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आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): अपने चार देशों के दौरे के तीसरे चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यूएई में हैं. इस दौरे की सबसे ख़ास बात ये है कि  आज यहां पीएम मोदी ने अबू धाबी के पहले हिन्दू मंदिर बोचसानवसी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) की आधारशिला रखी और इस भव्य मंदिर के लिए 125 करोड़ भारतीयों की ओर से वली अहद शहजादा मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को धन्यवाद दिया. उन्होंने अबू धाबी के मंदिर की नींव का पत्थर दुबई ओपेरा हाउस से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये रखा. मंदिर का शिलान्यास करने के बाद जब मोदी ने ओपेरा हाउस में भारतीयों को संबोधित करना शुरू किया, उनके स्वागत में जोर-जोर से ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए गए. पूरा ओपेरा हाउस इन नारों की गूंज से गूंज उठा. सारा माहौल मोदीमय हो गया और ऐसा लगा कि जैसे प्रवासी भारतियों के दिल में मोदी की एक ख़ास जगह है और वो जब भी उनके सामने जाते हैं तो लोगों के वो जज़्बात उनकी जुबान पर आ जाते हैं. 

दुबई ओपेरा हाउस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए मोदी ने गल्फ देशों को धन्यवाद देते हुए कहा कि यहां उन्हें घर जैसा माहौल दिया गया. उन्होंने कहा, ‘मैं गल्फ देशों को धन्यवाद कहना चाहता हूं कि यहां भी मुझे 30 लाख भारतीयों का साथ मिला, जिसकी वजह से मैं यहां भी अपने घर की तरह ही महसूस कर रहा हूं.’ पीएम मोदी ने कहा, ‘हम उस परंपरा में पले बढ़े हैं जहां मंदिर मानवता का माध्यम है. ये मंदिर आधुनिक तो होगा ही लेकिन विश्व को ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का अनुभव कराने का माध्यम बनेगा.’

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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): जैसे-जैसे कर्नाटक विधानसभा चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं वैसे-वैसे बीजेपी और कांग्रेस अपने सियासी समीकरणों को साधने में जुटती जा रही हैं. कांग्रेस जहाँ अबतक बीजेपी के ख़ास वोट बैंक रहे लिंगायत समुदाय पर अपनी नजर गड़ाए हुए है तो वहीँ बीजेपी दलित समुदाय को साधने में तत्पर दिख रही है, जिसका झुकाव कांग्रेस की तरफ रहा है. गौरतलब है कि लिंगायतों का कर्नाटक की सियासत तय करने में हमेशा ही दबदबा रहा है तो वही दूसरी तरफ़ किसी भी पार्टी की जीत और हार में निर्णायक भूमिका दलित भी निभाते हैं जिनकी संख्या लगभग 24 फीसदी है. मतलब साफ़ है कि राहुल गांधी लिंगायतों पर नजर गडाए बैठे हैं तो बीजेपी के सीएम उम्मीदवार यदुरप्पा दलितों को अपने पक्ष में करने के लिए प्रयासरत हैं. जिसके तहत राहुल गाँधी मंदिर और मठों में घूम रहे हैं और कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बीएस येदुरप्पा ने शनिवार रात झुग्गी-झोपड़ियों में रात बिताने का फैसला किया.

बीएस येदुरप्पा ने बेंगलुरु के लक्ष्मणपुरी स्लम में मुनिराजू नाम के एक शख्स के घर शनिवार रात गुज़ारी. जहां दलित और पिछड़े वर्ग के लोग रहते हैं. बीजेपी के राज्य मीडिया संयोजक शांताराम ने बताया "देश भर में ऐसे प्रयास चल रहे हैं ताकि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अन्तोदय स्कीम को अमली जामा पहनाया जा सके और येदुरप्पा जी का स्लम में रात्रि विश्राम इसी की कड़ी है."

वहीं राहुल गाँधी की अगर बात करें तो वो बेंगलुरु से तक़रीबन 400 किलोमीटर दूर होसपेट में राहुल गांधी लिंगायतों को लुभाने की कोशिश में जुटे दिखे. उन्होएँ पहले तो लिंगायतों के प्रसिद्ध सिद्धेश्वर मठ की यात्रा की और फिर यहीं से निकलने वाले रास्ते से पहाड़ी पर बने शिव मंदिर में जाकर दर्शन किये. यानी कोशिश साफ़ है बीजीपी के मज़बूत लिंगायत वोट बैंक को तोड़ने की. साथ ही ये भी वादा किया जा रहा है कि उनकी सरकार लिंगायत को अलग राज्य का दर्जा देने को तैयार है. सरकार बनने के बाद वो इसे कैबिनेट से पास कर सिफारिश केंद्र सरकार को भेज देंगे.


गौरतलब है कि हैदराबाद कर्नाटक क्षेत्र में कुल 19 विधान सभा सीटें हैं. 2013 के विधानसभा चुनावों में इसमें से बीजेपी को 4, जेडीएस को 4, येदुरप्पा की केजीपी को 2, सीटें मिली थीं, जबकि शेष 9 सीटें कांग्रेस के खाते में गयी थीं. लेकिन इस बार समीकरण कुछ बदले-बदले नजर आ रहे हैं. क्योंकि 201३ में यदुरप्पा बीजेपी के साथ नहीं थे और उन्होंने बीजेपी से बगावत कर नई पार्टी बनाई थी. लेकिन इस बार वो न केवल बीजेपी के साथ आये हैं बल्कि वो बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भी हैं. साथ ही उन्हें राज्य में सबसे बड़े लिंगायत नेता के रूप में भी जाना जाता है. एक और बात जो यदुरप्पा के पक्ष में जाती है वो ये है की यदुरप्पा तक़रीबन 74 साल के  हो चुके हैं और ऐसा कहा जा रहा है कि ये येदयुरप्पा का  आखिरी चुनाव हो सकता है. तो लिंगायत समुदाय उन्हें इस बार मुख्यमंत्री के पद पर देखना चाह रहा है जिसने कांग्रेस की नींद उड़ा रखी है. इस इलाके के बाद उत्तर कर्नाटक बीजेपी के लिए अहम है. यहाँ भी बीजेपी बाज़ी मारती हुई नजर आ रही है क्योंकि यहां लिंगायतों के साथ-साथ ब्राह्मणों का भी बड़ा वोट बैंक है जो परंपरागत तौर पर बीजेपी को ही मिलते हैं.​

ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि दोनों पार्टियों ने इस बार इस क्षेत्र में जी-जान फूंक दी है. अब कौन सी पार्टी किसे कितना अपनी और खींच पायेगी ये तो तभी पता चलेगा जब चुनाव के नतीजे सामने आयेंगे लेकिन अभी दोनों पार्टियों के बीच खींचतान जारी है और जनता चुपचाप सब तमाशा देख रही है.

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