प्रधानमन्त्री मोदी से मिले रिज़र्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल..... सरकार और RBI के बीच चल रही खींचतान का होगा जल्द समाधान....!

13 Nov 2018
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आवाज़(मुकेश शर्म, दिल्ली): पिछले कुछ समय से सरकार और रिजर्व बैंक के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर खींचतान जारी है....जिसे लेकर विपक्षी कांग्रेस रोज़ चुटकी तो ले ही रही है साथ ही सरकार पर संस्थानों की स्वायत्त को ख़त्म करने का आरोप भी लगा रही है.... लेकिन इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने 9 नवम्बर को प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी से मुलाकात की है.....सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को पटेल दिल्ली में थे और उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की. साथ ही ये भी जानकारी मिल रही है इस मुलाकात के बाद अब RBI और सरकार के बीच चल रही इस खींचतान का अंत हो सकता है. जिसका सीधा फायदा छोटे और मंझोले उद्योगों को मिल सकता है....

दरअसल पिछले कई हफ्तों से सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है. उम्मीद की जा रही है कि पटेल की मोदी से मुलाकात का मकसद सरकार के साथ जारी खींचतान का समाधान खोजना हो सकता है. सूत्रों की मानें तो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा छोटे एवं मझोले उद्योगों को ऋण देने की विशेष व्यवस्था के संकेत मिले हैं. लेकिन यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए नकदी की स्थिति को आसान बनाने और आरबीआई के अपने अधिशेष में से कुछ राशि जारी करने पर कोई सहमति बनी है अथवा नहीं. 

गौरतलब है कि सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच स्वायत्तता के मुद्दे को लेकर काफी तनाव की स्थिति बनी हुई है. इस खींचतान के चलते वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक कानून की धारा सात के तहत विचार विमर्श शुरू किया है. जिसके मुताबिक सरकार को जनहित के मुद्दों पर रिजर्व बैंक गवर्नर को निर्देश देने का अधिकार है. इससे पहले सरकार ने रिजर्व बैंक के साथ जारी खींचतान के बीच बीते शुक्रवार को स्पष्ट किया वह इस समय इस विषय में चर्चा कर रही है कि केंद्रीय बैंक के पास आरक्षित पूंजी कितनी होनी चाहिए और इसका उपयुक्त पैमाना क्या हो सकता है? हालांकि सरकार ने इस बात से इंकार किया कि वह भारतीय रिजर्व बैंक के पास पड़े विशाल आरक्षित कोष में से कुछ राशि मांग रही है.

दरअसल रिजर्व बैंक के पास 9.59 लाख करोड़ रुपये की पूंजी का भंडार है. अगर खबरों को सही माना जाए तो सरकार इस राशि का एक तिहाई हिस्सा बाजार में डालना चाहती है. इसके साथ ही सरकार कमजोर वाणिज्य बैंकों पर लागू पाबंदियों में कुछ ढील की भी मांग कर रही है. लेकिन हाल ही में जिस प्रकार से देश के कई बड़े उद्योगपति देश का पैसा लेकर फरार हुए और कई एनपीए हुए उसके बाद आरबीआई ने कई तरह के कड़े नियम बनाए हैं जिसमे वो ढील देने को तैयार नहीं है.... सरकार और आर बी आई के बीच इसी बात को लेकर खींचतान चल रही है.

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