आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): अब जब जम्मू कश्मीर में पानी बीजेपी के सर से ऊपर निकल गया तो आखिरकार बीजेपी ने आज पीडीपी सरकार से अपना समर्थन वापिस ले लिए जिसके बाद सीएम महबूबा मुफ़्ती ने राज्यपाल को अपना इस्तीफ़ा भेज दिया. इस सारे घटनाक्रम से पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एन एस ए अजित डोबाल से मुलाकात की और घाटी के हालात पर दोनों के बीच चर्चा हुई. जिसके बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू कश्मीर से अपनी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों से दिल्ली में मंत्रणा की और उसके बाद ये तय हुआ कि घाटी में अब बीजेपी पीडीपी के साथ सरकार में नहीं रहेगी और अपना समर्थन वापिस लेगी.

समर्थन वापसी के बाद बीजेपी नेता राम माधव ने कहा कि हमने ये फैसला बहुत सोचने समझने के बाद लिया है. जिस तरह से पिछले कुछ समय से घाटी में आतंकवाद बढ़ा मासूम लोगों की हत्याएं होने लगीं उसके बाद हमारा इस गठबंधन के साथ रहना मुश्किल हो गया था. हमने गृह मंत्रालय, जम्मू-कश्मीर के तीन साल के कामकाज, सभी एजेंसियों से राय लेकर ये फैसला किया है. जिसके बाद ये तय हुआ है कि बीजेपी अपना समर्थन वापस ले रही है. राम माधव ने कहा कि तीन साल पहले जो जनादेश आया था, तब ऐसी परिस्थितियां थी जिसके कारण ये गठबंधन हुआ था. लेकिन जो परिस्थितियां बनती जा रही थीं उससे गठबंधन में आगे चलना मुश्किल हो गया था.

लेकिन जानकारों की मानें तो बीजेपी ने गठबंधन सरकार से निकलने का फैसला बहुत सोच समझकर लिया है, यहाँ बीजेपी ने राजधर्म निभाने की आड़ में राजनीति भी की है, क्योंकि जम्मू के लोगों ने जिस विश्वास के साथ बीजेपी को वोट दिया था पार्टी उसको निभाने में बिल्कुल भी सफल नहीं हुई. इतना ही नहीं अब बीजेपी के लिए जम्मू के लोगों को झेल पाना मुश्किल हो रहा था. रूट्स इन कश्मीर के संस्थापक सुशिल पंडित के मुताबिक बीजेपी के मंत्रियों को सडक पर दौड़ाकर पीटा जा रहा था और लोगों में इतना रोष बढ़ गया था कि लोग बीजेपी को वोट देना तो दूर, देखकर भी राज़ी नहीं थे. ऐसे में जब 2019 का चुनाव सर पर आ गया है ऐसे में बीजेपी के पास गठबंधन से हटने के सिवाए कोई दूसरा चारा नहीं था. 

वहीँ बीजेपी के धुरविरोधी असदुद्दीन ओबेसी के मुताबिक बीजेपी का गठबंधन से निकलना मजबूरी थी क्योंकि एक दो दिन में सीएम महबूबा मुफ़्ती दिल्ली आने वाली थीं और वो फिरसे घाटी में सीसफायर का ऐलान करने के लिए कहतीं. अगर बीजेपी इस बात से इनकार करती तो महबूबा बीजेपी के साथ नहीं रहती और अलग हो जाती. ऐसे में बीजेपी ने मास्टर स्ट्रोक खेलकर गठबंधन तोडा है.

वहीँ बीजेपी ने इन सारे आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि हमने बहुत सोच समझकर ये फैसला लिया है और पार्टी कश्मीर में अब सेना को पूरी छूट देगी जिससे आंतकवाद का पूरी तरह सफाया किया जा सके. वहीँ अभी-अभी एक दूसरी बड़ी खबर घाटी से आ रही है कि सेना ने कश्मीर में सरकार गिरने से कुछ ही घंटे बाद बड़ी कार्यवाही करते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया है. जो इस बात की तरफ इशारा कर रहा है कि बीजेपी अब वाकई जनता की नाराज़गी को  समझ गई है अब जम्मू और कश्मीर के लोगों की भावनाओं  को समझते हुए आगे बढ़ रही है जिससे 2019 के लिए बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाया जा सके और लोगों की नाराज़गी दूर हो.

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): हरियाणा में सियासी तूफ़ान अपने चरम पर है और सियासी पार्टियाँ अभी से ही आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अपना अपना सियासी गणित बैठाने की जुगत में लगी हुई हैं. अब इसमें भला बीजेपी कैसे पीछे रहे. यहाँ बीजेपी की तरफ से बड़ी खबर ये आ रही है कि पार्टी आगामी लोकसभा चुनावों में सूबे की 10 लोकसभा सीटों में 7 सीटों पर नए चेहरे उतार सकती है. जिसके लिए बड़े नामों पर विचार विमर्श शुरू हो चुका है और सूत्रों की मानें तो इसके लिए बड़े चेहरों की तलाश भी शुरू हो चुकी है. गौरतलब है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और आर एस एस इन सांसदों की कार्यप्रणाली से बिलकुल भी खुश नहीं हैं साथ ही पार्टी और आर एस एस के आंतरिक सर्वे के मुताबिक अगर पार्टी फिर से इन्हीं चेहरों पर दांव लगाती है तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

इसी आशंका के मद्देनजर अब बीजेपी हरियाणा में प्रभावशाली और कद्दावर चेहरों की तलाश कर रही है. जानकारों की मानें तो इसी सब के मद्देनजर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सम्पर्क फॉर समर्थन अभियान के तहत पूर्व आर्मी चीफ जनरल दलवीरसिंह सुहाग से भी मुलाकात की थी और आने वाले वक़्त में अगर सुहाग इसके लिए हामी भरते हैं तो पार्टी उनपर दांव लगा सकती है. दरअसल इस वक़्त बीजेपी के हरियाणा में 7 सांसद हैं. तो वहीँ कांग्रेस के खाते में 1 और इनेलो के 2 सांसद हैं. यहाँ दिलचस्प बात ये है कि बीजेपी ने 2014 का लोकसभा चुनाव हरियाणा जनहित कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ा था जिसके तहां 8 सीटों पर बीजेपी ने अपने उम्मीदवार उतारे थे तो वहीँ 2 सीटें(सिरसा,हिसार) हरियाणा जनहित कांग्रेस के हिस्से में आई थीं जिनपर उनके उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा था. तो वहीँ रोहतक सीट पर बीजेपी को कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंदर हुड्डा ने करारी मात दी थी.

