पानी से किसी भी अंदाज़ में कम नहीं है.... यहां के लोग भोले-भाले और सीधे साधे हैं..... वोट तो नेता आकर ले जाते हैं पर इस गांव में सुविधाओं के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिलते हैं.... फिर शायद इस गांव की याद उन्हें अगले चुनाव में ही आती है.... आज इस गांव में सड़क तक नहीं है... जो कच्ची सड़क बनी थी वो भी पिछली बरसात में बह गई.... सम्पर्क पूरे क्षेत्र से टूट गया है.... बड़े लोग तो फिर भी किसी तरह अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करके अपने काम पर पहुँच रहे हैं, लेकिन बच्चे स्कूल तक नहीं जा पा  रहे हैं...... कहने के लिए तो एक बांस का छोटा सा पुल जिसे स्थानीय भाषा में त्रगड़ी कहते हैं वो बना दिया गया है लेकिन सुबह के वक़्त जैसे ही उस पुल पर ओस पड़ती है तो फिसलन से कई बार हादसे हो जाते हैं और जान जाते जाते बचती है.... पर किसी को परवाह नहीं है..... शिकायतें स्थानीय विधायक से बार बार की गई लेकिन असर निल्ल वटे सन्नाटा ही नजर आया है...स्थानीय लोगों की मानें तो विधायक को उनके गांव की याद बस चुनाव में आती है.... उसके बाद उन्होंने इस गांव को भुला ही दिया है... शिकायत करने जाओ तो केवल आश्वासन ही मिलते हैं.... काम होता नहीं...... कह सकते हैं कि सरकार और स्थानीय अधिकारी अपने कमरों में मस्त हैं और जनता त्रस्त है....जिस सरकार की प्राथमिकता सबका विकास की हो उसके राज में अगर हालत ऐसे हों तो वाकई घटना दुखद है...... .यानी सरकार का सबका साथ सबका विकास का नारा यहाँ पूरी तरह से फेल ही नजर आता है.....

ठेकेदार और स्थानीय प्रशासन गांव की बदहाली के जिम्मेवार, करोड़ो का हुआ घोटाला.....

आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क ने जब स्थानीय लोगों से बात की तो पता चला कि ऐसा नहीं है कि सड़क इस गांव में नहीं थी... सरकार ने करोड़ों रूपए खर्च करके सड़क तो बनाई लेकिन जिस तरह से वो सडक बनी वो कागजों पर ज्यादा थी और ज़मीन पर कम.... पुल भी बनाया गया लेकिन वो भी कागजों पर ज्यादा मजबूत था धरातल पर कम.... पिछली बरसात का पानी धरातल पर बनी सडक और पुल को बहा ले गया लेकिन कागजों पर आज भी ये सड़क और पुल मजबूत हैं.... यानी जाहिर तौर पर इसकी जांच कराए जाने की आवश्यकता है क्योंकि इतनी शिकायतों के बाद भी अगर समस्या का निपटारा नहीं हो पा रहा तो कहीं दाल में कुछ काला तो जरुर है... स्थानीय लोगों की मानें तो ठेकेदार ने सड़क बनाते वक़्त सारे नियम क़ानून को टाक पर रखकर काम किया... बात बात पर अपनी ऊँची पहुंच की धौंस जमाता था.... और अगर फिर भी बात न बने तो डराना धमकाना और उंची पहुंच का हवाला देना उसके लिए आम बात थी......

