प्रधानमंत्री पद की दावेदारी से पीछे हटे राहुल गांधी, कांग्रेस अब मायावती या ममता बैनर्जी पर खेल सकती है बड़ा दांव......!

25 Jul 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली):  देश भर में लोकसभा चुनावों का आगाज़ हो चूका है. तमाम पार्टियों ने इसके लिए कमर कस ली है. फिर चाहे वो सत्तारूढ़ बीजेपी हो या कांग्रेस सबने अपने हिसाब से राजनितिक समीकरण बैठने शुरू कर दिए हैं. लेकिन इन सब के बीच एक बाद खबर ये आ रही है कि कल तक जो कांग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी खुद को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बता रहे थे उन्होंने अब परिस्थियों को भापते हुए प्रधानमंत्री पद की अपनी उम्मीदवारी से हाथ पीछे खींच लिए हैं. राजनितिक पंडितों की मानें तो ऐसा कदम कांग्रेस ने बहुत घन विचार-विमर्श के बाद उठाया है.

दरअसल पिछले काफी समय से कांग्रेस प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ महागठबंधन के लिए प्रयासरत है लेकिन उसमे उसे अबतक कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली है. कांग्रेस ने इसके लिए कई क्षेत्रीय क्षत्रपों से भी सम्पर्क साधा लेकिन बार सिरे चढ़ते हुए नहीं दिख रही है. क्योंकि ज्यादातर क्षेत्रीय दलों को राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में मंजूर नहीं हैं. इसलिए कांग्रेस अब मजबूरी में राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की  उम्मीदवारी से कदम पीछे खींच रही है. सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेत्रित्व में सब दलों को एकजुट करने का अभियान तो चलाया लेकिन जेडीएस को छोड़कर कोई भी दूसरा दल राहुल गांधी के नेत्रित्व में चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ. ऐसे में कांग्रेस ने अब राहुल की उम्मीद्वारी को पीछे छोड़ देश भर में मोदी के खिलाफ महागठबंधन बनाने की कवायद शुरू की है.

जनसत्ता की मानें तो राहुल गांधी अब सब क्षेत्रीय पार्टियों को साथ लेकर चलना चाह रहे हैं और इसके लिए कई प्रदेशों में कांग्रेस क्षेत्रीय दलों को ज्यादा सीटें देकर खुद कम सीटों पर भी लड़ सकती है. मुख्य मिशन मोदी को सत्ता में आने से रोकना है और इसके लिउए उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र राहुल की रणनीति में सबसे आगे हैं. उत्तर प्रदेश में जहां कांग्रेस सपा-बसपा आर एल डी के साथ गठबंधन में उतरने के लिए प्रयासरत है वहीँ बिहार में आर जे डी और पश्चिम बंगाल में ममता की टी एम् सी के साथ गठबंधन की कवायद में जुटी हैं. ऐसा ही कुछ महाराष्ट्र में शरद पवार की एनसीपी के साथ गठबंधन के रूप में देखने को मिलेगा. दरअसल राहुल को लगता है कि अगर मोदी को सत्ता में काबिज़ होने से रोकना है तो ये राज्य सबसे महत्वपूर्ण साबित होंगे. ऐसे में कांग्रेस उतर प्रदेश में जहां बसपा और सपा को ज्यादा सीटें देकर खुद नाममात्र की सीटों पर ही चुनाव लड़ेगी वहीँ पश्चिम बंगाल में ममता और बिहार में आर जे डी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेंगी जबकि कांग्रेस के हिस्से कम ही सीटें आएँगी. हालांकि महाराष्ट्र की परिस्थितियां थोड़ी अलग हैं. यहाँ कांग्रेस की एनसीपी के साथ बराबर की सीटों पर लड़ने की बात बन सकती है. या फिर यहाँ कांग्रेस लोकसभा में ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने और विधानसभा चुनाव में एनसीपी को ज्यादा सीटों पर लड़ने के लिए राज़ी कर सकती है. शरद पवार को भी इसमें कोई परेशानी नहीं होगी क्योंकि उनका सारा ध्यान महाराष्ट्र की राजनीती पर ही है.

अब सबसे जरुरी बात जो प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर है कि आखिर किसके नेत्रित्व के नीचे कांग्रेस और बाकी दूसरे दल मोदी के खिलाफ उतरेंगे. सूत्रों की मानें तो इसके लिए कांग्रेस ने एक फार्मूला तैयार किया है. जिसमे हर एक राज्य में चेहरा अलग होगा. जहां कांग्रेस की स्थिति मज़बूत है वहां राहुल गांधी ही मुख्य चेहरा होंगे वहीँ उत्तर प्रदेश में मायावती, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, बिहार में तेजस्वी यादव मोदी के खिलाफ लड़ाई में मुख्य चेहरा होंगे. वहीँ अगर चुनावों में एनडीए 230 -240 सीटों में सिमट जाता है तो फिर कांग्रेस पहले राहुल गांधी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करेगी. अगर बात नहीं बनती है तो फिर कांग्रेस मायावती या फिर ममता बनर्जी के ऊपर भी अपना दांव खेल सकती है. यानी मतलब साफ़ है मोदी को रोको और उसके लिए फिर चाहे किसी भी हद तक जाना पड़े.

 

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