इंस्टेंट ट्रिपल तलाक बिल पेश करते हुए लोकसभा में बोले रवि शंकर प्रसाद: आज हम इतिहास रचने जा रहे हैं......

28 Dec 2017
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पश्चात तीन तलाक देने पर सजा के प्रावधान को लेकर केंद्र सरकार ने आज लोकसभा में बिल पेश किया. बिल पेश करते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है. सरकार महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए इस बिल को ला रही है.ये पूजा, प्रार्थना और इबारत का नहीं है बल्कि नारी न्‍याय और इंसाफ का है. सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को गैरकानूनी करार दिया है अगर इसके बाद भी ये पाप किया जा रहा है तो इस पर सदन खामोश रहेगा. उन्‍होंने कहा कि ये सदन को तय करना है तीन तलाक कि ये पीड़ित महिलाओं का मौलिक अधिकार है या नहीं. 
 
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमसे पूछा गया कि इसको अपराध क्‍यों बना रहे हैं. अगर तीन तलाक गैरकानूनी है तो ये अपराध क्‍यों नहीं है. वहीं इससे पहले तीन तलाक बिल पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सांसदों को ब्रीफ किया. उन्‍होंने कहा है कि पीएम मोदी के रहते किसी मुस्लिम महिला के साथ अन्याय नहीं होगा. उन्‍होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कानून बनाने को कहा था और उसी के आदेश का पालन हो रहा है. 

वहीँ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस बिल का समर्थन का ऐलान किया है. कांग्रेस बिल पर कोई संशोधन नहीं लाएगी. कांग्रेस की ओर से सरकार को सिर्फ सुझाव दिए जाएंगे, और सरकार का इस मुद्दे पर समर्थन किया जाएगा. लेकिन RJD, BJD समेत कई विपक्षी पार्टियों ने इस बिल का विरोध किया. विपक्षी पार्टियों ने बिल में सजा के प्रावधान को गलत बताया है. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल का विरोध किया. उन्होंने कहा कि ये बिल संविधान के मुताबिक नहीं है. ओवैसी ने कहा कि तलाक ए बिद्दत गैरकानूनी है, घरेलू हिंसा को लेकर भी कानून पहले से मौजूद है फिर इसी तरह के एक और कानून की जरूरत क्या है? इस बिल पर आवैसी ने कहा कि यदि पुरुष को जेल भेजा जाता है तो गुजारे भत्‍ते का भुगतान कौन करेगा. उन्‍होंने कहा कि इस विधेयक पर परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है. 

दरअसल तीन तलाक विधेयक को गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाले अंतर मंत्रीस्तरीय समूह ने तैयार किया है जिसमें मौखिक, लिखित या एसएमएस या व्हाट्सएप के जरिये किसी भी रूप में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत को अवैध करार देने और पति को तीन साल के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है. इस विधेयक को इस महीने ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी. यह विधेयक पिछले हफ्ते पेश किया जाना था लेकिन संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने संवाददाताओं से कहा था कि इसे अगले सप्ताह पेश किया जाएगा.

गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के मुताबिक, देश में 8.4 करोड़ मुस्लिम महिलाएं हैं और हर एक तलाकशुदा मर्द के मुकाबले 4 तलाक़शुदा औरतें हैं. 13.5 प्रतिशत लड़कियों की शादी 15 साल की उम्र से पहले हो जाती है और 49 प्रतिशत मुस्लिम लड़कियों की शादी 14 से 29 की उम्र में होती है. वहीं 2001-2011 तक मुस्लिम औरतों को तलाक़ देने के मामले 40 फीसदी बढ़े है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीते 15 दिसंबर को ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक’ को मंजूरी प्रदान की थी. गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले अंतर-मंत्रालयी समूह ने विधेयक का मसौदा तैयार किया था. इस समूह में वित्त मंत्री अरूण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और कानून राज्य मंत्री पी पी चौधरी शामिल थे. 

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