हरियाणा: एक बार फिर चर्चा में IAS अशोक खेमका, मास्टरस्ट्रोक से उड़ाई अफसरों की नींद.......

22 Jan 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, गुरुग्राम): बड़ी पुराणी कहावत है कि सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं, यानी आप उसको कितना भी छुपाओ वो अपने आप बहार आ ही जाता है. कुछ ऐसे ही अधिकारी हैं IAS  आशोक खेमका. सरकार चाहे कोई भी हो, इंसान चाहे कितना भी शक्तिशाली हो, आशोक खेमका कभी किसी के दवाब में नहीं आते और वही करते हैं जो उचित हो. शायद यही वजह है कि सूबे कि बीजेपी सरकार में भी उन्हें तबादलों का दंश झेलना पड़ा. लेकिन वो उदास नहीं हुए और चुपचाप अपना काम करते रहे. अब हरियाणा के ये IAS अधिकारी और खेल महकमे के प्रमुख सचिव अशोक खेमका एक बार फिर अपने मास्टरस्ट्रोक से चर्चा में है.  इस पर उन्होंने राज्य में सरकारी आयोजन पर हुए करोड़ों के खर्च का हिसाब-किताब मांगकर अफसरों को परेशान कर दिया है, जिन्होंने लंबा-चौड़ा बिल भुगतान के लिए लगाया है. लेकिन इस बार ख़ास बात ये है कि इस बार उन्हें सरकार का भी साथ मिला है. अपनी वेबाकी के लिए जाने जाने वाले खेल मंत्री अनिल विज ने कहा है कि खेमका जो कर रहे हैं, वो उचित है, बिना पक्का बिल के धनराशि नहीं जारी हो सकती. यानी दो शूरमा साथ हो गये हैं जिनसे पार पाना इस बार किसी के लिए आसान नहीं होने वाला है.

आखिर कौन हैं आशोक खेमका.....

आशोक खेमका ता दें कि अशोक खेमका राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में तब आए थे, जब उन्होने 2012 में रॉबर्ड वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुए भूमि सौदे को रद्द कर दिया था. उस समय खेमका हरियाणा के राजस्व विभाग में थे. बीजेपी ने इसी रिपोर्ट को चुनावों में भी बड़ा मुद्दा बनाया था और कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का इलज़ाम लगाया था. खैर खेमका जिस भी विभाग में रहे, उस विभाग के मंत्री और भ्रष्ट अफसरों से कभी नहीं पटी. यही वजह रही कि उन्हें हर बार तबादले झेलने पड़े. पिछले साल नवंबर में उनका 51 वीं बार ट्रांसफर हुआ था, जिसकी जानकारी उन्होंने खुद ट्विटर पर सभी से साझा की थी.

आखिर इस बार क्या है पूरा मामला......

दरअसल मामला स्वर्ण जयंती समारोह के आयोजन से जुड़ा हुआ है. हर जिले को हरियाणा सरकार ने 54-54 लाख रुपये दिए थे. मगर, जिलों के उपायुक्तों ने एक से डेढ़ करोड़ रुपये के खर्च का लंबा-चौड़ा बिल-बाउचर लगाकर भुगतान के लिए सचिवालय भेजा है. इस आयोजन का नोडल खेल विभाग को बनाया गया था. विभाग के आईएएस अफसर अशोक खेमका ने सभी जिला उपायुक्तों से साफ कह दिया है कि जितनी धनराशि खर्च के लिए तय थी, उससे एक रुपये अधिक नहीं मिलेगी. इसके लिए कोई सोर्स-सिफारिश नहीं चलेगी. जब खेमका ने भुगतान से जुड़ी फाइलों पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया तो अफसरों के चेहरे लटक गए. सूत्र बताते हैं कि कई जिलों में कंसल्टेंट नियुक्त कर 80 से 90 लाख रुपये दे दिए गए. इस पर मुख्य सचिव की बैठक में भी खेमका ने सवाल उठाते हुए कहा था कि आयोजन में कंसल्टेंट नियुक्त करने की क्या जरूरत थी. खेल विभाग ने आयोजन के लिए 22 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे, मगर जिलों से 11 करोड़ और रुपये मांगे गए. यह देखकर विभाग के प्रमुख सचिव अशोक खेमका ने सबसे स्टेटमेंट आफ एक्सपेंडीचर मांग लिया. गौरतलब है कि हरियाणा की स्थापना के 50 साल पूरे होने पर सभी जिलों में स्वर्ण जयंती समारोह हुए थे.(इनपुट:जनसत्ता)

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