साथ ही भिवानी-महेंद्रगढ़ के सांसद चौधरी धर्मवीर सिंह भी सार्वजनिक तौर पर कई बार अगला लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर चुके हैं. वो लोकसभा के बजाए विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं और इसके लिए उन्होंने वाकायदा ऐलान भी कर दिया है. तो वहीँ कुरुक्षेत्र से बीजेपी के बागी सांसद राजकुमार सैनी के तेवर भी किसी से छुपे हुए नहीं हैं. देर-सवेर वो भी बीजेपी को अलविदा कहेंगे. ऐसे में इन 4 लोकसभा सीटों पर पार्टी को नए चेहरों की तलाश है.

अम्बाला लोकसभा सीट:-

अम्बाला लोकसभा सीट पर नजर डाली जाए तो यहाँ भी पार्टी को नया उम्मीदवार उतरना पड़ेगा. फिलहाल यहाँ से रतनलाल कटारिया सांसद हैं लेकिन उनकी रिपोर्ट भी कुछ अच्छी नहीं है साथ ही बढ़ती उम्र भी उनके और टिकेट के बीच में बड़ी बाधा है. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी उनके ही परिवार के किसी व्यक्ति को टिकेट दे सकती है लेकिन जानकारों की मानें तो बीजेपी यहाँ किसी दूसरे चेहरे को ही मौका देगी. बीजेपी को अच्छी तरह पता है कि ये क्षेत्र कांग्रेस की उम्मीदवार कुमारी शैलजा का गढ़ है. पिछले चुनाव में बीजेपी को यहाँ से जीत जरुर मिली लेकिन अब जिस तरह से कुमारी शैलजा एक बार फिरसे इस क्षेत्र में सक्रिय हुई हैं उसे देखकर बीजेपी उनके सामने किसी नए,बड़े  और कद्दावर नेता को ही उतारेगी जो कुमारी शैलजा को मात दे सके.

करनाल लोकसभा सीट:-

करनाल लोकसभा सीट फिलहाल बीजेपी के खाते में है और यहाँ से मीडिया कारोबार के दिग्गज़ अश्वनी चोपड़ा फिलहाल बीजेपी के सांसद हैं. लेकिन सूत्रों की मानें तो उनके टिकेट में सबसे बड़ी रुकावट खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हो सकते हैं. जिसका सबसे बड़ा कारण पंजाबी वोटों का क्षत्रप होना है. सूत्रों की मानें तो जिस तरह से अश्वनी चोपड़ा मनोहर लाल खटार की आलोचना कर देते हैं और उनकी खिंचाई में कोई कसर नहीं छोड़ते उसे देखकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ही उनके रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा हैं. साथ ही खट्टर अपने आगे ऐसा कोई दूसरा पंजाबी नेता नहीं पैदा होने देना चाहते जो कल उनके लिए ही ख़तरा बन जाए. ऐसे में आगे मनोहर लाल खट्टर की चली तो बीजेपी की तरफ से यहाँ पर भी कोई नया उम्मीदवार मैदान में आ सकता है. हालांकि इसकी गुंजाइश बहुत कम है क्योंकि अश्वनी चोपड़ा की पहुँच सीधे आलाकमान तक है और पंजाबी वोट बैंक पर भी उनकी अच्छी खासी पकड़ है. लेकिन राजनीति सम्भावनाओं का खेल है और इस खेल में कुछ भी मुमकिन है यहाँ देखने वाली बात ये होगी कि क्या अश्वनी चोपड़ा मनोहर लाल खट्टर को मात देते हैं या फिर मनोहर लाल खट्टर अश्वनी चोपड़ा को. सूत्रों की मानें तो मनोहर खेमे ने यहाँ से सुगरफ़ेड चेयरमैन चंद्रप्रकाश कथूरिया का नाम आगे बढाया है. साथ ही बीजेपी के संगठन महामंत्री संजय भाटिया के नाम की भी चर्चा शुरू हो चुकी है. मतलब साफ़ है यहाँ भी आने वाले वक़्त में ऊँट किस करवट बैठता है ये देखने वाली बात होगी.

सोनीपत लोकसभा सीट:-

लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी के खाते में आने वाली इस सीट से फिलहाल रमेश कौशिक बीजेपी सांसद हैं. लेकिन सूत्रों की मानें तो यहाँ पर भी पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में नया चेहरा ही उतारेगी और रमेश कौशिक को विधानसभा चुनाव में टिकेट दिया जा सकता है. सांसद के रूप में यहाँ से रमेश कौशिक कोई ऐसा करिश्मा नहीं कर सके जिससे वो चर्चा का विषय बने हों. हालांकि रमेश कौशिक कभी भी ये नहीं चाहेंगे कि उनकी टिकेट कटे और उन्होंने अबतक ऐसा कुछ कहा भी नहीं है जिससे इस बात का अंदाज़ा हो लेकिन पिछले कुछ समय से यहाँ मार्केटिंग बोर्ड की चेयरमैन कृष्णा गहलोत का नाम सुर्ख़ियों में आ रहा है और क्षेत्र में उनकी दिनोंदिन बढती सक्रियता भी कौशिक की उम्मीदवारी के लिए खतरे की घंटी है.

