हरियाणा: सूबे की 10 लोकसभा सीटों में से 7 पर बीजेपी उतारेगी नए चेहरे, बीजेपी में अंदरखाते मचा हडकंप.......!

19 Jun 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): हरियाणा में सियासी तूफ़ान अपने चरम पर है और सियासी पार्टियाँ अभी से ही आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अपना अपना सियासी गणित बैठाने की जुगत में लगी हुई हैं. अब इसमें भला बीजेपी कैसे पीछे रहे. यहाँ बीजेपी की तरफ से बड़ी खबर ये आ रही है कि पार्टी आगामी लोकसभा चुनावों में सूबे की 10 लोकसभा सीटों में 7 सीटों पर नए चेहरे उतार सकती है. जिसके लिए बड़े नामों पर विचार विमर्श शुरू हो चुका है और सूत्रों की मानें तो इसके लिए बड़े चेहरों की तलाश भी शुरू हो चुकी है. गौरतलब है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और आर एस एस इन सांसदों की कार्यप्रणाली से बिलकुल भी खुश नहीं हैं साथ ही पार्टी और आर एस एस के आंतरिक सर्वे के मुताबिक अगर पार्टी फिर से इन्हीं चेहरों पर दांव लगाती है तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

इसी आशंका के मद्देनजर अब बीजेपी हरियाणा में प्रभावशाली और कद्दावर चेहरों की तलाश कर रही है. जानकारों की मानें तो इसी सब के मद्देनजर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सम्पर्क फॉर समर्थन अभियान के तहत पूर्व आर्मी चीफ जनरल दलवीरसिंह सुहाग से भी मुलाकात की थी और आने वाले वक़्त में अगर सुहाग इसके लिए हामी भरते हैं तो पार्टी उनपर दांव लगा सकती है. दरअसल इस वक़्त बीजेपी के हरियाणा में 7 सांसद हैं. तो वहीँ कांग्रेस के खाते में 1 और इनेलो के 2 सांसद हैं. यहाँ दिलचस्प बात ये है कि बीजेपी ने 2014 का लोकसभा चुनाव हरियाणा जनहित कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ा था जिसके तहां 8 सीटों पर बीजेपी ने अपने उम्मीदवार उतारे थे तो वहीँ 2 सीटें(सिरसा,हिसार) हरियाणा जनहित कांग्रेस के हिस्से में आई थीं जिनपर उनके उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा था. तो वहीँ रोहतक सीट पर बीजेपी को कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंदर हुड्डा ने करारी मात दी थी.

साथ ही भिवानी-महेंद्रगढ़ के सांसद चौधरी धर्मवीर सिंह भी सार्वजनिक तौर पर कई बार अगला लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर चुके हैं. वो लोकसभा के बजाए विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं और इसके लिए उन्होंने वाकायदा ऐलान भी कर दिया है. तो वहीँ कुरुक्षेत्र से बीजेपी के बागी सांसद राजकुमार सैनी के तेवर भी किसी से छुपे हुए नहीं हैं. देर-सवेर वो भी बीजेपी को अलविदा कहेंगे. ऐसे में इन 4 लोकसभा सीटों पर पार्टी को नए चेहरों की तलाश है.

अम्बाला लोकसभा सीट:-

अम्बाला लोकसभा सीट पर नजर डाली जाए तो यहाँ भी पार्टी को नया उम्मीदवार उतरना पड़ेगा. फिलहाल यहाँ से रतनलाल कटारिया सांसद हैं लेकिन उनकी रिपोर्ट भी कुछ अच्छी नहीं है साथ ही बढ़ती उम्र भी उनके और टिकेट के बीच में बड़ी बाधा है. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी उनके ही परिवार के किसी व्यक्ति को टिकेट दे सकती है लेकिन जानकारों की मानें तो बीजेपी यहाँ किसी दूसरे चेहरे को ही मौका देगी. बीजेपी को अच्छी तरह पता है कि ये क्षेत्र कांग्रेस की उम्मीदवार कुमारी शैलजा का गढ़ है. पिछले चुनाव में बीजेपी को यहाँ से जीत जरुर मिली लेकिन अब जिस तरह से कुमारी शैलजा एक बार फिरसे इस क्षेत्र में सक्रिय हुई हैं उसे देखकर बीजेपी उनके सामने किसी नए,बड़े  और कद्दावर नेता को ही उतारेगी जो कुमारी शैलजा को मात दे सके.

