Items filtered by date: Saturday, 09 June 2018

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): बीजेपी ने मिशन 2019 के लिए शंखनाद कर दिया है. लेकिन पार्टी में उलझनों का दौर अभी ख़त्म नहीं हो रहा है. हालिया उप-चुनावों में मिली करारी हार ने पार्टी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ऐसा क्या किया जाए जिससे पार्टी फिर से मजबूती के साथ एकजुट विपक्ष को न केवल कड़ी टक्कर दे पाए बल्कि उन्हें हरा भी सके. ऐसे में पार्टी के चाणक्य और अध्यक्ष अमित शाह इस बात को लेकर पूरी तरह से संजीदा हैं और पार्टी के अंदर आंतरिक सर्वे करवाए जा रहे हैं जिससे पता चल सके कि जनता बीजेपी सरकार और सरकार के नुमाइंदों यानी की बीजेपी के मौजूदा सांसदों की छवि कैसी है. जनता उनके कामकाज से कितना संतुष्ट है. लेकिन यहाँ भी खबर बीजेपी के लिए अच्छी नहीं है. सूत्रों की मानें तो गुजरात चुनाव से ठीक पहले देशभर में करवाए गये आंतरिक सर्वे में लगभग 40 फीसदी सांसदों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है. यानी इन सांसदों की जनता के बीच छवि अच्छी नहीं है. इस बात ने पार्टी को गहरी चिंता में डाल दिया है और ऐसा सूत्रों के हवाले खबर आ रही है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह अब इन सांसदों को अगली बार टिकेट देने के मूड में नहीं हैं और पार्टी और संगठन से अंदरखाते उनकी जगह वैकल्पिक उम्मीदवारों के नाम भी मंगा लिए गये हैं.

गौरतलब है कि इसी मुद्दे के मद्देनजर अभी अमित शाह संघ प्रमुख मोहन भागवत से भी मिले थे और दोनों के बीच काफी लम्बी चर्चा भी हुई थी. सूत्रों की मानें तो संघ ने भी जो सर्वे किया था उसमे भी ये चेताया गया था बीजेपी के कई सांसद अपने क्षेत्र में एक्टिव नहीं हैं. उनकी छवि जनता के बीच अच्छी नहीं है, जो आने वाले वक़्त में बीजेपी को नुक्सान पहुंचा सकती है. साथ ही पार्टी की कोशिश ये भी है कि नई लीडरशिप को उभारा जाए जो आने वाले 15-20 साल तक अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर सके. यानी एक बात तय है कि पार्टी के कई दिग्गजों के टिकेट कटेंगे और उनकी जगह नए उम्मीदवार नजर आयेंगे. हालांकि इन सांसदों को उनकी छवि जनता के बीच सुधारने के लिए वक़्त दिया गया है लेकिन सूत्रों की मानें तो इन सांसदों को अगले चुनाव में टिकेट न देने का पार्टी ने लगभग मन बना लिया है.

अब अगर राज्यवार सांसदों की कार्यप्रणाली पर नजर डाली जाए तो जिन राज्यों से बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा बुरी खबर आई है उनमे हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान के नाम शुमार हैं. सबसे बुरी खबर बीजेपी के लिए तो हरियाणा से ही है, जहाँ मौजूदा 7 सांसदों में से एक की भी रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं है. यानी जनता के बीच इन सभी सांसदों की छवि अच्छी नहीं है. उसके बाद बात उत्तर प्रदेश की करें तो यहाँ पार्टी के 71 सांसद हैं जिनमे से 48 सीटों पर सांसदों की रिपोर्ट नेगेटिव है. जो पार्टी के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय है. इसी के चलते पार्टी को यहाँ उप-चुनावों में भी हार का सामना करना पड़ा है.

अब अगर बात मध्य प्रदेश की करें तो यहाँ भी पार्टी के 16 सांसदों की रिपोर्ट नेगेटिव है. साथ ही राजस्थान और महाराष्ट्र के लोग भी अपने सांसदों के कामकाज़ से खुश नहीं हैं. जहाँ महाराष्ट्र के 17 सीटों के सांसदों की रिपोर्ट नेगेटिव है तो वहीँ राजस्थान में 13 सांसद ऐसे हैं जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव है. यानी एक बात तय है कि अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी इन सभी चेहरों को बदल सकती है क्योंकि अब बीजेपी को इन चेहरों पर दांव लगाना मंहगा पड़ सकता है. सूत्रों की मानें तो इस बाबत अमित शाह, संघ प्रमुख मोहन भागवत और भैयाजी जोशी के बीच जब मन्त्रणा हुई तो ये निष्कर्ष निकला की इन सभी सीटों पर बीजेपी तीसरी पीढ़ी के उम्मीदवारों को मौका देगी, जिसके लिए पार्टी और संगठन से वैकल्पिक नामों को मंगा लिया गया है. अब होता क्या है ये तो आने वाला वक़्त ही बतायेगा लेकिन इतना तय है की बीजेपी पार्टी और उनके अध्यक्ष आने वाले लोकसभा चुनाव में कोई रिस्क नहीं लेना चाह रहे हैं यानी उम्मीदवार बदलेंगे और उनकी जगह ऐसे लोगों को तरजीह दी जायेगी जिनकी छवि जनता के बीच अच्छी हो और जो लोग आने वाले 15-20 सालों तक अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर सकें. 

 

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