Items filtered by date: Thursday, 07 June 2018

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): आज देश के पूर्व राष्ट्रपति संघ के बुलावे पर आर एस एस के मुख्यालय नागपुर में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद हैं जहाँ वो आर एस एस के एक कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं. देश में चर्चाओं और अफवाहों का दौर जारी है सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दादा आज अपने सम्बोधन में क्या बोलेंगे. राष्ट्रपति बनाने से पहले उम्र भर एक कांग्रेसी रहे प्रणव मुखर्जी जब आर एस एस मुख्यालय पहुंचे तो सबसे पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने उनका फूल भेंट करके स्वागत किया. उसके बाद दोनों नेता संघ संस्थापक के बी हेडगेवार के जन्मस्थान गये और वहां पूर्व राष्ट्रपति ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये. यहाँ की विजिटर बुक में दादा ने हेडगेवार को "भारत माँ का महान सपूत" लिखा.

देश भर में पूर्व राष्ट्रपति के इस दौरे को लेकर उत्सुकता और जिज्ञासा है और हर कोई ये जानना चाहता है कि दादा अपने सम्बोधन में क्या बोलते हैं.राजनितिक पार्टियों में गर्मागर्मी का दौर जारी है. कांग्रेस जहाँ इस दौरे पर कुछ भी बोलने से बच रही है वहीँ देश के कुछ अपरिपक्व नेता दादा के ऊपर ही सवाल उठा रहे हैं. लेकिन आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क की साफ़ राय है कि दादा ने संघ का निमन्त्रण स्वीकार करके भारतीय लोकतंत्र की शान बढ़ाई है. देश में संवाद का दौर कभी समाप्त नहीं होना चाहिए. दादा हम आपके इस जज़्बे की कद्र करते हैं. साथ ही आपके इस निर्णय को भी नमन करते हैं इस देश में सही मायनों में आप जैसे ही कुछ लोग लोकतंत्र को समझते हैं और इस तरह के कार्यक्रम में जाकर आपने भारतीय लोकतंत्र की शान बढ़ाई है. आपको हृदय से नमन.....

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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): हिमाचल में विजय पताका फ़हराने के बाद बीजेपी ने यहां 2019 के लिए शंखनाद कर दिया है. चर्चाओं, अफवाहों और अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने का दौर जारी है. टिकेट की आस पाले कई उम्मीदवार लाइन में हैं और अपने-अपने हिसाब से हाई-कमान तक अपनी साख बढ़ाने में लगे हुए हैं. इस बीच बड़ी खबर ये आ रही है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ऐसे चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में है जिनकी छवि साफ़-सुथरी, इमानदार हो साथ ही उन्हें पार्टी और संगठन में भी अच्छा ख़ासा अनुभव हो. आइये हम आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं कि हिमाचल प्रदेश से कौन-कौन सी सीटों से कौन सा उम्मीदवार हो सकता है.....

कांगड़ा लोकसभा सीट......