करनाल लोकसभा सीट:-

करनाल लोकसभा सीट फिलहाल बीजेपी के खाते में है और यहाँ से मीडिया कारोबार के दिग्गज़ अश्वनी चोपड़ा फिलहाल बीजेपी के सांसद हैं. लेकिन सूत्रों की मानें तो उनके टिकेट में सबसे बड़ी रुकावट खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हो सकते हैं. जिसका सबसे बड़ा कारण पंजाबी वोटों का क्षत्रप होना है. सूत्रों की मानें तो जिस तरह से अश्वनी चोपड़ा मनोहर लाल खटार की आलोचना कर देते हैं और उनकी खिंचाई में कोई कसर नहीं छोड़ते उसे देखकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ही उनके रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा हैं. साथ ही खट्टर अपने आगे ऐसा कोई दूसरा पंजाबी नेता नहीं पैदा होने देना चाहते जो कल उनके लिए ही ख़तरा बन जाए. ऐसे में आगे मनोहर लाल खट्टर की चली तो बीजेपी की तरफ से यहाँ पर भी कोई नया उम्मीदवार मैदान में आ सकता है. हालांकि इसकी गुंजाइश बहुत कम है क्योंकि अश्वनी चोपड़ा की पहुँच सीधे आलाकमान तक है और पंजाबी वोट बैंक पर भी उनकी अच्छी खासी पकड़ है. लेकिन राजनीति सम्भावनाओं का खेल है और इस खेल में कुछ भी मुमकिन है यहाँ देखने वाली बात ये होगी कि क्या अश्वनी चोपड़ा मनोहर लाल खट्टर को मात देते हैं या फिर मनोहर लाल खट्टर अश्वनी चोपड़ा को. सूत्रों की मानें तो मनोहर खेमे ने यहाँ से सुगरफ़ेड चेयरमैन चंद्रप्रकाश कथूरिया का नाम आगे बढाया है. साथ ही बीजेपी के संगठन महामंत्री संजय भाटिया के नाम की भी चर्चा शुरू हो चुकी है. मतलब साफ़ है यहाँ भी आने वाले वक़्त में ऊँट किस करवट बैठता है ये देखने वाली बात होगी.

सोनीपत लोकसभा सीट:-

लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी के खाते में आने वाली इस सीट से फिलहाल रमेश कौशिक बीजेपी सांसद हैं. लेकिन सूत्रों की मानें तो यहाँ पर भी पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में नया चेहरा ही उतारेगी और रमेश कौशिक को विधानसभा चुनाव में टिकेट दिया जा सकता है. सांसद के रूप में यहाँ से रमेश कौशिक कोई ऐसा करिश्मा नहीं कर सके जिससे वो चर्चा का विषय बने हों. हालांकि रमेश कौशिक कभी भी ये नहीं चाहेंगे कि उनकी टिकेट कटे और उन्होंने अबतक ऐसा कुछ कहा भी नहीं है जिससे इस बात का अंदाज़ा हो लेकिन पिछले कुछ समय से यहाँ मार्केटिंग बोर्ड की चेयरमैन कृष्णा गहलोत का नाम सुर्ख़ियों में आ रहा है और क्षेत्र में उनकी दिनोंदिन बढती सक्रियता भी कौशिक की उम्मीदवारी के लिए खतरे की घंटी है.

