हरियाणा: फर्जी कागजातों के जरिये प्राइवेट बसों के रूट में हुआ फर्जीवाड़ा, सबसे ज्यादा मामले झज्जर में....

04 Jan 2018
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आवाज़(संजीत खन्ना, झज्जर): फर्जी इनवॉइस व कागजातों के जरिए प्राईवेट बसों के रूट परमिट लेने के मामले का झज्जर के बलजीत पूर्व सरपंच व राजपाल सुराह द्वारा फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ के जाने के बाद करीब 70 बसों के परमिटों पर तलवार लटक गई है और मामला हाईकोर्ट तक जा पहुंचा है। विभागीय स्तर पर भी परमिट प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी की जांच के आदेश ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा दिए गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते वर्ष के आरंभ में सरकार द्वारा विभिन्न मार्गों पर रूट परमिट दिया जाए जाने की योजना शुरू की गई थी। इसी योजना के तहत अथॉरिटी लेटर मिलने के 90 दिनों के दौरान बसें खरीदी जानी थी।

मामले को उजागर करने वाले शिकायतकर्ता राजपाल पुत्र महेंद्र सिंह निवासी गांव सूराह व बलजीत सिंह पूर्व सरपंच सुराह ने बताया कि सबसे ज्यादा गड़बड़ी झज्जर में हुई है और झज्जर के अलावा अंबाला, रोहतक, हिसार में फर्जीवाड़ा परमिटों के मामले में सामने आया है। उन्होंने बताया कि जिसमें सर्वाधिक अकेले झज्जर से हैं। अलॉटमेंट की प्रक्रिया फर्जी कागजातों के कारण लटक गई हैं और मामला अब हाईकोर्ट में पहुंच गया है। राजपाल सिंह ने बताया कि अथॉरिटी लेटर मार्च 2017 के दौरान विभाग द्वारा ट्रांसपोर्टरों को जारी किया गया। लेकिन कई ट्रांसपोर्टरों ने 90 दिनों के दौरान बसेें न खरीद कर अवधि बीतने के काफी दिनों बाद बसें खरीदी गई और बसें खरीदने का इनवॉइस, इंश्योरेंस, अस्थाई नंबर फर्जी तरीके से 90 दिनों की अवधि के दौरान दिखा कर परमिट लेने में गड़बड़ी की गई। राजपाल व बलजीत सिंह के अनुसार फर्जीवाड़े के चलते ही झज्जर व  रोहतक के असिस्टेंट आरटीए पहले ही सरकार द्वारा निलंबित किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के समक्ष उठा चुके हैं। उन्होंने बताया कि मामला हाईकोर्ट में जाने के कारण जिन रूट परमिटों के लिए फर्जी दस्तावेज दिए गए वे बसें अब रूट पर चलने की बजाए ट्रांसपोर्टरों के यहां खड़ी हैं। उन्होंने बताया कि पूरा फर्जीवाड़ा विभागीय अधिकारियों से मिलीभगत के जरिये हुआ और बड़े भ्रष्टाचार के इस मामले को पूरी तरह से उजागर करने तक वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

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