हरियाणा में नई पार्टी बनायेंगे हुड्डा, कांग्रेस को ज़ोर का झटका धीरे से!

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): अपनी अब तक की सबसे करारी हार का दंस झेल रही कांग्रेस को अब एक और झटका लग सकता है. सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और बड़े जाट नेता चौधरी भूपेन्द्र सिंह हुड्डा जल्द ही नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो ये निश्चित तौर पर कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी हानि होगी क्योंकि हुड्डा ना केवल पूर्व मुख्यमंत्री हैं बल्कि हरियाणा के सबसे बड़े जाट नेता भी हैं. ख़बर ये भी है की हुड्डा ना केवल खुद की पार्टी बना रहे हैं बल्कि वो 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को भी समर्थन देने जा रहे हैं.

गौरतलब है कि भूपिन्द्र सिंह हुड्डा प्रधानमंत्री मोदी से तीन बार मुलाकात कर चुके हैं, और ऐसा माना जा रहा है कि इस बारे में पूरी स्क्रिप्ट तैयार की जा चुकी है. जानकारों की मानें तो इसके पीछे हुड्डा की मजबूरी भी है. एक तो कांग्रेस में उनकी बड़े समय से अनदेखी हो रही है, वो कई बार पार्टी हाई कमान से हरियाणा की बागडोर मांग चुके हैं, लेकिन वहां से अबतक उन्हें निराशा ही हाथ लगी है. रही सही कसर कांग्रेस में कुलदीप विश्नोई की वापसी ने पूरी कर दी . क्योंकि एक समय जब ऐसा माना जा रहा था कि भूपिंदर सिंह हुड्डा या उनके बेटे दिपेंदर सिंह हुड्डा को पार्टी हाई कमान हरियाणा की बागडोर सौंप सकती है, उसी वक़्त कांग्रेस में कुलदीप विश्नोई की एंट्री होती है और हुड्डा के सर फिर से एक बार कांग्रेस का ताज सजते सजते रह जाता है. कुछ लोगों का तो ये भी कहना है की अगर हुड्डा को कांग्रेस की कमान नही दी जा रही तो इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह भी कुलदीप विश्नोई ही हैं, क्योंकि उनकी पहुंच गाँधी दरबार तक है  और वैसे भी हुड्डा अब कांग्रेस के लिए काम के नही रह गये हैं. ऐसे में हुड्डा के लिए सिर्फ यही एक विकल्प बच  जाता है.

वहीँ दूसरी तरफ रोबर्ट वाड्रा लैंड डील का जिन्न भी हुड्डा का पीछा नही छोड़ रहा और उन्हें डर है कि कहीं इस डील की चिंगारी उनके दामन पर भी ना गिर जाए. ऐसे में हुड्डा का प्रधानमंत्री मोदी से नजदीकियां बढ़ाना स्वभाविक है. वहीँ बीजेपी का भी इस सब के पीछे बहुत बड़ा मकसद है. एक तो पार्टी के पास हुड्डा की तरह कोई कद्दावर नेता नही है. हालांकि चौधरी वीरेंदर सिंह को बीजेपी में लाकर पार्टी हाई कमान ने ये सोचा था कि अब हरियाणा में जाट वोट बैंक उनकी तरफ आकर्षित होगा, लेकिन पार्टी को इस से बहुत ज्यादा फायदा नही हुआ. पार्टी के पास और भी कई जाट नेता हैं लेकिन उनमे से किसी का भी इतना जनाधार नही है जो हरियाणा में जाटों को भाजपा की और आकर्षित कर सके. ऐसे में हुड्डा को अगर पार्टी में लाया जाता है तो उन्हें कोई बड़ा पद देना पड़ेगा, जो अभी मुमकिन नहीं दिख रहा. इसलिए बीजेपी चाह रही है कि हुड्डा अपनी पार्टी बना लें. जिस से एक तीर से दो शिकार हो सकें.

वहीँ कुछ जानकारों का ये भी कहना है कि हुड्डा कांग्रेस में ही रहेंगे और वो ये सब भ्रम जान बूझ कर फैला रहे हैं ,ताकि पार्टी हाई कमान पर दबाव बनाया जा सके, जिससे हरियाणा में पार्टी की कमान उन्हें सौंप दी जाए. बहरहाल जो भी हो, इतना तो कह ही सकते हैं कि हरियाणा की राजनीति फिर से रंगीली हो गई है जहाँ अफवाहों का दौर जारी है और हरियाणा की चौपालों में फिर से राजनितिक मुद्दों पर गर्मागर्मी देखने को मिल रही है.

 

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