एटीएम में कैश नहीं, क्या फिर पैदा हो रहे हैं नोटबंदी जैसे हालात? बीजेपी के सीएम दे रहे उलटे सीधे ब्यान ...चार राज्यों में मची त्राहि-त्राहि...........

17 Apr 2018
307 times

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): बुरी खबर ये आ रही है कि देश में एक बार फिरसे नोटबंदी जैसे हालात पैदा हो रहे हैं. देश के 4 बड़े राज्यों से कैश की भारी किल्लत की ख़बरें लगातार आ रही हैं. बैंकों ने मानो हाथ खड़े कर दिए है और लोग परेशान हो रहे हैं. एटीएम के बाहर नो काश के बोर्ड टांग दिए गये हैं. जिन राज्यों में ये संकर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है उनमे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात का नाम प्रमुख है. इनमे से भी बिहार में तो नोटबंदी जैसे हालातों का लोगों को सामना करना पड़ रहा है.

लोग कैश के लिए एटीएम और बैंकों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन बैंकों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं. गौरतलब है कि शादियों का सीजन चल रहा है ऐसे में हर किसी को कैश की ज़रूरत होती है लेकिन इस नए संकट ने सबकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. ऐसे में बैंक शादी का कार्ड एकबार फिर से देखकर कैश तो दे रहे हैं लेकिन जितनी जरूरत है उससे कहीं कम ही मिल प् रहा है इस वजह से लोगों में एक बार फिर से भय और अफरा-तफरी का माहौल सा बन गया है.

वहीँ एक बार फिर से शुरू हुए इस नकदी संकट के बीच बीजेपी के दिग्गज नेता और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का बहुत ही चौंकाने वाला बयान सामने आया है जिसमे उन्होंने इस संकट को साजिश करार दिया है. किसानों की सभा को संबोधित करने को दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 2000 के नोट को साजिश के तहत चलन से गायब किया जा रहा है. अब ये साज़िश कौन कार रहा है इसका जवाब शायद उन्हें देना पड़ेगा क्योंकि केंद्र में भी बीजेपी सरकार है और राज्य में भी उनकी, जिसके वो मुखिया हैं. अब ऐसे हालातों के बीच वो ये दोष कांग्रेस के मत्थे तो नहीं मड्ड सकते. यानी राजनीतिक ताने-बाने को बुनने का खेल शुरू हो चुका हैजिसमे पक्ष ने तो अपनी कवायद शुरू कर दी है अब विपक्ष क्या गुल खिलाता है ये देखने वाली बात होगी.

जानकारों की मानें तो इन राज्यों मे लोगों द्वारा ज्यादा बैंको और एटीएम से ज्यादा नगदी निकालने की वजह से यह संकट पैदा हुआ है. इन राज्यो में लोगों ने बैंकों से पैसे तो निकाले लेकिन बैंकों में पैसे जमा नहीं कराए गए, जिसकी वजह से यह समस्या खड़ी हुई है. साथ ही रिज़र्व बैंक द्वारा 2000 के नोटों की छपाई बंद करना और 200 के नोटों के लिए बैंकों की सारी एटीएम मशीनों का अभी तक तैयार न हो पाना भी इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है.

वहीँ बैसाखी, बिहू और सौर नव वर्ष जैसे त्योहार होने की वजह से भी लोगों को ज्यादा नगदी की जरुरत पड़ी. यानी कैश निकाला तो ज्यादा गया लेकिन कैश जमा कम हुआ जिसके चलते ये हालात बने. साथ ही दूसरा मत ये भी है कि लोगों के सामने जबसे बैंकों के घोटाले आये हैं तबसे लोगों का विश्वास बैंकों के ऊपर से उठने लगा है वो अपने पैसे की धीरे-धीरे निकासी कर रहे हैं. अब असल वजह जो भी हो लेकिन इतना तो तय है की अगर ये नकदी संकट जल्दी नहीं सुलझा तो एक बार फिर से अपने विरोधियों के निशाने पर प्रधानमंत्री मोदी होंगे और इस बार वो जनता से क्या कहेंगे ये भी देखने वाली बात होगी क्योंकि पिछली बार  प्रधानमंत्री जी ने 90 दिनों का समय लेकर जनता  चुप कराया था हालांकि समस्या 90 दिनों में भी सुलझ नहीं पाई थी, जिसके कारण उनकी बहुत किरकिरी हुई थी. 

Rate this item
(0 votes)

Error : Please select some lists in your AcyMailing module configuration for the field "Automatically subscribe to" and make sure the selected lists are enabled

Photo Gallery