क्या आरक्षण के सहारे विश्वगुरु बनेगा भारत..... अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए हिन्दू समाज को बांट रही हैं सारी राजनीतिक पार्टियाँ........

20 May 2018
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आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): आरक्षण इस देश में एक ऐसा विषय हो गया है जिसे हर राजनीतिक दल अपने हिसाब से भुनाने में लगा हुआ है. हरेक दल अपने आप को दलितों, पिछड़ों और जनजातियों का हितेषी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा... लेकिन ऐसे में समाज के कई गैर राजनीतिक संगठन इसके विरोध में भी उतर रहे हैं. जो आरक्षण को ख़त्म करने की मांग कर रहे हैं या फिर आरक्षण को जाती आधारित न करके बल्कि गरीबी पर आधारित करने की मांग कर रहे हैं. ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब माँ कालका धर्मार्थ ट्रस्ट की अध्यक्षा और जीवनधारा संघ (एनजीओ) की राष्ट्रिय संरक्षिका सुधा भारद्वाज (माँ) ने आरक्षण के विरुद्ध आवाज़ उठाई.

मौका सुधा भारद्वाज के जन्मदिन का था और उसे मनाने के लिए पूरे देश से उनके एनजीओ के पदाधिकारी भी आये हुए थे. ऐसे में आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क भी उनके बुलावे पर वहां पहुंचा और उनसे बातचीत की. सुधा भारद्वाज ने बातचीत में बताया कि आरक्षण एक ऐसा ज़हर है जो समस्त हिन्दू समाज को बांटने का काम कर रहा है. सारे हिन्दू समाज को जातियों में बांटकर राजनीतिक पार्टियाँ अपना उल्लू सीधा कर रही हैं. हर कोई अपने आप को दलितों, पिछड़ों और देश की कुछ जनजातियों का सबसे बड़ा पेरोकार और हितेषी बताने में तुला हुआ है. लेकिन वास्तव में ये कुछ नहीं बल्कि समाज को बांटने का काम हो रहा है जिसे हर एक को समझने की जरुरत है.

सुधा भारद्वाज ने आगे कहा कि हमें आज़ाद हुए 70 साल हो चुके हैं. आजतक दलितों को उनका हक क्यों नहीं मिल पाया., और कितना समय लगेगा उनका हक उन्हें मिलने में. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि आरक्षण जिस गरीब को मिलना चाहिए वहां तक तो पहुँच ही नहीं पा रहा है. केवल समाज का एक चालाक तबका उसका फायदा उठा रहा है और बाकी लोग केवल उनका मुंह ताकते रह जा रहे हैं. लेकिन अब वक़्त आ गया है जब आरक्षण जाती आधारित नहीं बल्कि गरीबी पर आधारित होना चाहिए. समाज में केवल आरक्षण उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जो इसके वास्तव में हकदार हों.

सुधा भारद्वाज ने आगे कहा कि वो इस मुहीम को पूरे देश में लेकर जायेंगी. अभी उनका संगठन तकरीबन 12 राज्यों में समाजसेवा का काम कर रहा है. लेकिन अब वो आरक्षण के मुद्दे  को लेकर पूरे देश में जायेंगीं और जनजागृति का काम करेंगीं. वहीँ जब उनसे उनकी राजनीतिक मंशा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने फिलहाल राजनीति में जाने से मना किया, लेकिन इतना कहा कि आने वाले चुनावों में वो और उनका संगठन केवल उसी दल का समर्थन करेगा जो सब जातियों के हितों की बात करेगा और आरक्षण को जाती आधारित न करके गरीबी आधारित करने की वकालत करेगा.

वहीँ जब उनसे दलित विरोधी होने क सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ़ कहा कि वो सब जातियों का सम्मान करती हैं. उनके लिए बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर भी उतने ही सम्माननीय हैं जितने की पंडित मदन मोहन मालवीय. इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि जब बाबा साहेब ने आरक्षण की व्यवस्था की थी तो साथ ही कुछ समय के पश्चात उसकी समीक्षा की बात भी कही थी. लेकिन आज हो क्या रहा है. समाज में केवल कुछ चालाक लोग उसका फायदा उठा रहे हैं जबकि जो उस आरक्षण का वाकई हक़दार है वो उससे महरूम है. ऐसे में क्या कसूर है उस ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समुदाय के बच्चे का जो इस आरक्षण के कारण दूसरों से बढ़िया नंबर लाने के बावजूद भी न तो कहीं दाखिला ले पा रहा है और न कहीं नौकरी. आखिर ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समाज के लोगों का क्या कसूर है जो ये सजा उनको दी जा रही है. और सरकार हमें ये बताये कि और कितने समय के बाद समाज के इन वर्गों को उनका हक मिलेगा? और कितने समय तक समाज में ऐसी व्यवस्था लागू रहेगी? अब वक़्त आ गया है जब समाज के सब वर्गों को इसके खिलाफ आवाज़ उठानी होगी. मैं इस मुहीम को पूरे देश में लाकर जाउंगी. हम सबको जगाने का काम करेंगे और अगर जरुरत पड़ी तो सब राजनीतिक पार्टियों को आने वाले चुनावों में सबक भी सिखायेंगे.

इस मौके पर जीवनधारा एनजीओ के देश के काफी प्रदेशों के पदाधिकारी भी सम्मिलित हुए जिनमें जीवन धारा संघ के राष्ट्रीय अध्य्क्ष गोविंद पाण्डेय, गौ रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री योगेश भाटी, राष्ट्रीय संगठन मंत्री रवि मित्तल ,राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री प्रभुदयाल शर्मा , राष्ट्रीय संयोजिका श्री मति लक्ष्मी ठाकुर, राष्ट्रीय महिला सहसचिव मीनाक्षी शुक्ला, मुम्बई से आरिफ अली, हिमाचल से बिमला उत्तर प्रदेश से अध्यक्ष  श्री अभय शुक्ला, दिल्ली से आशु शर्मा,  नोएडा से अध्यक्ष श्री राहुल सिंह  और 50 से अधिक सदस्य के नाम शामिल हैं.

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