अपने वर्तमान के लिए देश का भविष्य दांव पर नहीं लगा सकता: प्रधानमन्त्री मोदी Featured

04 Oct 2017
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आवाज़ ब्यूरो(दिल्ली):  प्राधानमंत्री मोदी अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा घेरे जाने के बाद आज जब दिल्ली में इंस्टिट्यूट अॉफ कंपनीज सेक्रेटरीज अॉफ इंडिया (आईसीएसआई) के गोल्डन जुबली समारोह में शिरकत करने आये तो कयास लगाये जा रहे थे कि वो इन आलोचनाओं का जवाब जरुर देंगे. उन्होंने किया भी कुछ ऐसा ही. इस अवसर पर उन्होंने लोगों को  संबोधित करते हुए  अपना पक्ष रखा.  पीएम ने कहा कि नोटबंदी के बाद जीडीपी में कैश का अनुपात 9 प्रतिशत पर आ गया है. 8 दिसंबर 2016 से पहले यह 12 प्रतिशत था. पीएम मोदी ने कहा कि पिछली सरकार में 6 वर्षों के दौरान 8 बार एेसा हुआ, जब जीडीपी 5.7 प्रतिशत था या फिर इससे भी कम थी. ऐसा इस देश में पहली बार नहीं हुआ है. लेकिन कुछ लोगों को निराशा फैलाए बिना नींद नहीं आती. हमने ऐसे लोगों  की पहचान कर ली है. उन्होंने कहा कि आने वाली तिमाहियों में रिजर्व बैंक अॉफ इंडिया ने 7.7 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान लगाया है.  हमने 3 वर्षों में 7.5 प्रतिशत की औसत वृद्धि हासिल की है. हालांकि विकास दर अप्रैल से जून के बीच घटी है, लेकिन सरकार इसे दुरुस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है, और लगातार प्रयास कर रही है. पीएम मोदी ने कहा कि पिछली सरकार में मुद्रास्फीति जीडीपी वृद्धि से अधिक थी, उस समय ऊंची महंगाई, राजकोषीय घाटा व चालू खाते का घाटा सुर्खियां बनते थे. दहाई अंक तक पहुंची मुद्रास्फीति घटकर तीन प्रतिशत से कम रह गई है, चालू खाते का घाटा कम होकर 2.5 प्रतिशत रह गया और राजकोषीय घाटा कम होकर 3.5 प्रतिशत पर आ गया. इसपर कोई बात नहीं कर रहा.

पीएम ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए सुधार प्रक्रिया जारी रहेगी. नए जीएसटी सिस्टम पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद को बाधाओं, तकनीकी दिक्कतों की समीक्षा करने के लिए कहा गया है. सरकार जीएसटी में किसी भी तरह की अड़चन को दूर करने के लिए बदलावों को तैयार है.

अंत में पीएम ने कहा कि वे चुनावी फायदे के लिए रेवड़ियाँ नहीं बाटेंगे. उन्होंने सुधार एवं आम लोगों के सशक्तिकरण का कठिन रास्ता चुना है. वे अपने वर्तमान के लिए देश का भविष्य दांव पर नहीं लगा सकते.  प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को मजबूत बनाने का उन्होंने कठिन रास्ता चुना है जो सुधार और आम लोगों के सशक्तिकरण पर बल देने वाला है. इस मार्ग पर चलना कठिन है और इसीलिए मेरी आलोचना भी हो रही है, लेकिन वो इसके लिए तैयार हैं.

 

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