गुरुग्राम लोकसभा सीट:-

ये सीट भी बीजेपी के खाते में है और यहाँ से सांसद राव इंदजीत फिलहाल मोदी सरकार में मंत्री हैं. लेकिन सूत्रों की मानें तो इनका भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से 36 का आंकड़ा है और ऐसे कई मौके आये हैं जब राव इंदरजीत ने सार्वजनिक मंच से मनोहर लाल खट्टर की खिंचाई की है. उन्होंने रेवाड़ी में तो यहाँ तक कह दिया था कि अगले विधानसभा चुनाव में हमारे कार्यकर्ता किस मुंह से बीजेपी के लिए वोट मांगने जायेंगे. वहीँ गुरुग्राम में अभी हाल ही में हुए प्रकरण ने इन दोनों के बीच की खट्टास को और बढ़ा दिया है. जहाँ राव इंदरजीत ने खुले तौर पर खट्टर को ये कह दिया था कि आगामी लोकसभा चुनाव में आपसे मदद की उम्मीद न के बराबर है. तो मुमकिन है कि मनोहर लाल खट्टर यहाँ से अपने किसी चहेते को टिकेट दिलवाने की भरपूर कोशिश करें. हालांकि सूत्रों की मानें तो ये मुमकिन नहीं दिखता क्योंकि राव इंदरजीत अपने आप में खुद एक सरकार हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुड बुक में आते हैं. जबतक राव इंदरजीत खुद नहीं चाहेंगे तबतक उनका टिकेट यहाँ से काटना किसी के बस की बात नहीं है. हालांकि बीच में ये खबर भी आई थी राव इंदरजीत इस बार गुरुग्राम लोकसभा सीट का बजाये भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से चुनाव लड़ सकते हैं क्योंकि वहां के जातीय समीकरण भी उनके अनुकूल बैठते हैं आज भी वहां के लोग उनको अपना राजा ही समझते हैं. अगर जातीय समीकरण की बात करें तो ये राव- जाट बहुल क्षेत्र है जिसमे लगभग जाट और राव वोट बराबर की गिनती में हैं. ऐसे में राव इंदरजीत का राव वोटों पर आधिपत्य तो किसी से छुपा हुआ नहीं है और अगर मौजूदा सांसद चौधरी धर्मवीर भी राव इंदरजीत के साथ खड़े होते हैं तो फिर जाट वोट बैंक भी उनके खाते में आने के आसार काफी बढ़ जाते हैं जो सोने पे सुहागा हो जाएगा. लेकिन अभी राव इंदरजीत क्या तय करते हैं ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा लेकिन इतना तय है कि राव इंदरजीत इस वक़्त बीजेपी में वो चेहरा हैं जो कहीं से भी चुनाव लड़कर जीतने का माद्दा रखता है और उनके लिए फिलहाल कोई खतरे की घंटी नहीं है.

फरीदाबाद लोकसभा सीट:-

ये सीट भी मौजूदा दौर में बीजेपी के खाते में है और फिलहाल यहाँ से सांसद किशन पर गुर्जर मोदी सरकार में मंत्री भी हैं. साथ ही उन्हें वरिष्ठ केंदीय मंत्री और बीजेपी नेत्री सुषमा स्वराज का भी खासमखास भी समझा जाता है. सूबे में जब भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को बदलने की बात हुई है तो उनका नाम हमेशा से मनोहर लाल खट्टर के विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है. इन सब बातों के बावजूद गुर्जर एक बेहद साफ़ छवि के नेता हैं और मृदुभाषी भी. सूत्रों की मानें तो जनता के बीच उनकी छवि अच्छी है और आने वाले वक़्त में बीजेपी उन्हीं पर दांव लगाना चाहेगी. इसलिए फिलहाल उनके लोकसभा क्षेत्र में किसी और नेता की सक्रियता भी नहीं देखी जा रही है.

 

 

 

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): जैसे जैसे लोकसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं वैसे वैसे सियासी पार्टियों में हलचल बढ़ गई है. इस सब से बिहार की राजनीति भी अछूती नहीं है जहाँ एक तरफ प्रधानमंत्री  नरेंद्र  मोदी के धुरविरोधी शत्रुघन सिन्हा अपनी ही पार्टी के खिलाफ झंडा उठाए हुए हैं वहीँ  बीजेपी के बागी सांसद कीर्ति आज़ाद ने भी बीजेपी और ख़ासकर वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. सूत्रों की मानें तो कीर्ति आज़ाद जल्द ही कांग्रेस में जा सकते हैं जिसका इशारा उन्होंने दे भी दिया है. उनके मुताबिक बीजेपी में जो परिस्थितियां बन रही हैं उसके बाद उनके पास दूसरी पार्टियों का ही विकल्प बचा है. जानकारों की मानें  तो कीर्ति आज़ाद ने जिस तरह पिछले दिनों राहुल गांधी की शान में कसीदे गड़े थे उसी वक़्त ये तय हो गया था कि वो कांग्रेस की तरफ जायेंगे. वहीँ दुसरे सांसद शत्रुघन सिन्हा को लेकर सस्पेंस बरकरार है. उन्हें लेकर ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि वो आरजेडी का दामन थाम सकते हैं या फिर कांग्रेस में जा सकते हैं. हालांकि शत्रुघन ने ऐसी किसी भी खबर से इनकार किया है और बीजेपी में रहकर ही वो प्रधानमंत्री के खिलाफ अपना झंडा बुलंद किये हुए हैं.