 

कांग्रेस सरकार के कारनामों की सजा भुगत रहे हैं जमरेलावासी, हमारी सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर, जल्द होगा समाधान: मुल्ख राज प्रेमी(स्थानीय विधायक)

जब आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क ने इस मुद्दे को लेकर स्थानीय विधायक से बात की तो उन्होंने इसका ठीकरा पिछली सरकार के सर पर फोड़ते हुए कहा कि जमरेला वासीयों की इस तकलीफ की वजह पिछली कांग्रेस सरकार है.... उन्होंने जो पुल बनाया उसकी ड्राइंग तक ढंग से तैयार नहीं की गई थी.... हमनें सत्ता में आते ही जमरेला के लिए सड़क को ढंग से तैयार करवाया और वहां पर सुचारू रूप से बसें भी चलना शुरू हो गई थीं... लेकिन बरसात में पुल बह गया और ज्यादा बरसात होने के कारण सड़क भी जगह-जगह से टूट गई है.... लेकिन उन्होंने इस समस्या के निदान से मुख्यमंत्री से बात की है और जल्द ही सरकार जमरेला वासियों को मुख्यधारा में वापिस ले आएगी......

अब उम्मीद केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से.....

स्थानीय लोगों की मानें तो गांव को मुख्य धारा में जोड़ने के लिए उन्होंने अपनी तरफ से साड़ी कोशिशें करके देख ली हैं... स्थानीय अधिकारियों से लेकर एमएलए तक की चौखट पर वो कई बार अपनी नाक रगड़कर थक गये हैं.... पर सबने जैसे अपने कानों में रुई डाल रखी है.... भैंस के आगे जितनी मर्ज़ी बीन बजाओ कुछ असर ही नहीं होता..... अब उम्मीद केवल देश के प्रधानमंत्री मोदी से बची हुई हैं.... वो ही उनका कुछ भला कर सकते हैं.... हिमाचल की सरकार ने तो उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया है.....

 

 

 

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): आख़िरकार मोदी सरकार ने 3 राज्यों में सत्ता गंवाने के बाद एक ऐसा ब्रह्मास्त्र चलाया कि विपक्ष चारों खाने चित हो गया और अब ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में इसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा.... सभी धर्मों के सामान्य वर्ग के गरीब नागरिकों को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए संविधान में लाया गया संशोधन बिल लोकसभा में पास हो गया है. अब इसे आज राज्यसभा में 12 बजे लाया जायेगा.....गौरतलब है कि लोकसभा में बिल पर कुल 326 सांसदों ने मतदान किया, जिनमें से 323 ने संशोधन का समर्थन किया, जबकि 3 सांसदों ने बिल का विरोध किया. यानी सवर्णों को आरक्षण देने वाला संशोधन बिल लोकसभा में उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत से पास हो गया.

हालांकि कुछ विपक्षी दल ये आदेश सुप्रीम कोर्ट में खारिज होने का दावा कर रहे हैं लेकिन सरकार का मानना है कि संविधान में संशोधन किए जाने से इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना आसान नहीं होगा.  सरकार को उम्मीद है कि इस कानून के खिलाफ जाने वालों को कोर्ट नकार देगी. लेकिन मोदी सरकार के इस फैसले के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं. इस तरह के सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर संसद के आखिरी सत्र के आखिरी दिनों में ही यह क्यों लाया गया? आखिर अबतक इस मुद्दे पर खामोश रहने वाली मोदी सरकार ने अचानक से ऐसा कदम कैसे और क्यों उठाया.....और सबसे बड़ा सवाल ये कि आने वाले लोकसभा चुनाव में इसका फायदा आखिर कैसे बीजेपी को मिलेगा......

सवर्ण आरक्षण से सियासी समीकरणों को अपने पक्ष में भुनाएगी बीजेपी......

राजनितिक पंडितों का मानना है कि इस बिल का सीधा असर देश के 14 राज्यों में पड़ेगा..... इन 14 राज्यों में लोकसभा की कुल 341 सीटें हैं, जिनमें से करीब 180 सीटों पर सवर्ण वोटर निर्णायक हैं.  2014 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो यहां बीजेपी को मिली 282 सीटों में 256 सीटें मिली थीं.  अगर गौर से नजर डालें तो महाराष्ट्र में करीब 25 सीट, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड की 5-5 सीट, हिमाचल की 4 सीट पर सवर्ण वोटर निर्णायक हैं. बात गुजरात की करें तो यहां 12, एमपी की 14, राजस्थान की 14, बिहार की करीब 20 सीट और झारखंड की 6 सीट पर इसका असर पड़ता है. अकेले यूपी में 35 से 40 सीटें ऐसी हैं, जहां सवर्ण वोटर किसी की जीत या हार तय करते हैं. ऐसे में 2019 के आम चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार का यह मास्टरस्ट्रोक विपक्षी एकजुटता के लिए हानिकारक भी साबित हो सकता है और बीजेपी की विजयी रथ को फिर से परवाज मिल सकती है.

