हरियाणा: आखिर क्या हैं कभी पूर्व और पश्चिम रहे हरियाणा के दो राजनीतिक घरानों के मिलन के मायने?, क्या तंवर खेमे के साथ-साथ बीजेपी की भी बढेंगी मुश्किलें.....! Featured

02 May 2018
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आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): कहते हैं राजनीति में कोई परमानेंट दोस्त या फिर दुश्मन नहीं होता. सब समीकरण बनते और बिगड़ते रहते हैं और राजनीतिज्ञ भी बदलते समीकरणों के साथ अपनी दशा और दिशा तय करते हैं. ऐसा ही कुछ देखने को मिला हरियाणा में जहां कभी पूर्व और पश्चिम रहे दो कांग्रेसी राजनितिक घरानों ने सारे मतभेदों को भुलाते हुए एक दूसरे से हाथ मिलाया है. इस मिलन के वक्त हुड्डा और कुलदीप बिश्नोई के साथ-साथ प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे जिसमे हुड्डा के बहुत करीबी और हनुमान माने जाने वाले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा भी मौजूद थे. मीटिंग का एक विडियो भी सोशल मीडिया पर  वायरल हो रहा है जिसमे हुड्डा अपने हाथों से कुलदीप बिश्नोई को मिठाई खिलाते नजर आ रहे हैं.

वहीँ सूत्रों के हवाले से भी खबर आ रही है जिसमे इस बात की पुष्टि हो रही है कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और कुलदीप बिश्नोई के बीच समझौता हो गया है जिसके बाद ये अटकलें लगाईं जा रही हैं कि जल्द ही हरियाणा कांग्रेस में भी बदलाव देखने को मिलेगा और कुलदीप बिश्नोई हरियाणा कांग्रेस के अगले अध्यक्ष बन सकते हैं. इस नए गठजोड़ का असर हरियाणा की राजनीति में सीधे तौर पर पड़ेगा क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि इस नए गठजोड़ से जहां हुड्डा खेमा प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को मात देने की फिराक में है, वहीं रणदीप सिंह सुरजेवाला के दिनों दिन बड़ते कद को भी हरियाणा की राजनीति से दूर रखने की कोशिश है.

सूत्रों की मानें तो समझौता अचानक से नहीं हुआ है बल्कि पिछली मकार सक्रांति के अवसर पर जब कुलदीप बिश्नोई अपनी विधायक पत्नी के साथ हुड्डा आवास पर पहुंचे तो उसी समय प्रदेश की राजनीति गर्मा गई थी. उस समय दोनों काफी गर्मजोशी से मिले थे. हालांकि दोनों की ओर से उस समय इस मुलाकात को सामाजिक बताया गया था, परंतु उसी समय दोनों नेताओं के बीच मिलकर आगे बढऩे की रणनीति बनना शुरू हो गई थी.

 

उसका परिणाम सामने आया है कुलदीप बिश्नोई और हुड्डा के बीच समझौता हुआ है और दोनों नेता बीजेपी के साथ-साथ तंवर खेमे को मात देने के लिए एक साथ एक मंच पर आने के लिए राजी हुए हैं. कुलदीप बिश्नोई ने भी बड़ी ही सुझबुझ दिखाते हुए राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार चलते हुए हुड्डा के साथ मिलकर आगे बढऩे की रणनीति दिखाई.

सूत्रों की मानें तो चौधरी भूपिंदर सिंह हुड्डा के तमाम प्रयासों के बाद भी राहुल गाँधी प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर को हटाने पर राजी नहीं हो रहे थे और हुड्डा खेमे को हर बार मुंह की खानी पड़ रही थी. ऐसे में हुड्डा खेमे के पास इससे बेहतर विकल्प मौजूद नहीं था की वो बिश्नोई से हाथ मिलकर कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बना सके. अब जब दोनों ही नेता साथ काम करने के लिए तैयार हो गये हैं और राहुल गाँधी ने भी संगठन में बदलाव की कवायद शुरू कर दी है तो ये कयास लगाये जा रहे हैं कि जल्द ही हरियाणा कांग्रेस में भी इसका असर देखने को मिल सकता है.  अब जब राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान कमल नाथ को सौंपी तो इसकी उम्मीद और बढ़ गई कि हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष पद पर भी जल्द ही कुलदीप बिश्नोई की ताजपौशी हो सकती है.

राजनितिक पंडितों की मानें तो इस जुगलबंदी के परिणाम हरियाणा की राजनीति को पूरी तरह से बदल सकते हैं. जिसका पहला असर तो तंवर खेमे पर देखने को मिलेगा, साथ ही सूबे में बीजेपी की मुश्किलों का बढ़ना भी तय माना जा रहा है. वहीँ तंवर खेमा जो अबतक हुड्डा को हर मुद्दे पर मात देता आ रहा था अब वो उतनी आसानी से हुड्डा को नहीं हरा पायेगा, हुड्डा समर्थक इस समझौते से इतने खुश और आश्वस्त हैं कि मानों उन्हें कोई बाजी जीत हाथ लग गई है और  इसका सीधा फायदा उन्हें आने वाले वक्त में मिलेगा.

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