गौरतलब है कि दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) अध्यक्ष अरुण जेटली पर बीजेपी सांसद कीर्ति आज़ाद ने भर्ष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे. हालांकि पार्टी ने उन्हें उसके बाद निलंबित भी कर दिया था. तब से कीर्ति आज़ाद अरुण जेटली के खिलाफ लड़ाई लाद रहे हैं. उनके मुताबिक भ्रष्टाचार 1-2 करोड़ का नहीं बल्कि 400 करोड़ का है. कीर्ति आज़ाद ने पिछले दिनों इस मुद्दे पर अपने समर्थकों की राय भी मांगी थी जिसमे उन्होंने डीडीसीए के भर्ष्टाचार को लेकर अपने समर्थकों से राय मांगी थी तो वहीँ भक्तगणों को उपोदेश न देने की बात भी कही थी.

समर्थकों ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी जिसमें किसी ने उनका समर्थन किया तो वहीँ किसी ने उन्हें सलाह दी कि अगर भर्ष्टाचार के खिलाफ अगर उनके पास सबूत हैं तो उन्हें सुब्रमण्यम स्वामी के पास जाना चाहिए. इसको लेकर आज़ाद ने कहा था कि स्वामी भी इस मुद्दे पर वेबस हैं, वो उनसे सहमत तो हैं लेकिन इस मुद्दे पर उन्होंने मेरी कोई भी मदद करने से मना किया है. उसके बाद लगभग ये तय हो गया था कि आज़ाद अब बीजेपी को छोड़कर किसी दूसरे विकल्प के बारे में सोच रहे हैं. उनकी पत्नी तो पहले ही कांग्रेस में शामिल हो चुकी हैं वहीँ अब उनके भी कांग्रेस में जाने की सम्भावनाएं बढ़ गई हैं.

वहीँ शत्रुघन सिन्हा को लेकर भी बिहार बीजेपी अध्यक्ष का ब्यान आया है कि उन्हें भी पार्टी विरोधी गतिविधियों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा और पार्टी जल्द ही उनके खिलाफ भी कोई बड़ी कार्यवाही कर सकती है. गौरतलब है कि शत्रुघन सिन्हा आरजेडी द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में गये थे जिसके बाद उन्होंने ब्यान दिया था कि लालू यादव का परिवार और उनके बच्चे शत्रुघन के अपने परिवार की तरह हैं. जानकारों की मानें तो शत्रुघन को लालू यादव की बेटी मीसा भारती ने पटना साहिब की सीट से ही आरजेडी की टिकेट से चुनाव लड़ने की बात भी कही है, हालांकि शत्रुघन इस मुद्दे पर अंत तक अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं और अभी वो बीजेपी में रहकर ही प्रधानमंत्री का विरोध कर रहे हैं, साथ ही कदम कदम पर नसीहत देते रहते हैं.

आवाज़(हेमंत भारद्वाज,नारनौल):पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि राजस्थान की सीमा से सटे ढोसी की पहाड़ को कुरुक्षेत्र के नीलकंठ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यहां पर यात्री निवास बनाए जाएंगे। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम की तरफ से एक सड़क मार्ग का निर्माण करवाने की कार्ययोजना भी है ताकि पर्यटकों की संख्या बढ़ाई जा सके। श्री शर्मा इन्हीं संभावनाओं को तलाशने के लिए सोमवार सायं ढोसी की पहाड़ी पर पर्यटन विभाग के अफसरों को साथ लेकर शिव कुंड तक पहुंचे और अधिकारियों को जल्द से जल्द इस कार्ययोजना को सिरे चढ़ाने के निर्देश दिए। 

इस मौके पर पर्यटन मंत्री ने कहा कि ढोसी पहाड़ पर यात्री निवास के लिए पहले चरण में 50 वातानुकूलीन कमरे बनाने की योजना है। इतना ही नहीं यहां पर एक रेस्टेरेंट के अलावा अन्य सभी प्रकार की सुविधाएं विकसित होंगी। ये सभी सुविधाएं होने के बाद ढोसी हिल्स की ऑनलाइन बुकिंग होगी। उन्होंने कहा कि ढोसी की पहाड़ी पर सीढिय़ों से चढऩा काफी मुश्किल काम है इसलिए ज्यादा पर्यटकों को लुभाने के लिए सबसे पहले पहाड़ की उत्तर-पश्चिम दिशा से एक सड़क मार्ग बनाया जाएगा। इस तरफ से पहले से ही चरवाहों के आवागमन के लिए कच्चा मार्ग है। इस मार्ग को पक्का बनाकर इसे आकर्षक बनाया जाएगा। इसके साथ ही जिले के सभी पर्यटन क्षेत्रों पर आने वाले सड़क मार्गों को भी अच्छे से विकसित किया जाएगा।

श्री शर्मा ने कहा कि दक्षिणी हरियाणा को पर्यटन के क्षेत्र में विकसित किया जाएगा ताकि यहां के लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर मुहैया हो। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत महेंद्रगढ़-रेवाड़ी हैरिटेज सर्किट को विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं पर्यटन के हिसाब से इन सभी स्थलों को सभी प्रकार की सुविधाओं से युक्त किया जाएगा ताकि दक्षिणी हरियाणा देशी-विदेशी सैलानियों का गढ़ बन सके। इसके लिए जरूरी है कि इन जगहों पर अतिथि-गृहों, सड़कें, पानी, बिजली व पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएं। पर्यटन मंत्री ने इससे पहले जल-महल, बावड़ी व बीरबल का छत्ता का भी दौरा किया। इस मौके पर उनके साथ पर्यटन विभाग के एसीएस विजय वर्धन, एमडी विकास यादव, उपायुक्त डा. गरिमा मित्तल, एसडीएम नारनौल जगदीश शर्मा, बीजेपी के जिला प्रधान शिव कुमार मेहता के अलावा अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे। 

जड़ी-बूटियों तथा औषधियों का खजाना है ढोसी......