पिछली बार के लोकसभा चुनाव पर नजर डाली जाए तो काँगड़ा लोकसभा सीट बीजेपी ने हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटों से जीती थी. जहाँ से बीजेपी की तरफ से हिमाचल बीजेपी के दिग्गज़ नेता शांता कुमार ने चुनाव लड़ा था. लेकिन इस बार ये माना जा रहा है कि शांता कुमार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. एक तो उम्र ज्यादा हो गयी है और दूसरा शांता कुमार अपनी राजनितिक विरासत को आगे किसी ऐसे चेहरे को सौंपना चाहते हैं जो आगे भी हिमाचल भाजपा अपनी पकड़ बनाये रखे. सूत्रों की मानें तो इसी मुद्दे पर कुछ दिन पहले शांता कुमार और सूबे के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बीच काफी लम्बी चर्चा भी हुई है. सूत्रों की मानें तो इस बार काँगड़ा लोकसभा क्षेत्र से शांता कुमार की पसंद स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार या फिर कभी बीजेपी से बगावत करने वाले और फिर करारी हार के बाद फिर घर वापसी करने वाले नेता दूलो राम हैं. लेकिन विपिन परमार हिमाचल की राजनीति में ही रहना चाहते हैं वहीँ दूलो राम बेशक शांता कुमार और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के चहेते हों लेकिन हाई-कमान उनके नाम पर तैयार नहीं होगा. क्योंकि टिकेट हाई-कमान तय करेगा जहाँ पर न तो शांता कुमार के ही रिश्ते अच्छे हैं और दूलो राम का ट्रैक रिकॉर्ड भी वहां कुछ अच्छा नहीं है. ऐसे में जो नाम उभरकर सामने आ रहे हैं उनमें हिमाचल प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष इंदु गोस्वामी और बीजेपी प्रदेश संगठन मंत्री पवन राणा और नूरपुर जिला महामंत्री रणवीर सिंह निक्का के नाम सबसे आगे चल रहे हैं. सूत्रों की मानें तो ये बड़े चेहरे हैं जिनमें से किसी एक को बीजेपी इस बार काँगड़ा के दंगल में उतार सकती है. इन चेहरों की कई खासियतें हैं जो इन्हें इस बार के चुनाव के लिए दावेदार बना रही हैं. ऐसे में अगर इंदु गोस्वामी की बात की जाए तो उन्हें संगठन में अच्छा ख़ासा अनुभव है. प्रदेश की महिलाओं में अच्छी ख़ासी पकड़ के साथ-साथ वो एक डाउन तो अर्थ नेता मानी जाती रही हैं. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीति में महिलाओं को आगे बढ़ाने का संकल्प भी इस कदम से पूरा होता हुआ नजर आ रहा है. ऐसे में हाई-कमान उनकी अबतक की मेहनत का फल देते हुए काँगड़ा लोकसभा सीट से उम्मीदवार बना सकती हैं. वहीँ पवन राणा भी इस रेस में कहीं पिछड़ते हुए नजर नहीं आ रहे हैं. पार्टी और संगठन में उनकी अच्छी खासी पकड़ के साथ-साथ हाई-कमान से उनके मधुर सम्बन्ध भी उन्हें इस बार का दावेदार बना रहे हैं. वहीँ नूरपुर से ज़िला महामंत्री रणवीर सिंह निक्का का नाम इस रेस में चल रहा है. रणवीर सिंह निक्का की मेहनत और पार्टी के प्रति वफादारी भी उन्हें उम्मीदवार बनाती है. साथ ही उनके नाम पर शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल दोनों गुटों में सहमति बन सकती है. 

हमीरपुर लोकसभा सीट......

हिमाचल प्रदेश की हमीरपुर लोकसभा सीट पिछले काफी समय से बीजेपी के अभेद्य दुर्ग ही रही है. इस सीट में बीजेपी के उम्मीदवार के सामने कभी भी कांग्रेस कोई चुनौती पेश नहीं कर पायी है. धूमल परिवार यहाँ पर एकछत्र राज़ कर रहा है. लेकिन प्रेम कुमार धूमल के विधानसभा  चुनाव हारने के बाद यहाँ भी गुटबाजी तेज़ हुई और ऐसी अफवाहें उड़ाई गईं की इस बार यहाँ से अनुराग ठाकुर की बजाए पार्टी किसी दूसरे चेहरे को मौका दे सकती है. कईयों ने प्रेम कुमार धूमल को यहाँ से उम्मीदवार बनाया तो कईयों ने जे.पी. नड्डा को. लेकिन सूत्रों की मानें तो यहाँ से इस बार भी अनुराग ठाकुर ही बीजेपी के लोकसभा प्रत्याशी होंगे. पिछले काफी समय से अनुराग अपने लोकसभा क्षेत्र में काफी सक्रिय हैं और गांव-गांव जाकर लोगों से मिल रहे हैं. केंद्र की योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं. साथ ही पार्टी हाई-कमान में फिर चाहे वो स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, अनुराग के सबसे मधुर सम्बन्ध हैं. सूत्रों की मानें तो हाई-कमान अनुराग के जनसम्पर्क अभियान से काफी खुश है और इस बार भी वो ही हमीरपुर से पार्टी के प्रत्याशी होंगे इस बात में कोई दो-राय नहीं रह गयी है. वहीँ सूत्रों की मानें तो प्रेम कुमार धूमल को पार्टी के अंदर कोई बड़ा पद दिया जा सकता है क्योंकि वो हिमाचल बीजेपी के बड़े कद्दावर नेता हैं और पार्टी धूमल परिवार की राजनीति को खत्म नहीं करना चाहती क्योंकि इसका असर पूरे हिमाचल में परिणामों पर पड़ सकता है. साथ ही हमीरपुर के लोगों को भी अब इस बात का एहसास हो चुका है जब प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री हुआ करते थे तो पूरे हिमाचल में हमीरपुर की अलग पहचान होती थी. लेकिन विधानसभा चुनाव धूमल जैसे ही हारे तो वो प्रभाव हमीरपुर से हटकर मंडी का हो गया. ऐसे में अब हमीरपुर की एकमात्र उम्मीद अनुराग ठाकुर ही हैं. लोगों को ये लगता है कि अनुराग 2019 का चुनाव जीतने के बाद केंद्र में मंत्री बनेंगे जिसका सीधा फायदा हमीरपुर को होगा. ऐसे में ये कहा जा सकता है कि अनुराग ठाकुर ही इस बार भी हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी के उम्मीदवार होंगे.

