Items filtered by date: Tuesday, 13 March 2018

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): जब से राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बने हैं तबसे वो कांग्रेस को हाई-टेक करने में जुटे हैं. राजनितिक विशेषज्ञों की मानें तो राहुल गांधी तकनीक के महत्त्व को भली-भाँती समझते हैं और ये भी अच्छी तरह से जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसी तकनीक को अपनाकर देश के कोने-कोने में बीजेपी के लिए लोगों के दिल में जगह बनाई. फिर चाहे वो फेसबुक, व्हट्सऐप, ट्विटर जैसे माध्यमों से अपनी बात जनता तक पहुंचना मोदी ने हर जगह तकनीक के इस्तेमाल से कांग्रेस को पछाड़ा. अब राहुल अध्यक्ष बनने के बाद इसी तकनीक के इस्तेमाल से बीजेपी की रणनीति का जवाब देने की तैयारी में जुटे हुए हैं. 

यानी ऐसा कह सकते हैं कि भाजपा की तर्ज परअब कांग्रेस ने भी बूथ मैनेजमेंट के लिए एक बड़ा खाका तैयार करते हुए आधुनिक तकनीक का इस्‍तेमाल शुरू कर दिया है, जिसकी शुरुआत आने वाले विधानसभा चुनावों से की जाएगी. दरअसल कांग्रेस अब भाजपा के पन्ना प्रमुख और अमेरिकी पार्टियों की तर्ज पर सीधे मतदाताओं से संपर्क साधने की तैयारी में है. आगामी लोकसभा चुनावों को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए कांग्रेस ने सभी तरह के आंकड़ों को डिजिटल करने की प्रक्रिया शुरू की है. सूत्रों की मानें तो इस कार्यक्रम के तहत कांग्रेस पहले चरण में बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं की पहचान करेगी और उन सभी कार्यकर्ताओं से एक साझा डिजिटल प्‍लेटफॉर्म ‘शक्ति’ के जरिये सीधे संपर्क साधा जाएगा. जबकि दूसरे चरण में पिछले पांच चुनावों के बूथ लेवल के आंकड़ों को डिजिटल किया जाएगा. इससे यह पता लग जाएगा कि कांग्रेस को कहाँ कितने वोट मिले थे. यानी कांग्रेस कहां-कहां मजबूत है और कहां कमज़ोर. कौन से स्विंग बूथ हैं जिनपर अतिरिक्‍त ध्‍यान देने की जरूरत है.

इसके अलावा पार्टी मतदाता पत्र से भी आंकड़े जुटाएगी, जिसमे मौजूद मतदाताओं से लेकर नए वोटर पर भी विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया जाएगा. सूत्रों की मानें तो राहुल ने इस अभियान को अंजाम तक पहुंचाने की जिम्‍मेदारी नवगठित डाटा एनालिटिक्‍स डिपार्टमेंट को सौंपी है. कोर टीम के अलावा राहुल इसमें स्‍वतंत्र विशेषज्ञों की भी मदद लेंगे, ताकि कहीं कोई कमी न रह जाए. सूत्रों की मानें तो राहुल ने इसके लिए फुल प्रूफ तैयारी की है. हालांकि राहुल को ये मालूम है कि कई जगह ऐसी हो सकती हैं जहाँ पर पार्टी को इस तरह का ब्यौरा नहीं मिलेगा. पर राहुल वहां कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगायेंगे और ये कार्यकर्ता घर-घर जाकर इस तरह की जानकारी जुटाएंगे.

राजनितिक पंडितों की मानें तो राहुल का ये कदम कांग्रेस के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकता है क्योंकि कांग्रेस इस डाटाबेस के सहारे वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान जनता से सीधा संवाद कर सकेगी. जिससे न केवल कांग्रेस पार्टी जमीनी स्‍तर पर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से सीधे जुड़ेगी बल्कि मतदाताओं तक भी उनकी सीढ़ी पहुँच बन पाएगी. सूत्रों की मानें तो दिल्‍ली और राजस्‍थान में इसकी शुरुआत कर दी गई है. क्योंकि राजस्‍थान में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसके बाद इस अभियान को मध्‍य प्रदेश और छत्‍तीसगढ़ जैसे राज्‍यों तक भी ले जाया जाएगा. अब ये कदम कांग्रेस के लिए कितना क्रन्तिकारी साबित होता है ये तो आगामी विधानसभा चुनावों के नतीजे ही बतायेंगे लेकिन इतना तय है कि राहुल 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं और वो कांग्रेस को माइक्रो लेवल तक पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं.

सूत्रों की मानें तो ये डाटा इक्कठा होने के बाद कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से कांग्रेस सम्पर्क करने की तैयारी में है, जहां वो कई मुद्दों पर सीधे उनकी राय लेगी. पार्टी इसके तहत हर जिले के मतदाताओं का मूड भांपने के लिए ओपिनियन पोल कराएगी. यानी सीधे कार्यकर्ताओं और मतदातों से सवाल पूछे जायेंगे और उनका मूड भांपकर आगे की रणनीति बनाई जायेगी.

Published in राजनीति