नारनौल से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ढोसी के पहाड़ का इतिहास काफी पुराना एवं प्रसिद्ध है। इसकी प्रसिद्धि का एक कारण यह भी है कि यहां वैदिक काल के ऋषि च्यवन का आश्रम भी है। यह पहाड़ कई चमत्कार करने वाली जड़ी- बूटियों तथा औषधियों का खजाना है। आयुर्वेद की सबसे महान खोज च्यवनप्राश को माना जाता है जिसकी शुरूआत इसी पहाड़ी पर हुई थी। ऐसी आयुर्वेदिक दवा इसी पहाड़ी की देन है। इस पहाड़ी की एक तरफ हरियाणा के गांव कुलताजपुर, थाना व मकसूसपुर की जमीन लगती है जबकि दूसरी तरफ राजस्थान के गांव ढोसी की जमीन लगती है। कुलताजपुर की तरफ से चढऩे के लिए कुछ दूर चढ़ाई के बाद शिव कुंड से आगे सीढिय़ों का रास्ता है जबकि थाना गांव की तरफ से ज्यादा खड़ी सीढिय़ों की चढ़ाई करनी पड़ती है। मकसूसपुर गांव तरफ से गायों के लिए कच्चा रास्ता जाता है। इसके अलावा राजस्थान के गांव ढोसी की तरफ से भी चढ़ऩे का रास्ता है लेकिन इसके बीच में बड़ी-बड़ी खाई हैं तथा यह रास्ता बहुत ही खतरनाक है।

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): बीजेपी ने मिशन 2019 के लिए शंखनाद कर दिया है. लेकिन पार्टी में उलझनों का दौर अभी ख़त्म नहीं हो रहा है. हालिया उप-चुनावों में मिली करारी हार ने पार्टी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ऐसा क्या किया जाए जिससे पार्टी फिर से मजबूती के साथ एकजुट विपक्ष को न केवल कड़ी टक्कर दे पाए बल्कि उन्हें हरा भी सके. ऐसे में पार्टी के चाणक्य और अध्यक्ष अमित शाह इस बात को लेकर पूरी तरह से संजीदा हैं और पार्टी के अंदर आंतरिक सर्वे करवाए जा रहे हैं जिससे पता चल सके कि जनता बीजेपी सरकार और सरकार के नुमाइंदों यानी की बीजेपी के मौजूदा सांसदों की छवि कैसी है. जनता उनके कामकाज से कितना संतुष्ट है. लेकिन यहाँ भी खबर बीजेपी के लिए अच्छी नहीं है. सूत्रों की मानें तो गुजरात चुनाव से ठीक पहले देशभर में करवाए गये आंतरिक सर्वे में लगभग 40 फीसदी सांसदों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है. यानी इन सांसदों की जनता के बीच छवि अच्छी नहीं है. इस बात ने पार्टी को गहरी चिंता में डाल दिया है और ऐसा सूत्रों के हवाले खबर आ रही है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह अब इन सांसदों को अगली बार टिकेट देने के मूड में नहीं हैं और पार्टी और संगठन से अंदरखाते उनकी जगह वैकल्पिक उम्मीदवारों के नाम भी मंगा लिए गये हैं.

गौरतलब है कि इसी मुद्दे के मद्देनजर अभी अमित शाह संघ प्रमुख मोहन भागवत से भी मिले थे और दोनों के बीच काफी लम्बी चर्चा भी हुई थी. सूत्रों की मानें तो संघ ने भी जो सर्वे किया था उसमे भी ये चेताया गया था बीजेपी के कई सांसद अपने क्षेत्र में एक्टिव नहीं हैं. उनकी छवि जनता के बीच अच्छी नहीं है, जो आने वाले वक़्त में बीजेपी को नुक्सान पहुंचा सकती है. साथ ही पार्टी की कोशिश ये भी है कि नई लीडरशिप को उभारा जाए जो आने वाले 15-20 साल तक अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर सके. यानी एक बात तय है कि पार्टी के कई दिग्गजों के टिकेट कटेंगे और उनकी जगह नए उम्मीदवार नजर आयेंगे. हालांकि इन सांसदों को उनकी छवि जनता के बीच सुधारने के लिए वक़्त दिया गया है लेकिन सूत्रों की मानें तो इन सांसदों को अगले चुनाव में टिकेट न देने का पार्टी ने लगभग मन बना लिया है.

अब अगर राज्यवार सांसदों की कार्यप्रणाली पर नजर डाली जाए तो जिन राज्यों से बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा बुरी खबर आई है उनमे हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान के नाम शुमार हैं. सबसे बुरी खबर बीजेपी के लिए तो हरियाणा से ही है, जहाँ मौजूदा 7 सांसदों में से एक की भी रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं है. यानी जनता के बीच इन सभी सांसदों की छवि अच्छी नहीं है. उसके बाद बात उत्तर प्रदेश की करें तो यहाँ पार्टी के 71 सांसद हैं जिनमे से 48 सीटों पर सांसदों की रिपोर्ट नेगेटिव है. जो पार्टी के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय है. इसी के चलते पार्टी को यहाँ उप-चुनावों में भी हार का सामना करना पड़ा है.

अब अगर बात मध्य प्रदेश की करें तो यहाँ भी पार्टी के 16 सांसदों की रिपोर्ट नेगेटिव है. साथ ही राजस्थान और महाराष्ट्र के लोग भी अपने सांसदों के कामकाज़ से खुश नहीं हैं. जहाँ महाराष्ट्र के 17 सीटों के सांसदों की रिपोर्ट नेगेटिव है तो वहीँ राजस्थान में 13 सांसद ऐसे हैं जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव है. यानी एक बात तय है कि अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी इन सभी चेहरों को बदल सकती है क्योंकि अब बीजेपी को इन चेहरों पर दांव लगाना मंहगा पड़ सकता है. सूत्रों की मानें तो इस बाबत अमित शाह, संघ प्रमुख मोहन भागवत और भैयाजी जोशी के बीच जब मन्त्रणा हुई तो ये निष्कर्ष निकला की इन सभी सीटों पर बीजेपी तीसरी पीढ़ी के उम्मीदवारों को मौका देगी, जिसके लिए पार्टी और संगठन से वैकल्पिक नामों को मंगा लिया गया है. अब होता क्या है ये तो आने वाला वक़्त ही बतायेगा लेकिन इतना तय है की बीजेपी पार्टी और उनके अध्यक्ष आने वाले लोकसभा चुनाव में कोई रिस्क नहीं लेना चाह रहे हैं यानी उम्मीदवार बदलेंगे और उनकी जगह ऐसे लोगों को तरजीह दी जायेगी जिनकी छवि जनता के बीच अच्छी हो और जो लोग आने वाले 15-20 सालों तक अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर सकें. 