बहरहाल इतना तो तय है कि मोदी ने अपने इस ब्रह्मास्त्र से विरोधियों को बुरी तरह से पस्त कर दिया है... जो उनके लिए न निगलते बन रहा है न उगलते... मजबूरी में इसका समर्थन करना सब विपक्षियों की मजबूरी बन गया है..... अभी विधेयक राज्यसभा में पेश होना बाकी है लेकिन स्वर्ण आरक्षण के मामले का श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई है... उत्तराखंड के सीएम ने तो प्रधानमंत्री मोदी को सवर्णों ललका आंबेडकर करार दे दिया है... और जैसे जैसे चुनाव नज़दीक आयेंगे वैसे वैसे इस आरक्षण का श्रेय लेने की होड़ सब पार्टियों में बढ़ेगी लेकिन जानकारों की मानें तो मोदी को इसका फायदा सीधे तौर पर मिलेगा.... हालिया 3 राज्यों में जिस तरह से सवर्णों ने बीजेपी का विरोध कर नोट को वोट डालकर बीजेपी को वहां की सत्ता से बेदखल कर दिया... अब बीजेपी को उम्मीद है कि इस आरक्षण के बाद नाराज़ स्वर्ण एक बार फिरसे बीजेपी की तरफ मुड़ेगा.... और इसका सीधा फायदा आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिलेगा.... 

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): लोकसभा में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण से जुड़े 124वें  संशोधन बिल को पारित कर दिया गया. बिल के समर्थन में 323 वोट पड़े जबकि 3 सदस्यों ने बिल का विरोध किया. इस बिल के खिलाफ AIADMK सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया. लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है.....अब इस विधेयक को राज्यसभा में पेश किया जाएगा... दरअसल संविधान संशोधन बिल होने के कारण विधेयक का सदन में उपस्थित दो-तिहाई मतों से पास होना जरुरी था....

इससे पहले आज करीब 5 बजे इस बिल पर चर्चा शुरू हुई....जिसमे तमाम पार्टियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया..... गरीब सामान्य वर्ग को शिक्षा और नौकरी में 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन से जुड़े इस बिल पर लोकसभा में ज़ोरदार चर्चा हुई..... कांग्रेस ने हालांकि इस बिल का समर्थन तो किया साथ ही इसे लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार द्वारा जल्दी में लाया गया बिल करार दिया,...... कांग्रेस सदस्य के.वी थॉमस ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि कल केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया और 48 घंटों के भीतर ही इसे सदन में चर्चा के लिए लाया गया... ये एक महत्वपूर्ण विधेयक है जिसका आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा.... इसमें अभी कानूनी त्रुटियाँ हैं....इसे जल्दबाजी में पेश करने से अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है....

वहीँ एनडीए में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने इस बिल का स्वागत किया... उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग को आरक्षण देकर सरकार ने एक ऐसे वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है जिसे इसकी जरुरत थी... ये स्वागत योग्य कदम है... वहीँ लोक जनशक्ति पार्टी के नेता राम बिलास पासवान ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि ये सरकार का स्वागत योग्य कदम है... साथ ही उन्होंने कहा की इस विधेयक को संविधान की नौवीं सूची में डाला जाना चाहिए ताकी ये न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हो सके....

सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण के इस बिल को पास करने के लिए लोकसभा में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सभी दलों से इसे बड़े दिल से समर्थन देने की बात कही.... उन्होंने कहा कि सभी दलों ने इसके लिए अपने घोषणापत्रों में वादा कर रखा है....उन्होंने दावा किया चूंकि ये आरक्षण संविधान संशोधन के माध्यम से दिया जा रहा है इसलिए ये न्यायिक समीक्षा में सही ठहराया जाएगा ......

साथ ही सदन में मौजूद कई विपक्षी पार्टियों ने भी बिल को अपना समर्थन दिया... टीएमसी में बिल को अपना समर्थन दिया... वहीँ समाजवादी पार्टी, रालोसपा सांसद उपेन्द्र कुशवाहा जैसे ने भी बिल का समर्थन किया.... बहरहाल इतना तो तय हो गया कि भाजपा द्वारा फेंकी गई इस गूगली में सब पार्टियाँ फंस गयीं.... अगर वो इस बिल का विरोध करती तो स्वर्ण समाज के आगे गुनाहगार बनती.... ऐसे में सबने इस बिल का समर्थन करना ही मुनासिब समझा... अब देखने वाली बात ये है कि बीजेपी राज्यसभा में इस बिल को पास करवा पाती है या नहीं... और आने वाले चुनाव में इसका कितना फायदा उन्हें मिल पता है क्योंकि अभी तो बीजेपी ये मान कर चल रही है कि इस बिल के पास हो जाने से देश भर में ये संदेश जाएगा कि सवर्णों की सच्ची हितेषी केवल बीजेपी ही है... जिससे उन्हें वो वोट बैंक वापिस मिलेगा जो तीन राज्यों के चुनावों में बीजेपी का साथ छोड़ गया था.... और लोकसभा चुनाव के नतीजे फिर से एक बार उनके पक्ष में बैठेंगे.....

 

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली) हालिया विधानसभा चुनावों में बीजेपी को सवर्णों की नाराज़गी की वजह से 3 राज्यों में हार का सामना करना पड़ा.... सत्ता तो हाथ से गई ही साथ ही आगामी लोकसभा चुनावों में भी इसी तरह की हार का डर भी सताने लगा.....जिसका नतीजा ये निकला कि आज आखिरकार केंद्र सरकार ने अपनी कैबिनेट मीटिंग में सवर्णों को भी 10 फीसदी आरक्षण का ऐलान कर दिया.... हालांकि उसके साथ ये भी जोड़ दिया कि ये आरक्षण केवल आर्थिक रूप से कमज़ोर सवर्णों को ही मिल पायेगा...... 

राजनितिक पंडित इसे सवर्णों के लिए एक बड़ी कामयाबी के रूप में देख रहे हैं...... उनकी मानें तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को आने वाले लोकसभा चुनावों में मिलेगा.... एक तरफ जहां बीजेपी का पुराना वोट बैंक जो नोट की तरफ मुड गया था वो फिर उसकी तरफ वापिस लौटेगा वहीँ दूसरी तरफ जो स्वर्ण बीजेपी के साथ नहीं चलते थे अब उनमे भी बीजेपी ये संदेश देने में कामयाब होगी कि बीजेपी ही उनकी सच्ची हितेषी है.... यानी सत्ता गंवाने के बाद आखिरकार बीजेपी को होश आया है और 2019 की लड़ाई से पहले बीजेपी अपनी जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही है....

