हरियाणा: खट्टर सरकार के खिलाफ हो रही गोलबंदी, नाराज़ दलितों ने किया धर्म-परिवर्तन तो जाटों ने सभा न होने देने की दी धमकी.....

04 Jun 2018
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आवाज़(रेखा राव, गुरुग्राम): हरियाणा की खटार सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. अभी एक मुद्दा ख़त्म होता नहीं कि दूसरा बांह फैलाये आगे खडा हो जाता है. ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब हरियाणा की खट्टर सरकार से नाराज़  दलितों ने भारी संख्या में धर्म परिवर्तन कर लिया. इन लोगों का कहना है कि सरकार दलितों को सुरक्षा मुहैया करवाने में नाकाम रही है जिससे परेशान होकर इन सबने धर्म परिवर्तन कर लिया. टाइम्स नाउ की मानें तो जींद जिले के लगभग 120 लोगों ने खटार सरकार से नाराज़ होकर धर्म परिवर्तन कर लिया है.

गौरतल है कि दलितों द्वारा इतनी भारी संख्या में धर्म परिवर्तन अचानक नहीं बल्कि खट्टर सरकार के खिलाफ 113 दिन के प्रदर्शन के बाद किया गया है. सूबे के दलितों के इस कदम को जहाँ खट्टर सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है वहीँ इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमाएगी ये भी तय है. धर्म परिवर्तन करने वाले दलितों का कहना है कि खट्टर सरकार में उनकी बेकद्री हुई और सरकार उन्हें सुक्ष मुहैया करवाने में पूरी तरह नाकाम रही. जिस से निराश होकर इन सब ने धर्म परिवर्तन कर लिया.

वहीँ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मुद्दे पर वैसे तो खट्टर सरकार के मंत्री और बीजेपी नेता कुछ कहने से बाख रहे हैं लेकिन कुछ मंत्रियों ने कहा है कि ये एक राजनितिक साज़िश है. मंत्रियों का कहना है कि अगर कुछ लोग अपने फैसले की असल वजह बताये बिना अगर धर्म परिवर्तन करते हैं तो वो इसके लिए स्वतंत्र हैं. वहीँ इस मुद्दे पर दलित नेता दिनेश खापड़ ने मीडिया को बताया कि बीते 7 मार्च को सरकार के सामने दलितों ने कुछ मांगें रखी थीं और कहा गया था कि 10-15  दिनों में दलितों की मांगें पूरी की जाएँ. 20 मई को सरकार को चेतावनी दी गई थी कि अगर सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है तो वो धर्म परिवर्तन कर बौद्ध धर्म में चले जायेंगे. लेकिन सरकार ने कोई मांग पूरी नहीं की, अंत में परेशान होकर दलितों ने ये कदम उठाया.

राजनितिक पंडितों की मानें तो दरअसल जैसे- जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं वैसे-वैसे खट्टर सरकार के खिलाफ गोलबंदी की जा रही है और आने वाले वक़्त में ये और बढ़ेगी. जानकार इसके पीछे विपक्षी दलों की रणनीति भी मान रहे हैं. क्योंकि ये कोई पह;अ मामला और पहला समुदाय नहीं है जिसने खट्टर सरकार पर उनकी अनदेखी करने का इलज़ाम लगाया है. इससे पहले जात समुदाय भी इसी तरह के इलज़ाम सरकार पर लगा चुका है. इतना ही नहीं जात समुदाय पिछले काफी समय से आरक्षण की मांग कर रहा है और खट्टर सरकार को इसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा बता रहा है. इतना ही नहीं अभी हालिया फैसले में जाटों ने ये तय किया है कि वो खटार सरकार के किसी भी मंत्री का कार्यक्रम नहीं होने देंगे और जहां भी मुख्यमंत्री खट्टर या फिर उनके मंत्रियों का कार्यक्रम होगा वहां जाकर जाट धरना देंगे.

यानी बात साफ़ है जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आयेंगे ये धरने-प्रदर्शन और बढ़ेंगे, ऐसी धमकियाँ भी बढेंगी. लेकिन खट्टर सरकार इन सब के विरुद्ध क्या रणनीति बनाती है ये देखने वाली बात होगी.(इनपुट:जनसत्ता डॉट कॉम)

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