मंडी लोकसभा सीट....

मंडी लोकसभा सीट में भाजपा सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रही है. जोगिन्द्र नगर की सीट को छोड़ दिया जाए तो मंडी ज़िले की लगभग सभी विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्ज़ा है. जोगिन्दर नगर से आज़ाद जीतने वाले विधायक प्रकाश राणा भी एक तरह से बीजेपी के ही हो गये हैं क्योंकि उन्होंने अपना समर्थन बीजेपी को दे दिया है और ऐसा माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों में वो जोगिन्दर नगर से बीजेपी उम्मीदवार होंगे. मात्र कुल्लू में विपक्ष का एक विधायक है. यहाँ की लोकसभा सीट की बात की जाए जो वर्तमान सांसद रामस्वरूप के सामने कोई चुनौती नजर नहीं आ रही. पार्टी और संगठन से मधुर रिश्ते, संगठन में कामकाज़ का अच्छा ख़ासा अनुभव, साफ़-सुथरी छवि जैसे कई गुण हैं जो रामस्वरूप को निर्विवाद मंडी लोकसभा सीट से फिरसे प्रत्याशी बनाये जाने के लिए काफी हैं. इसके अलावा संघ की तरफ से भी वो पसंदीदा उम्मीदवार हैं.यानी रामस्वरूप के सामने कोई चुनौती नहीं है.

 

शिमला लोकसभा सीट....

उपरी हिमाचल की ये सीट एक सीट रिजर्व है, और साथ ही ऐसी सीट है जहाँ पिछली दो बार से बीजेपी का कब्ज़ा है लेकिन कांग्रेस भी यहाँ काफी मजबूत स्थिति में रहती है और इस सीट पर बड़े-बड़े राजनितिक पंडित भी कोई भविष्यवाणी करने से बचते हैं. यहाँ कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का अच्छा ख़ासा प्रभाव है. लेकिन बीजेपी के लिए सुखद बात ये है कि कांग्रेस हाई-कमान ने जिस तरह से वीरभद्र को साइड लाइन किया है उससे ऊपरी हिमाचल में कांग्रेस के खिलाफ लहर है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा. लेकिन बीजेपी को यहाँ से अपना उम्मीदवार बदलना होगा क्योंकि वर्तमान सांसद वीरेंदर कश्यप के ऊपर चुनावी समय में अवैध लेनदेन के मामले में आरोप तय हो गए हैं. ऐसे में पार्टी को यहाँ से नया चेहरा मैदान में उतरना होगा. इस सीट पर भाजपा की तरफ से दो नाम सबसे आगे चल रहे हैं. जिनमे पहला नाम कसौली से विधायक राज्जेक सहजल का है तो दूसरा नाम पच्छाद से विधायक सुरेश कश्यप  का है. दोनों ही नामों के रेस में आगे होने की अपनी-अपनी वजहें भी हैं. सहजल जहां चुनावी गणित को अपने पक्ष में भुनाने के एक्सपर्ट माने जाते हैं वहीँ कश्यप भी डाउन-टू-अर्थ नेता माने जाते हैं. यानी इन दोनों में से पार्टी किसी एक पर दांव लगा सकती है.

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