सिब्बल बोले 2019 के बाद हो राम जन्मभूमि-बाबरी विवाद पर सुनवाई, अमित शाह ने पूछा- शिवभक्त राहुल की कांग्रेस राम के खिलाफ क्यों? Featured

05 Dec 2017
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): काफी अरसे के बाद राम जन्म-भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट में नया मोड आया जब मंगलवार (5 नंवबर) को सुनवाई के दौरान  सुन्नी वक्फ बोर्ड की पैरवी कर रहे कपिल सिब्बल ने अदालत से अपील की कि अयोध्या मामले की सुनवाई जुलाई 2019 तक ताल दी जाए. यानी इस मामले में सुनवाई ही 2019 के बाद ही शुरू हो. मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर ने कपिल सिब्बल के इस आग्रह को बहुत गंभीरता से लिया. लें इतना पूछा कि इस मामले का 2019 तक टालने के पीछे क्या वजह है? वहीँ सिब्बल की सुनवाई 2019 तक टालने के आग्रह को लेकर राजनीतिक गलिआरों में बयानबाजी शुरू हो गयी है और बीजेपी और कांग्रेस एक बार फिर आमने-सामने आ गये हैं. बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल के इस रूख के पर सवाल उठाया है. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर ज़ोरदार हमला बोलते हुए कहा कि एक ओर तो राहुल गांधी मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना करते हैं दूसरी ओर उन्हीं की पार्टी के नेता राम मंदिर केस में सुनवाई में देरी करना चाहते हैं. इस मामले में राहुल गाँधी को और कांग्रेस पार्टी को अपना रूख साफ़ करना चाहिए. साथ ही बीजेपी के पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर कहा है कि वे इस मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड से ज्यादा कांग्रेस का विचार रख रहे हैं. संबित पात्रा ने ट्वीट किया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को 2019 के चुनावों से क्या लेना-देना है? आज कपिल सिब्बल की सच्चाई सामने आ गई है, वो वक्फ बोर्ड से ज्यादा कांग्रेस के विचारों को दर्शाते हैं? राहुल गांधी को अब बोलना चाहिए कि क्या वह मंदिर के साथ हैं या फिर उनकी कुछ और राय है.

वहीँ बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने भी इस मुद्दे पर कपिल सिब्बल पर हमला किया है. उन्होंने ट्वीट किया कि अयोध्या विवाद में कपिल सिब्बल कांग्रेस के वकील हैं, या सुन्नी वक्फ बोर्ड के जो वह इस मामले की सुनवाई को 2019 के चुनावों तक टलवाना चाहते हैं. स्वघोषित शिव भक्त भगवान राम के खिलाफ क्यों हो गये हैं? उन्होंने कहा कि कांग्रेस अयोध्या मामले पर राजनीति कर रही है.

दरअसल उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद मालिकाना हक प्रकरण में उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर दीवानी अपीलों पर अगले साल आठ फरवरी को सुनवाई करने का निश्चय किया है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की तीन सदस्यीय विशेष खंडपीठ ने इस प्रकरण के सभी एडवोकेट्स आन रिकार्ड से कहा कि वे एक साथ बैठकर यह सुनिश्चित करें कि शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में दाखिल करने से पहले सभी जरूरी दस्तावेजों का अनुवाद हो गया हो और उनपर संख्या लिखी जा चुकी हो. इस मामले में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर वकीलों को रजिस्ट्री से संपर्क करने का निर्देश दिया गया है.(इनपुट:जनसत्ता)

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