हरियाणा: मानेसर ज़मीन घोटाले में बढीं हुड्डा कि मुश्किलें, CBI ने की चार्जशीट दाखिल .........

03 Feb 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, गुरुग्राम): हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही. एक तरफ तंवर खेमा उनके लिए मुसीबत बना हुआ है वहीँ दूसरी तरफ उनकी सरकार के समय में मानेसर भूमि घोटाले के जिन्न ने उन्हें परेशां करना शुरू कर दिया है. सीबीआई ने हुड्डा के खिलाफ मानेसर भूमि घोटाला मामले में यहां विशेष अदालत में चार्जशीट दायर कर दी है. गौरतलब है कि सीबीआइ ने हुड्डा व उनके शासन के समय पावरफुल रहे कई अफसरों समेत 34 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इनमें अधिकतर बिल्डर शामिल हैैं. करीब 80 हजार पेज की चार्जशीट संबंधी दस्तावेज सीबीआइ अधिकारी दो अलमारियों में भरकर पंचकूला सीबीआइ कोर्ट में लाए. सीबीआइ के विशेष जज ने 26 फरवरी तक अन्य दस्तावेज जमा कराने को कहा है. यह मामला 2015 में दर्ज किया गया था. आरोप है कि हुड्डा के शासनकाल में सैकड़ों एकड़ जमीन अधिग्रहीत कर बिल्डरों को गलत ढ़ंग से प्लांट आवंटित कर दिया गया था.

वहीँ सीबीआइ द्वारा दाखिल चार्जशीट में हुड्डा के अलावा उनके पूर्व प्रधान सचिव एमएल तायल, पूर्व प्रधान सचिव छतर सिंह, अतिरिक्त पूर्व प्रधान सचिव एवं  हुडा के तत्कालीन प्रशासक एसएस ढिल्लों, पूर्व डीटीपी जसवंत सिंह और कई बिल्डरों के नाम शामिल होने से अफसरशाही तथा बिल्डरों में हड़कंप मच गया. हुड्डा के साथ-साथ इन रिटायर्ड अफसरों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैैं. चार्जशीट में एबीडब्ल्यू बिल्डर्स के अतुल बंसल का नाम भी शामिल है. 

गौरतलब है कि मानेसर जमीन घोटाले में 12 अप्रैल 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्णय सुरक्षित रखा था. कोर्ट ने सीबीआई को जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए चार महीने का समय दिया था साथ ही हरियाणा सरकार को आदेश दिए थे कि एक सप्ताह के अंदर -अंदर  इस मामले की जांच करने वाले जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग की रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे. मानेसर जमीन घोटाला करीब 1600 करोड़ का बताया जाता है.इसी दौरान सीबीआइ ने पंचकूला की विशेष सीबीआइ अदालत में मानेसर घोटाले मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी. इस मामले में ईडी ने भी हुड्डा के खिलाफ सितंबर 2016 में मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया था. ईडी ने हुड्डा और अन्य के खिलाफ सीबीआइ की एफआइआर के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया था.

अब इस मामले में सीबीआई ने पंचकूला की सीबीआई कोर्ट के स्पेशल जज कपिल राठी की अदालत में चार्जशीट पेश की है. मानेसर जमीन घोटाले को लेकर सीबीआइ ने हुड्डा और अन्‍य के खिलाफ 17 सितंबर 2015 को मामला दर्ज किया था. इस मामले में ईडी ने भी हुड्डा के खिलाफ सितंबर 2016 में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था. ईडी ने हुड्डा और अन्य के खिलाफ सीबीआइ की एफआइआर के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया था. कांग्रेस लगातार इस कारर्वाई को सियासी रंजिश करार दे रही है.

1600 करोड़ की जमीन 100 करोड़ में बेचने का आरोप

पिछली हुड्डा सरकार पर अपने कार्यकाल के दौरान करीब 900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर उसे बिल्डरों को कौडिय़ों के भाव यानी सिर्फ 100 करोड़ में बेचने का आरोप है. पूरे मामले में करीब 1600 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया जा रहा, जबकि हुड्डा बार-बार इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सुई भाजपा नेताओं की तरफ घुमाते हैैं. उनका कहना है कि भाजपा  नेताओं के अनुरोध पर अधिग्रहीत जमीन छोड़ी गई थी. यह जमीन तीन गांवों की है. किसानों ने गुरुग्राम के मानेसर थाने में केस दर्ज कराया था। भाजपा सरकार ने 17 सितंबर 2015 को मामला सीबीआइ के सुपुर्द कर दिया. सीबीआइ ने जमीन अधिग्रहण में अनियमितता को लेकर प्रीवेंशन आफ करप्शन एक्ट 1988 की धारा 420, 465, 467, 468, 471 तथा 120 बी के तहत मामला दर्ज किया.

आरोप है कि अगस्‍त 2014 में निजी बिल्डरों ने हरियाणा सरकार के कुछ नेताओं के साथ मिलीभगत कर गुरुग्राम जिले में मानसेर, नौरंगपुर और लखनौला गांवों के किसानों और भूस्वामियों को अधिग्रहण का भय दिखाकर उनकी करीब 400 एकड़ जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली थी.

अधिग्रहण का डर दिखाकर बिल्डरों ने खरीदी थी जमीनें

कांग्रेस की तत्कालीन हुड्डा सरकार के कार्यकाल के दौरान आइएमटी मानेसर की स्थापना के लिए करीब 912 एकड़ जमीन का अधिग्रहीत करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी. इस दौरान मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला में करीब 912 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की गई थी. ग्रामीणों को सेक्शन 4, 6 और 9 के नोटिस थमा दिए थे. इसके बाद बिल्डरों ने किसानों को अधिग्रहण का डर दिखाकर जमीनों के सौदे किए और जमीनों को कौडिय़ों के भाव खरीद लिया. आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम तत्कालीन सरकार के संरक्षण में चल रहा था. इसी दौरान उद्योग निदेशक ने सरकारी नियमों की अवहेलना करते हुए बिल्डर द्वारा खरीदी गई जमीन को अधिग्रहण प्रक्रिया से रिलीज कर दिया.

आरोप है कि निजी बिल्डरों ने तत्कालीन सरकार तथा संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर करीब 400 एकड़ जमीन को खरीदा था. अधिसूचना रद्द करने से नाखुश किसान सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे. राज्य में बीजेपी सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे.

' पब्लिक सब जानती है, मेरा मुंह न खुलवाएं ': हुड्डा 

वहीँ इस मुद्दे पर भूपिंदर सिंह हुड्डा कि प्रतिक्रिया भी आ गयी है. उन्होंने इस मामले को राजनितिक षड्यंत्र करार देते हुए प्रदेश सरकार पर ज़ोरदार हमला बोलते हुए कहा कि अपने  साढ़े तीन साल के कार्यकाल में इस सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया. प्रदेश में दंगे जरूर कराए. निर्दोष की जानें लीं. लोग अब सरकार को पूरी तरह से नकार चुके तो वह ओछे हथकंडों पर उतर आई है. पब्लिक सब जानती है कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और सारा खेल क्या है. भाजपा नेता मेरा मुंह न खुलवाएं. बहरहाल इतना तो तय है कि आने वाले दिनों में प्रदेश कि राजनीति में और उफान आएगा. सरकार के निशाने पर हुड्डा होंगे तो वहीँ कांग्रेस भी पीछे नहीं रहने वाली है.

 

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