शिमला के बाद अब उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी कई जगह गहराया जल संकट, लोग कर रहे हैं त्राहि-त्राहि......

04 Jun 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): किसी ने कहा है कि अगर अगला विश्व युद्ध होगा तो पानी के लिए होगा.मौजूदा हालात में उसकी बात भी वाजिब दिख रही है. आज पूरी दुनिया में पानी के स्त्रोत सूखते जा रहे हैं और हालात इसी तरह से बिगड़ते रहे तो शायद वो दिन भी दूर नहीं जब पानी को लेकर ही अगला विश्व युद्ध छिड़ जाए. अभी कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक अफ्रीकन देश का विडियो वायरल हुआ जिसमे पूरे देश में वाटर इमरजेंसी घोषित कर दी गई थी. लोगों को पीने का पानी ही नसीब हो जाए इसके लिए वहां की सरकार प्रयासरत थी. लेकिन अब ऐसा ही कुछ नज़ारा भारत में भी देखने को मिल रहा है जहां कई राज्यों में पानी का संकट दिनोंदिन गहराता जा रहा है.

पिछले 10-15 दिन पहले पहाड़ों की रानी शिमला में पानी लेकर हाहाकार मच गया जो अबतक जारी है. आलम ये है कि गर्मियों की छुट्टियों में शिमला जाने वाले लोगों को वहां आने से मना कर दिया गया. छोटे होटलों ने बुकिंग कैंसिल कर दिन और जिन होटलों ने कमरे दिए भी वो भी केवल एक शर्त पर कि केवल दो बाल्टी पानी ही मुहैया करवाया जाएगा. हालात अभी भी ठीक नहीं हुए हैं. सैलानी तो बेशक घूमने कहीं और चले जायेंगे लेकिन वो लोग कहाँ जायेंगे जो वहां के वाशिंदे हैं. मैं शिमला को अच्छी तरह जानता हूँ. वहां पला-बड़ा हुआ हूँ. शिमला शहर अंग्रेजों न बसाया था जो गर्मियों में देश की राजधानी होता था. उन्हीं के द्वारा रिज़ मैदान पर पानी की स्टोरेज के लिए तानकर बनाये गये हैं. लेकिन ये सब व्यवस्था उस समय के लिए थी अब तो शिमला में जनसंख्या विस्फोट हो रहा है. कई किलोमीटर तक बस गया है शिमला अब. फिर उस समय के इंतजाम कैसे इतनी भारी जनसंख्या की पानी की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं. हाई-कोर्ट में भी इस मुद्दे क लेकर सुनवाई हो रही है. आलम ये है कि केवल राज्यपाल और मुख्यमंत्री को छोड़कर वाकी सब के लिए टेंकर से सप्लाई बंद कर दी गई है. फिर चाहे वो कोई वी वी आई पी ही क्यों न हो. इसमें सरकार के मंत्री और आला अफसर भी शामिल हैं. कंस्ट्रक्शन के कार्यों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है और लोगों से शिमला आने से बचने के लिए कहा जा रहा है.

कुछ ऐसे ही हालात उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में भी देखने को मिल रहे हैं. लोगों को 5-6 किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है. पानी की कमी इतनी है कि लोगों को अब इसके चोरी होने का दर सताने लगा है. राजस्थान के अजमेर में कुछ ऐसा नज़ारा देखने को मिल रहा है जहाँ लोग पानी को ड्रम में रखकर ताला लगाकर सो रहे हैं. यानी मतलब साफ़ है कि पानी की वहां भी भयंकर कमी है जिससे लोगों को दो-चार ह्पना पड़ रहा है. इसी तरह पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ गांवों में भी पानी की भारी किल्लत है महिलाएंदूर दूर से जाकर पानी ला रही हैं तब उनके घर में खाना बन पा रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार ने तो 5 जिलों में सूखा भी घोषित कर दिया है जिसमें बुन्देलखण्ड और सोनभद्र शामिल हैं. आलम ये है कि हैण्ड-पंप सूख चुके हैं और लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है.

इसके अलावा मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ के कई इलाके भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं. यहाँ भी पानी के पारम्परिक स्त्रोत सूख गये हैं या फिर सूखने की कगार पर हैं. लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है. एनडीटीवी ने अभी हाल ही में एक खबर दिखाई थी जिसमे उन्होंने दिखाया कि किस प्रकार मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में लोग अपनी जान खतरे में डालकर कुएं में उतर रहे हैं और गंदा पानी पीने के लिए मजबूर हैं..

मतलब साफ़ है जिस तरह से हम विकाशील होते जा रहे हैं उसी तेज़ी से अपने पारम्परिक स्त्रोतों के रख-रखाव को भूलते जा रहे हैं. प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, लेकिन ये भूल रहे हैं कि जैसा हम प्रकृति के साथ करेंगे कुदरत हमें वैसा ही लौटाएगी. अब वक़्त आ गया है जब हम सब को मिलकर इस समस्या से झूझने के उपाए करने होंगे क्योंकि इसके लिए हम केवल सरकार को ही दोषी नहीं ठेहरा सकते बल्कि हमें खुद ही आगे बढ़कर कुछ ऐसे कदम उठाने होंगे जिस-से इस दिनोंदिन बढती समस्या से निजात मिल सके. हमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लागू करना होगा. पारम्परिक स्त्रोतों का नियमित रख-रखाव करना होगा, और पानी कम से कम बर्वाद करना होगा जिस से आने वाली नस्ल हमें इस समस्या के लिए दोषी न ठेह्राए. आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क की आप सब से ये गुजारिश है कि आप सभी पाठक अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को पानी की अहमियत समझायें और सबसे गुज़ारिश करें की पानी को बर्बाद न करें क्योंकि जल ही जीवन है.......

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