 

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): पिछले कल देश भर में बहुचर्चित पूर्व राष्ट्रपति की आर एस एस मुख्यालय में बतौर मुख्यातिथि यात्रा सम्पन्न हुई. पूरे देश की निगाह इसपर थी कि पूर्व राष्ट्रपति और देश के जाने माने दिग्गज कांग्रेसी प्रणव मुख़र्जी आर एस एस की पाठशाला मेंक्या बोलेंगे. तरह-तरह की अटकलें लगाईं जा रही थीं. कई कांग्रेसी उनकी इस यात्रा का विरोध कर रहे थे तो वहीँ उनकी अपनी बेटी भी इस यात्रा पर उन्हें सम्भल कर चलने की हिदायत दे रही थीं. लेकिन कल जो प्रणव दा ने आर एस एस की पाठशाला में बोला उसके बाद हर कोई उनका मुरीद हो गया, और शायद कांग्रेस को भी ये एहसास हो गया होगा की उन्होंने दादा की इस यात्रा का बेवजह किया. जैसा कि आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क ने पहले ही दादा की इस यात्रा को सकारात्मक पहलु बत्ताया था वैसे ही दादा ने आर एस एस की पाठशाला में सारे विरोधों और अटकलों पर विराम लगाते हुए ये बता दिया कि वो सही मायनों में सच्चे कांग्रेसी हैं जिनके दिल में राष्ट्र, राष्ट्रीयता और देशभक्ति कूट-कूट कर भरी हुई है. ये सबक केवल आर एस एस -बीजेपी के लिए ही नहीं था बल्कि उन कांग्रेस्सियों के लिए ज्यादा था जो बिना वजह इस यात्रा पर सवालिया निशाँ लगा रहे था. अब शायद उन्हें कांग्रेस की विचारधारा का सही मायनों में पता चला होगा. दादा ने सबको ये बताया की विचारधारा अलग अलग हो सकती है लेकिन संवाद हमेशा कायम रहना चाहिए. क्योंकि जहाँ संवाद ख़त्म हो जाएगा वहां केवल नफरत ही रहेगी. अगर इस नफरत को ख़त्म करना है तो हमें हमेशा सम्वाद करते रहना चाहिए.

गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति और दिग्गज कांग्रेसी प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप शिरकत कर रहे थे. उन्होंने वहां अपने सम्बोधन में कहा कि भारत में राष्ट्रीयता एक भाषा और एक धर्म की नहीं है. प्रणब ने कहा कि भारत की ताकत उसकी सहिष्णुता में निहित है और देश में विविधता की पूजा की जाती है. लिहाजा देश में यदि किसी धर्म विशेष, प्रांत विशेष, नफरत और असहिष्णुता के सहारे राष्ट्रवाद को परिभाषित करने की कोशिश की जाएगी तो इससे हमारी राष्ट्रीय छवि धूमिल हो जाएगी. इस दिग्गज़ कांग्रेसी ने आर एस एस के मंच से कहा कि वह यहाँ राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर अपना मत रखने के लिए बुलाए गए हैं. लेकिन इन तीन शब्दों को अलग-अलग देखना संभव नहीं है बल्कि इन शब्दों के समझने के लिए पहले हमें शब्दकोष की परिभाषा देखने की जरूरत है.

प्रणब ने कहा कि भारत एक मुक्त समाज था और पूर्व इतिहास में सिल्क रूट से सीधे जुड़ा था. इसके चलते दुनियाभर से तरह-तरह के लोगों का यहां आना हुआ. वहीं भारत से बौद्ध धर्म का विस्तार पूरी दुनिया में हुआ. चीन समेत दुनिया के अन्य कोनों से जो यात्री भारत आए उन्होंने इस बात को स्पष्ट तौर पर लिखा कि भारत में प्रशासन सुचारू है और बेहद मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर रहा है. नालंदा जैसे विश्वविद्यालय छठी सदी से लेकर 1800 वर्षों तक अपनी साख के साथ मौजूद रहे. चाणक्य का अर्थशास्त्र भी इसी दौर में लिखा गया.

प्रणब ने कहा कि जहां पूरी दुनिया के लिए मैगस्थनीज के विचार पर एक धर्म, एक जमीन के आधार पर राष्ट्र की परिकल्पना की गई वहीं इससे अलग भारत में वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा आगे बढ़ी जिसने पूरी दुनिया को एक परिवार के तौर पर देखा. प्रणब ने कहा कि भारतीय इसी विविधता के लिए जाने जाते हैं और यहां विविधता की पूजा की जाती है. वहीँ इतिहास के पन्नों को खंगालते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत में राज्य की शुरुआत छठी सदी में महाजनपद की अवधारणा में मिलती है. इसके बाद मौर्य, गुप्त समेत कई वंश का राज रहा और इस अवधारणा पर यह देश आगे बढ़ता रहा. इसके बाद 12वीं सदी में मुस्लिम आक्रमण के बाद से 600 वर्षों तक भारत में मुसलमानों का राज रहा. इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत आई एक बहुत बड़े हिस्से पर राज किया. पहले ईस्ट इंडिया कंपनी और फिर ब्रिटिश हुकूमत ने सीधे भारत पर राज किया. 

