कारगिल विजय दिवस: जब भारत के वीर जवानों ने दिया था पाकिस्तान के दुस्साहस का करारा जवाब, भाग निकले थे घुसपैठिये........

26 Jul 2018
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आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): आज कारगिल विजय दिवस है वो दिन जब हमारे देश के वीर जवानों ने पाकिस्तानी सेना के दुस्साहस का करार जवाब देते हुए न केवल उसे युद्ध के मैदान में धूल चटाई थी बल्कि दुश्मन पीठ दिखाकर भाग खडा हुआ था. भारतीय सेना के व्स्स्र जांबाजों ने इसी दिन फिर से कारगिल को फट करते हुए वहां तिरंगा लहराया था. इस मौके पर देश के प्रधानमंत्री ने भी भारतीय सेना के वीर सैनिकों के शौर्य की सराहना की है साथ ही कारगिल में बलिदान देने वाले भारतीय वीर जवानों को भी श्रद्धांजली दी है. आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क परिवार की तरफ से भी हमारे वीर जवानों को हृदय से नमन जिनके कारण हम अमनों-चैन से जीते हैं.

गौरतलब कारगिल का युद्ध दूसरे विश्व युद्ध के बाद ऐसा पहला युद्ध था, जिसमें हर मिनट दुश्मनों पर फायरिंग की गई. हालांकि कारगिल की लड़ाई अपने आप में कई राज छुपाए हुए है. उस समय क्या हुआ था ये कोई नहीं जानता. हर कोई अलग-अलग अंदाजा लगाता है. इसीलिए हम आज आपको बताने जा रहे हैं कारगिल से जुड़े कुछ अहम राज जिन्हें जानकर आप हैरान हो जाएंगे. कारगिल की लड़ाई में हमारे सैनिकों ने पाकिस्तानी फौज का जमकर मुकाबला किया था. पाकिस्तानी घुस्पैठियों ने लगातार गोलियां चलाई और हमारे सैनिकों ने उन्हें सामने से जवाब दिया. आइये आपको बताते हैं इस युद्ध से जुड़े कुछ तथ्य:.......

दरअसल भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में कारगिल युद्ध हुआ था. इसकी शुरुआत हुई थी 8 मई 1999 से जब पाकिस्तानी फौजियों और कश्मीरी आतंकियों को कारगिल की चोटी पर देखा गया था. माना जाता है कि पाकिस्तान इस ऑपरेशन की 1998 से तैयारी कर रहा था. एक बड़े खुलासे के तहत पाकिस्तान का दावा झूठा साबित हुआ कि करगिल लड़ाई में मुजाहिद्दीन शामिल थे. यह लड़ाई पाकिस्तान के नियमित सैनिकों ने लड़ी. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के पूर्व अधिकारी शाहिद अजीज ने यह राज उजागर किया था.

कारगिल सेक्टर में 1999 में भारतीय और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच लड़ाई शुरू होने से कुछ सप्ताह पहले जनरल परवेज मुशर्रफ ने एक हेलिकॉप्टर से नियंत्रण रेखा पार की थी और भारतीय भूभाग में करीब 11 किमी अंदर एक स्थान पर रात भी बिताई थी. मुशर्रफ के साथ 80 ब्रिगेड के तत्कालीन कमांडर ब्रिगेडियर मसूद असलम भी थे. दोनों ने जिकरिया मुस्तकार नामक स्थान पर रात बिताई थी.

जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने 1998 में परमाणु हथियारों का परीक्षण किया था. कई लोगों का कहना है कि कारगिल की लड़ाई उम्मीद से ज्यादा खतरनाक थी. हालात को देखते हुए मुशर्रफ ने परमाणु हथियार तक इस्तेमाल करने की तैयारी कर ली थी. पाकिस्तानी सेना कारगिल युद्ध को 1998 से अंजाम देने की फिराक में थी. इस काम के लिए पाक सेना ने अपने 5000 जवानों को कारगिल पर चढ़ाई करने के लिए भेजा था.

कारगिल की लड़ाई के दौरान पाकिस्तानी एयर फोर्स के चीफ को पहले इस ऑपरेशन की खबर नहीं दी गई थी. जब इस बारे में पाकिस्तानी एयर फोर्स के चीफ को बताया गया तो उनहोंने इस मिशन में आर्मी का साथ देने से मना कर दिया था. पाकिस्तानी सेना कारगिल युद्ध को 1998 से अंजाम देने की फिराक में थी. इस काम के लिए पाक सेना ने अपने 5000 जवानों को कारगिल पर चढ़ाई करने के लिए भेजा था.

कारगिल की लड़ाई के दौरान पाकिस्तानी एयर फोर्स के चीफ को पहले इस ऑपरेशन की खबर नहीं दी गई थी. जब इस बारे में पाकिस्तानी एयर फोर्स के चीफ को बताया गया तो उनहोंने इस मिशन में आर्मी का साथ देने से मना कर दिया था. उर्दू डेली में छपे एक बयान में नवाज शरीफ ने इस बात को स्वीकारा था कि कारगिल का युद्ध पाकिस्तानी सेना के लिए एक आपदा साबित हुआ था. पाकिस्तान ने इस युद्ध में 2700 से ज्यादा सैनिक खो दिए थे. पाकिस्तान को 1965 और 1971 की लड़ाई से भी ज्यादा नुकसान हुआ था.

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ कारगिल युद्ध में मिग-27 और मिग-29 का प्रयोग किया था. मिग-27 की मदद से इस युद्ध में उन स्थानों पर बम गिराए जहां पाक सैनिकों ने कब्जा जमा लिया था. इसके अलावा मिग-29 करगिल में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ इस विमान से पाक के कई ठिकानों पर आर-77 मिसाइलें दागी गईं थीं.

मई को कारगिल युद्ध शुरू होने के बाद 11 मई से भारतीय वायुसेना की टुकड़ी ने इंडियन आर्मी की मदद करना शुरू कर दिया था. कारगिल की लड़ाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस युद्ध में वायुसेना के करीब 300 विमान उड़ान भरते थे.

कारगिल की ऊंचाई समुद्र तल से 16000 से 18000 फीट ऊपर है. ऐसे में उड़ान भरने के लिए विमानों को करीब 20,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ना पड़ता है. ऐसी ऊंचाई पर हवा का घनत्व 30% से कम होता है. इन हालात में पायलट का दम विमान के अंदर ही घुट सकता है और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है.

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में लड़े गए कारगिल युद्ध में तोपखाने (आर्टिलरी) से 2,50,000 गोले और रॉकेट दागे गए थे. 300 से अधिक तोपों, मोर्टार और रॉकेट लॉन्चरों ने रोज करीब 5,000 बम फायर किए थे. लड़ाई के महत्वपूर्ण 17 दिनों में प्रतिदिन हर आर्टिलरी बैटरी से औसतन एक मिनट में एक राउंड फायर किया गया था. दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहली ऐसी लड़ाई थी, जिसमें किसी एक देश ने दुश्मन देश की सेना पर इतनी अधिक बमबारी की थी.(सौजन्य:आजतक डॉट इन)

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