अमित शाह ने शुरू किया जमा-घटा का खेल, शिव-सेना छिटकी तो एआइएडीएमके को साथ लेकर लेकर पूरा करेंगे मिशन 2019.......... Featured

25 Jul 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): महाराष्ट्र में बीजेपी और शिव-सेना दोनों पार्टियों में मतभेद दिनोंदिन गहराते जा रहे हैं. दोनों ही पार्टियाँ अगले लोकसभा चुनाव में अलग-अलग लड़ने का मन बना चुकी हैं. शिव-सेना ने तो खुले मंच से इसका ऐलान भी कर दिया है लेकिन बीजेपी अभी ऐसा करने से बाख रही है लेकिन सूत्रों की मानें तो बीजेपी ने भी इसके लिए तयारी शुरू कर दी है और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को इसके लिए तैयारी शुरू करने के लिए भी कह दिया है. मतलब साफ़ है कि तीन दशकों तक साथ चलने के बाद अब बीजेपी-शिव्सेनाल्ग होने की राह पर खड़े हैं. हालांकि बीजेपी सांसद सुब्रमणियास्वामी की मानें तो शिव-सेना लोकसभा चुनावों के आते-आते बीजेपी के साथ आ जाएगी लेकिन राजनितिक पंडितों की मानें तो अभी इसके आसार कम ही नजर आ रहे हैं. ऐसे में अगर शिव-सेना बीजेपी के रास्ते महाराष्ट्र में अलग होते हैं तो कांग्रेस और एनसीपी की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा क्योंकि उन्हें पता है कि बीजेपी-शिवसेना अगर मिलकर लादे तो फिर उन्हें हराना मुश्किल ही नहीं लगभग नामुमकिन हो जाएगा. अब सवाल ये पड़ा होता है कि अगर बीजेपी-शिव-सेना अलग हुए तो फिर होने वाले इस नुक्सान की भरपाई कैसे होगी? तो इस सवाल का समाधान बीजेपी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने खोज लिया है. सूत्रों की मानें तो शिव-सेना के एनडीए से जाने की स्थिति में बीजेपी तमिलनाडु की एआईए डीएमके को अपने साथ एनडीए में लाकर जहां नुक्सान की भरपाई करेगी वहीँ दक्षिण में भी पार्टी के इस कदम से बीजेपी का जनाधार बढाने में मदद मिलेगी.

सूत्रों की मानें तो अमित शाह ने एआईएडीएमके से नजदीकियां बढाने की कवायद भी शुरू कर दी है. इसका एक उदाहरण तब देखने को मिला जब संसद में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान एआईएडीएमके  बीजेपी के साथ खड़ी हुई दिखाई दी. और इससे पहले भी बीजेपी ने एआईएडीएमके के दो धड़ों को एक करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी जिसके लिए स्वयं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने उनका शुक्रिया अदा किया था. राजनीतिक पंडितों की मानें तो इस नए पार्टनर की पठकथा काफी पहले से लिखी जा रही है और समय आने पर इस बात का ऐलान भी हो जाएगा. वैसे भी डीएमके के कांग्रेस के साथ जाने के बाद एआईएडीएमके के पास दूसरा कोई चारा बचा भी नहीं है. जानकारों की मानें तो बीजेपी के इस कदम से जहाँ पार्टी का जनाधार दक्षिण में भी बढ़ेगा, वहीँ पार्टी शिव-सेना के अलग जाने से होने वाले मुक्सान की भरपाई करने के साथ मुनाफे में भी जायेगी. क्योंकि लोकसभा में इस समय जहाँ शिव-सेना के 18 सांसद हैं वहीं एआईएडीएमके के 37, वहीं राज्यसभा में शिव-सेना के मात्र 3 सांसद हैं वहीं एआईएडीएमके के 13. यानी मतलब साफ़ है कि एनडीए की स्थिति और मजबूत होगी.

हालांकि इसके लिए अभी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह थोडा इंतज़ार कर रहे हैं. सूरतों की मानें तो शाह साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव तक का इंतज़ार कर रहे हैं. अगर नतीज़े बीजेपी की आशा के अनुरूप आते हैं तो बीजेपी निश्चित तौर पर शिव-सेना की विदाई ही करना चाहेगी क्योंकि बीजेपी का मानना है कि एक टफ तो शिव-सेना सत्ता की मलाई खा रही है और दूसरी तरफ बीजेपी को बात-बात पर आँख दिखाती है. ऐसे में उसका एनडीए से अलग होना ही बेहतर है. सुरों की मानें तो महाराष्ट्र में ही शिव-सेना के अलग होने की स्थिति में राज ठाकरे को भी अपने साथ लिया सकता है और इसमें केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी अहम भूमिका निभा सकते हैं. अब आगे होगा क्या इसका पता तो साल के अंत में होने वाले कुछ राज्यों के चुनावों के नतीजों के बाद चल ही जाएगा, लेकिन इतना तय है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपना जमा-घटा का खेल शुरू कर दिया है और किसी भी कीमत पट अपने मिशन 2019 को पूरा करने में जुटे हुए हैं.

 

 

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