अब इसका कितना फायदा बीजेपी को मिल पाता है और कैबिनेट के इस फैसले को उसके ही सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी और अठाबले कैसे देखते हैं ये देखने वाली बात होगी लेकिन इतना तो तय है कि स्वर्ण एकता अब अपना असर दिखाने लगी है.... जिस वोट बैंक को बीजेपी अबतक अपनी बपौती समझती थी, जिसे वोट बैंक को लेकर बीजेपी को ये लगता था कि इनका कुछ करो या न करो ये तो हमारे साथ ही चलेंगे जब उसने अपनी नजरें बीजेपी की तरफ तल्ख़ कीं तो बीजेपी को 3 राज्यों में सत्ता से हाथ धोना पड़ा.... बहरहाल इतना तो तय है कि सवर्णों की नाराज़गी से बीजेपी के अंदर जो हडकंप मचा था ये उसी का नतीजा है कि अब उनको मनाने के लिए बीजेपी ने तुरुप का पत्ता चला है...अब इसका नतीजा क्या निकलेगा ये तो आने वाले चुनाव के नतीजे ही बतायेंगे लेकिन फिलहाल बीजेपी ने ये चाल चलकर विपक्ष की उम्मीदों पर पानी फेरने का काम तो कर ही दिया है......

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): देश में जब एस सी/एसटी आरक्षण पर बड़ी बहस चल रही हो, बीजेपी ने इसका खामियाजा अभी-अभी तीन राज्यों में हुए चुनावों में भुगता हो ऐसे में बीजेपी के ही गठबंधन के सहयोगी लोक-जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने एससी/एसटी आरक्षण पर एक ऐसा ब्यान दिया है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी और खीचा है.... जाहिर तौर पर उनका ये बयान स्वर्ण मतदाताओं में तारीफ़ बटोर रहा है वहीं कुछ दलित चिंतकों को ये चुभ भी रहा है.... दरअसल लोक-जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने कहा है कि जिस तरह से अमीर लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी है उसी तरह से अमीर दलितों को भी आरक्षण छोड़ देना चाहिए.. टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए अपने इस इंटरव्यू में चिराग ने साफ़ तौर पर कहा की जो दलित आर्थिक रूप से सम्पन्न हैं उन्हें ये कदम उठाना चाहिए... हालांकि ये फैसला स्वेच्छा से होना चाहिए नाकि जोर-जबरदस्ती से.....

चिराग ने साफ़ तौर पर कहा कि मैं एक जातिवाद रहित समाज की उम्मीद करता हूँ.... ये मेरा लक्ष्य है.... हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि मैं जहाँ से आता हूँ वहां जातिवाद के समीकरण हमेशा से हावी रहते हैं... और अगर इस सपने को साकार करना है तो इसमें उत्तर प्रदेश और बिहार की मुख्य भूमिका रहेगी......वहीँ जब उनसे उनके सहयोगी दल बीजेपी के बारे में जब सवाल पूछा गया कि क्या बीजेपी उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनावों से ठीक पहले दलित और ओबीसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर इस वोट बैंक को लुभाने की कोशिश कर रही है तो चिराग ने कहा कि मुझे पता है कि आप इन न्युक्तियों की टाइमिंग को लेकर सवाल उठायेंगे लेकिन अब वो समय आ गया है जब इस तबके से जुड़े नेताओं को आगे लाया जाए....ऐसे में अगर बीजेपी ऐसे नेताओं को आगे ला रही है तो ये तो भारतीय राजनीती के लिए एक शुभ संकेत है.....

वहीँ चिराग ने इस मौके पर मायावती पर भी जमकर निशाना साधा.... उन्होंने कहा कि जब मायावती की सरकार थी, उनके पास पूरी पॉवर थी लेकिन उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए कुछ नहीं किया.... उन्होंने अपना सारा ध्यान केवल और केवल मूर्तियां बनाने पर लगाए रखा....अगर वो चाहती तो दलितों के लिए बहुत कुछ कर सकती थीं.....

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के बारीपदा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राफेल डील पर कांग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी पर पलटवार किया. पीएम ने कहा कि कुछ ताकतें किसी भी कीमत पर चौकीदार को रास्ते से हटा देना चाहती है, क्योंकि जबतक चौकीदार है, चोरों की दाल नहीं गलती है. पीएम मोदी ने कहा कि सोसायटी हो या फ्लैट, कारखाना हो या मोहल्ला, चोर सबसे पहले चौकीदार को हटाने का षडयंत्र रचते हैं क्योंकि चौकीदार के रहते उनकी दाल नहीं गलती है. 