प्रणब ने कहा कि आधुनिक भारत की परिकल्पना कई लोगों ने की. इसका पहला अंश भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेशन इन द मेकिंग में मिलता है. इसके बाद नेहरू ने भारत एक खोज में कहा कि भारतीय राष्ट्रीयता केवल हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई के मिलन से ही विकसित होगी. वहीं गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के निरंतर प्रयासों से देश को 1947 में आजादी मिली. जिसके बाद सरदार पटेल की अथक मेहनत से भारत का एकीकरण किया गया.

प्रणब ने कहा कि आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को देश ने अपने लिए नया संविधान अंगीकृत किया. इस संविधान ने देश को एक लोकतंत्र के तौर पर आगे बढ़ाने की कवायद की. हालांकि प्रणब ने कहा कि भारत को लोकतंत्र किसी तोहफे की तरह नहीं मिला बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी के साथ लोकतंत्र के रास्ते पर पहल कदम बढ़ाया गया. प्रणब मुखर्जी ने संघ के मंच से ट्रेनिंग लेने वाले शिक्षार्थियों को कहा कि वह शांति का प्रयास करें और जिन आदर्शों पर नेहरू और गांधी जैसे नेताओं ने राष्ट्र, राष्ट्रीयता और देशभक्ति की परिभाषा दी उन्हीं रास्तों पर चलते हुए देश की विविधता को एक सूत्र में पिरोने का काम करें. प्रणब ने कहा कि बीते कई दशकों की कोशिश के बाद आज भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है लेकिन हैपिनेस इंडेक्स में भारत अभी भी 133वें नंबर पर है. लिहाजा, हमारे ऊपर जो दायित्व है उसे निभाते हुए कोशिश करने की जरूरत कि जल्द से जल्द भारत हैपीनेस इंडेक्स में शीर्ष के देशों में शुमार हो.

 

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): आज देश के पूर्व राष्ट्रपति संघ के बुलावे पर आर एस एस के मुख्यालय नागपुर में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद हैं जहाँ वो आर एस एस के एक कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं. देश में चर्चाओं और अफवाहों का दौर जारी है सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दादा आज अपने सम्बोधन में क्या बोलेंगे. राष्ट्रपति बनाने से पहले उम्र भर एक कांग्रेसी रहे प्रणव मुखर्जी जब आर एस एस मुख्यालय पहुंचे तो सबसे पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने उनका फूल भेंट करके स्वागत किया. उसके बाद दोनों नेता संघ संस्थापक के बी हेडगेवार के जन्मस्थान गये और वहां पूर्व राष्ट्रपति ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये. यहाँ की विजिटर बुक में दादा ने हेडगेवार को "भारत माँ का महान सपूत" लिखा.

देश भर में पूर्व राष्ट्रपति के इस दौरे को लेकर उत्सुकता और जिज्ञासा है और हर कोई ये जानना चाहता है कि दादा अपने सम्बोधन में क्या बोलते हैं.राजनितिक पार्टियों में गर्मागर्मी का दौर जारी है. कांग्रेस जहाँ इस दौरे पर कुछ भी बोलने से बच रही है वहीँ देश के कुछ अपरिपक्व नेता दादा के ऊपर ही सवाल उठा रहे हैं. लेकिन आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क की साफ़ राय है कि दादा ने संघ का निमन्त्रण स्वीकार करके भारतीय लोकतंत्र की शान बढ़ाई है. देश में संवाद का दौर कभी समाप्त नहीं होना चाहिए. दादा हम आपके इस जज़्बे की कद्र करते हैं. साथ ही आपके इस निर्णय को भी नमन करते हैं इस देश में सही मायनों में आप जैसे ही कुछ लोग लोकतंत्र को समझते हैं और इस तरह के कार्यक्रम में जाकर आपने भारतीय लोकतंत्र की शान बढ़ाई है. आपको हृदय से नमन.....

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली भी आज उन देश की गिनी-चुनी हस्तियों में शुमार हो गये जिनकी प्रतिमा मैडम तुसाद म्यूजियम में राखी गई है. आज दिल्ली के मैडम तुसाद म्यूजियम में उनकी की मोम की प्रतिमा का अनावरण किया गया . गौरतलब है कि लियोनेल मेस्सी, कपिल देव और उसेन बोल्ट की प्रतिमाओं के बाद अब भारतीय क्रिकेट के स्टार विराट कोहली की प्रतिमा लगाईं गई है. इस मौके पर संग्रहालय द्वारा जारी विराट कोहली के एक बयान में कहा ,‘‘ मैं इस प्रतिमा को बनाने के लिये किये गए प्रयासों की सराहना करता हूं. मैं मैडम तुसाद म्युजियम को धन्यवाद देता हूं जिसने मेरा चयन किया. मैं अपने प्रशंसकों का भी शुक्रगुजार हूं.’’ उन्होंने कहा ,‘‘ यह मेरे जीवन की अनमोल यादों में से एक होगा.’’ 

दरअसल कोहली की प्रतिमा उनसे मुलाकात के दौरान लिये गए 200 मापों और तस्वीरों से बनाई गई. वह इसमें भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी में है. कोहली ने अपने क्रिकेटिंग करियर के     दौरान अबतक अर्जुन पुरस्कार, आईसीसी विश्व के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर का पुरस्कार और बीसीसीआई के सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के तीन पुरस्कार जीते हैं.(सौजन्य: भाषा, इमेज सोर्स: lifeberrys.com)

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): देश भर में किसान आन्दोलन चल रहा है. कोई दूध सड़क पर बहाकर अपना विरोध जता रहा है तो कोई सब्ज़ी सड़कों पर बिखेर रहा है.  इन सब के बीच राहुल गांधी अपने मिशन 2019 के लिए व्यस्त हैं और वो किसानों के बीच जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे. ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब राहुल गाँधी मध्य प्रदेश के मंदसौर पहुंचे जहां उन्होंने पहले तो पिछले साल किसान आन्दोलन के दौरान मारे गये किसानों के परिवारों से मुलाकात की और फिर अपनी मंदसौर रैली में प्रधानमंत्री पर जमकर हमला बोला. गौरतलब है कि आज मंदसौर में पिछले साल प्रशासन की गोली से मारे गये किसानों की बरसी थी जिस मौके पर कांग्रेस ने रैली का आयोजन किया था.

