हरियाणा: कुमारी शैलजा को मिल सकती है हरियाणा कांग्रेस की कमान, साथ ही तमाम महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए बनाई जा सकती है एक कमेटी.......!

08 May 2018
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आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद देश भर में कांग्रेस पार्टी और संगठन में भारी फेरबदल देखने को मिल सकते हैं. जिसका सीधा असर हरियाणा कांग्रेस पर भी पड़ेगा. सूत्रों की मानें तो यहाँ भी पार्टी और संगठन में फेरबदल की सम्भावनाएं बढ़ गई हैं. सूबे में गुटबाजी पर रोकथाम लगाने और कांग्रेस के मिशन 2019 को सफल बनाने के लिए हरियाणा कांग्रेस में भी बड़े पैमाने पर बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है.

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस आलाकमान प्रदेश में गुटबाजी के मसले पर बेहद गंभीर है. अब वो कुछ इस   तरह से पार्टी की बुनियाद को मजबूत करना चाहती है कि कोई भी नेता सूबे में कांग्रेस से बड़ा न बन जाए. यानी सबकी पहचान कांग्रेस से हो, नाकि कांग्रेस की पहचान किसी बड़े हरियाणा के नेता से हो. मतलब साफ़ है कांग्रेस में अब सबको राहुल गाँधी के नेत्रित्व में आगे बढ़ना है जहाँ सबको उनके आदेशों का पालन करते हुए बिना किसी गुटबाजी के सबको साथ लेकर आगे बढ़ना होगा.

सूत्रों की मानें तो सबसे बड़ा बदलाव जो देखने को मिल सकता है वह कांग्रेस अध्यक्ष पद होगा. जहाँ कांग्रेस पार्टी आलाकमान तंवर को हटाकर कुमारी शैलजा को मौका दे सकती है. राजनितिक पंडितों के मुताबिक पार्टी इस फैसले से एक तीर से कई शिकार कर रही है. एक तो सूबे में दो खेमों(हुड्डा-तंवर) में बंटी कांग्रेस किसी तीसरे के नेत्रित्व को आसानी से स्वीकार कर पायेगी, दूसरा सूबे में अभी हालिया हुए इनेलो-बसपा गठबंधन को भी मात दे पायेगी. क्योंकि पार्टी को डर है कि कहीं इनेलो कांग्रेस के दलित वोट-बैंक पर इस नए गठबंधन पर सेंध न लगा दे. ऐसे में कुमारी शैलजा एक ऐसा चेहरा हैं जो गाँधी परिवार के नजदीकी होने के साथ-साथ हरियाणा में भी अपना एक जनाधार रखती है.

वहीँ बीजेपी को भी पार्टी अपनी इस रणनीति से घेरने की फिराक में है. कांग्रेस ये भली-भाँती जानती है कि अगर कुमारी शैलजा को हरियाणा की कमान सौंपी जाती है तो इसका असर पूरे में हरियाणा में तो होगा ही साथ ही अंबाला, यमुना नगर, पानीपत, सोनीपत से लेकर भिवानी-महेंद्रगढ़ तक पार्टी के साथ दलित वोट बैंक कांग्रेस के साथ जुड़ेगा जिसका फायदा उन्हें 2019 में मिलेगा और ये वो इलाके हैं जहाँ बीजेपी पिछले चुनावों में अच्छी सीटें जीतकर आई थी.

लेकिन शैलजा की राहें भी यहाँ बहुत आसान नहीं होगीं क्योंकि सूत्रों का कहना है कि पार्टी का शैलजा को अध्यक्ष न्युक्त करने का मतलब ये कतई नहीं है कि सारी शक्तियां उनके पास रहेंगी, बल्कि पार्टी गुटबाजी पर रोकथाम लगाने के लिए अध्यक्ष पास के साथ एक कमेटी का भी गठन करने जा रही है जिसमे प्रदेश के कई बड़े चेहरों को तरजीह दी जायेगी. सूत्रों की मानें तो इस कमेटी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा, कुलदीप बिश्नोई, किरण चौधरी, अशोक तंवर जैसे कई नेता शामिल होंगे कोई भी फैसला कुमारी शैलजा अकेले नहीं बल्कि इन सब की सहमति से लेंगी. ताकि सूबे में बढती गुटबाजी पर भी लगाम लगाईं जा सके और सारे नेता मिलजुलकर सूबे में कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए काम करें. अब क्या वाकई ऐसा होता है ये तो तब पता चलेगा जब कुमारी शैलजा अध्यक्ष बनेंगी और क्या वाकई सारे हरियाणा के नेता मिलजुल कर पार्टी के लिए काम करेंगे ये भी देखने वाली बात होगी.

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