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर देश की आंखों में धूल झोंकने का आरोप लगाया. पीएम मोदी ने कहा कि संसद के पवित्र पटल का अपने मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करने वालों को रक्षा मंत्री ने देश के सामने बेपर्दा कर दिया. पीएम ने कहा, "देश की आंखों में धूल झोंकने वालों की नीयत को, देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों की राजनीति को, अपने मनोरंजन के लिए पवित्र संसद का इस्तेमाल करने वालों के बचपने को, रक्षा मंत्री निर्मला ने देश के सामने उजागर कर दिया है."  पीएम ने कहा कि 2004 से 2014 के बीच देश की सेना को केन्द्र की सरकार ने कमजोर करने की साजिश रची, और जब उनकी सरकार इस साजिश से देश को बाहर निकाल रही है तो वे उनकी आंखों में खटकने लगे हैं. 

पीएम ने कहा कि इस सरकार की साफगोई नामदारों को इसलिए भी खटक रही है क्योंकि उनके राज खुल रहे हैं. पीएम ने बताया, "कल ही अखबारों में एक रिपोर्ट आई है, हेलीकॉप्टर घोटाले का बिचौलिया, कांग्रेस के करप्शन का राज़दार मिशेल, जिसको विदेश से यहां लाया गया है, उसकी एक चिट्ठी से खुलासा हुआ है कि इस राजदार का कांग्रेस के टॉप के नेताओं, मंत्रियों से गहरी पहचान थी. पीएम ने कहा कि पीएम ऑफिस में कौन सी फाइल कहां जा रही है, क्या फैसले लिए जा रहे हैं, इस बात की जानकारी जितनी इस बिचौलिए शख्स को रहती थी संभवत: उस समय के पीएम को भी ये जानकारी नहीं थी. पीएम ने कहा, "समझ नहीं आता कि कांग्रेस ने सरकार चलाई है या अपने मिशेल मामा का दरबार चलाया है, मैं आज स्पष्ट कहना चाहता हूं, देश के बजाय बिचौलियों के हितों की रक्षा में जिस-जिस की भूमिका रही है, उनका पूरा हिसाब जांच एजेंसियां करेंगी, देश की जनता करेगी."

 

4500 करोड़ की परियोजनाओं की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा में शनिवार को 4,500 करोड़ रुपये से अधिक की कई केंद्रीय परियोजनाओं की शुरुआत की. प्रधानमंत्री की एक पखवाड़े के भीतर ओडिशा की यह दूसरी यात्रा रही. उन्होंने 24 दिसंबर को भुवनेश्वर में कुछ परियोजनाओं की शुरुआत की थी और ऐतिहासिक खुर्दा शहर के पास भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एक रैली को संबोधित किया था. प्रधानमंत्री ने इन परियोजनाओं को ओडिशा के लोगों के लिये नये साल का नया तोहफा बताया. उन्होंने उम्मीद जताई कि नया साल 2019 में राज्य को तेज विकास के पथ पर ले जाएगा. आज जिन परियोजना कार्यों की शुरूआत की गयी वे राजमार्ग एवं परिवहन, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, रेलवे, संस्कृति, पर्यटन और पासपोर्ट सेवाओं से संबंधित हैं.

इनमें ओडिशा में तीन मुख्य राष्ट्रीय राजमार्गों को चार लेन का बनाया जाना, एक मुख्य एलपीजी पाइपलाइन का शिलान्यास करना तथा एक प्रमुख रेलवे मार्ग का दोहरीकरण किया जाना शामिल है. मोदी ने एक मार्ग पर एक नयी सवारी रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया. उन्होंने बालासोर में बहुमॉडल आधारित लॉजिस्टिक केंद्र का उद्घाटन किया. प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक हरिपुरगढ़ में संरक्षण की एक परियोजना की भी शुरुआत की. उन्होंने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये भदरक, कटक, जाजपुर, असका, क्योंझर और धेनकनाल के डाकघरों में पासपोर्ट सेवा केंद्रों का उद्घाटन भी किया. अधिकारियों ने कहा कि अभी लोगों को पासपोर्ट सेवाओं के लिये भुवनेश्वर जाना पड़ता है.