 राहुल गाँधी ने इस मौके पर शिवराज सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जमकर निशाने पर लिया. राहुल ने कहा कि चाहे मध्य प्रदेश की शिवराज चौहान की सरकार हो या फिर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार इनके दिल में किसानों के लिए कोई जगह नहीं है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि दिनभर पीएम मोदी और शिवराज सिंह चौहान बातें करते रहते हैं लेकिन किसानों के बारे में कुछ नहीं करते हैं. ये लोग किसानों की पूजा करते हैं लेकिन उनका कर्ज माफ नहीं करते हैं.  आज देश भर का किसान आत्महत्या करने को मजबूर है लेकिन सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही. उन्होंने कहा कि जिस दिन मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार आएगी उसके दस दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ हो जाएगा. वहीँ राहुल ने कहा कि जब हमारी सरकार आएगी तो हम खेतों के पास ही फूड प्रोसेसिंग पार्क बनाएंगे जिससे किसानों को पूरा लाभ होगा. उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि यहां जो लस्सुन होता है, दस साल में वो लस्सुन चीन की राजधानी बीजिंग में चीनी लोग खाएं. 

वहीँ प्रधानमंत्री मोदी पर उन्होंने केवल भ्रष्टाचारियों का साथ देने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, ललित मोदी, विजय माल्या सारे के सारे घोटालेबाजों को विदेश भागने दिया. राहुल ने कहा कि पीएम मोदी, नीरव मोदी को 'नीरव भाई' और मेहुल चोकसी को 'मेहुल भाई' बुलाते हैं. साथ ही बेरोज़गारी के मुद्दे पर राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था, 15 लाख देने का वादा किया था लेकिन इन्होंने अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया. 

वहीँ चीन के मुद्दे पर उन्होंने ओराधान्मंत्री को घेरते हुए कहा कि प्रधानमंत्री चीनी राष्ट्रपति के साथ अहमदाबाद में झूला झूल रहे थे, लेकिन कुछ ही दिन बाद डोकलाम में चीन की सेना घुस गई. उन्होंने कहा कि मोदी जी की जेब में जो फोन है उसके पीछे भी मेड इन चाइना लिखा है, जिससे वो सभी को मैसेज करते हैं.

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): 6 जून को ऑपरेशन ब्लू स्टार की 34वीं बरसी है. 1984 के साल इसी दिन चलाये गये इस ऑपरेशन के दौरान ऐसा कहा जाता है कि स्वर्ण मंदिर के अंदर हजारों की तादाद में खालिस्तान समर्थक भिंडरावाला के नेत्रित्व में मजूद थे. कहा जाता है कि ये समर्थक भारत देश से अलग देश की मांग कर रहे थे और हथियारों से लेस थे. हालात बिगड़ते देख उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सेना को ऑपरेशन ब्लू स्टार चलने की अनुमति दी थी. जिसके बाद सेना और खालिस्तान समर्थकों के बीच भारी गोलाबारी हुई और 492 खालिस्तान समर्थक मारे गये वहीँ 83 सैनिक भी शहीद हुए. लेकिन ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद इसी साल 31 अक्टूबर को प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के दो अंगरक्षकों ने गोली मार दी जिसके बाद देश भर में दंगे भड़क गये और गुस्स्ये लोगों ने 8000 से ज्यादा सिक्खों की हत्या कर दी थी. अकेले दिल्ली में ही 3000 से जयादा सिक्खों की हत्या कर दी गई थी. गटना दुर्भाग्यपूर्ण थी और आज सिख समाज आज तक इन ज़ख्मों को भूला नहीं है. क्योंकि दंगों में मारे गये हजारों परिवारों को आज भी न्याय नहीं मिला है.

आज 6 जून को जब पूरे विश्व का सिक्ख समाज में शोक की लहर है वहीँ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के अंदर खालिस्तान समर्थन के नारे लगाये जाने की ख़बरें आ रही हैं. खबर है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के मौके पर आल इंडिया सिक्ख छात्र संघ मंदिर परिसर के अंदर प्रदर्शन करते नजर आये.प्रदर्शन कर रहे लोगों ने यहां खालिस्तान समर्थन में नारे भी लगाये जिसका की विडियो भी सोशल मीडिया पर आ गया है. विडियो में नजर आ रहा है कि हाथों में तख्तियां और भिंडरावाला की तस्वीरें लिए ये लोग खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं.

हालांकि सरकार ने इसके लिए व्यापक सुरक्षा के इंतजाम कर रखे हैं. स्वर्ण मंदिर के आसपास 3000 सुरक्षाकर्मी तैनात किये गये हैं, वहीँ वाई-पास, रेलवे स्टेशन,हवाई अड्डे सहित शहर के सभी प्रवेश और निकास मार्गों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये हैं. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि आज लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचेंगे. इस बीच उग्र सिख संगठन खालसा ने अमृतसर बंद का ऐलान किया है. वहीँ अभी दो दिन पहले ही पंजाब के बटाला शहर में पुलिस ने तीन खालिस्तान समर्थकों को गिरफ्तार भी किया है.(इनपुट:जनसत्ता डॉट कॉम, इमेज सोर्स: ANI)