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(इमेज सोर्स:NewsX)

 

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली); आपको याद है नरेंद्र मोदी का वो स्टाइल से कहना कि .....अच्छे दिन...... आने वाले हैं.....! मुझे तो अबतक याद है. और न जाने इस देश में कितने ही हजारों,लाखों और करोड़ों लोग होंगे जो इस आस में हैं कि काश उनके भी अच्छे दिन आ जाएँ. लेकिन मोदी राज में अबतक जो हुआ उसे देखकर ऐसा ही लगा कि मोदी के दिखाए गये सपने बस सपनों तक ही रह जायेंगे. ऐसा इसलिए लगा कि मोदी सरकार में अबतक जो हुआ फिर चाहे वो नोट्बंदी हो या GST जैसे कदम उसने सरकार के कामकाज़ के तरीके पर ही सवाल उठा दिए. विपक्ष भी हर वक़्त सरकार को कोसता रहा और मोदी पर देश को बर्बाद कर देने का इलज़ाम लगाता रहा. ऐसे में सवालों के घेरे में सीधे-सीधे प्रधानमंत्री मोदी आये. सब मन ही मन ये सोचने लगे कि क्या वाकई मोदी ने देश को बर्बाद कर दिया? क्या अच्छे दिन केवल और केवल बीजेपी के ही आये. आखिर आम आदमी यानी कॉमन मैन के हाथ क्या आया? लेकिन अब एक ऐसी खबर आई है जो निश्चित तौर पर आम आदमी के साथ-साथ केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए भी अच्छी खबर है. यानी अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक अच्छी खबर आई है. कहबर ये है कि 2018 की तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.2 फीसद रही है. जो इससे पिछली तिमाही में 6.3 फीसद रही थी. मोदी सरकार के लिए इसमें सबसे अच्छी बात ये है कि इस रफ्तार के बूते भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है. अब ऐसा कह सकते हैं कि इस विकास दर के साथ ही भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी बन गई है. क्योंकि इस तिमाही के दौरान चीन की जीडीपी की रफ्तार 6.8 फीसदी रही थी. यानी चीन जहां सुस्त रफ़्तार से चल रहा है और ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि ये सुस्ती अभी काफी समय तक कायम रहने वाली है वहीँ भारत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और चीन को पछाड़ कर अब नंबर एक बन गया है.

गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष (2017-18) की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत की जीडीपी 6.3 फीसद और वहीं पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5.7 फीसदी रही थी. इसे देखते हुए विशेषज्ञ ये अनुमान लगा रहे थे कि तीसरी तिमाही में जीडीपी के 6.9 प्रतिशत तक रहेगी. लेकिन इन सारे आंकलन को पीछे छोड़ते हुए 7.2 फीसद की ग्रोथ रेट ने केंद्र सरकार को बड़ी राहत पहुंचाई है. ख़ास बात ये है कि मोदी सरकार का सरदर्द बने हुए कृषि क्षेत्र ने भी इसमें रफ़्तार पकड़ी है. मतलब चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है. इस अवधि के दौरान कृषि ग्रोथ 1.7 से बढ़कर 4.1 फीसद रही. यानी सरकार के लिए एक बड़ी राहत है. अबतक सरकार पर आरोप लगते रहे हैं कि मोदिराज़ में किसानों की हालत बद से बदतर हो गयी है. लेकिन यहाँ कृषि ग्रोथ 1.7 से बढकर अगर सीधे 4.1 तक पहुंची है तो ये वाकई देश भर के किसानों के साथ सरकार के लिए भी एक राहत भरी खबर है. 

साथ ही अगर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बात करें तो तीसरी तिमाही के दौरान मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 8.1 फीसद रही जो कि सालाना आधार पिछली बार 7 फीसद रही थी. यानी बिज़नस बढ़ रहा है. अगर बिज़नस बढ़ेगा तो रोज़गार के नये अवसर पैदा होंगे. सरकारी खजाने में भी वृद्धि होगी. मतलब देश के लिए अच्छे दिन आने वाले हैं. लेकिन सरकार को इस वृद्धि को कायम रखते हुए इसे और बढ़ाना होगा. सुधारों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा. तब जाकर पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था भी वापिस पटरी पर आएगी और वो विश्वास भी कायम होगा जो 2014 में जनता ने मोदी पर जताया था. साथ ही दिनोंदिन हमलावर होते विपक्ष का मुंह भी बंद होगा.

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