विभिन्न परियोजनाओं की शुरुआत, शिलान्यास तथा उद्घाटन ऐसे समय हुआ है जब कुछ महीने बाद आम चुनाव के साथ साथ ओडिशा विधानसभा के चुनाव भी होने वाले हैं. मोदी ने ओडिशा की 24 दिसंबर की यात्रा में भी 14,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की शुरुआत की थी.

आवाज़(ब्यूरो, दिल्ली): धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत बने स्पेशल कोर्ट ने शनिवार को मुंबई में शराब कारोबारी विजय माल्या को भगोड़ा वित्तीय अपराधी घोषित कर दिया. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इसके लिए स्पेशल कोर्ट में अर्जी लगाई थी. भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) के तहत विजय माल्या का नाम देश के पहले भगोड़े आर्थिक अपराधी के रूप में दर्ज हो गया. इस कानून में जांच एजेंसियों को एफईओए के तहत दर्ज अपराधी की सारी संपत्तियां जब्त करने का अधिकार है. अब कर्नाटक, इंग्लैंड और अन्य जगहों की विजय माल्या से जुड़ी संपत्तियां ईडी कुर्क कर सकता है.

इससे पहले ईडी के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता हितेन वेनगांवकर ने बताया कि एफईओए नया कानून है और काफी सख्त भी. इस कानून के दायरे में जांच एजेंसियां विजय माल्या की सभी प्रॉपर्टी जब्त कर सकती हैं. ये प्रॉपर्टी चाहे अपराध क्षेत्र के अंदर हों या बाहर, उससे फर्क नहीं पड़ता. आर्थिक भगोड़ा घोषित होने पर माल्या को ब्रिटेन से प्रत्यर्पित करने में भी मदद मिलेगी. स्पेशल कोर्ट माल्या की सभी अर्जियां पहले ही खारिज कर चुका है.

पीएमएलए कोर्ट ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) की धारा 2एफ के तहत माल्या के खिलाफ अपना फैसला सुनाया. इस कानून के मुताबिक जो व्यक्ति अपराध करने के बाद देश छोड़ गया हो और जांच के लिए कोर्ट में हाजिर न हो रहा हो, जिसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका हो लेकिन विदेश भागने के कारण वह हाजिर न हो रहा हो, उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी ठहराया जा सकता है. मार्च 2016 में ब्रिटेन भाग गए विजय माल्या पर कई बैंकों के नौ हजार करोड़ रुपए गबन करने का आरोप है. बैंकों का कर्ज न चुकाने के मामले में वे भारत में वांछित हैं. माल्या ने मुंबई हाई कोर्ट के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है. हाई कोर्ट ने हाल ही में मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की विशेष अदालत में माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के ईडी की अर्जी पर रोक लगाने के लिए दायर उनकी याचिका खारिज कर दी थी. इससे पहले, विशेष अदालत ने 30 अक्टूबर को माल्या की अर्जी खारिज कर दी थी.

आवाज़(ब्यूरो, दिल्ली): कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. इस बार उन्होंने देश में नौकरियों में कमी आने को लेकर हमला बोला है. इसके साथ ही राहुल गांधी ने बिजनेस टुडे की उस खबर को पोस्ट किया है, जिसमें सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि साल 2018 में करीब एक करोड़ 10 लाख लोगों ने अपनी नौकरी गंवा दी. इस एनालिसिस रिपोर्ट में कहा गया कि इतनी नौकरियों के कम होने से अशिक्षित महिलाएं और दिहाड़ी मजदूर, खेतिहर मजदूर और छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर साल 2 करोड़ रोजगार देने के वाले वादे को जुमला बताते हुए ट्वीट किया, 'ब्रेकिंग! साल 2018 में एक करोड़ 10 लाख नौकरियां खत्म हो गईं. हर साल 2 करोड़ युवाओं को रोजगार का वादा करने वाले प्रधानमंत्री आज भी 'राग जुमला' अलाप रहे हैं. मोदी जी ने अनिल अंबानी को चोरी करवाने के बजाय अगर देश के लिए काम किया होता, तो युवा का भविष्य इतना असुरक्षित नहीं होता.'