गुरुग्राम लोकसभा सीट:-

ये सीट भी बीजेपी के खाते में है और यहाँ से सांसद राव इंदजीत फिलहाल मोदी सरकार में मंत्री हैं. लेकिन सूत्रों की मानें तो इनका भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से 36 का आंकड़ा है और ऐसे कई मौके आये हैं जब राव इंदरजीत ने सार्वजनिक मंच से मनोहर लाल खट्टर की खिंचाई की है. उन्होंने रेवाड़ी में तो यहाँ तक कह दिया था कि अगले विधानसभा चुनाव में हमारे कार्यकर्ता किस मुंह से बीजेपी के लिए वोट मांगने जायेंगे. वहीँ गुरुग्राम में अभी हाल ही में हुए प्रकरण ने इन दोनों के बीच की खट्टास को और बढ़ा दिया है. जहाँ राव इंदरजीत ने खुले तौर पर खट्टर को ये कह दिया था कि आगामी लोकसभा चुनाव में आपसे मदद की उम्मीद न के बराबर है. तो मुमकिन है कि मनोहर लाल खट्टर यहाँ से अपने किसी चहेते को टिकेट दिलवाने की भरपूर कोशिश करें. हालांकि सूत्रों की मानें तो ये मुमकिन नहीं दिखता क्योंकि राव इंदरजीत अपने आप में खुद एक सरकार हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुड बुक में आते हैं. जबतक राव इंदरजीत खुद नहीं चाहेंगे तबतक उनका टिकेट यहाँ से काटना किसी के बस की बात नहीं है. हालांकि बीच में ये खबर भी आई थी राव इंदरजीत इस बार गुरुग्राम लोकसभा सीट का बजाये भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से चुनाव लड़ सकते हैं क्योंकि वहां के जातीय समीकरण भी उनके अनुकूल बैठते हैं आज भी वहां के लोग उनको अपना राजा ही समझते हैं. अगर जातीय समीकरण की बात करें तो ये राव- जाट बहुल क्षेत्र है जिसमे लगभग जाट और राव वोट बराबर की गिनती में हैं. ऐसे में राव इंदरजीत का राव वोटों पर आधिपत्य तो किसी से छुपा हुआ नहीं है और अगर मौजूदा सांसद चौधरी धर्मवीर भी राव इंदरजीत के साथ खड़े होते हैं तो फिर जाट वोट बैंक भी उनके खाते में आने के आसार काफी बढ़ जाते हैं जो सोने पे सुहागा हो जाएगा. लेकिन अभी राव इंदरजीत क्या तय करते हैं ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा लेकिन इतना तय है कि राव इंदरजीत इस वक़्त बीजेपी में वो चेहरा हैं जो कहीं से भी चुनाव लड़कर जीतने का माद्दा रखता है और उनके लिए फिलहाल कोई खतरे की घंटी नहीं है.

फरीदाबाद लोकसभा सीट:-

ये सीट भी मौजूदा दौर में बीजेपी के खाते में है और फिलहाल यहाँ से सांसद किशन पर गुर्जर मोदी सरकार में मंत्री भी हैं. साथ ही उन्हें वरिष्ठ केंदीय मंत्री और बीजेपी नेत्री सुषमा स्वराज का भी खासमखास भी समझा जाता है. सूबे में जब भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को बदलने की बात हुई है तो उनका नाम हमेशा से मनोहर लाल खट्टर के विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है. इन सब बातों के बावजूद गुर्जर एक बेहद साफ़ छवि के नेता हैं और मृदुभाषी भी. सूत्रों की मानें तो जनता के बीच उनकी छवि अच्छी है और आने वाले वक़्त में बीजेपी उन्हीं पर दांव लगाना चाहेगी. इसलिए फिलहाल उनके लोकसभा क्षेत्र में किसी और नेता की सक्रियता भी नहीं देखी जा रही है.

 

 

 

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