बहके नसीरुद्दीन फिर से बोले - पूरे मुल्क में नफरत और जुल्म का बेखौफ नाच जारी है.......!

04 Jan 2019
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आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): पिछले दिनों से अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में हैं......उनके ये ब्यान नित नये विवादों को जन्म दे रहे हैं लेकिन नसीरुद्दीन हैं कि थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं...... पहले उन्होंने बुलंदशहर में हुई घटना को लेकर अपनी बात रखी थी. जिसे लेकर विवाद अभी पूरी तरह से थमा भी नहीं था कि अब एक और वीडियो में नसीरुद्दीन शाह ने देश के माहौल पर सवाल उठाए हैं. इस वीडियो को मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंडिया ने टि्वटर पर शेयर किया है. नसीरुद्दीन शाह वीडियो में कह रहे हैं- "हमारे आजाद मुल्क का संविधान 26 नवंबर 1949 को ग्रहण किया गया. शुरू के ही सत्रों में उसके उसूल लागू कर दिए गए, जिनका मकसद ये था कि हर नागरिक को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक न्याय मिल सके. सोचने की, बोलने की और किसी भी धर्म को मानने की या इबादत करने की आजादी हो. "

नसीरुद्दीन शाह ने कहा-" हमारे मुल्क में जो लोग गरीबों के घरों को, जमीनों को और रोजगार को तबाह होने से बचाने की कोशिश करते हैं, करप्शन के खिलाफ आवाज उठाते हैं, ये लोग हमारे उसी संविधान की रखवाली कर रहे होते हैं. लेकिन अब हक के लिए आवाज उठाने वाले जेलों में बंद हैं. कलाकार, फनकार, शायर सबके काम पर रोक लगाई जा रही है. पत्रकारों को भी खामोश किया जा रहा है. "

नसीर ने आगे कहा- " मजहब के नाम पर नफरत की दीवारें खड़ी की जा रही हैं, मासूमों का कत्ल हो रहा है, पूरे मुल्क में नफरत और जुल्म का बेखौफ नाच जारी है. इन सबके खिलाफ आवाज उठाने वालों के दफ्तरों पर रेड डालकर, लाइसेंस कैंसिल करके, उनके बैंक अकाउंट फ्रीज करके, उन्हें खामोश किया जा रहा है, ताकि वो सच बोलने से बाज आ जाएं. क्या हमने ऐसे ही मुल्क का ख्वाब देखा था, जहां मतभेद की कोई गुंजाइश न हो. जहां सिर्फ अमीर और ताकतवर की ही आवाज सुनी जाए. जहां गरीब और कमजोर को हमेशा कुचला जाए."

नसीरुद्दीन से आवाज़ के कुछ सवाल:------

नसीरुद्दीन शाह न अपने पहले दिए ब्यान में कहा था कि उन्हें गुस्सा आता है...... आवाज़ उनके इस ब्यान से इत्फ़ाक रखता है कि जब भी देश में कुछ गलत हो तो हर एक जिम्मेवार नागरिक को गुस्सा आना चाहिए.... लेकिन ये गुस्सा किसी भी पार्टी, व्यक्ति, सम्प्रदाय के खिलाफ नहीं होना चाहिए..... आवाज़ नसीरुद्दीन से ये जानना चाहता है कि इस देश में हालत इमरजेंसी से भी बुरे हो गये हैं क्या? जो उन्हें गुस्सा आ रहा है.... क्या उन्हें उस वक़्त भी गुस्सा आया था जब कश्मीर से हज़ारों हिन्दुओं को मारकर उनके ही घरों से बाहर निकाल दिया गया था.... अनगिनत महिलाओं और बेटियों के साथ बलात्कार करके उन्हें काट दिया गया था..... क्या उन्हें उस वक़्त भी गुस्सा आया था जब 1984 में हज़ारों सिक्खों को जिंदा जला दिया गया था...... उन्हें मारा गया, काटा गया, महिलाओं से बलात्कार हुआ..... और इतने वक़्त तक अपराधी बाहर खुले में घुमते रहे..... तब नसीरुद्दीन को गुस्सा नहीं आया होगा...... या आया भी होगा तो निश्चित तौर पर उन्होंने अपना मुंह पल्लू में कहीं छुपा लिया होगा..... नसीरुद्दीन जी आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क आपसे जानना चाहता है कि इन घटनाओं पर आपको क्यों गुस्सा नहीं आया या फिर आता है.... और अगर आता है तो क्यों आप उसके खिलाफ अपना विडियो नहीं बनाते हैं..... उसे शेयर क्यों नहीं करते हैं..... इससे साफ़ प्रतीत होता है कि आपका गुस्सा निश्चित तौर पर एक व्यक्ति विशेष के लिए है...... या फिर आपकी राजनितिक महत्वकांक्षाएँ जाग गई हैं जो आपको गुस्सा दिला रही है.....

नसीरुद्दीन जी आपको आज फिर गुस्सा आ रहा है और आपको लगता है कि मौजूदा दौर में जो माहौल बना हुआ है वो तानाशाही का दौर है..... जो सत्ता पक्ष के खिलाफ आवाज़ उठाएगा उसे जेल में बंद कर दिया जाएगा..... आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क आपसे ये जानना चाह रहा है कि आपने भी तो सत्ता पक्ष के खिलाफ आवाज़ उठाई तो आप खुले में कैसे घूम रहे हैं.... आप जेल में बंद क्यों नहीं हैं........ नफरत की दीवार कहां खड़ी की जा रही है..... ये दीवार आप जैसे ही लोग तो खड़ा कर रहे हैं...... ये काम आपको मुबारक हो.... क्या देश में इमरजेंसी से भी ज्यादा माहौल ख़राब है.... इन कुछ सवालों के उत्तर के लिए आपके नये विडियो का इंतज़ार रहेगा.... सवाल कई सारे और भी हैं..... पहले इनका जवाब दे दीजियेगा..... और हो सके तो ये नफरत के बीज न बोयें...... इसीसे किसीका भला नहीं होगा......

 

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