CMIE की रिपोर्ट में दावा किया गया कि देश में रोजगार तेजी से कम होते जा रहे हैं. दिसंबर 2018 में 39 करोड़ 70 लाख रोजगार रिकॉर्ड किए गए, जो दिसंबर 2017 के 40 करोड़ 79 लाख रोज़गार के मुकाबले एक करोड़ 9 लाख कम है. इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्र के लोग प्रभावित हुए हैं. इससे सबसे ज्यादा पूर्व क्षेत्र प्रभावित हुआ है. एक आंकड़े के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में 91 लाख नौकरियां और शहरी क्षेत्र में 18 लाख नौकरियां कम हुई हैं. भारत की दो तिहाई जनता ग्रामीण इलाकों में ही रहती है.

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): उत्तर प्रदेश के अवैध रेत खनन मामले में सीबीआई (CBI) की ताबड़तोड़ छापेमारी जारी है. शनिवार को मामले में सीबीआई ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली के 14 ठिकानों पर छापेमारी की और तलाशी अभियान चलाया. जांच एजेंसी ने उत्तर प्रदेश के हमीरपुर, नोएडा, लखनऊ और कानपुर समेत अन्य इलाकों में छापेमारी की. यह अवैध खनन का मामला उस समय का है, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास खनन मंत्री की जिम्मेदारी थी.

सीबीआई सूत्रों का कहना है कि मामले में अखिलेश यादव की भूमिका की भी जांच की जाएगी. मामले में सीबीआई उनसे पूछताछ भी कर सकती है. सीबीआई ने साल 2012-16 के खनन मंत्री के नाम लिए हैं. आपको बता दें कि अखिलेश यादव साल 2012 से 2013 तक उत्तर प्रदेश के सीएम होने के साथ खनन मंत्री भी थे. ऐसे में मामले की आंच अखिलेश यादव तक भी पहुंच सकती है. फिलहाल अखिलेश के विधायक रमेश मिश्रा और उसके भाई दिनेश कुमार को सीबीआई ने मामले में आरोपी बनाया है. कानपुर के रहने वाले दिनेश कुमार एक कारोबारी हैं. सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इस अवैध खनन मामले में सरकारी अधिकारियों समेत 11 लोग शामिल हैं.

आईएएस अधिकारी चंद्रकला पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की रोक के बावजूद खनन लीज की मंजूरी देने और उसको रिन्यू करने का आरोप है. सीबीआई की छापेमारी में उनके पास से प्रोपर्टी के दस्तावेज बरामद हुए हैं. साथ ही उनके लॉकर और कुछ ज्वैलरी को जब्त किया गया है. वहीं, आदिल खान पर तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रजापति की सिफारिश से लीज हासिल करने का आरोप है. सीबीआई ने आदिल खान के लखनऊ और दिल्ली के लाजपत नगर स्थित ठिकाने पर छापेमारी की है.

जब अवैध खनन का यह खेल चल रहा था, तब मोइनुद्दीन हमीरपुर में खनन अधिकारी और जियोलॉजिस्ट के रूप में तैनात थे. मोइनुद्दीन के पास से छापेमारी में 12 लाख 50 हजार रुपये नकद और एक किलो 800 ग्राम सोना बरामद हुआ है. जालौन में खनन विभाग में क्लर्क रहे राम अवतार सिंह के ठिकाने से भी सीबीआई ने 2 करोड़ रुपये नकद और 2 किलो सोना बरामद किया है.

 

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