हरियाणा: तंवर ही रहेंगे हरियाणा कांग्रेस के सर्वेसर्वा, हुड्डा को पार्टी नहीं दे रही तरजीह, कट सकते हैं कई विधायकों के टिकेट.........!

29 Jun 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): खबर राजनीतिक है और हरियाणा से है, जिसका असर पूरे हरियाणा की राजनीति पर पड़ना तय माना जा रहा है. खबर ये है कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को हटाने की ख़बरें निराधार ही हैं और सूत्रों की मानें तो आने वाले वक़्त में भी तंवर ही हरियाणा कांग्रेस के सर्वेसर्वा होंगे. हाई कमान उनके अबतक के काम से पूरी तरह से संतुष्ट है और अब उन्हें सूबे में वो सब पॉवर देने की तैयारी चल रही है जहाँ वो पार्टी के लिए कई बड़े फैसले ले सकते हैं. यानी बात साफ़ है कि हुड्डा खेमे के लिए जहाँ ये बहुत बड़ा झटका है वहीँ कुलदीप बिश्नोई के लिए भी खबर कुछ ख़ास अच्छी नहीं है क्योंकि बिश्नोई को भी ये उम्मीद थी कि हुड्डा खेमे की मदद से वो प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी पाने में कामयाब हो सकते हैं. लेकिन जिस तरह की खबर सूत्रों से मिल रही है उसके मुताबिक कांग्रेस हाई कमान तंवर के अबतक के काम से न केवल संतुष्ट है बल्कि उनकी साइकिल यात्रा में उमड़ रही भीड़ से भी पार्टी गदगद है. पार्टी उनमे हरियाणा में कांग्रेस का भविष्य देख रही है. इतना ही नहीं सूत्रों की मानें तो तंवर को आने वाले वक़्त में ऐसी पॉवर दी जा सकती हैं जिससे वो बेधडक निर्णय ले सकते हैं. यानी मतलब साफ़ है कि हरियाणा की राजनीति में कांग्रेस की तरफ से अब सबसे बड़ा एकमात्र चेहरा अशोक तंवर ही हैं.

सूत्रों की मानें तो हुड्डा को पछाड़ने में तंवर को किरण चौधरी खेमे का साथ तो मिल ही रहा था लेकिन अब कुमारी शैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला का भी आशीर्वाद प्राप्त है. इन दोनों के भी तंवर के साथ आने से जहाँ हुड्डा खेमा कमज़ोर पड़ रहा है वहीँ इस खेमे के समर्थकों में भी मायूसी का माहौल है. हालांकि हुड्डा का भी जनजागरण अभियान चालू है लेकिन पार्टी हाई कमान फिलहाल तंवर के साथ ही खडा है. तंवर भी अब खुलकर बैटिंग करते हुए नजर आ रहे हैं और सूत्रों की मानें तो आने वाले विधानसभा चुनाव में तंवर की टिकेट वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका होगी. जिससे कई विधायकों और हुड्डा समर्थकों के टिकेट कटने की भी सम्भावना पैदा हो गई है. तंवर पहले भी कह चुके हैं कि वे पार्टी की उस सेकंड लाइन को आगे लायेंगे जो वर्षों से कांग्रेस की सेवा कर रहे हैं. अब केवल पार्टी में उसी को तरजीह मिलेगी जो पार्टी के लिए पूरी तरह से समर्पित हो न की किसी व्यक्ति विशेष के लिए. यानी मतलब साफ़ है कि अगर टिकेट वितरण में तंवर की चली तो हुड्डा खेमे के कई चेहरों के टिकेट काटने तय हैं और सूत्रों की मानें तो तंवर ने ऐसे कई पार्टी के सेकंड लाइन के नेताओं को चुनाव की तैयारी करने के निर्देश भी दे दिए हैं. पार्टी हाई कमान भी इस मुद्दे पर तंवर के साथ ही खड़ी दिखाई दे रही है. क्योंकि राहुल गांधी कई बार ये कह चुके हैं कि कांग्रेस में केवल उन्हीं लोगों को टिकेट मिलेगा जो पार्टी के लिए पूरी तरह समर्पित होंगे. यानी राहुल गांधी अब किसी भी राज्य में व्यक्ति विशेष को आगे बढ़ाने का बजाए ऐसे लोगों को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं जो कांग्रेस के लिए काम करे नाकि कोई व्यक्ति विशेष इतना बड़ा हो जाए कि वो कल को पार्टी के लिए दिक्कतें पैदा करे.

इसी के चलते तंवर ने गुरूवार को हरियाणा के पंचायत भवन में सूबे की 10 लोकसभा सीट और नब्बे विधानसभा हलकों के प्रमुख नेताओं से महत्वपूर्ण मीटिंग की और चुनावी बिगुल फूक दिया. सूत्रों की मानें तो तंवर के साथ-साथ पार्टी हाई कमान को भी ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव भी करा सकती है जिसके चलते अब तंवर बिलकुल भी देरी करने के मूड में नहीं हैं और उन्होंने पार्टी के सभी नेताओं को ये आदेश दे दिया है कि उनके पास अब 3 से 6 महीनों का ही वक़्त है. इस समय में जो जितना दम दिखायेगा उसको आने वाले वक़्त में उतना ही फायदा मिलेगा और टिकेट वितरण में भी तरजीह दी जायेगी.

तंवर ने पार्टी कार्यकर्ताओं को ये साफ़ निर्देश दिया है कि वो जनता के बीच जाएँ और सरकार की जनविरोधी नीतियों का प्रचार करें. बिजली पानी सड़क जैसे मुद्दों को उठाएं, एनहांसमेंट के नोटिस से परेशान लोगों का साथ दें, कर्मचारियों और किसानों से जुड़े मूद्दों को पूरे जोर-शोर से उठाएं, ऐसे आंदोलनों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें. साथ ही केंद्र सरकार की भी पोल खोलें. उनके जुमलों के बारे में जनता को बताएं. जनता को बताएं की किस तरह मोदी सरकार ने उन्हें काले धन के मुद्दे, बैंक अकाउंट में 15 लाख देने जैसे कई मुद्दों पर बेबकूफ बनाया ही साथ ही बेरोज़गारी की समस्या को भी उठाएं. कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर बताएं की मोदी सरकार ने किस तरह से हर साल 2 करोड़ लोगों को रोज़गार देने का वादा किया और अब 2 करोड़ तो छोडिये लाखों रोज़गार देने भी ये सरकार नाकामयाब रही. इस सरकार ने युवाओं को भी ठगा है ये संदेश भी सूबे के समस्त युवाओं तक पहुंचाएं.

हालांकि तंवर की इस मीटिंग में तंवर के एंटी खेमे का एक भी नेता नजर नहीं आया पर बैठक में गौर करने वाली एक बात थी वो ये है कि कभी एक-दूसरे के धुरविरोधी रहे कई नेता इस मंच पर एकसाथ नजर आये. जिनमें कुमारी शैलजा के सबसे नजदीकी पूर्व राज्यसभा सांसद ईश्वर सिंह से लेकर हुड्डा खेमे के करीबी रहे पूर्व सांसद चौधरी रणजीत सिंह, पूर्व मंत्री विजेंद्र कादियान, नरेश यादव, सुल्तान सिंह जडोला, डॉक्टर विपिन सांगवान, पंडित होशियारी लाल शर्मा, रवि मैहला के नाम शामिल हैं. साथ ही अभी हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व आईएएस अधिकारी परदीप कासनी भी मंच पर दिखे.

 

 

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